मुख्य लेख

कुलपति या खलनायक ?

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,

                     कुलपति या  खलनायक ?

      " गुरु  का गुंडाराज ,विनोबा विस्वविद्यालय "

हजारीबाग ब्यूरो तहलका
उत्तरी  छोटानागपूर का विनोबा विस्वविद्यालय संत  विनोबा के  आदर्शो को  आत्मसात करने के  लिए  स्थापित किया  गया  था ,लेकिन यहाँ  की  गुरु शिष्य परंपरा तार  तार हो  चुकी  है ,यहाँ के कुलपति गुरु  की  भूमिका में कम खलनायक की  भूमिका  में  ज्यादा दृष्टीगोचर  हो  रहे  है ,वर्तमान  कुलपति गुरदीप सिंह आईएसएम धनबाद से आये शिछाविद पर्यावरण विद  रहे  है लिहाज़ा अपेछा  थी की वे गुरुकुल को  भारतवर्ष के पहली पंक्ती में  संस्थान को  स्थापित कर  देंगे ,पर  यहाँ पूर्व कुलाधिपति यानी  गवर्नर का  बोर्ड उखाड़ दिया जाता  है आदेश कुलपति ,यहाँ कोकशास्त्र की  परिभाषा अपनी उत्तर पुस्तिका में सचित्र उकेरते  है और  पास  कर  जाते  है ,पास  करनेवाले  शिछक पुरस्कृत होते  है शिकायत करनेवाले दण्डित ,चमचागिरी दलाली चुगलखोर शिछको को  पदारुढ किया  जाता  है इमानदार को तबादला कर सजा  दी जाती  है ,
          लेकिन पिछले 8  सितम्बर 2016 को  सभी पिछली हकीकतो का  ताना  बाना टूट  सा  गया जब  कुलपति  ने  गुरु  का  चोला उतारकर खलनायक की  भूमिका  में  अपने  को  पेश करते छात्रों को जमकर खुद  अपने  हाथो  से पीटा ,जो  छात्र अपने  साथियो के  रोके रिज़ल्ट को प्रकाशित करने  की  जायज़ मांग  के  लिए अनशन  कर  रहे थे ,उनके  साथियो को  गुंडा बताकर पुलिस को  आदेश  दिया की  दो  चार को  गीरा दो  टपका दो ठोंक डालो सालों को ! यह  क्या है  किसी गुरुजन की  भाषा या  खलनायक  की ?

शिछा के सर्वोच्च पदों पर आसीन लोग जब कानून को अपने हाथो में लेने लगे ,गुंडे और अपराधी की तरह हाथ चलाने लगे तो समझे की हमारा समाज हमारा राज्य किस दिशा की ओर जा रहा है, जी हां संत विनोबा के नाम पर स्थापित विस्वविद्यालय ने 8 सितम्बर को सारी हदे पार कर दी ,पहले छात्रों ने फीर प्राध्यापको ने और फीर कुलपति ने ,छात्रों ने अपने प्राध्यापको से कुलपति से बदसलूकी की अपशब्द कहे गालियाँ दी गमले तोड़े सीसे तोड़े बलवा किया और पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोसिस की,और इनसब बातो से गुस्साए कुलपती महोदय और उनके शिछाविदो ने छात्रों की धुनायी अपने हाथो से शुरू कर दी,पत्थर फेकने लगे डंडे चलाने लगे,लात घुसे बरसाने लगे ,क्या यह सही है ?
मामला बीएड के 1100 छात्रों का परिछाफल को लेकर है जोलम्बित है,इसी केप्रकासन को लेकर nsui के छात्र धरने पर थे ,और आमरणअनसन पर बात बनता नहीं देखकर छात्र उग्र हो गए तो विस्वविद्यालय प्रशासन भी उग्र हो गया ,बाद में परिछाफल का प्रकासन का हल भी निकाला गया,लेकिन यह शर्मनाक घटना घटने के बाद,क्या इसका हल पहले नहींनिकाला जासकता था,
क्या कुलपति को हाथ चलाना चाहिए था ?
क्या शिछको को गुन्डावाला आचरण शोभादेता है?
क्या जनप्रतिनिधिओ को आगे नहीं आना चाहिए ?
क्या शिछा मंत्री को संज्ञान नहीं लेना चाहिए ?
छात्र या शिछक मारे जायेंगे तभी मुख्यमंत्री संज्ञान लेंगे?
अब इन्ही सवालो को जन्म देता हुवा वीडियो आपके सामने भारी मन से परोस रहा हूँ
,
मामला बीएड के 1100 छात्रों का परिछाफल को लेकर है जोलम्बित है,इसी केप्रकासन को लेकर nsui के छात्र धरने पर थे ,और आमरणअनसन पर बात बनता नहीं देखकर छात्र उग्र हो गए तो विस्वविद्यालय प्रशासन भी उग्र हो गया ,बाद में परिछाफल का प्रकासन का हल भी निकाला गया,लेकिन यह शर्मनाक घटना घटने के बाद,क्या इसका हल पहले नहींनिकाला जासकता था,क्या कुलपति को हाथ चलाना चाहिए था ?क्या शिछको को गुन्डावाला आचरण शोभादेता है?क्या जनप्रतिनिधिओ को आगे नहीं आना चाहिए ? क्या शिछा मंत्री को संज्ञान नहीं लेना चाहिए ?छात्र या शिछक मारे जायेंगे तभी मुख्यमंत्री संज्ञान लेंगे?अब इन्ही सवालो को जन्म देता हुवा वीडियो आपके सामने प्रस्तुत है !

video
कुलपति गुरदीप सिंह ने अपने द्वारा किये  गए  मार  पीट को  जस्टिफाई करने  के  लिए  यह  कहना  शुरू  कर  दिया  है की जिन  लड़को  की  पिटाई  की  गयी वे स्टूडेंट नहीं  है बल्कि  बाहरी गुंडे  है ,जबकि  सभी लोग  विस्वविद्यालय  के  छात्र है उनके  नामांकन है उनका रिकॉर्ड इन्ही  के  अधीन है ,पिटाई किये  जा रहे  एक  लडके का  नामांकन संत कोलम्बा में  है  जबकि  दूसरा बीएड गौतम बुद्धा का  छात्र है  इसलिए तो   इनके विरुद्ध हजारीबाग थाने में  केस  दर्ज  हो  चूका है ,यह  दूसरा  मामला  है जब  इनके  विरुद्ध केस दर्ज  हुवा है  इससे  पहले  एक  हरिजन  छात्र ने भी इनके विरुद्ध  केस दर्ज  कराया है ,गुरदीप सिंह छात्रो के  साथ क्या सलूक करेंगे  जब ए  पत्रकारों के  साथ बदसलूकी कर चुके  है उनके  साथ  अभद्र  व्यवहार  के  लिए  इन्हें  माफी मांगना  पड़ा  था ,कुलपति ने भी अपने बचाव में केस  किया  है की  लडके छात्रावो  को  छेद  रहे  थे  शराब  के  नशे   में  चूर  थे ,जबकि पत्रकारों  ने  कहा  की जिन्हें  पकड़ा  है  अगर  वे  शराब  पिए  है  तो  उनकी  जांच कराईये  पर  शराब  के  नशे  में  कोई  नहीं  था सो दर  से  कुलपति ने  यह  आदेश  नहीं  दिया वरना इनकी  ही  भद्द  पिट  जाती ,छात्रों  ने  बाद  में  गाना  भी  गया की ,,,,
वीसी  झूठो का  बड़ा  सरदार निकाला 
मुझे  छोड़  चला मुख  मोड़  चला ,,,


लेकिन झारखण्ड में उच्च पदों पर बैठे लोग बेहयाई की दलदल में आकंठ डूबे भ्रस्टाचार की  बदबू  से आम  आदमी का  जीना  मुहाल कर  चुके  है  उनसे न्याय जजमेंट कानून की बात  करना  बेमानी  है ,यहाँ तक  की बड़े मामलो में  संज्ञान नहीं  लेने  से राज्य का राजभवन भी कलंक से अछुता  नहीं  रहा  है ,

थाना मांगे आबरू

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,

                   थाना  मांगे  आबरू

तहलका डेस्क   रांची
मामला बड़ा  है  संगीन है और  समाज के  सामने,  सरकार  के   सामने   सवाल  खड़ा  करनेवाला   है ,
वैसे  तो  थाणे  में किसी  को  बेइज्जत  किया  जाना  नयी  बात  नहीं है पर अभी  जो  मामला  सामने  आया  है  वह  बड़ा संगीन है ,झारखण्ड  का  एक  थाना  है  मांडू ,इस  थाणे  में दामिनी* नामकी   एक  महिला  अपने  पति को  छुडवाने की  दरख्वास्त थानेदार  से  करती  है तो  थानेदार उसे उसके  बदले उसकी  आबरू  रिश्वत   में  मांगता  है ,उसके  हाथ पकड़  लेता है उसे अपने  क्वाटर  में  ले  जाता है ,लेकिन  महिला  भाग  निकलती है ,अभी  उसने अपने पुलिस  कप्तान  से  लेकर DIG मुख्यमंत्री और  महिला आयोग लगा  दिया  है  पर  किसी  ने  संज्ञान  नहीं  लिया  है ,जब इस  बाबत पत्रकार ने थानेदार  से  उनका  पछ जानने के  लिए  ठाणे  गए  तो  थाना  परिसर में  रहकर  भी  थानेदार के  कहलवा   दिया  साहब  अभी  नहीं  मिल  सकते  है ,जब DIG  से  इस  बाबत  जानने की कोसिस   की  तो  उनका  कहना   था  की  जबतक  महिला मेरे  पास   आकार  शिकायत  दर्ज  नहीं  करवाती  है  तबतक  मै   क्या  कह  सकता  हूँ ? जबकि  सुप्रीम कोर्ट  का  गाईड लाईन  है की महिला के  मामले  में रैगिंग   के  मामले  में अखबारों  से न्यूज़  से  जैसे  ही  पता  चलता  हो  उसपर  त्वरीत  करवाई  करें ,लेकिन  यहाँ  झारखण्ड   है  सरकार ,,,यहाँ  भाषण देने  में  सबसे  आगे  राशन देने  में  सबसे  पीछे ,
     यह  वही  थाना  है  जहा बिहार  के  समय  से  ही  बोली  लगती  रही  है इस  ठाणे  के  थानेदार  ने  आई जी ज्योती  सिन्हा जैसे  दबंग पदाधिकारी  का  लिखा  हुवा डायरी को  काट दिया करते है  ,इस  ठाणे   के  थानेदार कैलास जब घर  जा रहे  थे तो  उनकी  गाडी नेशनल पार्क  जंगल  में  पलट गयी  सड़क  के  दोनों  तरफ  नोटों  की  गड्डियां हवा  को  चूमने  लगी पूरे  राज्य  में  बात  फ़ैल  गयी पर  हुवा  कुछ  नहीं ,यहाँ के  थानेदार मुख्यमंत्री को  भी  अपने घर  के  फंक्सन  में  बुलाने  की  हैसियत  रखते  है ,यहाँ  के  थानेदार पुलिस  कप्तान को  बदलवाने  की  हैसियत  रखते  है  क्युकी  उनकी  पोस्टिंग  बिहार  के  समय  से ही  मुख्यमंत्री   दरबार  से   तय  होता  है ,
लिहाज़ा दामिनी  की जायज़ दरख्वास्त  भी  कूड़ेदान  की  शोभा  बनी  हुई  है ,थक हारकर  उसने CJM की  कोर्ट  में   केस  भी  दायर  किया  है ,इसके  बाद से  उसके  पति  पर  गुंडा  गिरोह  से  आये  लोग  केस  हटाने  का  दबाव  भी  डाल रहे  है ,भला  बताईये  की  गुंडे का  सहयोग  लेता  है  झारखण्ड  का  थानेदार ,क्या  दामिनी  को उसकी मांग  के  अनुरूप न्याय  मिल  सकेगा ? या फीर  कोई  दामिनी इस  थाणे  में आबरू की  भीख  मांगेगी ?  या  उसके  परिवार  को  गुंडे अपनी  जड़  में  ले  लेंगे ? इतने  बड़े  मामले  पर  ख़ामोशी  का  राज  क्या  है  ?
       दामिनी  की  अपने  पति  से  झगडा  हो गया  था  और  वह  ठाणे पहुचकर   थानेदार  से  अपने  पति  पर दबाव  बनाने  का  दरख्वास्त  करती  है ताकि उसकी   आगे  की  जिन्दगी  में  झगड़े  नहीं हो ,थानेदार दामिनी  के  रूप  लावण्य  में  फसकर  उसके  पति  को  पकड़  लेता  है ,पर  उसे   समझाने  की  जगह हाजत  में  डालकर महिला  से  जबरन एक केस   बनवा  लेता  है और  फीर  उसे   छोड़ने  के  एवज़  में  दामिनी  को  अपने क्वाटर  में  बुलाता   है  उसे  हाथ  पकड़कर बैठाता  है और उसकी   आबरू  का  सौदा  करना   चाहता  है ,लेकिन  दामिनी  वहा  से  भाग  निकलती  है  इससे  गुस्साया  थान  प्रभारी लिलेस्वर महतो  उसे जेल   भेज  देता  है ,पूरे   प्रकरण  में थानेदार  से  ज्यादा  उसका  मुंशी सुधीर   दोषी  माना  जा   रहा  है जो  थाणे  का  मास्टर  माईंड  है ,सुधीर ने  एक  केस दामिनी  के  पति पर  ठाणे  में  मुंशी के  साथ मार  पीट  करने और  सरकारी  काम  में  बाधा पहुचाने का  किया  है ,क्या संभव  है  की  कोई  अकेला  आदमी  ठाणे  में थानाकर्मी  के साथ  मार पिट  करे  और  वह  सही  सलामत भी  रह  जाये ?अभी  तबादला  हो  जाने  के  बाद  भी  यहीं  जमा  रहता  है  थाणे  की  दलाली  करता  है  थानेदार का दुलरुवा  है ,

* दामिनी =महिला  का  बदला  हुवा  नाम .

मोदी जी ,रघुबर दास ,अमित शाह सभी डरते है यशवंत से

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , , ,

अपराधी के  नेतृत्व  में आन्दोलन की राह  पर यशवंत                                     सिन्हा 
         मोदी जी ,रघुबर दास ,अमित शाह  सभी डरते  है  यशवंत  से 
नलिन शर्मा
तहलका डेस्क दिल्ली
पूर्व वित्त विदेश मंत्री ,भाजपा  के  वरिष्ठ नेता  यशवंत  सिन्हा अब अपराधियो के  नेतृत्व  में झारखण्ड की  धरती पर  आन्दोलन  करने  का  मन बना चुके है ,उनके साथ हजारीबाग में  बहजापा  विधायको की एक टोली भी है जो अपराधियो के संपर्क में रहती है ,नामज़द अपराधी हिस्ट्रीशीटर और रंगदारी वसुलानेवाले  लोगो  को  न  सिर्फ यशवंत  सिन्हा  बल्कि इनके  पुत्र वर्तमान भारत सरकार   के  मंत्री जयंत  सिन्हा  भी पसंद  करते है इन्हें बुलाते है साथ में बैठकर विकास की रूपरेखा भी तैयार करते है ,

झारखण्ड  के  हजारीबाग  में  बड़का गाव  में NTPC का कोल माईन्स बन रहा है यहाँ के रैयत खनन के लिए अपनी ज़मीन देने पर राज़ी नहीं है ,लेकिन सरकार इनकी ज़मीन डरा धमकाकर ले रहे है यशवंत सिन्हा कंपनी के मुलाज़िलो और फैसले के साथ है ,लेकिन जब यह बात जनता के बिच गयी तो जनता भाजपा के विरुद्ध गोलबंद होने लगी ,यशवंत अपने बेटे की राजनितिक ज़मीन  खिसकता देख आन्दोलन की राह पर चलकर एक दिखावा करने की राह पर  चल पड़े लेकिन वहां उनका कोई विरोध  नहीं  करे इसके लिए वहां के डॉन जिसका नाम झारखण्ड में रंगदारी के लिए मशहूर है को साथ लेना उचीत समझा और उसके नेतृत्व में गाव में सभाएँ कर डाली ,क्युकी यहाँ काम करनेवाली कंपनी से लेकर ठेकेदार रंगदार आउट सोर्सिंग कंपनी सभी लोग इनके ही अपने लोग है यहाँ की स्थिती  को लेकर इन्होने कई जांच कमिटियाँ भी गठीत की जिनका रिपोर्ट भी कंपनी के विरुद्ध आया पर इन्होने कभी भी कोई फैसला नहीं लिया जिससे जनता के बिच यह सन्देश जाए की कुछ अच्छा हो रहा है ,वैसे यशवंत सिन्हा की राजनैतिक पृष्ठभूमि शुरू से ऐसी रही है की उन्होंने अपने हिसाब से काम किया है जिससे राज्य की भाजपा को उसके संगठन को काफी नुकसान हुवा है पर इससे इनका कोई लेना देना नहीं रहा है ,

इनको केन्द्रीय नेतृत्व ने काफी हद तक ठुकरा दिया है पर इनके अपने छेत्र के मामले में इनके फैसले के विरूद्ध अभी तक किसी ने कदम उठाने की साहस नहीं की है ,यहाँ तक की इन्होने भाजपा के कार्यालय को अपने नाम से लिखवा लिया फिर भी किसी ने चूं करने की हिमाकत नहीं की ,इसीलिए जो इनके नजदीकी रहे उन्हें राज्य या केन्द्रीय नेतृत्व का विरोधी समझा जाने लगा और वे कोपभाजन के शिकार हुवे ,पिछले चुनाव में भी इन्होने कोयला माफिया ,ज़मीन की हेरफेर करनेवाले ,गलत कार्यो के सरगना इनके लिए पार्टियाँ करते रहे मदद करते रहे और इन्होने उनका सानिध्य उनका वर्चस्व स्वीकार किया ,लिहाज़ा अभी इनके बेटे को मंत्री बनते ही सारे क़र्ज़ वसूल करने की मंशा सामने आने लगी इसी गलत कार्यो की फेहरिस्त में इनके बेटे का नाम जुड़ने से उनकी बड़ी कुर्सी खिसक गयी और एक तरह से बेंच पर बिठा दिया गया है ,

अब बड़का गाव में यशवंत लाकहंन  साव की अगुवाई में आन्दोलन का डंका फूंक चुके है जिन्हें अपराध जगत का सरगना माना जाता है ,  लेकिन इन्हें माननीय समाजसेवी बताया गया है ,

मंत्री के पिताजी ने ख़रीदा भाजपा कार्यालय ,मामला भारत सरकार के मंत्री का

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , , , , ,

       मंत्री के पिताजी ने ख़रीदा भाजपा कार्यालय 
        भाजपा सरकार की उपलब्धि झारखण्ड में 
उमेश ओझा
तहलका डेस्क रांची 
पार्टी विद  डिफ़रेंस यानि  भाजपा की रंगत अब बाज़ार में दिखने लगी है की यह पार्टी अन्य पार्टियो से अलग कैसे है , झारखण्ड के हजारीबाग में भाजापा का जिला कार्यालय जो अटल भवन या अटल सेवा केंद्र के नाम से जाना जाता है उसे जयन्त सिन्हा  यानि भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री ने अपने पिताजी  यशवंत सिन्हा  के नाम से रजिस्ट्री करवा लिया ,यह कार्यालय भाजपा कार्यकर्ताओ के सदस्यता शुल्क और चंदे के पैसे से बना है ,इसकी ज़मीन भी इसी तरह 18 मंडलों के पैसे से खरीदा गया ,तत्कालीन जिला अध्यछ भैया बांके बिहारी के नाम से जो यशवंत सिन्हा  के रिश्तेदार कहे जाते है इसलिए इसे अपने नाम गुपचुप तरीके से रजिस्ट्री करवाने में कोई मस्स्कत नहीं करनी पडी ,अब एक माह बाद जब भाजपयियो को पता चला तो उन्होंने प्रधानमंत्री मोदीजी के नाम एक आवेदन दिया है वह भी रजिस्टर्ड डाक से इसके साथ केन्द्रीय अध्यछ अमित शाह को भी पत्र भेजा है ,अब देखना है की यशवंत सिन्हा जयन्त सिन्हा के विरुद्ध बोलने लिखने में जैसे झारखण्ड में भाजपाई डरते है वैसे ही केंद्र डरता है या कोई हल निकाल पाता  है ,क्युकी इस कार्यालय को अवैध ढंग से बेचे जाने के पूर्व भी एक सक्रीय कार्यकर्त्ता पूर्व महामंत्री ने भाजपा के प्रदेश अध्यछ को पत्र  लिखा था की कोई हल् निकालने को,  पर हल निकलना तो दूर की बात उन्होंने इन दबंग पिता पुत्रो से पूछने की हिम्मत भी नही जूटा  पाए , पद और पैसे के साथ पदवी का गुरुर और ताकत देखिये की जहा झारखण्ड में खास महाल की ज़मीनों के हजारो आदेश चार पांच छह साल से आदेश की राह देखते धुल फांक रहे है वही यशवंत सिन्हा  के लिए भाजपा कार्यालय खरीदने के आदेश महज छह दिनों में आ गए यानी आम और खास के कार्यो में अंतर था है और रहेगा ,यह मामूली बात नहीं है,मंत्री और उनके पिताजी अपने लिए मंत्री बने या जनता के लिए यह जांच का विषय है , हजारीबाग निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री करने के लिए खतियान खेवट के साथ 12 तरह के कागजात मांगे जाते है उसके बिना रजिस्ट्री संभव नहीं है पर यहाँ साहब के लिए सारे दरवाज़े खिडकियों के साथ खोल दिए गए ,बिना खतियान खेवट के रजिस्ट्री हो गयी नामान्तरण हो गया अब कार्यालय पर कब्ज़ा  तो है ही उसे किराये पर लगाने की मंशा भी सामने आ जाएगी .NTPC किराये पर इसे लेने के लिए तईयार बैठा है ,यही कारन है की हजारीबाग में भूदान आन्दोलन में भारत भर में सबसे ज्यादा ज़मीने विनोबा भावे को मिली थी आज उनकी कीमत आज करोडो में है उसकी अवैध ढंग से प्लाटिंग बिक्री और नामान्तरण की जा रही है पर इसे रोकने की जगह इसको बढ़ावा मिल रहा है क्युकी मंत्री से लेकर सारे अधिकारी ऐसे ही भूमि मफियावो के साथ है ,जो मंत्री खुद गलत करेगा वह आम आदमी के साथ हो रहे अन्याय को कैसे रोक सकता है ,तीन दीन पहले अखबारों की सुर्खियाँ थी की जयंत सिन्हा  ने अपने पिता के NGO जोहार को नियमो के विपरीत बैंको से 47 लाख दिलवा दिए ,उससे पहले इनके परिवार का नाम गरीबी रेखा की शुची में शुमार हो गया ,शायद विकाश की अवधारना यही है इसलिए तो मोदीजी ने उत्तर प्रदेश में भाषण के दौरान कहा की विकाश देखना है तो झारखण्ड जाईये ,और अब यह रजिस्ट्री का राज खुला है , आपके सामने प्रमाणिक  दस्तावेज़ प्रस्तुत है  ,आंकलन कीजिये की विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का हाल यह है और इतने बड़े भ्रस्टाचार पर सबकी जुबां खामोस है जो अपने घर के भ्रस्टाचार से निपटने में अछम है वह  देश से भ्रस्टाचार मिटने का संकल्प ले रहा है ,संपत्ति का दाम लगा है 93 लाख भवन ज़मीन ,पर यह रुपया क्या बेचनेवाले के खाते में ज़मा हुवा या फिर वही बंदरबाट का खेल ??





 मनोज गुप्ता  समाजसेवी सह RTI कार्यकर्त्ता  हजारीबाग ने कहा  पूरे जिले में फाईले पडी है उसे देखनेवाला कोई नहीं पर मंत्री  के पिताजी का अवैध ढंग से रजिस्ट्री क्यों किया गया ? क्युकी ए लोग ही राज्य में भूमि के अवैध कारोबार में शामिल है ,इनके इशारे पर ही जमीन का सारा अवैध काम होता है 

आदित्य जी  प्रचार प्रमुख भाजपा हजारीबाग के अनुसार  चंदे के पैसे से बना यह अटल भवन यानि जिला कार्यालय गलत तरीके से रजिस्ट्री किया गया यशवंत जी इसे भाजपा  के नाम से जल्द नामंत्रीत करे ,मैंने उस समय ही प्रश्न उठाया था की भाजपा का कार्यालय भाजपा के नाम से जाना जाये पर इनलोगों ने अटल भवन बनाकर उस समय ही अवैध करने की जगह छोड़ रखी थी ,




मंत्री के साथ साजिश ,या साजिश कर रहे है मंत्री ?

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , , ,

मंत्री के साथ साजिश ,या साजिश कर रहे है मंत्री ?
            मंत्री के साख पर सवाल 
संजीव शुक्ल दिल्ली डेस्क

भारत सरकार के  वित्त राज्य मंत्री जयन्त सिन्हा और उनके पिताश्री यशवंत सिन्हा किसी बड़े साजिश के शिकार हो रहे  है या फिर नाटक कर साजिश के जरिये जनता को गुमराह रहे है ,सवाल  बड़ा है और जनता को जवाब चाहिए ,
यशवंत सिन्हा जयन्त सिन्हा का ही नाम गरीबी रेखा की शुचि में शुमार क्यों और कैसे हो जाता है ? यही परिवार अपने घर के बाहर सरकारी हैंड पम्प लगाते है और उसे खराब करवा देते है ,उसे बनाने वाले को डाटकर भगा देते है , की गन्दा होता है ,फिर उसी बोरिंग से अवैध रूप से मोटर लगाकर अंदर पानी लेते है ,जबकि ऐसा करनेवालों के विरुद्ध केस करने का प्रावधान है ,कई केस हुवे  भी है पर यहाँ कौन केस करेगा ? सनद रहे की इस मोहल्ले में पानी की भारी किल्लत है और जयंत सिन्हा को दिल्ली से कई दीनो तक जिला प्रशासन को निर्देश देकर टैंकर से पानी भेजना पड़ा था ,क्युकी पानी के बिना लोग त्राहिमाम करते हुवे जयंत सिन्हा के गेट पर हंगामा खड़ा कर दिया था ,बावजूद इसके हैंडपम्प नहीं बनाया गया ,क्यों ?


जयंत सिन्हा ने मंत्री बनते के साथ एक साल के अंदर भाजपा कार्यालय अटल भवन को अपने पिता के नाम रजिस्ट्री करवा दिया,ख़ास महल की यह ज़मीन भाजपा जिलाध्यछ के नाम से जमाबंदी किया गया था ,आम लोगो के ख़ास महाल की ज़मीन नामांतरण नहीं हो रही है ,इसपर मंत्री जी का ध्यान नहीं है अपनी ज़मीन को ९ डीनो में ही मुख्यमंत्री से आदेश करवाकर नामांतरण करावा लिया ,इसे NTPC  को भाड़े पर लगने की कवायद की जा रही है ,जबकि विस्व की सबसे बड़ी पार्टी का हजारीबाग के प्रमंडलीय मुख्यालय में कार्यालय नहीं है ,यहाँ के विधायक को अपने घर में कार्यालय खोलना पड़ा है ,जबकि इसी शहर में  कांग्रेस पार्टी का कार्यालय कृष्ण वल्लभ आश्रम के नाम से रजिस्टर्ड  है वह भी ख़ास महाल की ही ज़मींन है ,  सब्ज़ी खरीदते है चौपारण में और यहाँ दिल्ली में बताते है की दिल्ली में सब्ज़ी का भाव देख रहे है अखबारों की सुर्खियां बंनती  है

 ,हजारीबाग में भूदान की ज़मीन  भूमि माफियाओं ने लूट मचा रखी है ,पर इसपर इन पिता पुत्रों का ध्यान नहीं है ,यशवंत सिन्हा ने सिर्फ एक प्लाट की जांच सीबीआई से करने के लिए मुख्य्मंत्री को चिट्ठी लिखी ,जबकि यहाँ सरकारी ज़मीन भूदान गैर मजरुआ ज़मीन जंगल की ज़मीन गोचर और हरिजनों की लाखो एकड़ ज़मीन अवैध तरीके से नामांतरण करावा लिया गया है जिसकी जांच भी दूसरे फोरम से चल रही है पर पहले इन्हे बचने की  कवायद यशवंत सिन्हा जी के तरफ से चलती थी अब इन भुमाफियाओ की पैरवी जयंत सिन्हा जी के द्वारा करने का आरोप है ,क्युकी इतने बड़े मामले पर स्थानीय पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर भी ना तो  कोई जवाब दिया जाता है और ना ही इसपर कोई करवाई की अनुशंषा की जाती है

,हजारीबाग और रामगढ में कोयला तस्करी बड़ी समस्या है ,अरबो के इस तस्करी में लगभग नेताओं के दामन पर दाग लगे है ,जयंत सिन्हा जैसे हावर्ड के प्रोडक्ट भी इस दाग से बाहर नहीं रह सके ,चुनाव जितने से पहले ही कोयला तस्करों ने मीटिंग कर इन्हे बुलाया और मदद करने के अस्वासन के साथ आर्थिक मदद  भी की इसलिए इनके खिलाफ मंत्री एक लब्ज़ भी सुनने को तैयार नहीं , जयंत सिन्हा जी ने अपने पिताश्री की विरासत सम्हालने की गरज से हजारीबाग की नागरिकता तो ग्रहण कर  ली पर इनकी पत्नी पुनीता कुमार अभी भी यहाँ की नागरिकता से परहेज़ कर रही है ,और वित्त मंत्री वित्त राज्य मंत्री जिस स्कुल में मतदान करने जाते है उस स्कुल की हालत ज़र्जर है ,यहाँ बिजली नहीं कम्पुटर सिछा नहीं चाहर दिवारी नहीं शौचालय में छत  नहीं,पूरी दुनिया को विकास का ईन दिखानेवाले का घर इस तरह बेतरतीब होगा कौन कह सकता है ,पर हकीकत यही है इसमें फ़साना यह है की सभी बातो को एक साथ नकार देते है की साजिस हो रही है ,हां साजिस तो हो रही है पर सजिसकर्ता कौन है ? यह अनुसंधान का विषय ज़रूर है ,
मंत्री जी ने अस्पताल के दलाल को मीडिया प्रभारी बना रखा है ,मंत्री होकर नकली नोट एक दूकानदार को दे दिया वह भी एक नही हज़ार के तीन तीन नोट ,राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र सिंह कहते है की हमारे कार्यकाल में ही हजारीबाग में मेडिकल कालेज -अस्पताल पास कर दिया गया ,फंड भी रिलीज हो गया अब इसका श्रेय जयंत सिन्हा लेने की फ़िराक में है ,हेमंत सोरेन ने एक बार चुटकी लेते हुवे कह दिया की अपने इलाके के पञ्च पंचायतो के नाम भी नहीं बता सकते ,यह सूचना जैसे ही जयंत सिन्हा को मिली भीड़ भरे भासन में कह दिया पांच क्या इस छेत्र के पञ्च हज़ार पंचायत मेरी मुट्ठी में रहता है (मोबाईल दिखाते ) ज़बकी हजारीबाग क्या पूरे झारखण्ड में पांच हज़ार पंचायत नहीं है ,एक फूटबाल प्रतियोगीता करायी ,बैंको से पैसा लिया और प्रायोजक में अपना नाम डाल दिया ,कोई कंट्रोवर्सी ना हो इसलिए फूटबाल संघ को ही खेल से बाहर कर दिया ,अपने कार्यालय में जेल जा चुके आदमी को मैनेजर बना दिया है और अब उसे 15 सूत्री का सदस्य भी बना दिया ,ज़बकी अच्छे अच्छे भाजपाई हासिये पर है ,आम आदमी के काम का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है की किसी आदमी का PNR नम्बर भी कन्फर्म नहीं करा सकते है ,कई पत्रकार भी इस दोष का शिकार हो चुके है ,

भाजपा की ठेकेदारी में कराहता विस्थापन का दर्द

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , , , ,

भाजपा की  ठेकेदारी  में कराहता विस्थापन  का  दर्द 
बड़कागाव  में एन टी पी सी  का कोल  माईनिंग प्रोजेक्ट  पर नेताओ की                                          काली   साया 
तहलका डेस्क
उमेश ओझा
झारखण्ड  में हजारीबाग भाजपा  का हाई प्रोफाईल छेत्र है इसलिए राज्य  या केंद्र के बड़े नेता भी यहाँ की राजनीती या  कूटनिति में अपनी भागीदारी  नहीं निभाते है ,लिहाज़ा यहाँ का मामला यहाँ के आका के  भरोसे चलता  है ,और इसी परंपरा में  आज १५ सालों से  कंपनी जिस आस में यहाँ  प्रोजेक्ट लगाने की  सोच रहा  है  उसपर तुषारापात होता  रहा है ,मिसनरी और  भाजपा  ने अलग  अलग बड़का गाव में  अपने अपने स्वार्थ के लिए किसानो ग्रामीणों रैयतो के हितो का  एक तरह  से बलात्कार किया  है ,बाकी बचे खुचे मामले को कांग्रेस के स्थानीय नेता ने अपने स्वार्थ के लिए बिगाड़ा ,पर पूरा मामला यह है की यहाँ NTPC के दो दो खनन परियोजनाए लगनी है ,दोनों में भाजपा और कांग्रेस दोनों का क्लेश  ग्रामीणों  से उनका हक़ हुकुक  छीन   रहा है ,भाजपा के बड़े नेता  और दलाल यहाँ हावी होकर स्थानीय लोगो का हक  छीन रहे है ,इसमें सांसद विधायक और  भाजपा के  बड़े  फायिनांसर का  हाथ  है ,भाजपा  नेताओ  ने  अब  हत्यारों  शूटरो मफियावो को  आगे  बढाकर माईनिंग प्रोजेक्ट पर  हावी  होने  की  पृष्ठभूमि  तईयार  की  है ,NTPC के  जितने  भी  काम चल  रहे  है चाहे वह RNR  कोलोनी हो या  डंप  यार्ड  हो  या  गोदाम हो  या  खनन  हो  सभी में   भाजपा के नेताओ  की  बड़ी भागीदारी  है ,यह बाते राजद  के  प्रदेश अध्यछ गौतम  राणा ने भी  स्वीकार  की  है ,स्थानीय  नेता और  बुजुर्ग  लोग  स्थानीयता   के दर्द  को आगे  बढ़ाते  हुवे  जल  सत्याग्रह  से  स्टार्ट कर  चिता सत्याग्रह पर पहुचे  है ,
 विस्थापन के सालते दर्द को  ग्रामीण न  बता  पा रहे है  ना छुपा पा रहे  है और नेताओ की  अपनी स्वार्थ लोलुपता  में महिला पुरुष बच्चे  बूढ़े और गर्भवती महिलाये लाठियो से पिटे  जा रहे  है जुल्म वो सितम के  शिकार  हो  रहे  है ,उनके  गहर में  कोई कोई  भाजपाई या  कांग्रेसी या  राजद  की  आंखे झाँकने को  तईयार  नही और  कार्पोरेट दलाल खुल्ला  खेल  फरुखाबादी खेलने को  बिसात बीचा  चुके  है ,ग्रामीण मोहरे इधर  से उधर किये  जा रहे  है ,
हजारीबाग से पत्रकार टी सिंह ने  भी इस  मामले पर  अपना आलेख लिखकर कुछ खुलासा किया  है
बड़कागाव का विस्थापन और आन्दोलन का दर्द
*************************************************
NTPC ने बड़कागाव में जबसे बड़कागाव में कोल माईनिंग प्रोजेक्ट लगाने की प्रक्रिया आरम्भ की है तबसे आजतक आन्दोलन होते रहेहै ,कार्य रुकता चालू होता बिकता और फीर यक्च्छ प्रश्न बनकर सामने खड़ा हो जाता रहा है,कई नेताओ ने कई पार्टियो ने कई जातियो ने कई वर्गों ने कई धर्मो ने आन्दोलन की बागडोर सम्हाली उसे आगे बढाया ,किसी ने अपनी डफली बजायी किसी ने अपना राग गाया किसी ने खरीदा किसी ने बेचा और फीर रैयतो को वही छोड़ दिया उनके भाग्य के भरोसे,दूर से तमाशा देखनेवाले रैयतो के आन्दोलन को ड्रामा कहते है नेता मज़ाक करते है दुनिया हसती है विस्थापीत रोते है ,पर किसी ने भी विस्थापन के दर्द को आत्मसात करने उसे इमानदारी सेसुलझाने का प्रयास नहीं किया ,कहने को तो यहाँ राज्य नही दुनिया के बड़े नेता मौजूद है उनकी उपस्थितीहै पर इस मामले में इमानदारी से किसी ने प्रयास करने की जुर्रत नहीं की ,NTPC ने भी कभी इमानदारी से पारदर्शी योजना नहीं बनायीं ग्रामीणों को ठगने बरगलाने तोड़ने लड़ाने में लाखो नहीं करोडो खर्च किये पर वास्तव में जो रैयत है उनतक लाभ पहुचाने का मात्र १० प्रतिसत प्रयास किया,
इस आन्दोलन को सबसे पहले मिसनरी ने हँडल किया अपने तरीके से चलाया मार पीट करवाया अधिकारिओ पुलिस पत्रकार नेता को पिटवाया और आन्दोलन को आम आदमी के चिंतन से बहुत दूर कर दिया ,दुसरे इनके साथ मिथिलेश और दिनेश नामक स्थानीय नेताओ ने जाती पाती का भेद भाव करवा दिया ,यह इस आन्दोलन की सबसे बड़ी तकनिकी खामी रही,
इसके बाद आन्दोलन की कमान भाजपा के कुछ बड़े पार्टी के नेताओ ने सम्हालने की जुगत में अपने को कम्पनी का सिपहसालार बना लिया और कंपनी के साथ मिलकर दलाली ठेकेदारी और बिचौलिया गिरी कर ग्रामीणों को तोड़ने लगे ,यहाँ से आन्दोलन की दूसरी गिरावट शुरू हुई,
इसके बाद आन्दोलन को स्थानीय कांग्रेसी नेता और अपने को इसी धरती का लाल बतानेवाले योगेन्द्र साव ने सम्हाला , योगेन्द्र साव ने अपनी राजनीती कूटनीति भ्रष्टनिति के ज़रिये आन्दोलन को हर तरह से खंडीत कर रख दिया ,तोड़ जोड़ की विडंबना में जोड़ने की जगह लोगो को अलग अलग खेमे में जुड़ने को विवस कर दिया ,आज इसी आन्दोलन की वज़ह से उनपर ही नहीं उनकेपुत्र विधायक पत्नी पर भी केस दर्ज है ,क्युकी सारी दुनिया से उनकी रुसवाई हो चुकी है,योगेन्द्र को लोगो ने चोर दलाल कमिसंखोर ,झूठा बताया,लेकिन चाहे जो भी हो योगेन्द्र साव कितना भी गलत किया हो अपने हिसाब से लोगो को बेचा खरीदा हो पर आज की तारीख में अगर ज़मीन की कीमत २० लाख है तो वह योगेन्द्र की वज़ह से वरना कंपनी छह लाख से ज्यादा देने नहीं जा रही थी , और छः लाख से बीस लाख में बड़ा फासला होता है,नहीं तो हजारीबाग में ही बांका में रैयती ज़मीन कीकीमत एक लाख रु एकड़ लगायी गयी है जो वर्तमान में पेमेंट मोड़ पर आया है ,

जाने अपना राशिफल