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30 करोड़ का अवैध शराब बिकता है रामगढ में

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     30 करोड़ का अवैध शराब बिकता है रामगढ में 

तहलका डेस्क
रांची
झारखण्ड में शराब सरकार बेचती है ,जबसे यह फैसला आया है शराब के अवैध कारोबारी बल्ले बल्ले कर रहे है क्युकी सरकारी बाबुओ से लेकर मंत्रियो को पटाकर सटा देना आम बात है ,झारखण्ड में अवैध शराब का नया हब रामगढ जिला बन गया है जहाँ से सभी जिलो में शराब  भेजना और बेचना आसान है ,अभी इस जिले से हर दिन एक करोड़ का इंडियन मेक फोरेन लिकर बेच दिया जा रहा है ,खपा दिया जा रहा है ,और शराब मफियावो की पहुच मुख्यमंत्री के दरबार तक है सो उन्हें बचा लिया जाता है ,जब एकाएक छापामारी की गयी तो रजरप्पा -कुज्जू  में 25 लाख का शराब बरामद किया गया आधा दर्ज़न लोगो को जेल भी भेजा गया, लेकिन मुख्य सरगना मुकेस का नाम तक केस में नहीं आया क्युकी  भाजपाई लोगो ने इनकी पैरवी की ,कहा जाता है की दोनों की पैरवी रघुबर दास तक है सो वे किसी को भी बचा सकते है ,हलाकि मुकेश का एक भाई जो मौके से पकड़ा गया उसे जेल जाने से नहीं बचाया  जा सका जो CCL कर्मी भी है ,पुलिस  ने रिमांड पर भी दो लोगो को लिया जिन्होने बहुत सारी बातो का खुलासा भी किया है लेकिन पुलिस उसपर अमल करने की स्थिती में नहीं है क्युकी हर जगह वही मुकेश का नाम आ जा रहा है जिसकी पहुच राज दरबार तक  है ,रामगढ से बोकारो ,हजारीबाग ,रांची और कोडरमा तक माल जा रहा है ,हलाकि सारे रैपर और बोतल पर हरियाणा का मुहर लगा है लेकिन यह आई वाश  है ,यह सारा माल झारखण्ड का ही है और रांची डिस्टिलरी का ही बताया जा रहा है यही से सारा खेल हो रहा है यानी सरसों में ही भूत घुस चूका है ,किसी को शक नहीं हो इसलिए उसमे दुसरे राज्यों का मुहर लेबल लगाकर निकाला जाता है, जिस दिन डिस्टिलरी बंद रहती है या सरकारी छुट्टी होता है ,इसका लेबल मुहर सब कोलकाता से बनकर आ रहा है इसमें बड़ा खेल है जिसमे सरकार सरकारी पदाधिकारी और माफिया का गठबंधन है ,इस गठबंधन में बिहार और झारखण्ड के कई विधायक भी शामिल है ,

25 लाख के 10,000 अवैध शराब की बोतल जप्त मामला दर्ज 
रामगढ़ थाना में सात शराब माफियाओं के खिलाफ दर्ज की गई है प्राथमिकी ।
4 शराब माफियाओं 1, शिवशरण साव उर्फ शिव 2, राकेश कुमार सिंह 3,अरविंद कुमार 4, जमुना साव को पहले ही किया जा चुका है गिरफ्तार । फिलहाल चारों रामगढ़ जेल  में है बंद ।गिरफ्तार शराब माफियाओं के पास से 8 मोबाइल भी जप्त  किया गया है ,
इसके अलावा दर्ज प्राथमिकी में 5,जयराम प्रसाद 6, इंदर महतो ओर 7,मंटू महतो को भी अभियुक्त बनाया गया है  ।
तीनों है फरार ।मुकेश साव (कुजू ),उदय सिंह और रघु साव( रामगढ)सहित कई शराब के धंधेबाजों की भूमिका की पुलिस कर रही है अभी जांच ।धारा 420 / 34 IPC एंड 47 (A) एक्साइज एक्ट के तहत दर्ज की गई है प्राथमिकी ।
फरार शराब माफियाओं की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार कर रही है छापेमारी ।  रामगढ़ जिला के पुलिस कप्तान किशोर कौशल को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने रामगढ़ कुजू और रजरप्पा क्षेत्र में छापेमारी कर 25 लाख रुपए मूल्य के करीब 10 हजार अवैध शराब की बोतलों को जप्त किया था ।जो हरियाणा राज्य की बनी हुई बताई जा रही है उसपर लेबल चिपका है  ,जिसको रामगढ़ जिला सहित झारखंड राज्य के अन्य शहरों और झारखंड से सटे राज्यों में खपाया जाना था अंतर्राज्य शराब माफियाओं की गिरफ्तारी के बाद शराब माफियाओं में खलबली मची हुई है।
विदेशी शराब की 250 पेटी जप्त ।विदेशी शराब की पेटियों को ट्रक में लादकर लाया जा रहा था रामगढ़ ।SP किशोर कौशल को मिली जानकारी के बाद पुलिस ने की कारवाई । कुख्यात शराब माफिया शिवचरण उर्फ शिवा साव,अरविंद साव को पुलिस ने पकड़ा ।कई शराब माफिया फरार । गिरफ्तारी के लिए पुलिस कर रही है छापेमारी ।हरियाणा प्रदेश की शराब को रामगढ़ जिला में खपाए जाने का हुआ खुलासा ।या यूँ कहे की सारा मामला और शक की सुई हरियाणा भेज दी गयी जहाँ जाँच के लिए कोई नहीं जायेगा .
   

झारखण्ड के एक गाँव का दर्द।

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            " झारखण्ड के एक गाँव का दर्द "                                 ****************************

जुगरा में 8 घंटे 
टी पी सिंह 
लिखा किस्मत में हो तो ,खुदा को याद क्या करना ,जहाँ बेदर्द हो हाकिम वहां फ़रियाद क्या करना ?
झारखंड के हजारीबाग में एक गांव है जुगरा ,500घरों के इस गांव की आबादी है 3,000। इस गांव में कुल जमीन 2000एकड़ है । पर कोई जमीन खाली नहीं इस गांव के 95% लोग कृषि पर आश्रित और आधारित है, 5% लोग नौकरी पेशा या अन्य व्यवसाय पर आश्रित है, इस गांव के लोग काफी मेहनती और जुझारू है कृषि ही उनके जरूरतों का व्यवसाय और नौकरी है लिहाजा पूरी तन्मयता से वह कृषि को अपना रोजगार समझते हैं इस गांव से उत्पादित गुड  राज्य और देश ही नहीं विश्व प्रसिद्ध है जाहिर  है यहां के किसान अपने खेतों से कितना प्यार और लगाव रखते हैं इस को बताने की जरूरत नहीं लेकिन अभी इस गांव में राहु की महादशा कालका आगमन हो चुका है, बगल में कोयले की खदान खुल चुकी है वह भी NTPC का और उस खदान से निष्कासित कोयले को इसी गांव के रास्ते बाहर निकालने की कवायद को लेकर कंपनी ने गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, वैसे तो NTPC को इस कोलियरी का  आउट सोर्सिंग का कोई काम दूसरी कंपनी से नहीं करवाना है, लेकिन NTPC खनन का काम त्रिवेणी सैनिक नामक कंपनी को दे दिया है जो जबरन ग्रामीणों की जमीन छीन ले रहे हैं इस जूगरा गांव में त्रिवेणी सैनिक में ग्रामीणों को बिना कोई मुआवजा दिए बिना ग्रामीणों की सहमति के खेत की पेट चीरकर रास्ता निकाल दिया ,

इस रास्ते को देश के पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने खुद कुदाल चलाकर काटा और रास्ते को बंद करने की हिदायत दी, ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता भी लेना है तो गांव के सीमा के किनारे से रास्ता निकालने से खेती प्रभावित नहीं होगी और गांव की कृषि के साथ किसानों की अस्मिता भी बरकरार रहेगी, लेकिन कंपनी गुंडागर्दी की तर्ज पर उनके खेतों का पेट चीरकर हरियाली को रौंदते हुए कोयले के व्यापार को  देशहित का मुद्दा बनाकर किसानों की पीठ पर चस्पा कर  रहा है क्या यही लोकतंत्र है ?क्या यही न्याय है ?क्या यही प्रशासनिक और सरकार की सरकारी प्रक्रिया का दोगलापन चरित्र उजागर करता है, किसानों के सामने यह यक्ष प्रश्न बनकर खड़ा है किसान पिछले कई वर्षों से न्याय की आस लगाए सरकार और सरकारी नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण की मांग कर रहे हैं, 


लेकिन उनकी जायज मांगों को सुनना तो दूर बात करने के लिए कोई तैयार नहीं है, ना ही नेता नाही जनप्रतिनिधि,ना राज्य की सरकार  और ना ही कोई समाजसेवी, ग्रामीण अपनी लड़ाई अब खुद लड़ गए हैं क्योंकि कई नेताओं ने उनके न्याय में दलाली की सेंध लगाई है और किसान दूध से जले आदमी की तरह छाछ भी फूंक कर पीने की अदा में बर्बाद हो रहे हैं, मैं इस गांव में जब पहुंचा हूं तो पत्रकार होने के बावजूद लोगों ने शक की निगाह से मुझे देखा घुरा  और पूछा, क्योंकि वे पत्रकारों की निष्पक्ष पत्रकारिता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे थे बीच-बीच में बात करते अपनी शक को मुझ पर जारी करते थे, लेकिन कई लोगों ने कहा और मेरी बातों पर मेरे व्यक्तित्व पर बहुत सारे सवाल भी आए और जवाब मैंने नहीं जानने वाले ग्रामीणों ने अनजान ग्रामीणों के बीच दिया , बीच-बीच में उन लोगों ने मुझे वहां के सबसे प्रसिद्ध सोंधी गुड़ की महक का पान भी  करवाया और पानी भी पिलाया, कहा यही गुड  हमारी पहचान है और गांव की हरियाली ही हमारी अस्मिता है ,आबरु है, भूख शांत करने की एक दवा है, भगवान की एक दुआ है ,जिससे लोग हमारे हाथों से छीन लेना चाहते हैं और कोई हमारे साथ में नही ,उनकी शिकायत लाजमी थी लेकिन मैं ठहरा एक पत्रकार मेरा काम लड़ाई लड़ना नहीं बल्कि जनता का किसानों का दर्द और उनकी परेशानी जनता के सामने रूबरू करने और सरकार के साथ प्रशासन का आंख खोलना है ,लेकिन स्थानीय प्रशासन राज्य सरकार की दबाव के आगे सच बोलने ,सच कहना और न्याय करने की स्थिति में नहीं क्योंकि राज्य के मुखिया के पुत्र इन कोयला खदानों के ठेकेदार हैं ,रिश्तेदार हैं ,हिस्सेदार है तलबगार है । जाहिर है इस गांव के दर्द में कोई नश्तर चुभो रहा है और न्याय के पुरोधा तमाशबीन बने खड़े हैं ग्रामीण कहते हैं

 कि मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है क्या मेरे हक में फैसला देगा ?




यह बहुत अहम प्रश्न है गूढ़ बात है और बडा सवाल है । मैंने कई लोगों से बातें की उनसे सवाल की उनकी बातों का जवाब पाया लेकिन सभी का नाम नहीं लिख पा रहा हूं क्योंकि फिर वे गुंडा  कंपनी के आंखों की किरकिरी बन जाएंगे उनके ऊपर केस हो जाएंगे बावजूद इसके हम कई लोगों की तस्वीरें आपके सामने पेश कर रहे हैं कई महिलाओं ने खुलकर अपना दर्द अपने गांव की परेशानी को बयां किया कई पुरुषों में कागजात दिखलाए और किस तरह सरकार और सरकारी नुमाइंदे उनके लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं यह प्रमाणित करने की कोशिश की इस गांव की अगल बगल लगभग 13 गांव हैं और सभी गांव की लगभग यही दशा है हलाकि यह गांव अन्य गांवों से भिन्न है पुलिस ने अन्य गांवों में घुसकर महिलाओं पुरुषों बच्चों अतिथियों गर्भवती महिलाओं को भी पीटा , है मारा है ,बेईज्जत किया है और गोली चलाकर उनकी हत्या की  है 



लेकिन इस गांव में पुलिस अभी तक नहीं है इसलिए क्योंकि अभी इस गांव में उनका माइंस बनाने का कोई इरादा नहीं है सिर्फ इस गांव को चीरकर रास्ता बनाना है उनका मकसद और उनका ध्येय है । इस गांव के लोगों ने अपने गांव को बचाने के लिए धरना प्रदर्शन, भूख हड़ताल ,आमरण अनशन यहां तक कि चीता सत्याग्रह भी किया लेकिन अभी तक कंपनी के विचार और उनके निर्देश में कोई बदलाव नहीं आया जबकि ग्रामीणों को अंचल अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक कई बार लिखित आश्वासन दे चुके हैं लेकिन फिल्मी गानों की तरह प्यार वफ़ा तो वादे हैं वादों का क्या?  इसी तरह वादे टूटते गए, अधिकारी मुकरते गए और ग्रामीणों का दर्द यूं ही उन्हेंयक्ष प्रश्न की तरह  सालता रहा।
गाँव की गलियां चौबारा ,सडके ,सब बिना पूछे बताती है की इस गाव में डर कितना है ,हौसला कितना पस्त है ,किसान डर से कही खेती ना भूल जाये ,



हजारीबाग के पूर्व DC ने GM लैंड को बनाया रैयती ,खोला पेट्रोल पम्प

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               हजारीबाग के पूर्व DC 
          ने GM लैंड को बनाया रैयती ,
                खोला पेट्रोल पम्प 

तहलका डेस्क 
हजारीबाग के पूर्व उपायुक्त सुनील कुमार ने अपने प्रभाव से गैर मज़रुवा भूमि को रैयती बना डाला ,साथ ही अपने पत्नी के नाम से HPCL का एक पेट्रोल पम्प भी खुलवा दिया है ,अब इस मामले ने तूल पकड़ना आरंभ कर दिया है लोगो ने सीबीआई जांच की मांग की है ,खाता नम्बर 17 और 57 से तीन प्लाटो में 4.18 एकड़ भूमि हस्तगत की गयी है ,दनुवा भनुवा जंगल में NH 2 शेरशाह सूरी मार्ग पर ज़मीन कीमती है और वर्तमान समय में GM ज़मीन की रशीद कटनी भी बंद है ,बावजूद इसके सभी काम स्मूथली हो गया ,इतना ही नहीं इसका नेचर चेंज कर अवैध ढंग से रैयती बना डाला गया ,बकौल रंजना कुमार यह ज़मीन GM नही रैयती है मैंने माशूक आजम से तिस साल की लिज़ पर ज़मीन ली है ,शिकायत कर केस करने वाले शिकायत कर्ता पर केस करुँगी .
सुनील कुमार पर पहले से NTPC के अधिकारी को पीटने का केस उच्च न्यायलय में चल रहा है .

सॉफ्टवेयर की कारस्तानी से हलकान जनता ,सरकार मूकदर्शक

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      झारखण्ड  में सॉफ्टवेयर की कारस्तानी से                                    हलकान  जनता
                         सरकार मूकदर्शक

तहलका डेस्क 
झारखंड में सॉफ्टवेयर का एक बड़ा घोटाला हुआ है ।इसमें परिवहन कार्यालय और निबंधन कार्यालय दोनों में परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। जनता हलकान हो रही है ,अधिकारी परेशान हो रहे हैं ,और सरकार चैन की बांसुरी बजा रहा है ।बहुत मुश्किल है लोगों के दुखों का बयां कर पाना डीटीओ कार्यालय में हर दिन लाइसेंस बनाने से लेकर उनके रिनुअल करने का जो सॉफ्टवेयर है उसमें इतनी सारी खामियां हैं कि हजारों लोगों का पैसा जमा करने के बाद भी डूब जा रहा है। साथ ही हजारों लाइसेंस बेकार हो जा रहे हैं ।हजारों युवाओं का पैसा जिन्होंने लर्निंग लाइसेंस बना रखा है उनका परमानेंट लाइसेंस नहीं बन पा रहा है। जिससे उनके लर्निंग का पैसा बर्बाद हो जा रहा है ।इसे देखने ,सुनने ,समझने और निदान करने के लिए झारखंड सरकार का कोई नुमाइंदा मंत्री या सरकार तैयार नहीं हैदूसरी तरफ जिला निबंधन कार्यालय जिनमें सॉफ्टवेयर की गलती के चलते दूर-दराज से आए ग्रामीण, गरीब मजलूम अपने बेटे -बेटी की ब्याह करने से भी वंचित रह जा रहे हैं ।या पैसे के अभाव में उनका रिश्ता टूट जा रहा है। सोचिये कि जिस गरीब औरत ,विधवा या अन्य कोई जो 80 किलोमीटर की दूरी तय करता है और उसका रजिस्ट्री नहीं हो पाता है और उसे कहा जाता है कि कल आना फिर कल आने से कल आना और ऐसे महीनों बीत जाते हैं। क्या उसके दुख का अंत है क्या सरकार के पास ?बात  सीधा-साधा है सॉफ्टवेयर के लिए जिस कंपनी को अधिकृत किया गया उसे पैसे लेकर उसके नाकाफी सॉफ्टवेयर को पूरे राज्य में लागू कर दिया गया। जबकि सॉफ्टवेयर में यह जरूरी है कि ग्रामीणों का रजिस्ट्री करने वालों का डाटा फीड हो जाए और जैसे ही लिंक आए वह अपडेट स्वयं हो जाए। लेकिन ऐसा नहीं है ।अपडेट करने के कयास में आगे का काम आगे की कार्यवाही रुक जाती है और सारा निबंधन कार्यालय एक तरह से ठप हो जाता है ।उसी  तरह परिवहन कार्यालय में भी सॉफ्टवेयर की गलती से जितने लोगों का जिलों में लर्निंग लाइसेंस बनता है सभी का समय सीमा समाप्त होने से पहले परमानेंट लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया नहीं हो पाती है ।एक जिले में 150 से 200 लर्निंग लाइसेंस आते हैं जबकि अपडेट आधे ही हो पाते है ।यह  बात हर जिले के जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक को पता है ।लेकिन जनता की गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाने के लिए ना तो कोई तत्पर है और ना ही तैयार। क्या झारखंड में ऐसे ही चलेगी सरकार ?

सी एम के भाई ने गोलगप्पा वाले को पीटा

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      सी एम के भाई ने  गोलगप्पा वाले को पीटा 

तहलका डेस्क 
सूबे के मुखिया के सहोदर की टाटा नगरी में तूती बोलती है सो थानेदार कप्तान से लेकर खोमचा वाले से भी लड़ते रहते है ।इसबार एक गुपचुप वाले को पीट डाला ।भरत साव नामक खोंमचेवाले ने सिदगोड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है ।लेकिन किस थानेदार की ओकात है राज्य के प्रधान के भाई पर मामला दर्ज कर दे ।अब भरत साव को सावगिरी दिखाकर मोदी जी से मिलना होगा तभी शायद कुछ हो ।

झारखण्ड में बारबुडा ट्रेंगल का राज

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      झारखण्ड में बारबुडा ट्रेंगल का राज  

उमेश ओझा
तहलका डेस्क रांची
झारखण्ड का शासन प्रशासन ठेकेदारी विकाश लाईजनिंग सभी काम तीन लोगो के जिम्मे है यह तिकड़ी है राज्य के मुखिया का बेटा ,पुलिस मुखिया का बेटा और मुख्य नौकरशाह  का बेटा .तीनो की तिकड़ी कमाल का डेवलपमेंट दिखा रहे है ,तीनो भाजपाई ज़मीन से जुड़े है इसलिए कोई डर नही कोई भय नहीं ,कौन क्या कर सकता है जब किसी बड़े अधिकारी का बेटा ,राज्य मुखिया का बेटा मुख्य आईएएस का बेटा कोई काम कर रहा हो ? काम वैध हो या अवैध कोई कुछ नहीं बोल सकता है ,होल्डिंग टैक्स वासुल्नेवाली कम्पनी रितिका इनलोगों के मातहत है इसलिए भाजपा नेताओ को भी माँ बहन कर देते है ,सरकार ने बोल दिया कंपनी को हटा दिया जायेगा पर वही के वही है  ,क्या जुबान है सरकार की ? किसी भी ठेकेदारी को लेने से पहले इन तीनो बारबुडा ट्रेंगल को प्रणाम करना जरुरी है चढ़ावा के बगैर काम नहीं होगा ,ट्रांसफर पोस्टिंग बहाली से लेकर दाखिला दिलवाने के लिए इनलोगों के पास आपको जाना पड़ेगा ,कोई ठेकेदार आजकल चीफ इंजीनियर से भी नहीं डरता है खुले आम अविध काम करता है मानदंड और मापदंड के खिलाफ काम करता है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं क्यों ?हर अधिकारी के आदेश को इनलोगों ने ठेंगे पर रख हुवा है ,यहाँ तक की टंडवा से नक्सली द्वारा वसूले गए पैसे की वसूली भी करने यह लोग जाते है ,वह भी इनके आदेश से हईवा डम्पर ट्रक चलते है और सभी का कमिसन इनके हाथ में आता है ,जितने भी रेलवे सायडिंग में हेरफेर हो रहा है उसका कमिसन भी इनके हाथ है ,यानि झारखण्ड की सरकार और जंगल की सरकार दोनों इनके हाथ में है ,
एक के पिताजी भाजपा मुखिया है दुसरे के पिताजी भाजपा नेता और तीसरे के ससुर भाजपा नेता ,कुल मिलकर भाजपा की सरकार कांग्रेस की तरह बेटों के दामन से गन्दा हो रहा है ,

जाने अपना राशिफल