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मुख्य सचिव के यहाँ से बर्खास्तगी की फाइल गुम,मंत्री ठेका पर रखकर बचा रहे है अधिकारी को

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                                     डेमोटांड़ के कृषि पर्यटन केंद्र में लूट की छूट 

              निगरानी ने जांच में पाया गबन का मामला फिर भी गिरफ्तारी नहीं ,क्यों ??

                               मुख्य सचिव के यहाँ से बर्खास्तगी  की फाइल गुम 

               मंत्री ठेका पर रखकर बचा रहे है अधिकारी को 

तहलका डेस्क (रांची )

हजारीबाग के डेमोटांड़ में  झारखण्ड का एकलौता एग्रो टूरिस्म सेंटर ( कृषि पर्यटन केंद्र ) है जो भूमि संरछण अनुसंधान एवं प्रसिक्छन केंद्र के अधीन चलता है। लेकिन इस केंद्र की दुर्दशा हो गयी है ,यह केंद्र पैसा रहते भी ज़िल्लत ,ज़लालत और तंगहाली में है। क्युकी यहाँ सुनील कुमार जैसे अधिकारी को डेपुटी डाइरेक्टर बना दिया गया है। सुनील कुमार पर १.२६ करोड़ के गबन का आरोप निगरानी ने केस न ३७ / २०१० से प्रमाणित कर दिया है।मामला soil health smart card बनवाने का था।  इसके बाद कृषि विभाग ने अपने पत्रांक ३८/२००८ (१९.०५.१४ )के माध्यम से इनके बरखास्तगी का पत्र सरकार में मुख्य सचिव के मार्फ़त भेज दिया है। लेकिन कृषि मंत्री योगेन्द्र साव ने इसलिए इन्हे बचा रखा है क्युकी इनके मार्फ़त डेमोटांड़ में डेढ़ करोड़ का काम चला रहे है जो मंत्री के अपने साले साहब कर रहे है ,और इस काम में पूरा लूट की छूट है। काम का ठेका जिला परिषद से निकला है पर पेमेंट सुनील कुमार कर रहे है जिला परिषद की कोई मॉनिटरिंग नहीं है। ज़ाहिर है कुल मिलाकर काम का बन्दर बाट हो रहा है ऐसे में इस एकलौते केंद्र का विकाश नहीं हो सकता है। इसके लिए किसी सक्छम अधिकारी को यहाँ पदस्थापित करना आवस्यक है।लेकिन अभी कई बड़े काम इन्ही पदाधिकारी के माध्यम से मंत्री को कराकर बंदरबाट करना है।साथ ही जिस डोलोमाईट के खरीद में सुनील कुमार ने घोटाला किया है वही काम मंत्री फिर से करवाने की फाइल बढ़ा दिया है इस बार मामला २२ करोड़ का है।  लिहाज़ा गलत पदाधिकारी को बचाकर -पालकर रखे है।  यह केंद्र ना सिर्फ हजारीबाग बल्कि पूरे राज्य का नाम रोशन करेगा ,और पर्यटन के  बडे  और सुंदर स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।  मामला एक PIL से सुरु हुवा था जिसमे नृपेन्द्र कुमार परिमल नामक आदमी ने जनहित याचिका संख्या ४०८/२००९ के माध्यम से सरकार और उनके नुमाईंदों को पार्टी बनाते हुवे केस दर्ज़ कराया था। निगरानी ने केस दर्ज़ कर जब जांच सुरु की तो सारे आरोप सही पाये गए ,लेकिन निगरानी ने इस अधिकारी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया। दूसरी तरफ मुख्य सचिव के यहाँ से बर्खास्तगी की फाइल गुम हो गयी है ,क्या झारखण्ड में भ्रस्टाचारी इतने ताकतवर हो गए है की मुख्य सचिव के  टेबल से फाइल टपा देते है ?ऐसे अधिकारी अगर राज्य की व्यवस्था पर हावी रहेंगे तो कितना विकाश हो सकता है इसका अंदाज़ा आम आदमी भी आसानी से लगा सकता है।








       



माफियाओ को मिल रहा है जंगल उजाड़ने का अवैध ठेका

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माफियाओ को मिल रहा है जंगल उजाड़ने  का अवैध ठेका 


तहलका डेस्क (रांची )
उमेश ओझा ,
झारखण्ड में आम आदमी ,या किसी व्यवसायी को भले ही सुरछा  मुहैया न हो, बाबूलाल की सुरछा के लिए केंद्र को संज्ञान लेना पड़ता है, पर एक माफिया जो कोयला और पत्थर दोनों की तस्करी कर रहा है उसे बॉडी गार्ड मिल जाता है। जी हा यह कोई मिथक नहीं बल्कि कोरा सच है।और जब आदमी हरियाणा से झारखण्ड की धरती पर कदम रखता है तो पुलिस की स्कोर्ट पार्टी उसके साथ चलती है ताकि उसे अवैध माईन्स तक जाने में कोई तकलीफ ना हो।  झारखण्ड के बरकट्ठा में वन भूमि में 8 पत्थर के माईन्स चल रहे है इसमें तीन माईन्स हिल्स ट्रेड खज़ाना नामक कंपनी की है। गुरगांव हरियाणा के इस कंपनी का माईन्स धड़ल्ले से चल रहा है जिसमे चार चार पोकलेन मशीने एक माईन्स में लगी है। इतने बड़े काम के लिए थाना प्रभारी से लेकर वन विभाग ,खनन विभाग ,प्रदुषण नियंत्रण ,नक्सली संगठन ,फैक्ट्री इंस्पेक्टरऔर स्थानीय विधायक  को बड़ा रकम चुकाना पड़ता है ,वन विभाग में रेंजर से लेकर आर सी सी ऍफ़ तक मोटा माल लेते है ,इसी कारन एक बोटा काटनेवाले गरीब को जेल भेजनेवाले विभाग का मुह इतने बड़े कार्य पर बंद है ,यह कंपनी झारखण्ड की सबसे बड़ी क्रसर मशीन लगायी है जिससे एक दिन में १५० ट्रक चिप्स ( छर्री ) का उत्पादन होता है ,कागज़ पर गिरिडीह से पत्थर  माईन्स जाली रूप  दिखाया जाता है। इस मशीन में आदमी की ज़रूरत नहीं है सारा काम मेकेनाइज़्ड है। बरकट्ठा के पचरुखी पहाड़ जहा  से पत्थर निकाला जा रहा है वहा गिद्धों का प्राकृतिक आशियाना है ,हर दिन अवैध रूप से गाडिओं  लदकर विस्फोटक सामग्री जंगलो  जाकर विस्फोट करते है जिससे गिद्धों का आशियाना उजड़ने के कगार पर है ,जबकि दूसरी ओर  झारखण्ड में गिद्धों को बचाने के लिए चार करोड़ की लागत से सेंटर बनाया  रहा है ,जिससे गिद्धों को बचाया जा सके ,अब सरकार और वन विभाग की नियत और नियती पर क्या कहा  जा सकता है ? केवल हिल्सट्रेड यहाँ से हर दिन दो सौ हाईवा पत्थर निकालती है। इस कंपनी को न तो खनन का लाइसेंस है न ही मशीन के उचित भण्डारण का। एक तरफ अर्जुन मुंडा सरकार के कार्यशैली पर प्रश्न उठाते है तो दूसरी तरफ ऐसे माफिया को बॉडी गार्ड  दिलाने से लेकर अवैध खनन चलाने और मशीन लगाने में पैरवी करते है जिसपर गबन के एक बड़े मामले में सीबीआई जांच भी चल रही है। 












बिजली का ड्रामा -जेल और बेल -अपराधी कौन ?

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                मजाक -ड्रामा -नौटंकी का अड्डा बना हज़ारीबाग़ सेन्ट्रल जेल 


उमेश ओझा ( रांची )

यशवंत सिन्हा भले ही भारत के वित्त और विदेश मंत्रालय सम्हाल चुके हो ,उन्हें झारखण्ड का नेतृत्व देने की बात अडवाणी जैसे नेता कह रहे हो पर इनकी हैसियत का अंदाज़ा इसी से लग जाता है की इनको जमानत मिल जाने के बाद भी इसलिए जेल से नहीं निकल सके क्युकी ६४ लोगो के लिए (जो इनके साथ जेल में बंद है ) ६४ बेलर नहीं मिल सके। हलाकि नियम के मुताबिक हर आदमी को दो दो बेलर चाहिए -पर यहाँ तो एक के भी लाले पड़े हुवे है। और इसके लिए उन्हें एक दिन जेल में ज्यादा रहना पड़ा।
      श्री सिन्हा के हकीकत और फ़साने में काफी अंतर है -इन्हे अपने कार्यकर्ताओ का सहयोग प्राप्त नहीं है। यह काम इन्होने जनता के लिए किया या अपने लिए इसका राज खुल चूका है। ३ जून से १८ जून तक जेल में रहे यशवंत सिन्हा के लिए जेल आरामगाह की शक्ल में तब्दील हो चूका था ,अंग्रेजी हुकूमत के इतिहास को अपने में समेटे यह जेल स्वतंत्रता संग्राम का तीर्थ स्थल है यहाँ जेल के सारे कायदे कानून ध्वस्त होते दिखाई दिए। जेल में गद्दा तकिया ,कूलर ,पंखा ,८४ मोबाइल ,खाने का हर सामान ,दारु पानी गुटखा तो होता ही रहा साथ में सुबह ६ बजे से रात ९ बजे तक जेल गेट पर जमावड़ा ,क्युकी जेलर सी पी सुमन गेट पर नेताओ के लिए हाथ जोड़े खड़ा रहते थे। शत्रुहन सिन्हा जेल में यशवंत सिन्हा से मिलकर ८ बजे रात में निकले ,,क्या यह सही है ?
अडवाणी जेल में मीटिंग किये ,इस मीटिंग में जेलर खड़ा रहे और अडवाणी अर्जुन बैठे रहे। किस पद पर है आडवाणी ? क्या उन्हें जेल में मीटिंग करने की इजाजत है ?क्या उन्हें सभी  बंदिओ को सम्बोधित करने की आज़ादी है ? खुले आम कानून  का मज़ाक होता रहा और निकम्मी सरकार सोती रही। 
     अब ज़रा सरकार और क़ानूनी पहलू पर गौर फरमाये -GM को रस्सी से बांधा गया पुलिस की उपस्थिती में। उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया पुलिस के सामने। यशवंत सिन्हा की इजाजत से सरकारी काम में बाधा पहुचाया गया।  धारा ३५३ IPC  गैरजामंतिया है ,बेल नहीं मिल सकता है ,सो पहले तो सरकार पर दबाव बनाया गया की सरकार केस वापस ले ले। केस वापस नहीं हुवा और दो लोगो के बेल रिजेक्ट हो गए। फिर सुरु हुवा GM धनेछ झा पर दबाव डालने की प्रक्रिया। ८ जून को यशवंत सिन्हा ने ऊर्जा मंत्री राजेंद्र सिंह से कुमार महेश सिंह के मोबाइल से १२ मिनट बात की ,फिर ९ जून को भी बात हुई और धनेछ झा का तबादला कर दिया गया। फिर उसे कोर्ट में बयान देने लिए कहा गया पुलिस ने उसके १६४ के तहत बयान कलमबद्ध करने का आग्रह किया। और १७ जून को धनेश झा टूट गए ,हजारीबाग कोर्ट में बयान दिया की ऐसी कोई बात नहीं है ये लोग हमें बांधने में नहीं थे मई इन्हे नहीं पहचानता हु। लोगो के कहने पर इनका नाम दिया। और फिर ज़ी एम गायब हो गए बेल मिल गया। क्या इसमें पुलिस का दोस नहीं है ? कितने केस में १६४ का बयान करवाया जाता है ? यह तो गवाही की प्रक्रिया में आता। पर ऐसा नहीं होना पुलिस सरकार को कठघरे में खड़ा करता है। या फिर गलत तरीके से केस में नाम दर्ज़ कराने वाले GM को ही सजा मिलनी चाहिए जिसने इतने बड़े आदमी को बिना मतलब के १६ दीनो तक जेल में रखा। 
         आडवाणी जी पोसटर में आ गए मोदी गायब हो गए ,मोदी के नाम पर जीतनेवाले जयंत सिन्हा ने शहर में लगानेवाले कट आउट से मोदी को ही गायब कर दिया है। जब चुनाव में थे तो अटल आडवाणी को ही काट आउट से गायब कर दिया था। उस समय मीडिया के सवाल पर कहा था की अटल - आडवाणी हमारे दिलो में बसते है पोस्टर में उनके तस्वीर की जरुरत नहीं। आडवाणी को हजारीबाग आने में ८० लाख का खर्च आया ,यह खर्च किसने वहन किया ?? विशेष विमान से रांची और हेलीकॉप्टर से हजारीबाग। क्या इतने खर्च में ५० गाव के लोगो को बिजली नहीं मिल जाती ? जिस बेस गाव के मुद्दे को आगे बढ़ाकर आंदोलन किया जा रहा है वहा के २० मज़दूरों को जो जेल में यशवंत के साथ है को मैनेज करने के लिए ५० हज़ार से अधिक का खर्च किया गया ,क्युकी उनकी पत्निया और परिवार के लोग हल्ला मचा रहे थे। यशवंत कहते है की इस गाव के लिए मै पिछले १० वर्षो से परेसान हु बिजली देने के लिए।यहाँ चावल गया पैसा गया ,सुवर कटा खस्सी की पार्टी चली पर ।  सवाल है की कही इस गाव को पालकर तो नहीं रखा गया है ? इस गाव को क्या फायदा मिलेगा ?यहाँ बिजली मिले न मिले यशवंत जी को माइलेज तो मिला। आडवाणी सरीखे नेता ,जेल में मिलाने आये तब आंदोलन ख़त्म हुवा। अन्यथा बिना शर्त जेल से बहार निकलने की बात कही थी। हालांकि आडवाणी के आने की ओपचारिकता भर पूरी की गयी। क्युकी आडवाणी १२.२८ पी एम पर हजारीबाग लैंड किये और ग्यारह बजे ही बेल पीटीसन फाइल हो गया था। आखिर इतने उतावले क्यों थे,  यशवंत और उनके वकील ? लेकिन यहाँ अर्जुन मुंडा ने भी एक चाल खेला आडवाणी को रांची में ही इतनी देर करावा दिया की यशवंत के ऋषव वाटिका में खाना खाकर एक घंटे रुकने का उनका प्रोग्राम फेल कर गया। 
    हालांकि यशवंत सिन्हा का ऐसा हर आंदोलन फेल ही होता रहा है। एक्साइस टैक्स ऑफिस का मामला ,बी इस ऍफ़  के सब्सिडरी ट्रेनिंग सेंटर का मामला ,जेल भी गए थे पर हुवा क्या ?कोई फायदा नहीं ,,पर इनको माइलेज मिलता रहा। इस मामले में भी जेल मजाक का अड्डा बनता रहा ,ऐतिहासिक जेल की गरिमा धूमिल होती रही ,कभी जेल में प्रेस वार्ता ,तो कभी लोगो का काफिला ,कभी सामानो की आवाजाही , कोई नियम नहीं कोई कानून नहीं। क्यूकी जेलर सी पी सुमन जेलर नहीं अर्दली बनकर काम करते रहे। 
 अब सबसे बड़ा सवाल है की यशवंत ने गलत नहीं किया ,ज़ी एम के साथ दुर्व्यवहार नहीं हुवा ,फिर २८ दीनो की न्यायिक हिरासत का दोसी कौन ,,प्रसासन ,,पुलिस ,,,या जनता ??





राज्य का एकलौता पीटीसी बना है भ्रस्टाचार का अड्डा

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न्यूज़ डेस्क । तहलका.इन 

झारखण्ड के इकलौते पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से  ६२  DSP ट्रेनिंग  लेकर १२ जून को निकल गए  ,इनका पासिंग आउट हो गया CM और DGP ने पारण परेड में हिस्सा लिया , पर पीटीसी के पास इसके लिए फंड नहीं था सो कार्यक्रम १५ दिन लेट हुवा  यानि पैसा नहीं है ,गरीब हो गया है पीटीसी। ,,,,,,,, क्युकी सारे DSP बाहर निकलकर कोयला बेचेंगे बेचेंगे ही। अभी से बेचने का गुर सीखने को आतुर है। अच्छे से एग्जाम लिया जायेगा तो ७५% लोग फेल कर जाएंगे। पिछले सेसन में ५७ में ५३ फेल कर गए थे। मुख्यालय से काफी लाताड मिली ,ट्रेनिंग में सुधार तो नहीं हुवा नंबर जरूर आ गया ,,अब कोई फेल नहीं होगा ,,,,ट्रेनर क्या करेगा शिकायत पर कोई अमल नहीं करते DIG ,,एक इंस्ट्रक्टर ने कहा की ट्रेनिंग के दौरान प्रसिच्छु सिक  देते है जबकि यह एकाध बार होना चाहिए पर पूरे ट्रेनिंग में ७०० सिक पड़े है सदर अस्पताल में लिखकर साटा गया था  की आप बिना बीमारी के सिक ना दे  ,मैंने १६५ प्रोसीडिंग बनाकर DIG साहब को दिया पर कोई कार्यवाही नहीं ,दीपक वर्मा ने अपने समय से यहाँ प्रसिच्छुओ को छूट देना सुरु किया है जो प्रसिछंन के लिए काफी शर्मनाक है ,दस परसेंट ग्रेस देकर सबको पास कराया गया परीछा में किताब लेकर लिखने की छूट दी गयी। अब ये बाहर निकालकर क्या करेंगे वह सरकार जानती है 








झारखण्ड का यह पीटीसी पुलिस एकेडेमी बना दिया गया है पर अभी तक इसे एकेडेमी का दर्ज़ा प्राप्त नहीं हो पाया है ,जब एकेडेमी का दर्ज़ा प्राप्त हो जायेगा तो यहाँ के प्रभारी IG स्तर के अधिकारी को बनाया जायेगा। झारखण्ड में पुलिस को उम्दा प्रसिछन की परंपरा ही नहीं रही है ,यहाँ कभी भी अच्छे ट्रेनर को जगह नहीं मिली ,अंग्रेज़ो द्वारा बनायीं गयी इस ट्रेनिंग सेंटर को पूरे भारत में जाना जाता था ,यहाँ की लाइब्रेरी अभी भी सबसे रिच है यहाँ अभी भी कई एंटीक किताबे है पर उन्हें कोई ट्रेनर नहीं पढता है न ही किसी प्रसिच्छु को पढने के लिए कहा जाता है ,परसिछु भी  की यहाँ से निकालकर उन्हें रिस्वत कामना है और यह गुर उन्हें इस चुनिंदा किताबो से  सकता है यहाँ अधिकारिओ से लेकर नेताओ के तलवे सहलाने पड़ते है रिस्वत देने पड़ते है। रिस्वत के दो प्रकार है प्री पेड़ और पोस्ट पेड़। जाहीर है की ईसिस वज़ह से यहाँ नक्सली पुलिस पर भारी पड़ते है नक्सलिओ के बुलंद हौसलों और पुलिस के खोखले दावों के बीच पुलिस ने कई संगठन भी खड़े कर दिए है जो पुलिस को सूचना देने से लेकर रिस्वत का ,,लेवी का हिस्सा भी पहुचाते  है ,यहाँ जो भी ट्रेनर आते है वो पढ़ाने नहीं बल्कि समय काटने  आते है। बच्चो को परिवार को समय देने आते है। अपनी कमाई हुई अकूत संपत्ति को जगह लगाने आते है ,उन्हें पढ़ाने में क्या मन लगेगा ?माईन्स एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट से लेकर बारूद हथियार की जानकारी रखनेवाले सभी अधिकारी निकम्मे है। वे ट्रेनिंग क्या देंगे ?अब ये फेल किये दारोगा DSP क्या उपलब्धी हासिल कर सकेंगे वह पूरा राज्य जनता है। पासिंग आउट में DIG उपेन्द्र सिंह कह रहे थे की यह लड़का एक दीं भी सिक नहीं लिया यह चमचागिरी है जबकि यहाँ के ट्रेनर बताते है की कोई भी ऐसा प्रसिच्छु नहीं जिसने सिक नहीं लिया। फिर सिक दिया क्यों जाता है ?यह यहाँ के प्राचार्य भीनहीं बता पते है ,,यह राज्य सेवा का चौथा बैच है। तीसरे बैच में कुछ ऐसे भी छात्र ए जो DIG  पर भी भरी थे।

  

कोयले की चोरी

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देखिये कैसे होती है कोयले की चोरी और कैसे इसे खदानों से गंतव्य स्थानो पर पहुँचाने   के लिए पारम्परिक तरीके का उपयोग किया जाता है। 

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ज़रा            एक           नज़र        देखो      ना कि
                                                           भोलूवा       की    पाती    मुखमंतरी   के       नाम


आदरनिये मुखमंतरी  महोदय
                                               वालेकुम परनाम। आगे खुसल -मंगल सब अच्छा है लेकिन आपका राज में सब कुछ अछा नहीं चल रहा है। एगो मंत्री सच बोल दिया तो उसको हटा दिए पर ई तो बताइये कि केतना के मुह बंद कीजियेगा ?? एगो पांडे सच बोल दिया तो बली का बकरा बना दिए। बेचारा का गलत बोला था ?? आपका बाबूजी बैठके कोयला का पैसा ले रहे है राजेनर सिंह का बेटा का साथ  ,आखीर आपका बाबूजी ई पइसवा लेके ऊपर जायेंगे का ? कि पैसवे पर सुता के उनको जरायेगा ?? यही अँधाधुंध पैसा का खातीर एगो बेटा  का जान चला गया। एकगो कोयला चोर का पास आपका चाचा का नंबर है। सब सीधे एस पी को बोलता है एस पी तो मानो चपरासी बन गया है ,और IPS लोग भी भडुवन पैसा कमाए खातीर नौकर चपरासी हवलदार दरबान कुछ भी बने वास्ते तईयार है।
   भला बताईये कि आपका राज में डी ज़ी पी अभी तक का सबसे अहमक अधिकारी है ,खाली मुह से ऎ के 47 चलावे वाला ,,आपका राज में अभी तक का सबसे भ्रस्ट चीफ सेक्रेटरी ,,आपका राज में सबसे भ्रस्ट गृह सचिव ,आप बोलते है कि हमरा गठबंधन का सरकार है मज़बूरी है ,सो अपना मन से कुछो नहीं करे पाते है ,,तब आपका खिलाफ दुबे बोला तो उसको हटाने वास्ते ताकत कहा से आ गया ?? इसका मतलब है कि आपका मन खाली चोरी वास्ते करता है इसलिए उसी का नक्से कदम पर चलते है। यही कारन है कि आपका बाप जो दिशोम गुरु का नाम से जाना जाता था आज का डेट में सबसे बड़ा गुस्ख़ोर नेता कहलाने लगा है। यही हाल रहा तो कही चौक चौराहा पर मरे का बाद मूर्ती लगाईयेगा तो आदमी जूता से मारेगा। तनिको लाज़ सरम रखिये साहेब, नहीं तो कल बेटा पोता आंधर लांगड़ निकल जायेगा तब का कीजियेगा ? बाबूजी थोडा बहुत अच्छा करम किये थे तब आपलोग लायक आदमी निकले लेकिन आज तक आप तो कोय अच्छा काम नहीं किये। आपका बाबूजी भर जिंदगी बाहरी भीतरी का लड़ाई लड़ते रहे और मरे के समय में पैसा खातीर आपलोग बाप बेटा दुनो बाहरी लोगो का लिए दरवाज़ा खोल दिए ,कोय मना  करेवाला नहीं रहे तो आपलोग ऑडर पास करवा दीजियेगा कि झारखण्ड में बाल बच्चा भी दूसरा स्टेट का आदमी पैदा करेगा।
   खैर अभी इतना ही
                          आगे आपका
                                                   भोलूवा उर्फ़ भोलानाथ
                                                                                       मासीपीढ़ी
                                                                                                             हज़ारीबाग़ 

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