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रेलवे की दलाली से कराहते ग्रामीण

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                रेलवे की दलाली से कराहते ग्रामीण 
तहलका डेस्क
चौकिये नहीं पर बात सच है ,हज़ारीबाग़ के बांका गाव में शिवपुर -टोरी रेलवे लाईन के लिए ज़मीन २००३ -०४ में  अधिग्रहीत की गयी थी। लेकिन वन विभाग से NOC नहीं मिलने के कारन लाईन रद्द हो गयी ,अब NTPC यहाँ डम्पिंग यार्ड और रैक लोडिंग पॉइंट बना रहा है। रेलवे को इससे भारी मुनाफा होगा सो रेलवे ने यह ज़मीन NTPC को बेच दी। नियमतः यह ज़मीन सरकार को या रईयतो को वापस होनी चाहिए अधिग्रहण के सरकारी प्रावधानों के तहत ५ साल तक अगर कोई काम नहीं होता है तो ज़मीन वापस होना चाहिए यहाँ तो बारह साल बीत गए ,इसी नियम के तहत कोल ब्लॉक वापस किये गए ,एक तो टाइम बार्ड दूसरे कम रेट। यहाँ दोनों बाते प्रभावी है। ज़मीन का रेट मात्र ४८०० रु प्रति कट्ठा /चार डिस्मिल के लिए दी गयी। क्या यह रेट जायज़ है ? यहाँ के किसान काफी मेहनती है ,उनकी ज़मीन छीन गयी तो सलगावां ,कदमा ,छड़वा डैम गोंडा डैम के पास किराये पर ज़मीन लेकर खेती कर हरियाली पैदा कर दिखाया है। ऐसे किसान की ज़मीन मात्र ४८०० रु कट्ठा यानि एक लाख बीस हज़ार रु प्रति एकड़। उसमे भी अभी तक १०६ किसानो को मुआवज़ा मिला भी नहीं है ,अभी फरवरी माह में भू अर्जन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक १८८ /१५ के ज़रिये इनको मुआवज़ा भुगतान करने के लिए रैयती ज़मीनो के लिस्ट जारी किये है ,जिसमे किसी भी किसान का नाम दर्ज़ अंकित नहीं है क्यों ?जब ज़मीन रैयती है तो रईयत कहा गए कहते है हमारे पास भू अभिलेख नहीं है ,तो ये किसके पास होंगे ,,,,मोदी जी के पास ?और अब इन किसानो को २०१५ में १८.८७ एकड़ ज़मीन का मुआवज़ा ४८०० प्रति कठा लेने का दबाव बनाया जा रहा है वह भी तब जब माननीय उच्च न्यायलय ने संज्ञान लिया नहीं तो पुलिस के लाठी के बल पर कब्ज़ा करने की कवायद जारी है। बाकि के २० एकड़ गैरमजरूआ खास जिसपर १९१७ से खेती कर रहे किसान बेदखल कर दिए गए ,उन्हें कहा गया सरकारी ज़मीन है मुआवज़ा नहीं मिलेगा ,जिसपर ९ कुवा तिस सालो से सिचाई के काम आ रहा था। और इस ज़मीन को NTPC को कमाने के लिए दे दिया गया जो वर्षो काबिज़ है उनको बाबा जी का ढुल्लू ,उन्हें क्यों नहीं हकीयत और मालिक समझा जा रहा है ? जबकि इसी गाव में ग्रामीणो को डराकर धमकाकर बगल के अस्सी एकड़ ज़मीन शहर के भू माफियाओ ने यह कहकर ओने पौने दाम में खरीद लिया की सरकार तो पैसा देगी नहीं हम जो देते है रख लो। ताकि इसपर बाद में बड़ा व्यवसाय स्थापित किया जा सके ,अगर सरकार ,NTPC या कोई भी इन भू माफियाओ से ज़मीन लेती है तो उनको अच्छा मुआवज़ा भी मिलेगा क्युकी सारा कुछ उन्हीका किया धरा है ,गाव में दो गुट बनवा दिया है ,NTPC DGM की पिटाई में भी इन्ही दलालो की भूमिका अग्रणी है। अब रेलवे और NTPC दोनों उच्च न्यायलय में हलफनामा दायर करने जा रहे है की काम रेलवे का है मेरा नहीं ,लेकिन काम रेलवे का है तो इसका टेंडर कब और किसके आदेश से निकला ,और सरकार तथा रेलवे का कितना पैसा कब  आया ? क्युकी यहाँ के काम में ६६% हिस्सा राज्य सरकार को ३३% रेलवे को देना है इस बात पर भू अर्जन पदाधिकारी बंका राम चुप्पी साध गए। NTPC के ज़ी एम RS राठी  फोन नहीं उठा रहे है। 



भोलुआ की पाती ,,,,,,,,,,,,मुखमंतरी का नाम

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जरा ,,,,,,,,,,,,,,,एक ,,,,,,,,,, नज़र,,,,,,,,,,,,,,, देखो,,,,,,,,,,,, ना

             भोलुआ की पाती ,,,,,,,,,,,,मुखमंतरी का नाम
आदरनिये रघुबर जी ,
                              वालेकुम परनाम।  आपको दास नहीं लिखे काहे की अब आप दास नहीं रहे मालिक हो गए है ,राज का मालिक ,,जनता का मालिक ,,सरकार का मालिक  इसी वास्ते खाली रघुबर जी लिखे बुरा नहीं मानना है। अबरी चिट्ठी लिखने का खास कारन है की आप रोज रोज बोल रहे है की ५० हज़ार मास्टर का बहाली करेंगे ,,,अरे भाई ई मास्टरवान का बहाली कहे वास्ते कर रहे है ,इससे कोई फायदा नहीं है। ईगो सीधा हिसाब है की पचास हज़ार मास्टर का हर महीना वेतन बनेगा एक अरब पचास करोड़ रूपया। इससे बढ़िया है की आपलोग ५० हज़ार लडकन जे पढ़ाय करनेवाला है उसको दे दीजिये पांच हज़ार रु महीना खरच आवेगा केवल पच्चीस करोड़ रूपया। अगर जादा चाहते है तो एक लाख बच्चा को दीजिये पचास करोड़ खरच आवेगा ,साथ में बच्चा अच्छा इसकूल में पहड़ सकेगा ,और रोज रोज हड़ताल, धमकी वेतन बढ़ाओ का हंगामा भी नहीं होगा। सरकारी स्कुल में कौन अपना बच्चा को पढ़ाना चाहता है ?? ज़रा ईगो सवाल तो जनता को पूछिये ,,अगर नहीं तब ई बहाली केकरा वास्ते कर रहे है ,,इतना मास्टर का वेतन में आप पांच लाख बच्चा को हर महीना ५ हज़ार रु वज़ीफ़ा दे  है ,,पांच लाख परिवार हर साल आपके सरकार का वफादार होगा ,,इसलिए रघुबर बाबू ज़रा ध्यान दीजिये ,,इस मास्टरवान का चक्कर में मत पढ़िए ईसब सरकार का एसेट्स नहीं लेब्लिटी है। इसलिए प्लान कैंसल कीजिये मास्टर लोग सबसे खराब जीव जंतु हो गिया है। कोई अब इस लोग अपना बेटी का शादी भी नहीं करना चाहता है। काहे की इसमें सबसे बड़ा बाधा है रिजर्वेसन और उसको आप ख़तम नहीं कर सकते है लेकिन इवाला नया फार्मूला जे हम दिए है उसमे सब लोग चारो खाना चित्त हो जायेगा।
खैर आगे फिर कभी 
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आपका भोलुआ उर्फ़ भोलानाथ 
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,माँसीपीढ़ी ,हज़ारीबाग़ ८२५३०१ 

झारखण्ड में थाना बनाने में लूट का व्यापार

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    झारखण्ड में थाना बनाने में लूट का व्यापार 

टी पी सिंह  तहलका 

झारखण्ड में पुलिसः की बानगी देखिये ,इनके भवन बनाने के लिए एक अलग विंग है - पुलिस भवन निर्माण निगम। यहाँ के सबसे बड़े अधिकारी होते है MD ,अब यह पद आई ज़ी या ऊपर के अधिकारी से सुशोभित होता है। यहाँ बिना मोटे रिस्वत के कोई परिन्दा पर नहीं मारता है ,काम होता है ज़िलों में ,पर वहा के पुलिस कप्तान या थानेदार का कोई रोल नहीं होता ना ही घटिया निर्माण या गलत होने पर कुछ बोल सकता है। अभी वर्तमान में राज्य के अंदर मॉडल थाने बन रहे है। स्टेमित है २ करोड़ की और काम है मात्र अस्सी लाख का यानि सवा करोड़ का बंदरबाट होता है। उसके बाद भी निर्माण देखिये घटिया ही नहीं अस्ताबक्र। दो प्रतिसत निर्माण को छोड़कर किसी भी निर्माण को अच्छा नहीं कहा जा सकता है। पीलर डांस मुद्रा में ,दिवार शयन मुद्रा में और ठेकेदार रिस्वत मुद्रा में। इस निर्माण को प्राइवेट ठेकेदार मुनाफा कमाकर अस्सी लाख में बना देगा वह भी अच्छी फिनिशिंग अच्छे रंग रोगन साथ। लेकिन यहाँ तो बंदरबाट करनीहै  भाई सो लूट सके तो लूट। इस निगम में एक ख़ास जाती के लोगो का साम्राज्य है ,उस कॉकस से सभी घबराते है ,अभी यहाँ देशमुख साहब एम डी थे ५० करोड़ का नगद तोहफा लेकर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए। यही हाल पुलिस के नीव में मट्ठा पटा रहा है। 


घोटालो का अम्बार है डी वी सी के बोकारो पावर प्लांट में

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      ,,,,,,घोटालो का अम्बार है डी वी सी में ,,,,,

दामोदर घाटी निगम का बोकारो थर्मल पावर प्लांट में खुबीओ की जगह खामिया अपनी जगह बनाने लगी है इन खामिओ ने प्लांट का बेडा गर्क करना शुरू कर दिया है ,सभी लोग अचंभित है की इतना सारा घोटाला कैसे हुवा ? घोटालो की पोल खोलता प्रस्तुत है तहलका के लिए बोकारो थर्मल से संजय मिश्रा की ख़ास रिपोर्ट :-
डीवीसी बोकारो थर्मल के बी पावर प्लांट में कैसे 24 के स्थान पर करवाया जा रहा है 72 मजदूरों का भुगतान--
संजय कुमार मिश्रा ( बोकारो थर्मल )
बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के ’बी’ पावर प्लांट की आर्थिक बदहाली के लिए अधिकारियों एवं ठीकेदारों की जुगलबंदी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में कितनी कारगर रहती है उसकी बानगी देखिये कि किस तरह वर्ष 2008 से लगातार ‘बी‘ प्लांट के सीएचपी में कनवेयर बेल्ट से जाने वाले कोयले से पत्थर चुनने के कार्य में कार्यरत मजदूरों से ज्यादा का भुगतान अधिकारियों की मिली भगत से काम करने वाली कंपनी को किया जा रहा है।‘बी‘ पावर प्लांट के कोल हैंडलिंग प्लांट(सीएचपी) के कन्वेयर बेल्ट से जाने वाले कोयले से पत्थर चुनने का कार्य नागपुर की कंपनी मेसर्स प्रिंस हाई टेक प्रा0लि0 को कार्यादेश संख्या-BT/B/(O&M)T/2006-07/WC/CHP/SE(F&E)/34/252 दिनांक-15 मई 2008 को दिया गया था। कंपनी के मजदूरों को तीनों पालियों में कन्वेयर बेल्ट से कोयले से पत्थर को चुनना था और इस कार्य के लिए कंपनी ने वर्ष 2008 में 54 मजदूरों का गेट पास बनवाया था परंतु कार्यस्थल पर तीनों पालियों में मात्र 24 मजदूरों से ही कार्य करवाया जाता रहा था। आश्चर्य एवं भ्रष्टाचार की हद तब हो गयी जब कार्यरत 24 मजदूरों के स्थान पर 54 मजदूरों का भुगतान किया जाता रहा। तत्कालिन डिप्टी चाफ इंजीनियर आर.बासुरी ने भी उस समय स्वीकार किया था कि 24 के स्थान पर 50 मजदूरों का गेट पास निर्गत है। तत्कालीन परियोजना प्रधान अमरनाथ मिश्रा ने तब गोल मटोल जबाब देते हुए कहा था कि जितने मजदूर कार्य कर रहें हैं उतने का ही भुगतान किया जा रहा है। डिप्टी चीफ इंजीनियर श्री बासुरी ने तब कंपनी के इंचार्ज को काफी डांट भी पिलायी थी। परंतु वर्ष 2008 सेे चल रहे इस लूट के सिलसिले में 2015 में जो एक बदलाव देखने को मिला वह यह कि वर्ष 2008 में जिन 24 मजदूरों के स्थान पर 54 मजदूरों का भुगतान किया जाता रहा था वह वर्तमान 2014-2015 में बढ़कर 72 हो गया है। ऐसा सिर्फ इस कारण हो रहा है कि आज भ्रष्टाचार की राशि का हिस्सा ज्यादा लोगों में बांटा जा रहा है? इस लूट एवं भ्रष्टाचार का खुलासा कभी भी कंपनी के कार्यस्थल पर जाकर मजदूरों की फिजिकल जाँच कर की जा सकती है?आज भी इस लूट की जानकारी एसई(फ्यूल) गुलाब अंसारी,कार्यपालक अभियंता रुद्रसेन,डिप्टी चीफ इंजीनियर तक को है परंतु आज तक उनके तरफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई का नहीं करना अपने आप में बहुत कुछ कहता है?


बोकारो थर्मल में स्टेशन लिविंग परमीशन के बिना 5-6 बजे शाम के बाद गायब हो जातें हैं डीवीसी के डीजीएम सहित कई अधिकारी----
भारत सरकार के अध्यादेश सहित सीवीसी एवं डीवीसी के प्रावधान में पावर प्लांट एवं बिजली को आवश्यक सेवा में वर्णित करते हुए रखा गया है।आवश्यक सेवा में रखने का उद्देश्य यह होता है कि इसमें कार्य करने वाले सभी अधिकारियों एवं अभियंताओं की ड्यूटी 24 घंटे होती है । 24 घंटे ड्यूटी रहने के कारण उन्हें जरुरत पड़ने पर कभी भी ड्यूटी बुलाया जा सकता है । 24 घंटा ड्यूटी रहने के कारण अधिकारी एवं अभियंता सेक्शनल हेड के बिना स्टेशन लिविंग परमीशन के अपनी ड्यूटी से गायब नहीं हो सकतें हैं।परंतु डीवीसी बोकारो थर्मल में बिना सेक्शनल हेड के परमीशन के प्रति दिन तथा प्रत्येक शनिवार को कई अधिकारी एवं अभियंता 5-6 बजे के दरम्यान सर्विस स्टेशन से गायब होकर चंद्रपुरा एवं मीजिया चले जातें हैं। डीवीसी बोकारो थर्मल के उपमुख्य अभियंता केके शर्मा,डीजीएम एमके श्रीवास्तव,अधीक्षण अभियंता एनके चैधरी,ईस-वन डीपी पुटुंडी,अधीक्षण अभियंता(सी एंड आई) प्रशांत धावा,वरीय प्रबंधक पीके सिंह,प्रबंधक रविन्द्र कुमार,दिलीप कुमार इनमें मुख्य रुप से शामिल हैं। उपरोक्त अभियंताओं एवं अधिकारियों में से उपमुख्य अभियंता केके शर्मा का तबादला पुनः चंद्रपुरा कर दिया गया,वरीय प्रबंधक पीके सिंह ने बोकारो थर्मल में आवास लेकर सपरिवार रहना आरंभ कर दिया।परंतु डीजीएम एमके श्रीवास्तव,अधीक्षण अभियंता एनके चैधरी, प्रबंधक रविन्द्र कुमार,दिलीप कुमार प्रत्येक दिन 5-6 बजे शाम के बाद बिना स्टेशन लिविंग परमीशन के चंद्रपुरा चले जातें हैं।उपरोक्त अधिकारियों ने चंद्रपुरा-बोकारो थर्मल के लिए एक वाहन भी भाड़े पर कर रखा है।जबकि ईस-वन डीपी पुटुंडी,अधीक्षण अभियंता(सी एंड आई) प्रशांत धावा प्रत्येक शनिवार को मीजिया चले जातें हैं।इस बीच यदि इन अधिकारियों की जरुरत पड़ती है तो फिर अगली सुबह का इंतजार करें या फिर भगवान को याद कीजिए----ड्यूटी से बिना परमीशन के भागना भी एक तरह का भ्रष्टाचार ही है जिस पर रोक लगाने की जरुरत है जिसे वर्तमान में देखने वाला शायद कोई नहीं है ?

भ्रष्टाचार के सीएचपी कोल मिल के 12 गियर बॉक्स खरीद मामले की जांच आरम्भ कर दी है केंद्रीय सर्तकता आयोग ने

बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के बी पावर प्लांट स्थित सीएचपी के कोल मील में विगत डेढ़ वर्षों के दरम्यान 4 करोड़ 80 लाख रूपये के बारह कोल मील गियर की खरीददारी में भ्रष्टाचार से सम्बंधित चौथी क़िस्त की खबर सोशल मीडिया एवं रांची से प्रकाशित कुछ समाचार पत्रों में छपने के बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग नयी दिल्ली ने इसे गंभीरता से लेते हुए इस पूरे मामले की जांच आरम्भ कर दी है। केंद्रीय सतर्कता आयोग नयी दिल्ली के द्वारा डीवीसी के मुख्य सतर्कता पदाधिकारी पीके सिन्हा से इसकी जांच कर रिपोर्ट मांगी गयी है। डीवीसी के मुख्य सतर्कता पदाधिकारी श्री सिन्हा के निर्देश पर कोल मिल के गियर बॉक्स की खरीद से सम्बंधित सभी फ़ाइल स्थानीय सतर्कता पदाधिकारी से मांगी गयी है।बोकारो थर्मल सीएचपी,अधीक्षण अभियंता तकनीकी एवं संपोषण अधीक्षक-एक एनके चौधरी के कार्यालय से सम्बंधित फाइलों को जांच के लिए जब्त माँगा गया है। मामले में जांच की जायेगी कि किस तरह से डीवीसी के मैटेरियल परचेज मैन्युअल की अनदेखी कर संपोषण अधीक्षक-एक एनके चौधरी द्वारा कोल मिल के गियर बॉक्स की खरीददारी की गयी ।गियर बॉक्स की खरीददारी का सबसे आश्चर्य जनक पहलु यह था कि एक ही कम्पनी द्वारा सभी गियर बॉक्सों की सप्लाई की गयी है परन्तु डेढ़ वर्ष पूर्व जो गियर बॉक्स खरीदी गयी उसे डेढ़ वर्ष बाद खरीदने पर उसकी कीमत में 10 लाख रूपये का इजाफा हुआ। गियर बॉक्स की खरीददारी में जितनी महंगाई डेढ़ वर्ष में देखने को मिली उतनी महंगाई डेढ़ वर्ष में देश में नहीं बढ़ी।बोकारो थर्मल पावर प्लांट के सीएचपी स्थित कोल मिल के दो गियर बॉक्स को पर्चेज संख्या-840 दिनांक-23.01.2012 को पश्चिम बंगाल के आनंदपुर,कोलकाता की कम्पनी मेसर्स प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड से 40 लाख 22 हजार रूपये की दर से खरीदा गया था। पुनः पावर प्लांट में मेसर्स प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी द्वारा पर्चेज संख्या-2046 दिनांक-25.8.2012 को 48 लाख रूपये प्रति गियर बॉक्स की लागत से चार गियर बॉक्स ख़रीदे गए।बाद में पुनः पर्चेज आर्डर नंबर-00021 दिनांक-30.8.2013 को मेसर्स प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी से 49 लाख 95 हजार प्रति गियर बॉक्स की लागत से चार गियर बॉक्स 1करोड़ 99 लाख 80 हजार रूपये में ख़रीदे गए। इस प्रकार मात्र डेढ़ वर्ष में एक गियर बॉक्स की खरीददारी में दस लाख रूपये का इजाफा भ्रष्टाचार की कहानी खुद कहता है।
बोकारो थर्मल में भ्रष्टाचार की बानगी
बोकारो थर्मल बी प्लांट के कंट्रोल रूम से कैसे चोरी हो गए 18 लाख रूपये मूल्य के कॉपर केबल--
केबल के कस्टडीयन अभियंता को ही दे दिया गया जाँच का जिम्मा
बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के बी पावर प्लांट के तीन नंबर कंट्रोल रुम के समीप से जब 18 लाख रुपये मूल्य के काॅपर चोरी का मामला सामने आया तो एक बारगी मन में यह ख्याल आया था कि जिस पावर प्लांट में तीन से चार कंपनी सीआईएसएफ को सुरक्षा में लगाया गया हो उस पावर प्लांट से 18 लाख रुपये मूल्य के पाँच ड्रम काॅपर की चोरी की घटना को आखिर अंजाम किस तरह दिया गया होगा। वर्ष 2008 के 7 अक्टूवर का दिन था जब पाँच ड्रम काॅपर केबुल के चोरी की घटना को अंजाम दिया गया था। बोकारो थर्मल बी पावर प्लांट के एक एवं दो नंबर यूनिट में एक्साइटर वायरिंग का कार्य होने के बाद तीन नंबर यूनिट में एक्साइटर वायरिंग का कार्य किया जाना था। कार्य को लेकर तीन नंबर यूनिट कंट्रोल रुम के बगल में पाँच ड्रम 1.1 केवी के काॅपर केबल रखे गए थे।सभी केबल पीवीसी आम्र्ड एफआरएस 1.1 केवी एवं एसक्यू मिमी के थे। पहले ड्रम में 1545 मीटर,दूसरे में 560 मीटर,तीसरे में 623 मीटर,चैथे में 1008 मीटर तथा पाँचवें ड्रम में 1000 मीटर केबल था। 6 अक्टूवर को पावर प्लांट में सभी कामगारों एवं अधिकारियों ने पाँचों ड्रम केबल को देखा था परंतु 7 अक्टूवर को सारे केबल गायब थे और सभी पाँचों ड्रम खाली पड़े हुए थे।छह अक्टूवर की रात्रि को ही चोरी की घटना को अंजाम दे दिया गया।केबल चोरी की घटना में जब तत्कालीन डिप्टी चीफ इंजीनियर गजेन्द्र झा का कहना था कि पाँच नहीं चार ड्रम केबल गायब हैं और श्री झा ने चोरी गए केबल जाँच करने का निर्देश तत्कालीन अधीक्षण अभियंता एपी सिंह को दे डाला। डिप्टी चीफ श्री झा का इस संबंध में दिया गया जाँच का निर्देश अटपटा इसलिए था कि चोरी गए 18 लाख रुपये मूल्य के केबल के कस्टडीयन अधिकारी अधीक्षण अभियंता एपी सिंह ही थे तो उन्हें जाँच का भार क्यों सौंपा गया?तीन नंबर यूनिट के कंट्रोल रुम के समीप से इतनी मात्रा में केबल ले जाना क्या एक आदमी के बूते की बात रही होगी?कई ऐसे अनसुलझे सवाल थे जिनके जवाब गर्त में समा गये।अनसुलझे सवालों के जवाब सुलझा लिए जाते तो कई के चेहरे से पर्दे उठ जाते?

बोकारो थर्मल बी प्लांट में 42 लाख 69 हजार की निविदा के बाद भी मौखिक आदेश पर पसंदीदा ठीकेदार से करवा लिए गए कार्य----
भ्रष्टाचार के कारण बोकारो थर्मल में अभियंताओं द्वारा संवेदकों(ठीकेदारों) पर प्रावधानों का उल्लंघन कर मेहरबानी के कई कारनामे जुड़े हुए हैं। ऐसे ही कारनामों में से एक अधीक्षण अभियंता तकनीकी एवं अधीक्ष्ण अभियंता टीजी से जुड़ी हुई हैं। बी पावर प्लांट में अधीक्षण अभियंता तकनीकी द्वारा निविदा संख्या-बीटी/बी(08एम) टी/06-07/डब्ल्यूसी/टीजीए/एसई(एम)-511एक्स-179 दिनांक-07.08.2007 के तहत टीजी एग्जेलरी पंप के 19 लाख 79 हजार 284 रुपये,टीजी कंडेंसर हीटर काॅलर ईटीसी के 09 लाख 77 हजार 321 रुपया का कार्य के अलावा निविदा संख्या- बीटी/बी(08 एम) टी/2006-07/डब्ल्यूसी/टीजीए/एसई(एम)-511 वाई-180 दिनांक-07.08.2007 तथा टीजी एग्जलरी भाल्व एआरसी के 13 लाख 12 हजार 752 रुपये की निविदा संख्या- बीटी/बी(08 एम) टी/06-07/डब्ल्यूसी/टीजीए/एसई(एम)-511 जेड-181 दिनांक-07.08.2007 को टरबाईन एवं जेनरेटर एग्जलरी के लिए निकाला गया था। दिनांक-07.08.2007 को जो निविदा डाली गयी थी उसे सात माह बाद भी नहीं खोला गया था। निविदा नहीं खोलने के बाद भी निविदा में जो उपरोक्त कार्य दर्शाये गये थे उसे उपरोक्त दोनों ही अभियंताओं की शह एवं मौखिक आदेश पर पतरातू के संवंदक मेसर्स एसएन सिंह से करवा लिया गया।



बोकारो थर्मल बी प्लांट में टेंडर के बावजूद एएमसी की निविदा में दिया गया 1 करोड़ 12 लाख रुपये का कार्य विस्तार---
भ्रष्टाचार के कारण बोकारो थर्मल के बी प्लांट में अभियंताओं द्वारा संवेदकों (ठीकेदारों) को प्रावधानों का उल्लंघन कर निविदा के बाद भी बार-बार कार्य का विस्तार दिया जाता रहा और स्थानीय परियोजना प्रधान से लेकर मुख्यालय तक के अधिकारी मूक-बधिर की तरह तमाशा देखते रहे।जुलाई 2007 में बी पावर प्लांट में कोल मिल के वार्षिक रखरखाव
एवं मरम्मत की 1 करोड़ 12 लाख रुपये की निविदा नंबर-बीटी/बी(ओ एंड एम)टी/2007-08/डब्ल्यूसी/सीएम/एमएस-1/1785/324 निकाली गयी।निविदा डालने की अंतिम तिथि 27 जुलाई 2007 थी।निविदा में एनटीपीसी एवं रिलायंस के संयुक्त उपक्रम यूपीएल,मेसर्स एसएन सिंह,बीके कंस्ट्रक्सन ने भाग लिया था।पुराने निविदा की तिथि 31 दिसंबर 2007 को समाप्त होनी थी और इसके पूर्व डाली गयी निविदा को तकनीकी विभाग के अधीक्षण अभियंता को खोल देनी चाहिए थी परंतु तत्कालीन परियोजना प्रधान अमरनाथ मिश्रा के निर्देश पर अधीक्षण अभियंता ए.मल्लिक ने आठ माह बाद मार्च 2008 तक निविदा खोली ही नहीं और 1 करोड़ 12 लाख रुपये का कोल मिल के वार्षिक रखरखाव एवं मरम्मत कार्य का कार्य विस्तार अपने पसंदीदा ठीकेदार को दे डाला।यहाँ सवाल उठना लाजिमी है कि जब परियोजना प्रधान एवं अधीक्षण अभियंता तकनीकी को कोल मिल के वार्षिक रखरखाव एवं मरम्मत का कार्य विस्तार अपने पसंदीदा ठीकेदार को देना ही था तो फिर टेंडर करवाया क्यों ?यदि टेंडर करवाया तो उसे 8 माह तक खोला क्यों नही?


सीवीसी एवं डीवीसी के प्रावधानों का उल्लंघन कर संवेदनशील पदों पर वर्षों से जमे हैं अधिकारी
10 वर्षों से जमे कई अधिकारियों का नहीं हो रहा तबादला

बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के ए एवं बी पावर प्लांट में सीवीसी एवं डीवीसी के सर्कुलर एवं प्रावधानों का उल्लंघन कर संवेदनशील पदो पर वर्षों से कई अधिकारी जमे हुए हैं। संवेदनशील पदों पर जमे अधिकारियों का तबादला नहीं किये जाने से ऐसे अधिकारी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहें हैं या भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। सीवीसी का सर्कुलर संख्या-02/01/12 तथा डीवीसी मुख्यालय कोलकाता के निदेशक (एचआरडी) के पत्रांक-6091,जनवरी 12 एम तथा निदेशक (सिस्टम) के पत्रांक-6 फ़रवरी 12 के तहत स्पष्ट उल्लेखित है कि संवेदनशील पदों पर किसी भी अधिकारी को ढाई से तीन वर्षों से ज्यादा नहीं रखना है और वैसे अधिकारियों का इंटरनल ट्रांसफर इन वर्षों के बाद कर देना है साथ ही प्रावधान एवं सर्कुलर में यह भी है कि ऐसे सभी अधिकारियों को दस वर्षों से ज्यादा समय तक एक स्थान पर नहीं रखना है उनका ट्रांसफर अन्यत्र कर देना है।सीवीसी एवं डीवीसी द्वारा जिन पदो को संवेदनशील रखा गया है उनमे एसई (टेक),एसई (सिविल),एमएस,एर्सइ (फ्यूल),स्टोर ऑफिसर,एकाउंट्स ऑफिसर,चीफ मैटेरियल मैनेजर,डायरेक्टर (एचआरडी),सीई (कमर्शियल,इएमपीसी,टीएससी) डायरेक्टर सॉयल कंज़र्वेशन शामिल हैं। बोकारो थर्मल में कई वर्षों से सीवीसी एवं डीवीसी के उपरोक्त प्रावधानों का उल्लंघन कर अजय दत्ता एसई(टेक),गुलाब अंसारी एसई (फ्यूल),एसके सुमन,लाल बाबू शर्मा एसई(सिविल),एनके चैधरी एमएस-वन,आरपी साह एमएस-दो,यूएस ठाकुर डिप्टी चीफ(सिविल) जैसे संवेदनशील पदों पर अधिकारी जमे हुए हैं जिनका इंटरनल ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है।
10 वर्षों से जमे हैं अधिकारी-सीवीसी एवं डीवीसी का प्रावधान एवं सर्कुलर में यह भी वर्णित है कि ऐसे सभी अधिकारियों को जो दस वर्षों से ज्यादा समय तक एक स्थान पर पदस्थापित हैं उनका ट्रांसफर अन्यत्र कर देना है।वावजूद बोकारो थर्मल में प्रावधानों एवं सकुर्लर का उल्लंघन कर विगत 10 वर्षों से जिन अधिकारियों का तबादला नहीं किया गया उनमें अधीक्षण अभियंता आरपी साह,एसएन प्रसाद कार्यपालक अभियंता एके सक्सेना,रुद्र सेन,राजीव रंजन,संजय सिंह,गौरव शुक्ला,नमन चंदेल,धर्मेंद्र शर्मा,धर्मेंद्र प्रसाद शामिल हैं।
तबादले के बाद वापस आ गये अधिकारी-बोकारो थर्मल में कई अधिकारी ऐसे हैं जो तबादले के 1-5 वर्षों के बाद वापस लौटकर बोकारो थर्मल आ गये हैं।ऐसे अधिकारियों में परियोजना प्रधान प्रमोद कुमार,डिप्टी चीफ इंजीनियर कमलेश कुमार,यूएस ठाकुर,एसएस प्रसाद,अधीक्षण अभियंता मो.यासीन,पीपी साह,एसएन प्रसाद हैं।

भ्रष्टाचार के कारण बोकारो थर्मल में डीवीसी के 395 आवासों पर है अवैध कब्जा
वैध कब्जा वाले ज्यादातर आवासों से वसूला जाता है भाड़ा
बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी का कोई भी ऐसा विभाग नहीं है जो भ्रष्टाचार से अछूता हो?बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी सिविल विभाग के अंर्तगत भूसंपदा विभाग है और इस विभाग के जिम्मे आवास रहतें हैं।डीवीसी बोकारो थर्मल में कामगारों,अधिकारियों,अन्य संस्थानों के कामगारों,सीआईएसएफ आदि के लिए कुल आवासों की संख्या 2908 है।आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कुल आवासों का 14 फीसदी आवासों पर अवैध कब्जा है।डीवीसी का सिविल विभाग या प्रबंधन वर्षों से अवैध कब्जा वाले उपरोक्त आवासों को खाली करवाने में अपने को असहाय महसूस कर रहा है। बोकारो थर्मल में डीवीसी के कुल 2908 आवासों में से 2359 आवासों को डीवीसी के सभी तरह के कामगार,सीआईएसएफ,श्रम विभाग,सरकारी एवं प्राईवेट एजेंसी,टेªड यूनियन को आबंटित किया गया है।कुल आवासों में से 118 आवास खाली पडे़ हुए हैं।जर्जरावस्था में अनुपयोगी आवासों की संख्या 36 है। कुल 2908 आवासों में से 395 आवासों पर अवैध कब्जा है और ज्यादातर आवासों से अधिकारियों एवं विभागीय कुछ कामगारों के एक सिंडीकेट द्वारा भाड़ा प्रत्येक माह वसूल किया जाता है।एक तरफ बोकारो थर्मल में डीवीसी के 395 आवासों पर अवैध कब्जा है तो दूसरी तरफ अभी भी सैकड़ों सप्लाई मजदूरों को आवास मुहैया नहीं करवाया गया है और सप्लाई मजदूर आवास की मांग करतें रहतें हैं।इसी प्रकार रिटायर्ड कामगारों से उनके आवासों के एवज में 50 गुणा ज्यादा भाड़ा वसूलने की नयी नीति बनायी गयी है,जिससे डीवीसी के सीनियर सिटीजन काफी परेशान हैं।आवास के अभाव में 500 मेगावाट के नये पावर प्लांट में कार्य करनेवाले ज्यादातर कंपनियों के कामगारों,अधिकारियों को निजी आवासों में भाड़ा पर रहना पड़ रहा है।बोकारो थर्मल का सिविल एवं भूसंपदा विभाग यदाकदा अवैध कब्जा वाले आवासों को खाली करवाने के लिए इविक्शन आर्डर निकाल कर अपना दायित्व पूरा कर लेता है:
(उपरोक्त सभी जानकारी डीवीसी बोकारो थर्मल प्रबंधन द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मुहैया करवायी गयी जानकारी पर आधारित है।)


बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के 630 मेगावाट का पावर प्लांट एक माह से बंद है।एक माह से कामगारों एवं अधिकारियों को बैठा कर वेतन का भुगतान किया जा रहा है।बोकारो थर्मल पावर प्लांट की बदहाली के लिए अधिकारियों द्वारा लूट-खसोट,भ्रष्टाचार को बढ़ावा तथा उनकी तुगलकी नीतियाँ ज्यादा जिम्मेवार रहीं हैं।अखबारों में शायद अधिकारियों द्वारा लूट-खसोट,भ्रष्टाचार को बढ़ावा तथा उनकी तुगलकी नीतियाँ को उजागर करना भी चाहूँ तो स्थान ना मिले इसलिए मैं बोकारो थर्मल पावर प्लांट में फैले लूट-खसोट,भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों तथा उनकी तुगलकी नीतियों को किस्तवार सिलसिले ढ़ंग से आपके समक्ष प्रस्तुत करुँगा जिससे आप भी भली-भाँति परिचित हो जायेंगे कि कैसे बोकारो थर्मल पावर प्लांट के अधिकारियों ने इसे एक चारागाह समझ दुधारु गाय की तरह इस्तेमाल किया जिसके कारण आज यह अपनी आर्थिक दुर्दशा के कारण बदहाली के कगार पर खड़ा अपने वजूद को होने की लड़ाई लड़ रहा है----------कल पढि़ए पहली किस्त में कैसे डीवीसी के अधिकारियों की तुगलकी नीतियों के कारण 20 वर्ष पूर्व बोकारो थर्मल में डीवीसी के डूब गये करोड़ों रुपये-----परंतु किसी पर नहीं हुई कोई कार्रवाई-----

नियमो एवं प्रावधानों को ताक पर रखकर डीआरसीसी को दी गयी लगभग एक करोड़ की निविदा
डीवीसी बोकारो थर्मल पावर प्लांट में नियमों को ताक पर रखकर जिस प्रकार निविदा का आबंटन किया जाता है वैसी बानगी कहीं और दिखाई नहीं पड़ती है।बोकारो थर्मल में सीएचपी की वार्षिक मरम्मत के लिए 88 लाख 27 हजार 238 रुपये की निविदा 4 मार्च 2006 को निकाली गयी थी।निविदा में कोलकाता की डीआरसीसी एवं एस्सार इंजीनियरिंग कंपनी ने भाग लिया था।निविदा में सीएचपी के 7 वर्ष का कार्यानुभव मांगा गया था।डीआरसीसी ने डाली गयी निविदा में सीएचपी के स्थान पर रोप-वे का कार्यानुभव डाला था।प्रावधान के तहत दस्तावेजों के अभाव में डीआरसीसी का टेंडर रद्द हो जाना चाहिए था परंतु तत्कालीन तकनीकी अधीक्षण अभियंता ने निविदा खुलने के साढ़े तीन माह बाद डीआरसीसी को पत्र देते हुए 20 दिनों की मोहलत देते हुए सीएचपी का कार्यानुभव जमा करने को कहा।डीआरसीसी ने 20 दिनों की बजाय 7 माह बाद 10 फरवरी 2007 को जो कार्यानुभव जमा किया वह सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) की बजाय कलपक्कम के आणविक प्लांट का था,जबकि आणविक प्लांट में सीएचपी होता ही नहीं है।आश्चर्य इस बात का है कि इसके बावजूद 9 माह बाद 25 नवंबर 2007 को डीवीसी के अधीक्षण अभियंता तकनीकी ने डीआरसीसी को कार्य आबंटित कर दिया।एस्सार इंजीनियरिंग ने निविदा में की गयी अनियमितता को लेकर डीवीसी अध्यक्ष,सचिव,मुख्य अभियंता एवं मुख्य सर्तकता पदाधिकारी कोलकाता को पत्र लिखा।सर्तकता विभाग द्वारा जांच में डीआरसीसी द्वारा गलत क्रेडिंसियल देने की बात साफ हो गयी थी और सर्तकता विभाग ने जो रिर्पोट सौंपी उसमें डीआरसीसी को कार्य आबंटित न करने को लिखा बावजूद डीआरसीसी को कार्य दे दिया गया।निविदा देने में अनियमितता के बाद भी तत्कालीन परियोजना प्रधान सह मुख्य अभियंता तथा अधीक्षण अभियंता तकनीकी पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डेढ़ वर्ष में कोल मील के गियर बॉक्स की कीमत में 10 लाख रूपये का इजाफा

बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के बी पावर प्लांट स्थित सीएचपी के कोल मील में विगत डेढ़ वर्षों के दरम्यान 4 करोड़ 80 लाख रूपये के दस कोल मील गियर की खरीददारी डीवीसी के मैटेरियल परचेज मैन्युअल की अनदेखी कर संपोषण अधीक्षक-एक एनके चौधरी द्वारा की गयी ।गियर बॉक्स की खरीददारी का सबसे आश्चर्य जनक पहलु यह है कि एक ही कम्पनी द्वारा सभी गियर बॉक्सों की सप्लाई की गयी है परन्तु डेढ़ वर्ष पूर्व जो गियर बॉक्स खरीदी गयी उसे डेढ़ वर्ष बाद खरीदने पर उसकी कीमत में 10 लाख रूपये का इजाफा हुआ। गियर बॉक्स की खरीददारी में जितनी महंगाई डेढ़ वर्ष में देखने को मिली उतनी महंगाई डेढ़ वर्ष में देश में नहीं बढ़ी।बोकारो थर्मल पावर प्लांट के सीएचपी स्थित कोल मिल के दो गियर बॉक्स को पर्चेज संख्या-840 दिनांक-23.01.2012 को पश्चिम बंगाल के आनंदपुर,कोलकाता की कम्पनी मेसर्स प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड से 40 लाख 22 हजार रूपये की दर से खरीदा गया था। पुनः पावर प्लांट में मेसर्स प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी द्वारा पर्चेज संख्या-2046 दिनांक-25.8.2012 को 48 लाख रूपये प्रति गियर बॉक्स की लागत से चार गियर बॉक्स ख़रीदे गए।बाद में पुनः पर्चेज आर्डर नंबर-00021 दिनांक-30.8.2013 को मेसर्स प्रीमियम ट्रांसमिशन लिमिटेड कंपनी से 49 लाख 95 हजार प्रति गियर बॉक्स की लागत से चार गियर बॉक्स 1करोड़ 99 लाख 80 हजार रूपये में ख़रीदे गए। इस प्रकार मात्र डेढ़ वर्ष में एक गियर बॉक्स की खरीददारी में दस लाख रूपये का इजाफा भ्रष्टाचार की कहानी खुद कहता है।



एक कहावत चरितार्थ है चोरी और सीना जोरी।यह कहावत बोकारो थर्मल पावर प्लांट में व्याप्त भ्रष्टाचार पर बिलकुल ही सटीक बैठती है। बोकारो थर्मल बी पावर प्लांट में संपोषण अधीक्षक-एक के पद पदासीन एनके चैधरी द्वारा विगत डेढ़ वर्षों में कोल मिल के 12 गियर बाॅक्स की खरीददारी से संबंधित समाचार का प्रकाशन रांची से प्रकाशित एक समाचार पत्र में होने के बाद डीवीसी प्रबंधन को बुरा इसलिए लगा कि उनके गंदे दाग को क्यों दिखाने की जहमत की गयी।प्रबंधन ने समाचार-पत्र को लिखित प्रतिवाद देते हुए लिखा कि बोकारो थर्मल में जिस गियर बाॅक्स को 40 लाख 22 हजार में खरीदा गया उसे डीवीसी के दुर्गापुर पावर प्लांट में 22.10.2011 को 48 लाख रुपये में खरीदा गया था।इसी प्रकार बोकारो थर्मल में पत्रांक-00021,दिनांक-30.8.2013 को 4 गियर बाॅक्स 49 लाख 95 हजार प्रति गियर बाॅक्स की दर से खरीदे गये थे और उसकी तुलना छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा स्थित पावर प्लांट में 71 लाख 34 हजार 604 रुपये 35 पैसे प्रति गियर बाॅक्स की खरीद से की गयी है।बोकारो थर्मल बी पावर प्लांट में संपोषण अधीक्षक-एक एनके चैधरी द्वारा दिनांक-12.9.2011 को रुपया-40,22000/- की लागत से जो दो गियर बॉक्स खरीदा गया है उसमे दुर्गापुर पावर प्लांट में दिनांक-22.10.2011 को ख़रीदे गए गियर बॉक्स से तुलना दिखाई गयी है। जानकारी के लिए बता दूँ कि डीवीसी मुख्यालय ने मैटेरियल परचेज को लेकर एक परचेज मैनुअल बना रखा है और उपरोक्त मैनुअल के तहत डीवीसी के किसी भी प्रोजेक्ट में मैटेरियल की खरीद करते समय विगत तीन वर्षों के दरम्यान का मैटेरियल की खरीद का रेट देखा जाता है।डीवीसी दुर्गापुर में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता आरआर पाण्डेय ने गियर बॉक्स की खरीद में डीवीसी के मैटेरियल परचेज मैनुअल के तहत बोकारो थर्मल में विगत बीस दिनों पूर्व 12.09.2011 को ख़रीदे गए गियर बॉक्स का रेट नहीं लिया और भ्रष्टाचार की खातिर उसे 48 लाख रुपया प्रति गियर बॉक्स की दर से परचेज कर लिया। दुर्गापुर में अधीक्षण अभियंता श्री पाण्डेय द्वारा ऊँचे दर पर ख़रीदे गए गियर बॉक्स मामले की विजिलेंस से जाँच करवायी गयी और विजिलेंस जाँच के आधार पर श्री पाण्डेय को अनिमितता में संलिप्ता का दोषी मानते हुए श्री पाण्डेय का तबादला दुर्गापुर के सेंसेटिव पद से नन सेंसेटिव पद पर डीवीसी चंद्रपुरा के ट्रेनिंग इंस्ट्यूट कर दिया गया। जबकि बोकारो थर्मल में संपोषण अधीक्षक-एक के सेंसेटिव पद पर विगत चार वर्षों से पदस्थापित एनके चैधरी पर गियर बाॅक्स खरीद मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है जो यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की खातिर श्री चैधरी पर कार्रवाई नहीं की गयी है।बोकारो थर्मल में श्री चैधरी द्वारा मात्र आठ माह के अंतराल के बाद 08.5.2012 को रुपया-48 लाख प्रति गियर बॉक्स की दर से 20 फीसदी बढ़ी हुई दर पर चार गियर बॉक्स खरीदकर एक बार फिर से डीवीसी के मैटेरियल परचेज मैनुअल की अवहेलना की गयी जो भ्रष्टाचार को दर्शाता है। मैटेरियल परचेजिंग के दर में बढ़ोतरी तीन प्रकार से की जाती है-मजदूरों की मजदूरी दर का बढ़ना,जो मैटेरियल प्रयोग में लायी गयी है उसकी कीमत में बढ़ोतरी का होना एवं आरबीआई के बेस प्राइस एवं व्होलसेल प्राइस में बढ़ोतरी का होना। परन्तु तत्कालीन समय में तीनों कारण प्राइस बढ़ोतरी में देखने को नहीं मिले वावजूद गियर बॉक्स की खरीद में 20 फीसदी का इजाफा भ्रष्टाचार को दर्शाता है। डीवीसी बोकारो थर्मल के संपोषण अधीक्षक श्री चैधरी ने कुल बारह गियर बॉक्स परचेज आर्डर नंबर-147 दिनांक-12.09.2011-02 गियर बॉक्स,परचेज आर्डर नंबर-40-दिनांक -08.5.2012 -04 गियर बॉक्स,परचेज आर्डर नंबर--00021 दिनांक -30.8.2013--04 गियर बॉक्स,तथा परचेज आर्डर नंबर-300 दिनांक-10.12.2012--02 गियर बॉक्स की खरीदारी की थी।मामला गंभीर है इसलिए बारीकी से जांच की जरुरत है ताकि आर्थिक मंदी का मार झेल रहे डीवीसी एवं बंदी का सामना कर रहे बोकारो थर्मल पावर प्लांट को भ्रष्टाचार से बचाया जा सके।


बोकारो थर्मल में डीवीसी के अधिकारियों का व्यवहार ब्रिटिश राज के हुक्मरानों की याद दिलाने के लिए काफी है। कहा गया है कि यदि कहीं गन्दगी दिखती है तो आईने में देखकर उस गन्दगी को साफ़ करने का जतन करनी चाहिए ना कि आईने को ही तोड़ देना ही सरल उपाय है---बोकारो थर्मल में एक ओर जहां पावर प्लांट को बंदी का सामना करना पड़ रहा था तो दूसरी ओर अधिकारी नए वर्ष के तीन दिवसीय जश्न में डूबे हुए थे----खबरिया चैनल न्यूज़-11 ने इससे सम्बंधित समाचार चलाया तो ब्रिटिश राज के हुक्मरानों को नागवार गुजरी ।मुनादी करवाई गयी कि खबरिया चैनल के प्रसारण को बंद करवा दिया जाय। हुक्म की तामील हुई और केबुल चलाने वालों ने न्यूज-11 चैनल का प्रसारण बंद करवा दिया। मैने उपर लिखा है ना कि दाग दिखाओगे तो आइना तोड़ डालूँगा----और तोड़ दिया। इसी प्रकार दो वर्ष पूर्व जब सीबीआई के एंटी करप्सन टीम के अधिकारियों ने बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के कुछ अधिकारियों के घर एवं दफ्तरों पर छापामारी की थी और खबरिया चैनल---न्यूज़11,सहारा समय,ईटीवी ने सीबीआई छापामारी की खबर चलायी तो तत्कालीन ब्रिटिश राज के वायसराय नाराज हो गए और लगभग छह माह तक सभी चैनलों को बंद करवा दिया गया था----बंद कर च भी देना चाहिए था खबरिया चैनलों ने खबर चलाने की गुस्ताखी जो की थी ?


बंदी एवं मंदी की मार झेल रहे बोकारो थर्मल में डीवीसी को प्रति माह चूना लगा रहें अधिकारी...........
भारत सरकार का उपक्रम कोल इंडिया के बाद पब्लिक सेक्टर का उपक्रम डीवीसी दूसरा ऐसा संस्थान है जहां सरकारी एवं संविदा पर चलने वाले वाहनों का दुरुपयोग व्यापक पैमाने पर किया जाता है।वाहनों का दुरुपयोग के साथ ही निजी वाहनों का भत्ता भी लेकर संस्थान को चूना लगाने का कार्य वर्षों से बदस्तूर जारी है।डीवीसी में निगम के या संविदा पर चलने वालेवाहनों का उपयोग करने को लेकर तथा जो उपरोक्त वाहनों का उपयोग नहीं करतें हैं उनके लिए वाहन-भत्ता को लेकर एक सर्कुलर बना हुआ है।डीवीसी में कामगारों एवं अधिकारियों को वाहन भत्ता के रुप में क्रमशः1600 एवं 3000 से 3500 सौ रुपये का भुगतान किया जाता है।डीवीसी के अवर सचिव कर्नल आरएन मल्होत्रा के पत्रांक-2003-04/103,दिनांक-06.08.2003 में डीवीसी के वाहनों का उपयोग तथा वाहनों का भत्ता को लेकर स्पष्ट रुप से उल्लेख है।अवर सचिव के सर्कुलर में उल्लेख था कि जो अधिकारी डीवीसी से वाहन भत्ता लेंगे वे डयूटी आने-जाने में डीवीसी या डीवीसी में संविदा के तहत चलनेवाली वाहनों से डयूटी आना-जाना नहीं करेंगे।इसके अलावा जो अधिकारी अपने निजी कार्य के लिए वाहन का उपयोग करेंगे उनके वेतन से वाहन का भाड़ा काट लिया जाएगा।परंतु बोकारो थर्मल में लगभग सभी अधिकारी वाहन भत्ता भी उठा रहें हेैं और डीवीसी के वाहनों का उपयोग डयूटी आने-जाने के साथ-साथ अपने निजी कार्यों,बच्चों को स्कूल एवं टयूशन लाने-ले जाने में तथा बाजार करने में कर रहें हैं।एक अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी तो लगातार डीवीसी वाहन का उपयोग मैथन एवं हजारीबाग अपने घर एवं टयूशन पढ़ाने के लिए आने-जाने में कर रहें हैं।बोकारो थर्मल में संविदा में वर्तमान में 25-30 वाहन 10-15 लाख रुपये मासिक पर चलाये जा रहें हैं।मुख्य अभियंता एवं परियाजना प्रधान दो-दो यानि कुल चार वाहनों का प्रयोग कर रहें हैं।आश्चर्य इस बात का है कि आज तक अधिकारियों द्वारा वाहनों का इतने दुरुपयोग के बाद भी किसी भी अधिकारी के वेतन से कोई राशि नहीं काटी गयी।अपवाद के रुप में बोकारो थर्मल में "ए" प्लांट के परियोजना पदाधिकारी आरआर टोप्पो एवं सिविल के एसडीई श्री मैती डीवीसी वाहन से अलग-अलग बार पटना एवं कोलकाता गए।परंतु वापसी के बाद दोनों अधिकारियों ने अपने वेतन से एकाउंट सेक्शन में वाहन का भाड़ा जमाकर एक मिशाल कायम की थी।बोकारो थर्मल में इसके बाद तीसरी कोई मिशाल नहीं हैं।मंदी एवं बंदी की मार झेल रहे डीवीसी एवं बोकारो थर्मल में इस फिजूलखर्ची को रोका भी जा सकता है।जरुरत है एक सकारात्मक प्रयास की----
कोयला के काले कारोबार में किन अधिकारियों पर सीबीआई ने की कार्रवाई
भ्रष्टाचार के मामले में डीवीसी ही एक मात्र ऐसा संस्थान है जहां कुछ भी संभव है।वर्षों पूर्व बोकारो थर्मल में कोयला का शाॅर्टेज हुआ था और इसकी जांच को कोलकाता से बंगाली अधिकारियों की टीम बोकारो थर्मल आयी थी। तत्कालीन कोल अधीक्षक ने तब के चहारदिवारी विहीन कोल यार्ड में कोयला के स्टाॅक पर गुड़ घोलकर छिटवा दिया था और कोयला के उपर लगी गुड़ को जब गाय चाट रही थी तो जांच टीम को कोल अधीक्षक ने यह कहते हुए दिखाया कि बोकारो थर्मल में गाय कोयला भी खाती है इसलिए कोयला का शॅार्टेज हो गया। वैसे भी तत्कालीन बिहार में जब स्कूटर से चारा एवं जानवर ढ़ोया जा सकता है तो यदि गाय कोयला खा गयी तो इसमें आश्चर्य कैसा?कोयला के उपरोक्त शाॅर्टेज की जांच के वर्षों बाद बोकारो थर्मल के कोल यार्ड में एक बार फिर से कोयला शाॅर्टेज का मामला जनवरी 2012 में उस समय प्रकाश में आया जब धनबाद सीबीआई एंटी क्रपस्न के 20 सदस्यों वाली टीम के अधिकारियों ने डीवीसी बोकारो थर्मल पावर प्लांट के अधीक्षण अभियंता फ्यूल बीडी साहू,कार्यपालक अभियंता रुद्र सेन एवं राजीव रंजन के पावर प्लांट स्थित दफ्तरों,बैंक एवं कार्यालयों पर एक साथ छापामारी की थी।दो दिनों तक चली सीबीआई की छापामारी कार्रवाई में बोकारो थर्मल के कोल यार्ड में सीबीआई को 50 हजार मीट्रिक टन कोयला का शाॅर्टेज मिला था जबकि पेन एवं पेपर पर विभागीय अधिकारियों ने कोल स्टाॅक को पूरी तरह से अपडेट कर रखा था।सीबीआई ने उपरोक्त अधिकारियों पर कांड संख्या आरसी 01(2012) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।परंतु विडंबना देख्एि डीवीसी के मुख्यालय की अधिकारियों पर कार्रवाई करना तो दूर की बात रही कुछ माह बाद अधीक्षण अभियंता को पदोन्नति देते हुए बोकारो थर्मल बी प्लांट का डिप्टी चीफ इंजीनियर बना दिया गया। हाल-फिलहाल उनका तबादला डीवीसी चंद्रपुरा विजिलेंश ग्राउंड पर कर दिया गया जबकि बाकि के दो अधिकारी आज भी बोकारो थर्मल पावर प्लांट में विराजमान हैं। बोकारो थर्मल में भ्रष्टाचार की बानगी पर कर्नाटक के बंगलुरु से प्रसिद्ध साहित्यकार,पत्रकार एवं हमारे अभिभावक तुल्य बड़े भाई श्री टी.राज श्रेष्ठ जी की मुझे भेजी गयी कवि दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ बिल्कुल सटीक बैठती हैर्-जिस्म पहरावों में छिप जाते थे,पहरावों में-जिस्म नंगे नजर आने लगे,ये तो हद है।

डीवीसी बोकारो थर्मल एकांउट विभाग के अधिकारी का दुःसाहस-फर्जी तरीके से निकाल लिए 5 करोड़ रुपये
भ्रष्टाचार एवं लूट को लेकर जितना दुःसाहस बोकारो थर्मल के डीवीसी अधिकारियों द्वारा किया जाता है वैसा दुःसाहस की बानगी कहीं और देखने को नहीं मिलेगी। बोकारो थर्मल में भ्रष्टाचार का आलम यह था कि पावर प्लांट लेखा विभाग के वरीय अपर मुख्य लेखा पदाधिकारी सुमन कुमार ने फर्जी तरीके से अहमदाबाद की रीजिड कंट्रोल कंपनी,रांची डोरंडा की शंभु ट्रेडिग कंपनी,डोरंडा की ही सुमित इलेक्ट्रिकल,पटना की ओसियन एलिभेटर प्राईवेट लि.,तथा बोकारो थर्मल के रंजन ब्रदर्स के नाम पर दुबारा भुगतान के एवज में कंपनियों से मिलीभगत कर 4 करोड़ 6 लाख 33 हजार 4 सौ 78 रुपये की निकासी कर ली।मामला प्रकाश में आने के बाद धनबाद सीबीआई एंटी क्रप्सन की टीम ने दिनांक-17 अगस्त 2012 एवं 26 फरवरी 2013 को एक साथ बोकारो थर्मल पावर प्लांट स्थित सुमन कुमार के आवास,दफ्तर सहित रांची,अहमदाबाद,पटना पश्चिम बंगाल स्थित सुमन कुमार के अन्य रिश्तेदारों सहित कंपनी एवं ठीकेदारों के ठीकानों पर एक साथ छापामारी की।छापामरी में सीबीआई की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज,कागजात,बैंक खाते जब्त किये। सीबीआई धनबाद ने इस मामले में कांड संख्या-आरसी-09(ए)/2012-डी भादवि की धारा-120 बी,420,468,471,477 ए सेक्शन 13(आर/डब्ल्यू )1डी के तहत सुमन कुमार सहित उपरोक्त सभी पर प्राथमिकी दर्ज की थी।लेखा विभाग के अधिकारी सुमन कुमार द्वारा फर्जी भुगतान का नायाब तरीका निकाला गया था।अधिकारी सुमन कुमार ने डीवीसी द्वारा जिस कंपनी को उसके कार्यों एवं मैटेरियल सप्लाई के एवज में डीवीसी द्वारा एक बार भुगतान कर दिया गया था उसी कंपनी से सांठ-गांठ कर फर्जी तरीके से दुबारा भुगतान ले लिया गया था।सुमन कुमार द्वारा फर्जी तरीके से लगभग 5 करोड रुपये की निकासी की गयी परंतु उस पर कार्रवाई के नाम पर डीवीसी मुख्यालय कोलकाता द्वारा मात्र दुर्गापुर तबादला कर दिया गया।

खराब कार्य प्रदर्शन एवं पेनाल्टी काटे जाने के बाद भी डीआरसीसी कंपनी को दिया गया 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का कार्य विस्तार
बोकारो थर्मल में भ्रष्टाचार की बानगी की तीसरी किस्त में आपने पढ़ा था कि किस तरह से नियमो एवं प्रावधानों को ताक पर रखकर डीआरसीसी को लगभग एक करोड़ की निविदा दी गयी थी।कार्य मिलने के बाद डीआरसीसी कंपनी का कार्य में प्रदर्शन बेहद खराब रहा था।सीएचपी के एक नंबर कंप्रेशर सिस्टम,क्रेंक के मशीनरी पार्टस की खराबी,मशीनरी पार्टस में बदलाव एवं सुधार के लिए निर्माता कंपनियों के इंजीनियरों को लेकर इसकी खराबी को दूर करने को लेकर तत्कालीन विभागीय अभियंता वीके वर्मा ने 10.11.2009 को डीआरसीसी को लिखित सूचना देते हुए इसमें सुधार का निर्देश दिया था।अभियंता श्री वर्मा ने खराबी दूर नहीं करने की स्थिति में डीआरसीसी कंपनी के बिल से इसके एवज में पेनाल्टी राशि काटने को भी लिखा था। डीवीसी प्रबंधन ने डीआरसीसी कंपनी को अगस्त 2009 में कार्यादेश संख्या-208 दिनांक-11.08.2009 के तहत 1 करोड़ 3 लाख 50 हजार एक सौ रुपया का सीएचपी के वार्षिक रखरखाव का कार्य दिया था।कार्य में खराबी के बाद अधीक्षण अभियंता श्री वर्मा द्वारा डीआरसीसी के बिल से पेनाल्टी राशि काटने संबंधी लिखित सूचना के बावजूद भी पेनाल्टी की राशि नहीं काटी गयी और डीआरसीसी कंपनी को एक वर्ष का कार्य विस्तार पत्रांक-195 दिनांक-28.08.2010 के तहत दे दिया गया। अधीक्षण अभियंता श्री वर्मा द्वारा जो पेनाल्टी की राशि पूर्व में 11.08.2009 को काटने का निर्देश दिया गया था उसे डीवीसी प्रबंधन द्वारा डीआरसीसी को कार्य विस्तार दिये जाने के छह माह बाद 23.02.2011 को 3 लाख 25 हजार रुपया काटा गया।इस संबंध में सीवीसी का बिल्कुल साफ निर्देश है कि खराब प्रदर्शन करने तथा पेनाल्टी राशि काटी जानेवाली कंपनी एवं ठीकेदारों को कार्य में किसी भी प्रकार का सेवा विस्तार नहीं दिया जा सकता है।परंतु बोकारो थर्मल में अधिकारियों के लिए ऐसे प्रावधान कोई मायने भ्रष्टाचार के आगे नहीं रखते हैं ?

प्रावधानों का उल्लंधन कर मेसर्स ईएम सर्विसेज को दिया गया कैपिटल ओवरवायलिंग का 3.5 करोड़ का कार्य
ओवरवायलिंग के बाद यूनिट के लाईटअप में जलाया गया 6 करोड़ का तेल
डीवीसी बोकारो थर्मल में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण ही पहली बार तीन नंबर यूनिट के टरबाईन का कैपिटल ओवरवायलिंग में उपकरणों को बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की वास्तविक निर्माता कंपनी भेल को टरबाईन के कैपिटल ओवरवायलिंग का कार्य ना देकर नागपुर की एक प्राईवेट कंपनी मेसर्स ईएम सर्विसेज को 1 करोड़ 85 लाख 500 रुपये का कैपिटल ओवरवायलिंग का कार्य कार्यादेश संख्या-742/285 दिनांक-22.03.2012 को दे दिया गया।कंपनी को कार्यादेश मिलने के बाद बोकारो थर्मल क्या डीवीसी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ होगा कि कंपनी के स्थानीय इंचार्ज को ठहरने के लिए डीवीसी का निदेशक भवन दिया गया। मेसर्स ईएम सर्विसेज द्वारा कार्य संपन्न के बाद जब तीन नंबर यूनिट को लाईटअप कर विद्धुत उत्पादन के लिए सिंक्रोनाईज किया गया तो टरबाईन के ओवरवायलिंग में बरती गयी भ्रष्टाचार खुद अपनी कहानी कहने लगा। सिंक्रोनाईज के साथ ही तीन नंबर यूनिट के टरबाईन में इतनी कंपन देखने को मिली कि यूनिट को बंद कर पुनः मरम्मत का कार्य करना पड़ा।मरम्मत कार्य के बाद पुनः लाईटअप करने पर फिर से टरबाईन में कंपन होने लगी।यूनिट को लगभग 30 बार बंद कर लाईटअप किया गया जिसमें 1200 किलोलीटर तेल जलाया गया जिसका तत्कालिक बाजार मूल्य लगभग 6 करोड़ रुपया था।यूनिट को चालू करने एवं बंद करने में डीवीसी को प्रतिदिन 2 करोड़ रुपये की क्षति उठानी पड़ी सो अलग।तीन नंबर यूनिट कैपिटल ओवरवायलिंग के बाद लगातार इसलिए बंद कर रखा गया ताकि उसे चलाने से उसकी खामियाँ स्वतः ना उजागर हो जाय। तीन नंबर यूनिट के कैपिटल ओवरवायलिंग का कार्य इतनी घटिया तरीके से जिस कंपनी ने किया हो उसे ब्लैक लिस्टेड करने की बजाय फिर से ईनाम में 66 लाख 61 हजार रुपये का एक नंबर यूनिट के शाॅर्ट टरबाईन ओवरवायलिंग का कार्य मेसर्स ईएम सर्विसेज को कार्यादेश संख्या-97 दिनांक-26.07.2012 को दे दिया गया।एक नंबर यूनिट के कार्य में भी सीवीसी द्वारा निर्धारित निविदा संबंधी सभी प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया गया और एनआईटी की तिथी से 11 दिनों के अंदर कंपनी को कार्यादेश आबंटित कर दिया गया।

डीवीसी के दो अभियंता गये हवालात
डीवीसी बोकारो थर्मल एवं चंद्रपुरा के दो अभियंता को अलग-अलग मामलों में हवालात जाना पड़ गया।बोकारो थर्मल के बी पावर प्लांट के कार्यपालक अभियंता एवं भारत विकास परिषद् के स्थानीय शाखा सचिव सचिव संजय सिंह को जहां दहेज की खातिर अपनी पत्नी को प्रताडि़त करने के मामले में हवालात जाना पड़ा वहीं चंद्रपुरा पावर प्लांट के अभियंता अखिेलश प्रसाद श्रीवास्तव को दुष्क्रर्म के मामले में हवालात जाना पड़ा।डीवीसी बोकारो थर्मल के अभियंता संजय सिंह पर जब उनके श्वसुर केपी सिंह ने बोकारो थर्मल थाना में मामला दर्ज करवाया था तो सोशल मीडिया पर जब ये खबर मैनें डाली थी तो राँची के रतन तिर्की ने पोस्ट किया था और लिखा था कि संजय की पहुंच काफी उपर तक है इसलिए उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा।रतन तिर्की जी के पोस्ट पर मैनें लिखा था कि इस देश में सुखराम,राजा,कनिमौजी,लालू प्रसाद यादव,मधु कौड़ा,सहारा प्रमुख सुब्रत राय जैसे लोगों से उँची पहुंच रखने वालों को हवालात जानी पड़ गयी तो अभियंता संजय सिंह की क्या बिसात है?अगस्त 2014 में संजय सिंह पर प्राथमिकी के पांच माह बाद तक पुलिस की पूरी मेहरबानी संजय सिंह पर चाहे जिस कारण रही हो उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे अपने को खुदा मान बैठे थे।अंततः न्यायालय से अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर उन्हें हवालात जाना पड़ा?संजय सिंह के मामले में मैं इतना ही कह सकता हूँ कि दोनों पति-पत्नी के हालात इतने भी खराब नहीं हुए थे कि दोनों में सुलह की गुंजाईश नहीं रही थी परंतु कुछ सिपहसलारों एवं सलाहकारों के कारण दूरियाँ बढ़ती चली गयी जिसकी परिणति हवालात में जाकर समाप्त हुई।सच कहा गया है ज्यादा पढ़े-लिखे प्रबुद्द लोगों की दुनिया आम लोगों की दुनिया से अलग होती है--------?

ड्रेस गोरखधंधे में डी ए वी भी शामिल हुवा क्या ?

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   ड्रेस गोरखधंधे में डी ए वी भी शामिल हुवा क्या ?
उमेश ओझा  तहलका डेस्क रांची ,
मिस्नरिओ के  सिच्छा  अधिपत्य को करारा जवाब देकर एक नयी सिछण संस्कृति को भारत भूमि में अधिष्ठापित करनेवाला सिछण  संस्थान डी ए वी भी आम स्कूलों के मानिंद छोटे मोटे घोटाले का शिकार हो जायेगा -विस्वास नहीं होता है। पर हकीकत की बानगीओ को आत्मसात करे तो मामले से थोड़ा पर्दा उठता है। झारखण्ड में दो साल पहले सरस्वती विद्या मंदिर में भी ऐसी ही घटना ने दुखद संदेश समाज को दिया। इस बार दयानंद का यह संस्थान पुरे देस में एक साथ ड्रेस के बदलाव की मुहीम चलाकर बता दिया की हमारे यहाँ भी तीसमार लोगो की कमी नहीं है। ग्रोवर जैसे समाजसेवी के मेहनत से सींचे गए इस पौध पर ऐसे लालची भौरे मण्डराएंगे यह विस्वास नहीं होता है। ड्रेस कोड के बदलाव के लिए जो कपड़ो के सैम्पल सामने आये है उनमे मफतलाल का डिज़ाइन 3288 आया है जो अधिकृत मफतलाल के ड्रेस डिज़ाइन  से मेल नहीं खाता है,दूसरे कपडे की डिज़ाइन खटावु मिल की है खटावु मिल बंद हुवे १५ साल से ज्यादा हो गए है। तीसरे शर्ट के कपडे में शैलवेज़ नहीं डाला जाता है शैलवेज़ कोई अपना डलवाता है यानि किसी आदमी ने ऑर्डर देकर यह कपड़ा बनवाया है ताकि मन माफिक रेट तय किया जा सके।ग्वालियर शूटिंग का जिक्र भी है पर ग्वालियर शूटिंग कोई ब्रांड नहीं है ,यह नाम कोई भी दे सकता है।  यानि कोई कपड़ा ब्रांडेड नहीं है ,पहले साल यह कपड़ा किसी भी दूकान ,मिल या डिस्टिब्युटर के यहाँ नही मिलेगा इसके बाद तो  सभी ऑर्डर देकर बनवा लेंगे ,लेकिन पहले साल में ही करोडो का खेला - मेला हो जायेगा। जो कपडे इस साल १०० रु मीटर मिलेंगे वह अगले साल २५  रु मीटर मिलेंगे। ज़ाहिर है की इस बार ही चार गुना पैसे वसूले जा सकेंगे। ड्रेस बेचनेवाले बताते है की ड्रेस बदल गया है अप्रैल से लागु होगा ,पर अभी ड्रेस मांगने पर कहते है -नहीं दे सकता ,क्युकी अभी दे दिया तो डिज़ाइन बनकर अप्रैल तक आ जायेगा ,इसलिए मामले को दबाकर रखा गया है। ड्रेस डिज़ाइन करनेवाली कंपनिया पांच हज़ार से ज्यादा डिज़ाइन बनाकर देश में सैम्पल भेज दिया है पर इन ब्रांडेड कम्पनिओं में से किसी से यह ड्रेस डिज़ाइन नहीं लिया जाना और किसी कंपनी के ड्रेस डिज़ाइन की चोरी कर सामने लाना क्या जताता है ??स्कुल के पुरे भारत में 720 स्कुल है और लगभग  २५ लाख छात्र है। अंदाज़ा लगाया जा सकता है की घोटाला कितने का होगा ?






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भोलुआ ,,,,,,,चिठी ,,,,,,,मुखमंतरी ,,,,,,का ,,,,,,,,,नाम ,,,,,,,,,


                                  ,,ज़रा ,,,,,एक ,,,,,नज़र ,,,,,,,देखो ,,,,,,,ना ,,,,,,,,,



आदरनिये मुखमंतरी रघुबर जी ,
                                                           वालेकुम परनाम। पहिला बार कोय रघुबर मुखमंतरी बना है से पब्लिक का मन में बड़ा खुसी है। आपका ऊपर उम्मीद और बिस्वास दुनो है से आपका माय कसम आप जनता के धोखा नाय दीजियेगा। अब आप मुखमंतरी बनाने का बाद बोले की कोयला चोरी नहीं होगा ,कोय नहीं करेगा लेकिन का ई बात संभव है ? कोयला चोरी तो आपका पुलिस कर रहा है और कोय सिपाही दरोगा नहीं बलिक पुलिस का मुखिया ही शामिल है ,बड़ा नाइंसाफी है और कुछ लोग तो मुखमंतरी का चौखट पर भी पहुंच रखता है और पैदा हुवा है  खाली कोयला चोरी करने का लिये। ऐसे आज ईगो पत्रकार का होटल में छापामारी किया गया जो कोयला चोर है वहा से चार जोड़ा लड़का लड़की के बरामद किया गया ई साबित कर रहा है की आपका बात का डर पुलिसवाला लोग में है ,इसलिए  कोयला से ध्यान बटाने का वास्ते ई गेम किया गया है। सबसे पहिले तो ई बात समझ लीजिये की कोयला चोरी तीन तरह से होता है ,पहिला चोरी जे डाइरेक्ट कोयला चोरी करके किया जाता है ,दूसरा चोरी कोयला कंपनी का कोयला टपाके किया जाता है ,लिफ्टर से लेके कांटा बाबू तक इसमें मिला हुवा रहता है ,तीसरा चोरी सब्सिडी का साथ धोखाघड़ी है ,कोयला के सब्सिडी मारने के लिए गेम होता है ८०० से जयादा कंपनी को सॉफ्ट कोक से लेके स्मोकलेस कॉल बनाने  वास्ते रियायती दर पर कोयला दिया जाता है इस कोयला को ई लोग डाइरेक्ट मार्किट में बेच देते है। कंपनी चालू है इसको दिखाने के लिए चिमनी से टायर जलाकर धुवा निकाला जाता है ,जेतना कंपनी है सबका दिवार इतना उचा होता है की जेल भी फेल है। अंदर का हो रहा है ई कोय नहीं जान सकता है। ई वाला चोरी सबसे बड़ा चोरी है इसको कैसे पकड़िएगा ? काहे की बहुत चालाक आदमी लोग कुदरा से लेके करमनसा तक में अपना कंपनी लगाया है ताकि वहा तक जाने में कोई रोक टॉक नहीं रहे। ई सब कंपनी अपना कोयला को रिडक्सन यानि अनयूस्ड  कॉल के नाम पर बेचते है। साथ ही चोरी के कोयले को भी यही पेपर देकर बेचा जाता है। बाद के दो कम्पनिओं से आपका सी आई डी से लेकर सी बी आई तक को पैसा मिलता है ,पहलेवाला डाइरेक्ट चोरी के धंधे से सी बी आई को छोड़कर सभी वर्ग को पैसा मिलता है सरकार तक जाता है आपका पास भी जायेगा ,ज़रूर जायेगा। अब बताईये की आपका विधायक से लेके मंत्री डी ज़ी पी तक को माल जाता है ,तब कैसे रोकिएगा इस धंधा को ? ऊपर से अब अडानी ,आडवाणी रिलायंस कोयला चोरी करने का वास्ते आ गया है इसको रोकने में आपका ताकत जवाब दे देगा।  कही आप ई आदेश अपना रेट बढ़ावे का वास्ते तो नहीं दे रहे है ? काहे की आजतक जेतना भी पुलिस ,मंत्री ,प्रसासन कड़ा रुख अपनाया वह ज्यादा पैसा लिया ,वर्तमान में रामगढ़ का डी सी ज्यादा प्याज खाया हल्ला हुवा ईमानदार डी सी ,,,उसका रेट बढ़ गया। अब आपका क्या विचार है से  जानिए हम तो एतना दिन में यही सब देख रहे है।
   विशेष फिर कभी आपका
                                                  भोलुआ उर्फ़ भोलानाथ
                                                                                       मासीपीढ़ी हज़ारीबाग़   
लोकल सेल की रंगदारी वसूली पर रोक लगावें मुख्य मंत्री जी----
बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल,गांधीनगर,बेरमो एवं चंद्रपुरा थाना क्षेत्रों में सीसीएल के लोकल सेलों में ट्रकों से वसूली जानेवाली रंगदारी की राशि तीन हजार रूपये पर मुख्यमंत्री रघुवर दास जी रोक लगावें। साथ ही इसकी जांच भी करवाई जाय कि रंगदारी की जो राशि वसूल की जा रही है उसका हिस्सा कहाँ-कहाँ जाता है क्योंकि यह एक ऐसा कारोबार है जिसे अप्रत्यक्ष रूप से कानूनी संरक्षण प्राप्त है---साथ ही लोकल सेलों से फैक्ट्री के नाम पर उठाया जानेवाला पीएलसी का कोयला बिहार एवं यूपी की मंडियों में कैसे जा रहा है इसकी भी जाँच होनी चाहिए---इसके लिए बरही एवं चौपारण में चेकनाका पर लगाम लगानी होगी और कोयला के ट्रकों की जाँच बारीकी से करनी होगी---तभी इस पर लगाम लगेगी ?

 

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