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पत्रकारों को पुलिस बना रही है मुखबिर

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           पत्रकारों को पुलिस  बना रही है  मुखबिर 
                    कई प्रेसवाले निशाने पर 
तहलका डेस्क रांची
चतरा में ताज़ा टी वि  के रेपोटर इन्द्रदेव यादव  की  हत्या  ने  कई प्रसंगों को एक साथ जोड़कर रख  दिया है ,कौन पत्रकार  है कौन ठेकेदार और कौन पहरेदार ? कई लोगो  को  चैनेल और अखबार  ने केवल उगाही के लिए रख  छोड़ा है क्या वे भी पत्रकार ही  है ?
कई लोग पुलिस की  मुखबिरी में लगे है उन्हें पुलिस दरमाहा देती है वे पुलिस के यहाँ सब्जी से लेकर मीट मुर्गा भी पहुचाते है कई लोगो को निगरानी ने दरमाहा देकर अपना मुखबिर या  एस पी ओ बनाया है ,अब इन लोगो की लिस्ट को नक्सली संगठन खंगाल रहे है और इन्हें एक एक कर निशाना  बनाया जा सकता है ,खासकर चतरा ,हजारीबाग ,कोडरमा ,रामगढ ,लातेहार ,पलामू में स्थिति गंभीर है ,
चतरा में लगभग दो दर्ज़न पत्रकार पुलिस  के पेड़ स्टाफ़ है ,कुछ पुलिस के तो कुछ निगरानी के ,वही हजारीबाग में भी मुफसिल से लेकर जिला में 26 पत्रकार पुलिस और निगरानी के सेलेरी स्टाफ़ है लेकिन इनका वजूद खतरे में है ,पुलिस को अब मुखिबिरी के लिए बड़ी रकम मिलती है इसमें आधे से ज्यादा पुलिस या निगरानी के अधिकारी खुद खा जाते है ,आम आदमी को मुखबीर रखने में उन्हें ज्यादा पैसे खर्च  करने पड़ते है वही प्रेसवालो को मुखबीर या SPO बनाने में ज्यादा मस्सकत नहीं करनी पड़ती है वही उन्हें आधे रकम में ही सारा काम करा लिया जाता है बल्कि फोन के पैसे भी पुलिस बचा लेते है , इन प्रेसवालो से पैसे देनेवाले गलत करनेवाले व्यवसायी और अन्य लोगो की तोह भी पुलिसवाले लेते रहते है और जो उगाही होती है उसमे दोनों का अलग अलग हिस्सा होता है ,
कोडरमा ,रामगढ लातेहार पलामू की स्थिती थोड़ी भिन्न है ,पर यह स्थिती भयानक है और आगे आनेवाले दिनों में पत्रकारों के साथ अगर कोई दुर्घटना होती है तो ऐसे लोगो को सावधान रहने की ज़रूरत है ,और साथ ही पत्रकारिता में थोड़े फिल्त्रेसन की भी जरुरत है ,कई पत्रकार संघ भी बन रहे है वही कई रन कर रहे है जो ऐसे भ्रष्ट पत्रकारों को बचाने के लिए जी जान एक कर रहे है ,कई संगठनो को बाहर से भी चंदे मिल रहे है जिसका बेजा खर्च हो रहा है ,कई के बारे में ख़ुफ़िया विभाग और कई के बारे में आई बी को भी जानकारियाँ मिल चुकी है ऐसे कई संगठन को राज्य के बड़े पुलिस अधिकारी भी प्रयोग में ला रहे है ताकि सूचना मिल सके ,पर आगे यही सूचना संगठन सरकार और पुलिस के लिए नासूर बन सकते है ,जैसे बी डी राम ने टी पी सी संगठन बनाया था ताकि मावोवाद को ख़त्म किया जा सके आज वही संगठन समाज के लिए नासूर बन चूका है ,वैसे ही कई पत्रकार संगठन सरकारी सूचना तंत्र का माध्यम बनते जा रहे है जो कई दुसरे प्रकार के अतिवादी संगठन से हाथ मिलाकर परेसानी का सबब पैदा कर सकते है ,ये संगठन पुरे राज्य में नेटवर्क बनाकर अपने वजूद का डंका मनवाने के लिए अधिकारिओ से मोटी  रकम भी वसूल रहे है ,इन्हें मुफसील से जो सुचनाये मिल रही है वे सरकार के खुफिया विभाग को पंहुचा रहे है ,नक्सली  ऐसे लोगो की लिस्ट बना रही है लिस्ट बनने में भाकपा  मावो और TPC सहीत कई अन्य संगठन भी है ,

अब जो सही मायने में पत्रकार है वो इस प्रकार के लोग और संगठन दोनों से किनारा कर ले रहे है ,एक तरफ अखबार के मालिक और उनके नुमायिंदे है जो पत्रकारों के साथ शोषण की प्रबुद्ध तरकीब बनाकर उनका शोसन कर रहे है वही दूसरी और ऐसे संगठन और उसके नेता है जो गलत करते हुवे चोरी और सीना जोरी की तर्ज़ पर समाज और राज्य में अपने ताकत का परचम बुलंद कर रहे है ,सरकार पत्रकार और समाज तीनो को ऐसे लोगो को पहचानना होगा ,
               नक्सली पैसे  बांटते  है पत्रकारों  को 
दूसरी  तरफ  नक्सली  संगठन TPC  चतरा के ३७ पत्रकारों  में  हर  माह  साढ़े  छह  लाख  रु   बाटता   है ,जिससे वे उसके  हुकुम  के गुलाम  बने  रहे  ,हर  पत्रकार  को  ओहदे पद  और  उसकी प्रसिध्ही  के  लिहाज़  से  नज़रान  मिलता  है  इसमें  प्रिंट  और  इलेक्ट्रोनिक  दोनों  मीडिया  के  लोग  शामिल  है ,राची  के  8 पत्रकारो  को  भी  दरमाहा  नज़राना  पेश  किया जाता  है  ,

भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री गरीब है

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               मंत्री बने बीपीएल धारी 

भारत सरकार  के  वित्त राज्य  मंत्री गरीब  है ,क्या 

               मिलेगा इंदिरा  आवास ?

हजारीबाग डेस्क 



भारत सरकार के पूर्व वित्त एवं विदेश मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा गरीबी रेखा से निचे बसर करते है उन्हें इंदिरा आवास योजना का लाभ मिलेगा साथ ही उन्हें अन्त्योदय योजना के तहत एक रु चावल और अन्य अनाज दिए जायेंगे ,यह मै नहीं कह रहा हूँ बल्कि झारखण्ड सरकार का लिस्ट कह रहा है जिसमे यशवंत सिन्हा का नाम हुपाद पंचायत के २५२ वे नंबर पर दर्ज़ है ,इस परिवार में ५ सदस्य दिखाए गए है इस लिहाज़ से वर्तमान में भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री जयन्त sinha भी BPL केटेगरी में शुमार हो जाते है क्युकी वे यशवंत सिन्हा के बड़े पुत्र और राजनितिक वारिस भी है ,अब ज़रा हुपाद पंचायत की मुखिया सरिता देवी की सुनते है की वे क्या कहती है क्युकी इसी पंचायत में यशवंत सिन्हा का ऋषभ वाटिका है जो 8 एकड़ ज़मीन पर फैला किसी आलीशान कोठी को भी लजा देता है ,
सरिता देवी मुखिया हुपाद पंचायत कहती है गरीब का नाम नहीं है और अमिर का नाम पता नहीं कैसे चढ़ जाता है सूचि में
अब ज़रा गरीब के कुनबे में झांककर देखते है उसकी क्या सोच है यशवंत sinha के नाम दर्ज होने से
मारशा एक्का ग्रामीण आदिवासी महिला कहती है गरीब लोगो की शुची में आमिर आदमी का नाम दर्ज है जो गलत है मेरा नाम यहाँ होना चाहिए सो नहीं है और यशवंत sinha जैसे लोगो का नाम दर्ज है ,और तो और पुनीता sinha जिनका नाम यहाँ की मतदाता शुची में नहीं है उनका नाम भी है यहाँ BPL धारीशुचीमें.
हलाकि इस मामले पर यशवंत सिन्हानेस्वयं कहा है की मै तो यह नाम चढाने के लिए आवेदन नहीं दिया लिहाज़ा यह किसकी गलती या साजिस है उसको पहचानकर दंडित किया जाना चाहिए ,



बड़कागाव में पुलिस आतंक से कराहते ग्रामीण

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बड़कागाव में पुलिस आतंक से कराहते ग्रामीण

तहलका डेस्क रांची ( गोपाल सहाय )

बडकगाव के ग्रामीण इलाके में आज शाम १७ मई को पुलिसिया आतंक ने लोगो को घर छोडकर भागने पर मजबूर कर दिया,ओरत बच्चे बूढ़े सभी को घर में घुसघुसकर पिटा गया,दरवाज़े तोडकर पुलिस ने बर्बरता की नुमयिस की ,जैसे अंग्रेजो की हुकूमत फीर से कायम हो गयी हो , सदर अस्पताल में उनका बयान भी नही लिया गया,यहाँ से कहा गया गया की बदकगाव थाना में ही दर्ज होगा बयान ,जबकि बड़कागाव थाना ने कहा अस्पताल में ही दर्ज होगी प्राथमिकी और वही लिया जायेगा बयान ,यह बात भी सही है की अस्पताल में ही बयान दर्ज होने का प्रावधान है ,फीर एक पुलिस ने दबी जुबां में कहा कि बड़ा साहेब का आदेश है प्राथमिकी दर्ज नहीं होगी ना ही बयान लिया जायेगा ,लोकतंत्र में यह परंपरा घातक है अमानवीय है ,मानवाधिकारों का उल्लंघन है ,
असल में बड़का गाव में कोयले के उत्खनन के लिए NTPC को खनन का पट्टा दिया गया है उसने त्रिवेणी नामक कंपनी को आउट सोर्सिंग का काम दिया है अब उस कंपनी के अधिकारी उनके गार्ड्स पुलिस मिलकर ग्रामीणों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे है ताकि वे उन्हें बिना ज़मीन का मुवावजा दिए कोयला कोड़ने का अधिकार दे दे ,इसके विरोध में ग्रामीण पिचले 45 दिनों से धरने पर है 12 गाव के लगभग ४०० लोग धरने पर बैठे है ,इसमें महिलाएं बच्चे और बूढ़े भी है , लोकतंत्र में धरना प्रदर्शन करने का अधिकार सबको है पर पुलिस की बर्बरता सर चढ़कर बोल रही है यह सरकार की तानाशाही का नतीजा है ,पूर्व विधायक मंत्री योगेन्द्र साव को अंचल बदर किया गया है विधायक निर्मला देवी को केस में फसाकर अन्दर करने की मुहीम चल रही है मजिस्ट्रेट से वारंट माँगा गया है ,जबकि जिस केस में निर्मला देवी पर केस किया गया उस समय निर्मला देवी ग्रामीणों के साथ जल सत्याग्रह कर रही थी जो कई अखबारों और टी वी चैनल की सुर्खियाँ बनी थी ,पर पुलिस को क्या वह रांची के झारखण्ड सरकार के आदेशो का पालन करने में व्यस्त है भले ही वह आदेश लोकतान्त्रिक परंपरा के लिए शोसन की प्रतिमूर्ति हो ,अभी के समय में झारखण्ड में कोई ऐसा उपायुक्त कप्तान नहीं है जो सरकार के गलत आदेशो के पालन करने से मन कर दे ,
नियम के मुताबिक ग्रामीणों को अगर मुवावजा देने में कोई दिक्कत हो तो ट्रेज़री में पैसे जमाकर भी खनन किया जा सकता था पर NTPC ने ऐसा करने की कभी नहीं सोची जिससे उनकी नियत में खोंट का पता चलता है ,इनके लिए जो कोलोनी बनाया गया है वह भी घटिया है रघुबर दास के आदेश पर भाजपा की कमिटी ने इसका जांच भी किया उस कमिटी को उपहार मनुहार देकर रिपोर्ट को बदलने की साजिस की गयी यह भी प्रमाणित हो गया ,बावजूद इसके ज़बरन काम कराया जा रहा है ,फीर पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत sinha के निर्देश पर भाजपा के GM को एक करोड़ रु एकड़ के मुवावाज़े का ऐलान सौपा गया ,इन सभी बातो के बाद स्थानीय नीती ग्रामीणों किसानो एवं विस्थापितों की राय के बगैर ग्रामीणों के तन मन धन का शोसन कर उनके आन्दोलन को कुचलने और उनके साथ अमानवीय व्यवहार की गाडी चलाई जा रही है ,

भारत सरकार के मंत्री के गाव में शादिया रोक दी गयी

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भारत सरकार के मंत्री के गाव में शादिया रोक दी गयी 
लोग स्नान नही कर पा रहे है ,मंत्री के घर के बाहर खुद का हैण्ड पम्प खराब 




अब आप फोटो में देख सकते है :- मंत्रीजी के घर के बाहर पानी के लिए खडी महिलाएं ,हैण्ड पम्प खराब से पानी निकलने की कोसिस में युवक जिस मंत्री के घर के बाहर ही नलका ठीक नहीं किया जा सका वह दुनिया के लिए क्या करेगा ? मोदीजी को लिखा गये  पत्र की कापी



 मोदीजी जहाँ एक तरफ स्वछता अभियान के तहत पूरे देश में खुले में शौच से मुक्ती का ऐलान कर रखा है वहीँ इनके मंत्रियो के अपने गाव इस अभियान में फिस्सडी साबित हो रहे है,बल्कि पेय जल संकट से इस गाव में इस साल की शादियाँ रोक दी गयी है  ,आईये आपको लिए चलते है भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री जयन्त सिन्हा का गाव जहा इस अभियान के प्रति कोई जागरूकता ना तो दिखाई देती है ना ही मंत्री जी की कोई रूचि इस ओरे है ,हजारीबाग के हुपाद पंचायत में है मंत्री जी का आलीशान बांगला लेकिन इनके स्कुल का हालत खस्ता है इनके पंचायत में चार गाव है चारो गाव में मात्र 5, 5 प्रतिसत शौचालय है जिन्होंने अपने लिए अपना शौचालय बनवाया है बाकी सरकार का काम गया तेल लेने  ९५ प्रतिसत को कोई देखनेवाला नहीं है ,यहाँ तक की इनके घर के बगल के गाव सुन्दरपुर में  पानी की इतनी किल्लत है की यहाँ ग्रामीणों ने इस साल की शादिय मुल्तवी कर दी है ,लोग हर दीन स्नान नहीं कर पा रहे है एक कोस से पिने का पानी लाना पद रहा है ,ग्रामीणों ने सबको कहने से कोई फायदा नहीं देखते हुवे प्रधानमंत्री मोदीजी को ही पत्र लिखा  है .अब ज़रा ग्रामीणों के श्री मुख से ही सुनते है की उनका क्या कहना है ?
इस विडिओ में :-



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देश का हीरो या इतिहास वाला नीरो ?

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देश का हीरो या इतिहास वाला नीरो ?
इतिहास में मर गया नीरो वर्तमान में जिंदा है
उमेश ओझा तहलका  डेस्क रांची 
झारखण्ड के हजारीबाग में दंगा हो गया ,17 अप्रैल से 24 अप्रैल तक सारा माहौल अस्त व्यस्त था ,ज़िन्दगी तबाह थी ,समाज और उसके लोग जल रहे थे ,लेकिन हजारीबाग में एक और अशांति की आग की लपटे मानवता को शर्मशार कर रही थी उसी बिच दिल्ली के एक आलीशान वातानुकूलित हाल में हजारीबाग के सांसद और देश के वित्त राज्य मंत्री  जयन्त सिन्हा के जन्म दीन की पार्टी चल रही थी ,मंत्रालय के लोग हजारीबाग संसदीय छेत्र के चहेतों में से चुनिन्दा लोग ,तरल पेय पदार्थो का मज़ा ले रहे थे ,खुशनुमा माहौल की नीली रोशनी में नहाया आलम लोगो के टपकते नूर यह बता रहे थे की जीना इसी का नाम है  हजारीबाग  के दंगे और यहाँ के हालात से उन्हें कोई लेना देना नहीं है ,21अप्रैल सोलह को हजारीबाग में चिलचिलाती धुप 41डिग्री का पारा पार कर चूका था लेकिन इस तपिश को भुलाकर लोग बेतहासा सड़को पर भाग रहे थे क्युकी कर्फ्यू में दो घंटे की ढील मिली थी ,सो जरुरत और रोजमर्रा का सामान खरीदने में सारा आलम मशगुल था तो दूसरी तरफ जिले का प्रशासन दंगे की पृष्ठभूमि के तार खोजने में व्यस्त था साथ ही दंगा आगे ना बढे इसकी गुन्जाईस तलाशी जा रही थी ,कोई बम तो कोई लाशो की तफ्तीश में जूता था ,अमन चैन लोग शांति की बहाली में मशगुल थे ,क्युकी रामनवमी पूजा में भड़के आक्रोश से दंगा भड़क गया था लाठी अंशु गैस और गोलिया दागी गयी थी ,कई लोग जख्मी तो कई मौत के आगोश में शमा  गए दहशतगर्दी के तार बांग्लादेश से जुड़ रहे थे ,शादी के सारे किनाबे बेरौनक हो गए थे ,सब कुछ दंगो की भेंट चढ़ गया था ,लेकिन इन सबसे बेखबर होकर हजारीबाग का रहनुमा ,,आका ,,जनप्रतिनिधि ,,सांसद  दिल्ली के वातानुकूलित हाल में पार्टी मन रहा था ,चैन की बांसुरी बजानेवाले इस रहनुमा को रोम के नीरो से तुलना की जाये तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी ,, 


        कौन है नीरो और कौन है जयन्त सिन्हा ?
जयन्त सिन्हा हजारीबाग संसदीय छेत्र से भाजपा के सांसद है साथ ही देश के वित्त राज्य मंत्री भी है ,अपने छेत्र के लोगो की सुधि लेने की बजाय AC हाल में अपनी व्यस्तता का ढोंग रचाकर अपनी जनता को उल्लू बना रहे थे ,उन्हें रोम के नीरो से तुलना की जा रही है तो क्या गलत है ?क्युकी जिसका अपना शहर दंगे की भेंट चढ़कर कर्फ्यू की आग में जल रहा था ,उसका रहनुमा ,उसका आका ,अपने जन्म दीन की खुशियाँ बाटने और गिफ्ट लेने में मशगुल था ,तो इसे क्या कहें ?
१७ अप्रैल को जब दंगे की शुरुवात हुई उससे पहले माननीय सांसद ने दस बजे सुबह जुलुश के ऊपर हेलिकोप्टर से फूल बरसाकर लोगो को रिझाने पटाने और हिंदुत्व की भावना जगाने में अपनी रूचि दिखाई ,जबकि इस समय शहर के मुख्य मार्गो पर दो दो युवको की लाश पड़ी थी और उसके परिजन विलाप और हंगामा कर रहे थे ,और यह बात सांसद और विधायक को भी बताई गयी फीर भी वे इस मौत को नज़रंदाज़ करते हुवे फूल बरसाने की मुहीम ज़ारी रखी ,अब उसके तुरंत बाद वहां से मंत्री चलते बने और दंगा हो गया ,अब इन बेरहम दिल के  जन प्रतिनिधिओ से लाशे सवाल कर रही है की तुम्हारे इस  अमानवीय क्रिय को काया कहा जाए ?






                     बेरहम दिल मंत्री या नीरो ?
असल में जयन्त सिन्हा पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के पुत्र है और वातानुलीत संस्कृति में पीला बढे है ,और राजनीती उन्हें पिता से विरासत में मिली है और जीत मोदीजी की कृपा से लहर में मिल गयी ,इसीलिए अभीतक अपनी पत्नी पुनीता कुमार को हजारीबाग की नागरिकता से महरूम रखा है ,वैसे भाजपा को हजारीबाग सीट पर कब्ज़ा ज़माने में १९८९ का दंगा मददगार साबीत हुवा था ,इसलिए दंगे की पृष्ठभूमि को भाजपाई अभी गलत नज़रिए से नहीं देखते है ,और इस राजनीती पर पार्टी की लहलहाती फसल में समय दर समय खाद पानी डालते रहना अपना कर्तब्य समझते है ,इसलिए दंगा को नज़रंदाज़ कर सांसद दिल्ली में नीरो बन गए और उनके बापजी हजारीबाग की सड़को पर दंगे को कश्मीर से तुलना कर तनाव को हवा देते रहे ,सायद यह कोई सोची समझी राजनीती थी ,




                    रणछोड़ है जयन्त सिन्हा 
हजारीबाग के सांसद से उम्मीदे पाले यहाँ की जनता उब रही है पर इससे क्या फायदा ? क्युकी २०१५ में बिजली के लिए हंगामा करते जब इनके पिताश्री गिरफ्तार होकर जेल चले गए तो जबतक  यशवंत sinha जेल से बाहर नहीं आये जयन्त दिल्ली में ही रहे ,अब यह क्लियर हो चूका था की जो अपने पिताश्री के जेल रहते छोड़कर भाग गया हो वह जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरेगा ?इसलिए १७ अप्रैल को दंगा की शुरुवात होते ही यह नुमयिन्दा भाग खड़ा हुवा और 24 अप्रैल तक जनता की सुधि लेने की बजाय दिल्ली के ५ सितारा जिंदगी का आनंद लेता रहा ,जनता जाये भांड में मुझे काया पडी ?










बा अदब बा मुलाहिजा होशियार मुख्यमंत्री ऑन नक्सल मूव

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      बा अदब  बा  मुलाहिजा होशियार मुख्यमंत्री ऑन नक्सल मूव 

उमेश ओझा
तहलका डेस्क  रांची
सारे खुफिया विभाग को बंद कर दिया जाए ,सारे खुफिया उपकरण बेच दिया जाए ,सारे लाम -काफ खर्चे बेकार हो रहे है क्युकी सूचनाये सरकार तक नहीं मिल रही है ,और अगर मिल रही है और उसपर अमल नहीं हो पा रहा है तब भी उसका कोई फायदा नहीं है लिहाज़ा दोनों स्थिती में इनका वजूद खतरे में है ,सरकार का समाज का देश का रूपया जाया क्यों हो ?
१२ फ़रवरी को मुख्यमंत्री रघुबर दास चतरा के लावालोंग जा रहे है ,यहाँ एक यज्ञ का उद्घाटन करना है ,मालूम है यह यज्ञ कौन करा रहा है ? यह यग्य वही कमिटी करा रहा है जो टडवा पिपरवार में पैसे का बंदरबाट करा रहा है जिसके लिए सारी  सरकारी मसिनारी जांच में जुटी है ,पुलिस तफतीस कर रही है खुफिया विभाग रिपोर्ट दे रहा है ,छापामारी हो रही है अरबो  के खेल का करोडो रुपया पकड़ा जा रहा है ,और उसी खेल के मुखिया के घर पर मुख्यमंत्री खाना भी खायेंगे ,वाह री सरकार ,वाह रे विडम्बना ,वाह रे खेल नक्सल -नेता-सरगना -मुखिया -मुख्यमंत्री का गठजोड़ बराबर रुपया ,अच्छा पहल है अच्छी बात है उम्दा खेल है ,यानी जो पहले से कवायद हो रहे है सभी नूर कुस्ती की तरह है ,छापामारी दिखावा है ,जांच छलावा है असल में साभी कार्य सिर्फ दामन को बेदाग़ दिखाने की कवायद भर है  ,नहीं तो क्या उन्हें जानकारी नहीं है की यज्ञ कौन करवा रहा है किसकी पहल है और वे उन्ही के घर पर खाना भी खायेंगे जिनके लिए सारा आलम सारी सरकार लगी है ,हो सकता है बंद कमरे में उनसे भी मुलाकात करे जो प्रतिबंधित है क्युकी अन्दर का नज़ारा देखने के लिए ना तो वहा मीडिया उपस्थीत होगी ना ही कोई साधारण  आदमी, सभी लोग सिंडिकेट के होंगे, लस्कर के होंगे ,रुपया देनेवाले रुपया का हिसाब रखनेवाले और रूपये से हथियार का भय दिखाकर गेम करनेवाले ,और उनके बिच सरकार के वर्दी पहने पहरुवे ऐसे रहेंगे मानो वही गुंडे हो ,अपराधी हो दलाल हो ,वर्दी की यही बेदर्दी उन्हें भ्रष्ट बनाती है नकाहील बनाती है क्युकी हमारे नेता ही अपनी सारी अकीदत अपराध की झोली में डाल देते है ,
हलाकि दिखने के लिए मुख्यमंत्री कस्तूरबा विद्यालय और  छोटी मोटी सड़को का भी शिलान्यास उद्घाटन करेंगे ताकि कोयले की काली चादर और नक्सल छाप को सफ़ेद चादर से ढाका जा सके ,अब लग रहा है की अनिल पलता का तबादला कैसे और क्यों  किया गया ,योगेन्द्र साव क्यों कहते है की रघुबर दास के इशारे पर सारा सिंडिकेट चल रहा है, TPC  JPC चल रहा है ,मतलब लब्बोलुवाब है की सरगना से मिलने के लिए इतना बड़ा आयोजन हो रहा है ,पुलिस से लेकर सारा महकमा इसके लिए बेदम है ,आम्रपाली से लेकर अशोका और मगध के लिए दरिआप किया जाएगा  I



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