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   झारखण्ड में भाजपा  सरकार ने पोर्न  फ्री किया 
तहलका डेस्क  हजारीबाग 
भाजपा की सरकार पोर्न साईंटो पर प्रतिबन्ध लगाने की मंशा रखती है ऐसे में अगर किसी भाजपा शासित प्रदेश में किसी धार्मिक मेले में खुलकर न्यूड डांस हो जिस मेले का उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री करते है तो क्या कहा जाए ,और विडम्बना है की उस छेत्र में भाजपा का ही विधायक है और सांसद भी भाजपा का ही है  सांसद प्रदेश अध्यच है और इसी जिले के एक अन्य सांसद केंद्र में वित्त राज्य मंत्री भी है ,अगर ऐसे में धार्मिक मेले में अश्लीलता और फूहड़पन बाजारू संस्कृति का रूप लेने लगे तो शायद कहना पड़ता है की राजद कांग्रेस और सपा पर छिटाकसी करनेवाले जब खुद की औकात पर आये तो फिजां बदल सी गयी ,जी हा आईये आपको झारखण्ड में  हजारीबाग के बरकट्ठा लिए चलते है जहाँ विस्व प्रसिद्द सूर्य कुण्ड है ,यहाँ का कुण्ड 88 डिग्री का तापमान रखता है जो एशिया का सबसे गर्म कुण्ड है लिहाज़ा यहाँ जनवरी में  15 दीनो का मेला लगता है ज़ाहिर है यहाँ वैज्ञानिक परिपेछय से ज्यादा धार्मीक है इसलिए इस बार यहाँ मेले के उद्घाटन के लिए रघुबर दास स्वयं 14 जनवरी को आये । अब यहां दो दो थियेटर अपना कुनबा लगाये बैठे है शोभा सम्राट थियेटर और इंडिया थियेटर  जिनमे खुलकर न्यूड डांस नंगा नृत्य हो रहा है ,पैसे ने सबको चुप रहने को विवस कर दिया है हालांकि कुछ पंडित खुलकर बोल रहे है की यह गलत है ।नरेश पंडित पुजारी कहते है ,खुलकर नंगा नाच हो रहा है जो गलत है हमलोगो के वज़ूद पर प्रश्न चिन्ह लगने लगा है 
जुगल पाण्डे प्रबंधन समिति - यह कहने में कोई संकोच नही की नंगा नाच हो रहा है जिससे धार्मिक आस्था का नाश हो रहा है 
गौतम कुमार स्थानीय युवक  एशिया के उषणतंम कुंडो में एक इस कुण्ड और यहाँ  की आस्था दोनों ख़त्म हो रही है ,,,,, अब ज़रा दूसरे पछ के कुनबे में झांककर देखते है की उनका क्या मानना है ,लेकिन इससे पहले हम आपकी थोडा हकीकत के दर्शन करवा देते है क्योंकि पूरा दृश्य हम आपको नही दिखा सकते है
 S. K. Jha थाना प्रभारी गोरहर की मानें तो  हमें तो किसी अश्लील डांस की शिकायत नही मिली है वरना थियेटर बंद करवा देता, 
संजय पाण्डे मेला ठेकेदार ने ताल ठोककर कहा  कोई अश्लील डांस हमलोग नहीं होने देते है 
दीपक कुमार थियेटर संचालक - बदलते परिवेश में सबकुछ बदला है और सब कुछ में पापी पेट का सवाल है 
अब इतना सबकुछ हो रहा है यहाँ तक की लोग झारखण्ड के अलावे बिहार के ओरंगाबाद, गया, नवादा, बिहार शरीफ, से आ रहे है नाच देखने जिसकी चर्चा चारो तरफ है ,और साहब लोग कहते है हमें पता नही ।उत्तरी छोटानागपुर के सभी जिलो से लोग आ ही रहे है ,बड़े बड़े लोग रात में बड़ी बड़ी गाडियो में आते है और बन्दर टोपी लगाकर अश्लीलता का रसपान कर रहे है 
अब एक तीसरा पच्छ भी है कलाकारों का उसे भी सुन ले देख ले तो पुरे मामले की पड़ताल हो सकेगी-
 रीना कुमारी कलाकार शोभा थियेटर की -लोग  लड़की को लोग नंगा ओपन देखना पसंद करते है ,लहंगा चुनरी में आने से पत्थर मरते है बोतल फेकते है )
कसीस,, कलाकार इंडिया थियेटर  और जगहों की अपेछा यहा के दर्शक भिन्न है वो हद से ज्यादा कुछ देखना चाहते है,लड़की के तन पर कपड़ा देखना गंवारा नहीं लिहाज़ा पत्थर बोतल कुछ भी फेकने लगते है ,सांस्कृतिक रूप कोई देखना पसंद नहीं करता है  
सारे पछो को देखने सुनने के बाद लगता है की भाजपा सरकार की कथनी करनी में अंतर है सोनपुर मेले की अश्लीलता को मात देती यह संस्कृति शायद पाश्चात्य देशो में भी नही है ज़हाँ ऑरत की नुमाईस ही नही की जाती बल्कि उसका गन्दा प्रदर्शन किया जा रहा है और सरकार से लेकर प्रसासन तक चुप है खामोश है । तो फिर नंगा किसको कहा जाये यह एक बड़ा प्रश्न है
सच किसने कहा झूठ कौन बोल रहा है यह बात आप इस विडिओ को देखकर स्वयं बता सकते है ,,,,,,
video

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भोलुवा का  पाती ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मुखमंतरी के नाम 
जरा एक नज़र देखो न ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

आदरनिये मुखमंतरी साहेब
                                      वालेकुम परनाम , आगे सब खुसाल मंगल  है , लेकिन आपका राज में आपका रिस्तादार लोग अच्छा नहीं कर रहा है ,आपका नाम पर गुण्डागरदी हो रहा है ,अइसन गुंडागर्दी की लालू जादव  भी लजा जा रहा है ,टाटानगर  में पाहिले तो आपका बेटा अकेले था वही धूम धडाम करता था ,वू तो ईगो ऑफिस हड़प के बैठ गया है वही से सब गोगोगिरी चला रहा है ,उसको आप ऑफिसर बना दिए है तबो अइसन काहे करता है ,दूसरा तरफ आपका भाई और भतीजा लोग है जो गंगाजल फिलिम का शूटिंग जैसन हंगामा कर रहा है ,अभियंता लोग के कहता है की ठीक हमारा आदमी को दो नहीं तो गंगाजल फिलिम देखा था न वैसने होगा ,सब इंजीनियर लोग डरा हुवा है ,थानादार को डरता है किसका FIR करना है किसका नहीं ,रिक्सावाला का लड़ाई में भी मुखमंतरी आवास से फोन जा रहा है ,का इसाब अच्छा है ,इनोभा गाडी का टायर बदले के वास्ते शो रुम वाला से आपका भाई लड़ जाता है थानादार भी शोरुम्वाला को कहता है की  सी एम् हॉउस से फोन ईल बा गलत रहे चाहे सही टैरवा तो देवे के पड़ी ,भला बताइए रघुबर भैया की आपका भाई ईगो टैर  का वास्ते झगडा कर रहा है ,आप का  करवाना चाहते है ,यही लोग आपका माटी पलीत करके छोड़ देगा ताखनी  आपको कोय नहीं पूछेगा ,अपना इज्जत बचाना है तो माय कसम जे घुस के रुपैया कमाए है ने वही देके विदेश भेज दीजिये ,नहीं तो जादा हो हल्ल्ला होगा न तो मोदीजी जादा लोड नहीं लेंगे सीधे बैक टू पेवेलियन ,सम्हाल के रहिये  भाई भतीजे के चलते ही महाभारत हुवा था और उसका चलते ही आदमी भीतरे चला जाता है ,भ्लुवा का बात आपको कड़ा लगेगा काहे की हमको घीव लगाके बोलना नहीं आता है ने ,सीधे बात बोलते है खर्रा ,गोली लगेगा छर्रा ,
वैसे आप अच्छा आदमी है नाप जोखके बीटा भतीजा पर लगाम लगाइए ,कमांड रखिये नहीं तो माय बाप किरिया जै जाई सियाराम  हो जायेगा,,हम तो सोचते थे की आप खाली TPC वाला आदमी से गुंडागर्दी करा रहे है लेकिन आपतो अपना आदमी लोग को भी साधू जादव बनके बजार में उतार रहे है ,ठीके है नहीं होगा तब हमको मोदी बाबा को भी चिट्ठी लिखना पड़ेगा ,
खैर आगे भूल चुक लेनी देनी माफ़ ,,,,,,आगे आपका
भोलुवा उर्फ़ भोलानाथ 
मांसीपीढ़ी ,हजारीबाग    

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                    पैसे का देखो ज़ोर
 
          झारखण्ड सरकार पड़ी कमज़ो

झारखंड में प्रेस ,पोलितिसियन ,पुलिस एवं जंगल की तथाकथीत सरकार मिलकर पैसे और पैरवी का ऐसा खेल खेल रहे है की सच्चाई सामने आने से कई लोगो के होश फाख्ता हो जायेंगे ,
तहलका डेस्क रांची  
झारखण्ड में सरकार पुलिस इतनी कमज़ोर है की सिर्फ कागज़ी दावे ही कर पाती है ।टी पी  सी ,जे एम् पी  पी ,जे पी सी  हावी है ,कोयले की काली कमाई में सबके हाथ काले ,पेट काले ,मुह काले हो रहे है ।
आम्रपाली मगध से हर महीने 12 से 15 करोड़ की उगाही हो रही है । दूसरी और रघुराम रेड्डी के बयान ने लेवी लेवाल् में नक्सलियो के साथ पत्रकारो को भी खड़ा क्र दिया ।
एक का बन्दुक शासन ,,दूसरे का बौद्धिक शासन ,


प्रति टन 264 रु का लेवी ,टैक्स,रुक्का,मनसब,विष्णुप्रित जो भी कहे निकलता है ।इसके अलावे 2300 रु प्रति गाड़ी लोडिंग कांटा के नज़्म पर भी वसूला जाता है ,और 3 से 4 लाख टन कोयला एक कोलियरी से निकलता है । ऐसी तीन कोलियारियां है। पिपरवार,मगध,आम्रपाली,अशोका से हर माह 50 करोड़ की उगाही रंगदारी या लेवी के रूप में होती है , इसमें सभी का हिस्सा है । 15 रु पत्रकार के नाम से प्रति टन निकलता है जिसमे खलारी पिपरवार से चतरा होते रांची के मुख्य पत्रकारो के अलावे संपादको तक जाता है पैसा । 50 रु प्रसासन के नाम से निकलता है जिसमे थानेदार से लेकर कप्तान जिलाधिकारी होते डी ज़ी तक जाता है रुपया । बाकि बचे 200 में से TPC ,लोकल कमिटी ,और नेता मंतरी है । 25 रु मंत्रियो के लिए निकलता है ,50 रु कमिटी और बाकि TPC, JPC वगैरह वगैरह । इसके अलावे जीतने डम्पर लगते है वह TPC के आदेस पर उस आदेस के लिये भी खर्च है फायदा है ।डीजल रेड्डी से ही लेना है वह भी 5 रु लीटर अधिक रेट ।रेड्डी जितना कोयला निकालता है उससे ज्यादा की रिपोर्टिंग होती है और बाद में आग लगाकर सब साफ़ क्र दिया जाता है ,इसमें भी TPC का हिस्सा है ,जितनी गाड़ियां चलती है वे भी TPC की है या उनके रहमो करम पर है ।महीने में 2,3 सौ ट्रक कोयले की चोरी भी हो जाती है ।सभी मामले में सरकार पुलिस प्रसासन मिले है अगुवा TPC है ।किसी को फसां देना ,किसी पर केस कर देना ,यह सब टी पी सी के आदेस पर होता है ।आक्रमण जी तूफ़ान जी बबलू जी बिंदु जी मोर्चे पर बड़े सिपाही है बाकि लोग होमगार्ड की तरह है ।


होनहे , कुमारांग 2,बिंगलात,उर्शु में दुनिया और दुनियादारी दोनों बदल चुके है । दबंग गाव छोड़कर भाग गए ,जो रह गये है वे इसी रंग में रंगदार बन गए ,कुछ भंगी वफादार से जमींदार बन गए ।लोगो के दरवाज़े पर गाय बैल नही बाइक गाड़ी ट्रक लगने लगे है ।सरकार ख़ुफ़िया और पुलिस से नज़र बचाने के लिए ग्रामीणों की एक टीम बनी है हलाकि ऊपर से सारा नियंत्रण टी पी सी का होता है उसमे चालीस लोग है ,कुमारांग,होनहे बिंगलात,उर्शु से चुंचुनकर् रखा गया है जिसमे मंटू सिंह,अमलेश दास, अरविन्द सिंह,सुरेश सिंह,विजय दास, संतोस यादव,रघुवीर साव,लखन साव,उमेश यादव,त्रिवेणी यादव,हुलास यादव ,संजय महतो, बिंदु गंझु,कैलास यादव,सूरज उराव ,जयराम उराव,रामलाल उराव,कैलाश गंझु,राजेंद्र उराव, महेश वर्मा ,ररय वर्मा,प्रदीप वर्मा ,उपेन्द्र वर्मा ,पंकज वर्मा ,शुभान मियाँ,परमेस्वर गंझु ,अर्जुब गंझु ,जुगल गंझु प्रमुख है इसके अलावे ब्रजेश,अनिश्चय,विंदू,बबलू विनोद भी टॉप लाईन है ।जिनके इशारे पर ही कोयला चलता है या रुकता है ।
हालांकि ग्रामीणों ने भी अपना दो दो संगठन बना रखा है लेकिन वह प्रभावी नही है उसे नक्सली पुलिस और अधिकारी जब चाहते है केस करा देते है .

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       उपलब्धियो का डंका पीटकर बरगलाने की मुहीम 

                  झारखण्ड सरकार  के एक साल 

तहलका डेस्क 
झारखण्ड सरकार को एक साल हुवे । रघुबर दास ने उपलब्धियों का लेखा जोखा अखबार की सुर्खियां बनी पड़ी है, क्या गलत क्या सही ,कौन सामने लाएगा ? कलम के मसीहाओं की कलम गुलाम हो गयी है क्योंकि विज्ञापन की बेड़ियां उनके कलाई की शोभा बन गयी है । लेकिन यह झारखण्ड की पहली सरकार है जो बहुमतवाली है फिर भी एक साल में खाका भी तईयार नही होना क्या जताता है ? 
ये लो उपलब्धियो का गट्ठर कुछ इधर भी है 
टी पी सी ,,जे पी सी,जे एम् पी पी जैसे नक्सल संगठन सरकार चला रही है ।
यह संगठन हज़ारो गाव में अपना साम्राज्य बना चुकी है । इनके लेवी के पैसे पुलिस प्रसासन नेता मंतरी सरकार तक जा रही है ।इसलिए इनके आदेश के बगैर कोई केस तक थाणे में दर्ज़ नही होता ,सरकार कौन है ? नक्सली या रघुबर ? यही कारण है की इनकी जांच में कदम उठानेवाले आईपीएस अनिल पलटा का तबादला मात्र 29 दिनों में कर दिया गया जबकि वो उपलब्धि के करीब थे । नक्सल नेता ने 35 करोड़ में ADG का तबादला करवा दिया । बड़ा कौन नक्सल या पुलिस ?
राज्य के 7 समेकित टोल नाकों पर हर दीं साढ़े तीन करोड़ की चोरी हो रही है सबको पता है पर रोक नही ,क्यों ?इसमें किसका किसका हिस्सा है ?
राज्य के परिवहन कार्यालयों में पदाधिकारी कर्मचारी नही । निबंधन कार्यालयों में कर्मी नही जहाँ से करोडो का राजस्व आता है ।
राज्य का कोयला अडानी अम्बानी रेड्डी सरकारी दर पर यानि सब्सिडी पर कोयला लेकर बाज़ार में ऊँचे दाम पर बेच रहे है जरुरत से चार गुना ज्यादा कोयला लूटकर ले जा रहे है ।
कोल इंडिया के खदानों से कोयला चोरी कर पत्थर सप्लाई हो रहा है ।
लोहा अभ्रख रत्न की लूट ज़ारी है ।
ईमानदार अधिकारी संटिंग में और भ्रस्ट अधिकारी फंडिंग में ।
ज़मीन माफिया कोयला माफिया कारपोरेट दलाल हावी ।
बिहार के ठेकेदार, गुंडे ,नेता ,पत्रकार,हावी ,झारखंडियों का शोसन ।उनके निर्देस पर तबादला ,पोस्टिंग,और बहाली भी ।

राज्यपाल के सम्मान में गुस्ताखी

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      "राज्यपाल  के  सम्मान  में  गुस्ताखी "

तहलका  डेस्क  हजारीबाग

भारत  के  संत शिरोमणि  विनोबा  के  नाम  पर  स्थापित विस्वविद्यालय  में  इन  दीनो   झूठ  का  बोलबाला सच  का  मुह  काला  हो  रहा  है ,तीन अक्तूबर १५  को  इसी  सन्दर्भ  में एक  सेमीनार  का  आयोजन  किया  गया इसमें मुख्य  अतिथी झारखण्ड  की  राज्यपाल द्रौपदी  मुर्मू  थी ,कुलाधिपती  से  यहाँ  विवेकानंद  सभागार  का  उद्घाटन  भी  कराया  गया ,जबकि इस  हाल  का  उद्घाटन दस  माह  पहले  ही  पूर्व  के  राज्यपाल सैयद  अहमद  साहब  ने  किया  था ,उनके  उद्घाटन  वाले  शिलापट्ट को  छुपा दिया  गया  और  उसके  बगल  में ही दूसरा  सिलापट्ट  लगाकर उद्घाटन  करा  दिया  गया ,क्या  यह  धोखा ,मानहानि या  भ्रस्टाचार   नहीं  है ? कुलपति गुरमीत  सिंह  ने  चमचागिरी  की  सारी  सीमाए  लांघते  हुवे  यह  अपराध  कर वाहवाही  लूटने  की    कोसीस  की ,लिखा  रेनोवेट किया  गया ,,,अब  पता  तो  चले  की  मात्र  दस  माह  में  कैसे नविक्रीत  की  ज़रूरत  आन  पडी ? और  क्या  सही  मायने  में  नाविक्रीत किया  गया ?  अगर नहीं  तो  राज्यपान  से  झूठ  बोलकर उद्घाटन  करवाया  जाना  क्या  छम्य  अपराध  है ?
  इस  सेमीनार  में अर्थशास्त्र पर  चर्चा  थी पर  कुलपती ने सारा  समय अपने  भाषण में भाजपा  की  तरफदारी में  बिता  दिया ,अर्थशास्त्र के  छात्रों में  २५  प्रतिशत  को  ही  अन्दर  जाने  दिया  गया  बाकि  के  छात्र अपने  भाग्य और  कुलपती  को  बाहर  बैठकर  कोसते  रहे , आखीर   यह  सेमीनार  था  किसके  लिए ,?
  तीसरे  इस सेमीनार  के  उद्घाटन  में सोवेनियर भी  छापा गया  उसमे  एक  भी  आर्टिकल हिन्दी में  नहीं था ,इतना  ही  नहीं एक  लाईन  भी हिन्दी नहीं  लिखा  गया था जबकि  यहाँ  के  अस्सी  प्रतिशत  छात्र  हिंदी  भाषी  है ,उनके  लेख ,उनके विचार उनकी  छमता  से  विस्वविद्यालय और  समाज  को दूर  रखा  गया  ,क्या  यह  अपराध  नहीं  है ? OBC ,हरिजन आदिवासी पिछडी  जाती के  छात्रों  के  सम्मान  में  यह ठेस  लगाने वाली  घटना  है क्युकी  यहाँ कुछेक अगड़ी  जाती के  लोगो  का  वर्चस्व  है ,और महामहीम कुलाधिपती ने  भी  अपने  भाषण को  अंग्रेजी  में देकर इनकी कारगुजारी को  जस्टिफाई कर  दिया ,इससे यह  बात  पता  ही  नहीं चलता  है की  यह  विनोबा  भावे  विश्व विद्यालय है  या  मैकाले का उनिवार्सिटी ??
इस  विश्व विद्यालय  में  छात्रों  का  सम्मान  नहीं ,पत्रकारों  का  सम्मान  नहीं ,समाज सेवी  का  सामान  नहीं सिर्फ राजनीती  का  सम्मान  है  चमचागिरी के  नए  मापदंड  है  उसीपर सबकी  कुर्सी बरकरार  है ,


झारखण्ड की महिमा न्यारी- सीबीआई पर निगरानी भारी

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            झारखण्ड की महिमा न्यारी  
                  सीबीआई  पर निगरानी  भारी 

तहलका डेस्क रांची
झारखण्ड में कोयले की कालिख से मुह और हाथ काला कर चुकी सीबीआई अब हर जगह मात खा रही है यानी उनके मातहत और अधिकारी के दामन पर दाग लगता जा रहा है ,इस बार राज्य के APDRP  योजना में एक कंपनी के काले कारनामो को जांच  निगरानी को जब भ्रस्टाचारी नहीं खरीद पाये तो सीबीआई के साथ मिलाकर खेल खेला और निगरानी की जांच को ही रुकवा दिया ,इससे लगता है की झारखण्ड की मीट्टी में जो भ्रस्टाचार के अवयव है उनसे अच्छी फसले  भी रोगग्रस्त हो जा रही है ,आपके सामने प्रस्तुत है 10. 89  करोड़ के अधिक भुगतान  की तह खोलता हुवा यह रिपोर्ट :-
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,भ्रष्टाचार के आगे सरकार ने घुटने टेके,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राज्य के निगरानी ब्यूरो को कमजोर करने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का मामला प्रकाश में आया

है. राज्य सरकार द्वारा एक ऐसे मामले में निगरानी जांच पर रोक लगा दी गयी है जिसमे राज्य के निगरानी

ब्यूरो द्वारा अभियुक्तों के विरुद्ध काण्ड सत्य पाते हुए निगरानी कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है.

इससे सरकार के भ्रष्टाचार-विरोधी छवि को धक्का पहुंचा है. एक ओर तो सरकार निगरानी विभाग को मजबूत

बनाने की कवायद कर रही है, वही दूसरी ओर भ्रष्ट ताकते उसे कमजोर करने की तरकीब में सफल होते नजर

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ए पी डी आर पी परियोजना के जमशेदपुर पैकज में एजेंसी आर पी सी

एल को रु 10.89 करोड़ के अधिक भुगतान का मामला महालेखाकार की रिपोर्ट में आने के बाद विद्युत् बोर्ड ने

इसकी जांच की. जांच में कई पदाधिकारिओं की संलिप्तता सामने आने के बाद बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष शिव

वसंत के आदेश पर सचिव सुमंत कुमार सिन्हा द्वारा निगरानी ब्यूरो में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. राज्यपाल के

तत्कालीन सलाहकार श्री वी. एस. दूबे के आदेश के बाद निगरानी ब्यूरो द्वारा कांड संख्या ०२/२०११ दर्ज कर

जांच प्रारंभ कर दिया गया. अनुसंधान के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निगरानी ब्यूरो द्वारा डब्ल्यू एन

के होरो, मुख्य अभियंता, एस सी श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, उमेश कुमार, वित्त नियंत्रक, निरंजन राय,

वित्त नियंत्रक, वी पी दूबे, निदेशक वित्त, तथा डी महापात्रा, उप लेखा निदेशक के विरुद्ध अभी हाल में ही

आरोप पत्र दाखिल किया गया है.



सूत्रों का कहना है की इस काण्ड के अनुसंधान में लगातार रुकावट पैदा करने की कोशिश की गयी है.

निगरानी ब्यूरो द्वारा वर्ष २०१३ में ही अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति मांगी गयी थी पर

अभियुक्तों के प्रभाव में यह टलता रहा. यहाँ तक की बोर्ड से स्वीकृती होने के बाद भी इसे निगरानी ब्यूरो को

सूचित नहीं किया गया था. बाद में ब्यूरो के कड़े रुख के बाद झारखंड ऊर्जा विकास निगम के महाप्रबंधक

(कार्मिक) ने अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की. इसके बाद ही आरोप पत्र दाखिल किया

मधुसूदन मित्तल द्वारा दायर पी आई एल संख्या १७९३/२००१ में माननीय झारखंड द्वारा बोर्ड के

गतिविधियों के सी बी आई जांच का आदेश दि २८.०३.२०११ को दिया गया था. इस आदेश का सहारा लेकर

अभियुक्तों द्वारा इस काण्ड की जांच रुकवाने का प्रयास किया जाता रहा है.

दिनांक १२.०९.११ को सी बी आई के डी. एस. पी .श्री ए के झा ने बोर्ड एवं ब्यूरो को पत्र लिखा कि

ए पी डी आर पी के उक्त पॅकेज में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है एवं प्राथमिकी गलत दायर हुई है. चूँकि उस समय

तक निगरानी जांच में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों की पुष्टि हो चुकी थी, अत: इस बाबत सी बी आई से

पत्राचार किया गया. पत्रांक ३४४ दिनांक २१.०१.२०१३ द्वारा सी. बी. आई. ने स्पस्ट किया कि उनके द्वारा

APDRP स्कीम की कोई जांच नहीं की जा रही है. डी. एस. पी. सी. बी. आई. के उपरोक्त पत्र के सम्बन्ध में
पत्राचार करने पर बाद में सी बी आई ने दि ०८.११. २०१३ को पत्र लिख कर स्वीकार किया कि इस मामले में

उसके द्वारा गहन जांच नहीं की गयी है.

अब कांड में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों की पुष्टि होने एवं आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मंत्रिमंडल

(निगरानी) विभाग के पत्रांक १६४१ दि ११.०८.१५ के द्वारा जांच स्थगित करने का आदेश पारित कर दिया

गया है क्या है पत्र में पत्र में कहा गया है कि इस मामले की जांच सी बी आई कर रही है. पत्र में विधि विभाग का मंतव्य अंकित है कि बशर्ते दिनांक २८.०३.११ के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय अथवा माननीय उच्च न्यायालय का इस सम्बन्ध में कोई आदेश नहीं पारित हुआ हो तो सी बी आई जांच तक निगरानी अनुसंधान स्थगित रखी जाय. पत्रांक ३४४ दिनांक २१.०१.२०१३ द्वारा सी. बी. आई. ने स्पस्ट किया कि उनके द्वारा APDRP स्कीम की कोई जांच नहीं की जा रही है. पुन: सी बी आई के पत्र संख्या ४५९६ दि ०८.११.२०१३ द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस सम्बन्ध में उनके द्वारा कोई विस्तृत जांच नहीं की गयी है. सी बी आई ने कई वादों में दायर प्रतिशपथ पत्रों द्वारा भी माननीय न्यायालयों को सूचित किया है की उनके द्वारा इस मामले की जांच नहीं की जा रही है. काण्ड के एक अभियुक्त द्वारा दायर क्रिमिनल मिस्लेनिअस पिटीशन १२९८/१२ में सभी तथ्यों पर विचार कर के तथा सी बी आई का पक्ष प्राप्त करने बाद माननीय झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दिनांक
२८.०२.२०१३ को आदेश पारित कर निगरानी जांच को हरी झंडी दे दी है. स्पष्ट है कि इन तथ्यों को छुपाकर मुख्यमंत्री से अनुसंधान पर स्थगनादेश प्राप्त किया गया है.उक्त काण्ड के अभियुक्तों द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में दायर केशों की सूची:

FILING NUMBER CASE NO PETITIONER

NAME RESPONDENT NAME

012010052962013 Cr.M.P/0000499/2013 Virendra

Pratap Dubey

State Of Jharkhand

Through Secretary Cabinet

Vigilance Department And

012010055552013 Cr.M.P/0000523/2013 Niranjan Roy State Of Jharkhand And

012010059352013 Cr.M.P/0000558/2013 Pushpendra

State Of Jharkhand And

Kumar Sinha Ors





कई केशों में माननीय झारखंड हाईकोर्ट द्वारा निगरानी अनुसंधान जारी रखने का आदेश पारित किया गया है

इतने संगीन मसले पर आनन्-फानन में जाँच पर रोक निगरानी ब्यूरो का मनोबल कम करने तथा अभियुक्तों –

एजेंसी को लाभ पहुंचाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है. यक्ष प्रश्न पुन: उपस्थित है कि क्या झारखंड

इसका सीधा लाभ में. आर. पी. सी. एल. को मिल सकता है. उसके द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कारवाई रोकने तथा

अतिरिक्त भुगतान प्राप्त करने हेतु वाद दायर किया गया है. अगर ऐसा होता है तो सरकार पर भारी आर्थिक

बोझ पड़ सकता है. आर. पी. सी. एल. के केश में माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे

में. आर. पी. सी. एल. के विरुद्ध पहले भी फर्जी बैंक गारंटी जमा कर बोर्ड से धोखा-धडी करने का केश चल रहा

है. बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष श्री शिवेन्दु द्वारा इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने का आदेश दिया गया था पर

ऊर्जा विभाग ने दो वर्ष पूर्व बोर्ड को निदेश दिया था कि निगरानी अभियुक्तों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया जाय,
अब सवाल उठना लाज़मी हो गया है की जब सरसो में ही भूत घुस जाये तो झाड़ फूक का क्या फायदा ? सीबीआई ही अगर दामन को गन्दा कर लेगी तो विस्वास किसपे किया जा सकेगा ?

आनन- फानन में VPSC NO. 2/11 तथा 19/13 की जांच स्थगित करने से उठने वाले सवाल:
1. विधि विभाग ने प्रशासी विभाग से यह संपुष्ट होने को कहा था कि 28.03.11 के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय का कोई आदेश नही आया है। सवाल यह है कि इसको नजरअंदाज़ क्यों किया गया?

2. उप सचिव ने अपनी टिप्पणी में Cr. M. P. 1298/12 में CBI के affidavit का संपादित अंश तो अंकित किया है पर इस केश में पारित आदेश को क्यों छुपाया, जबकि इस केश में माननीय उच्च न्यायालय ने सभी तथ्यों पर गौर करके निगरानी जांच को हरी झंडी दी थी।

3.उप सचिव ने अपनी टिप्पणी में बोर्ड के वरीय विधि परामर्शी की एक टिप्पणी का जिक्र किया पर उसके एक माह के बाद ही केश डायरी के गहन अध्ययन के बाद दिए गए मंतव्य को क्यों नजरअंदाज कर दिया गया जिसमे उन्होंने काण्ड को सत्य बताते हुए तुरंत अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव दिया।

4. उप सचिव ने CBI के पत्र संख्या 465 दिनांक 29.01.13 की गलत व्याख्या करते हुए यह क्यों लिखा कि CBI APDRP की जांच कर रही है जबकि उस पत्र के संलग्नक पत्र संख्या 344 दिनांक 21.01.13 द्वारा ही CBI ने स्पष्ट कर दिया था कि वह APDRP की जांच नही कर रही है।

5. उप सचिव ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP (Crl.) 8203/2013 में 17 अक्टूबर 2013 को पारित स्थगनादेश का उल्लेख किया पर यह उल्लेख क्यों नही किया कि उक्त केश में निर्णय की तिथि 17.08.15 निर्धारित है जो कि internet से संभव था। 

अब सुप्रीम कोर्ट ने 17.08.15 को उक्त स्थगनादेश को रद्द करते हुए उक्त वाद को dismiss कर दिया है और अपराधियों के CBI जांच के दावे को खारिज करते हुए निगरानी जांच को हरी झंडी दी है तो क्या इस तथ्य को माननीय मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है?

बड़ा सवाल यह है कि अपराधियों के पक्ष में आँख बंद करने के लिए मंत्रिमण्डल (निगरानी) विभाग के उप सचिव, विशेष सचिव तथा अपर मुख्य सचिव पर कौन सा दवाब था।

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