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बाज़ार समिती भंग करने के लिए करोडो का सौदा ,मंत्री मालामाल

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झारखण्ड में मार्केटिंग बोर्ड की कवायद पर लगाम लगा 
                    करोडो की डीलिंग हुई
,                                      कृषि  मंत्री  मालामाल 
टी पी सिंह  तहलका
जी हां सरकार ,झारखण्ड सरकार के इस कार्यवाही को क्या कहेंगे ,आत्म हत्या ,? भ्रस्टाचार ,,,व्यभिचार ,,,या बनिया का व्यापार ?बहुत  कठीण प्रश्न है ,१९६० में वर्ल्ड बैंक की मदद से गठीत मार्केटिंग बोर्ड को ख़त्म करने के लिए व्यापारी वर्ग बहुत दीनो से लगे  थे  ,योगेन्द्र साव जब कृषि मंत्री थे तभी इसपर बड़ी डीलिंग हुई थी पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसपर लगाम लगा दिया सो उस समय की डीलिंग ख़त्म हो गयी ,अभी जैसे ही भाजपा के नेतृत्व की सरकार बनी इसपर कृषि मंत्री ने पहले की डीलिंग को थोडा बड़ा रेट देकर हामी भर दी ,,हलाकि कृषि सचीव नितिन मदन कुलकर्णी इसपर सहमती नहीं दे रहे थे पर उनके ऊपर मुख्य सचीव और मुख्यमंत्री का दबाव था इसलिए उन्हें भी हामी भरनी पडी ,हलाकि इसके लिए मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था की कमिटी गठीत कर दी है उनके रिपोर्ट आने के बाद ही कोई निर्णय लिया जायेगा पर ऐसा नहीं हुवा ,देवाशीष गुप्ता IAS के नेतृत्व में तीन सदस्यी कमेटी गठीत की गयी थी जिसने अपने रिपोर्ट में कहा था की बाज़ार समिती अपने मूल स्वरुप में ही काम करे ,इसकी जरुरत है ,तब क्यों भंग किया गया मार्केटिंग बोर्ड ,हलाकि अभी भंग नहीं किया गया है बल्कि मामूली एक प्रतिशत लग रहे टैक्स को ख़त्म किया गया ,इसमें मोटा माल बनाया गया ,बिहार में २००६ में लालन सिंह कृषि मंत्री ने ८५ करोड़ की मंडवानी कर बोर्ड को भंग कर दिया ,अब इतने दीनो बाद फीर से बिहार में इसकी आवस्यकता महसूस की जा रही है अब फीर से वहा बोर्ड गठीत होगा ,जबकि पूरे देश में मार्केटिंग बोर्ड दो प्रतिशत से १९ प्रतिशत तक बाज़ार कर लिया जाता है केवल केरला को छोड़कर ,अब रणधीर सिंह मंत्री कृषि विभाग ने इसे भंग किया हालाकि यह उनका अकेले का फैसला नहीं है बल्कि मोटे माल का एक हिस्सा रास्ट्रीय अध्यछ अमित शाह तक पंहुचा है ,उनके पिछले दौरे  में ही यह सब फिक्स हो गया था जब उनने कहा था कार्पोरेट को मदद नहीं करेंगे ,तीस करोड़ की डीलिंग हुई जिसमे आधा मंत्री -आधा रास्ट्रीय अध्यछ ,जब राजनाथ जी अध्यछ थे तब इसी तरह झारखण्ड में अनैतिक वातावरण पैदा कर हर माह मोटा माल ले गठरी बांधकर ले जाते थे,, अब यह काम अमित शाह जी को सौपा गया है ,जबकि झारखण्ड मॉडल एक्ट में २% के कर का प्रावधान किया गया था जो सेन्ट्रल गोर्मेट का था राज्य ने इसे स्वीकार भी किया था , यानी अभी के कृषि मंत्री को योगेन्द्र साव से भी खराब कहा जा सकता है ,सभी जिलो में करोडो के सरकारी भूखंड है भवन है उनको क्या करना है ? क्या यह मुफ्त में व्यापारियो के हाथ दे डालने का खेल चल रहा है ,रांची के पंडारा में धनबाद ,रामगढ में करोडो के भवन है एक एक गोदाम करोडो के है उनका क्या होगा ?
           अब अगर टैक्स नहीं लेंगे तो सफाई कौन कैसे करेगा ? अधिकारी कर्मचारी का वेतन कौन कहा से देगा ?पेयजल शेड का निर्माण कौन कैसे करेगा ? यार्ड में निर्मित संरचना का मेंटेनेंस कौन करेगा ?जबकि एक प्रतिशत का कर व्यवसायी कोई अपने घर से नहीं देता था वह क्रेता से वसूला जाता था ,रांची के हर एक  दूकान पचास पचास लाख के है जिसे व्यापारियो ने थांग रखा है जबकि यह किसानो के हीत के लिए किसानो का है ,और यह पूरे देश में वर्क कर रहा है पर केंद्र की सरकार व्यापारियो के हीत के लिए राज्य की सरकार व्यापारियो के पीठ पर खड़ा होकर किसानो के पीठ में छुरा भोकने का काम कर रही है ,अब हाट बाजारों की नीलामी कौन करेगा ? हाट बाज़ार से राज्य के २५००० किसानो को रोजगार मिलता था वह ख़त्म हो गया ,सभी यार्ड में sfc और FCI का गोदाम है अभी राज्य में २४०००० MTका स्टोरेज है इसका क्या होगा ?१०० करोड़ के डवलपमेंट का काम चल रहा है ,
अब ज़रा इनकी संपत्ति पर भी गौर फरमाया जाए  कहा किस जिले में  बाज़ार समिती की औकात क्या है ?
रांची ६० एकड़ ,धनबाद ५६ एकड़ ,रामगढ ४५ एकड़ ,पलामू ३० एकड़ ,गढवा ३५ एकड़ ,जमशेदपुर ५२ एकड़ ,दोघर २८ एकड़ ,गिरिडीह ३२ एकड़ ,चकुलिये १८ एकड़ ,कोडरमा २४ एकड़ ,प्कुर ३० एकड़ ,साहेबगंज २६ एकड़ ,
बोकारो ३४ एकड़ ,खूंटी १६ एकड़ ,हजारीबाग २४ एकड़  में फैला है यानी अरबो रु की सम्पत्ती है बाज़ार समिती के पास ,पर मफियावो और बड़े व्यापारियो की नज़र इसपर पहले से ज़मी थी ,उन्होंने मंत्री के साथ सौदा किया और जो काम भ्रष्ट सरकारे नहीं कर सकी वह तथाकथीत रघुबर दास की तथाकथीत इमानदार सरकार ने कर डाला ,इन्हें बिहार से भी थोडा सबक सिखना चाहिए था ,पर किसानो का हीत रहे तब तो यहाँ तो किसान का खून भी चूस लेना है नियती का नज़ारा यह है .

झारखण्ड ,मुख्यमंत्री रघुबर के गृह शहर में दो दो आयकर आयुक्त

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,                    झारखण्ड ,मुख्यमंत्री रघुबर के गृह शहर में दो दो आयकर आयुक्त ,                                     चौकानेवाला मामला

टी पी सिंह  तहलका 
झारखण्ड है भैये यहाँ सब कुछ जायज़ है ,जब मुख्यमंत्री के नाक के नीचे आयकर आयुक्त रंगदारी कर रहा है तो दुसरे शहरो की बात क्या होगी ? यहाँ स्वेताभ सुमन नामक आयकर आयुक्त २००७ से पदास्थापीत है लेकिन इनका तबादला मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश हो गया ,बावजूद इसके इन्होने जमशेदपुर में ही अपना सारा कुनबा स्थापित कर रखा है,और यह सब जुबानी नहीं बल्कि बड़ा बड़ा बोर्ड लगाकर काबीज है ,जबकि यहाँ पर बीर बिरसा एक्का नामक आयुक्त का पदस्थापन है ,और रिश्वत वसूलना ,काम करवाना ,रंगदारी भंजना सुमन साहब का काम है ,क्या यह सब मुख्यमंत्री महोदय को मालूम नहीं ,,और अगर मुख्यमंत्री को यह मालूम नहीं मतलब वे नाक के नीचे की सड़ांध से भी बेखबर है ,तो सत्ता का हिसाब कैसे चलेगा ? या फीर रघुबर बाबा ही के इशारे पर यह सब होता है ? क्या होगा पूरे राज्य का जब हमारे मुखिया के घर के बगल में इतना बड़ा भ्रस्ताचार हर दीं हो रहा है ,इनकी दम पर कई बेनामी सम्पत्ती बनायीं गयी है ,हर तरफ इनके रंगदारी का डंका बाज़ रहा है ,कोई देखनेवाला नहीं कोई सुननेवाला नहीं ,जबकि देश के वित्त मत्री को भी इसकी सूचना सिकायत के रूप में की गयी है ,बेनामी नाजायज़ अरबो रु की संपत्ति बना रखी है ,इनका एक रिसोर्ट भी है जिसमे लड़किया बुलाई जाती है ,रिसोर्ट को भी लोग आयुक्त के रिसोर्ट के नाम से जानते है की यहाँ कभी छापा नहीं पड़ेगा ,सफेद्पोस से लेकर अधिकारी तक इनके यहाँ जल्वाफरोज़ होते है ,मज़े की बात तो यह है की इनका आवास जिले के पुलिस कप्तान के बगल में है ,और ये लाल बत्ती लगी गाडी से न सिर्फ घुमाते है बल्कि शान से उसपर जमशेदपुर आयुक्त का बोर्ड भी लगा रखा है ,व्यपारियो में भयादोहन होता है ,जबकि रघुबर दस हर बार भाषण देते नहीं थकते की अधिकारी राज ख़त्म होगा और किसी का भयादोहन नहीं होगा और उनके अपने जिले में यही काम धड़ल्ले से हो रहा है ,साहब के कुछ बड़े इन्वेस्टमेंट जो जमशेदपुर की शोभा बढा रहे है ,इनके अवैध कमाई का डंका बराबर से बजाता रहा है ,२००७ में अपराधियो ने इनका अपहरण कर लिया था एक बड़ी डीलिंग और फिरौती के बाद इन्हें अपराधियो ने तीन दींन  के बाद मुक्त किया था ,इनके विरूद्ध कई मामलो की फाईल दबी पडी है जिसे सेट करने के लिए ये सबको मैनेज करने के लिए सब तरह का ऊपर नीचे का खेल खेलते रहते है ,
      सोनारी आदर्श नगर
      आदर्श नगर में तिन रूम का falat

       सोनारी में ही २००० sqft का ऑफिस और अलग से एक मकान
       आदित्यपुर में हेवन टावर में १९०० sqft ६०४ no छठे माले पर
        अदित्यासिन्दिकेट में एक ५००० sqf का plot
       शेरेपंजाब चौक आदित्यपुर  स्थित  दयाल सिटी में ३ कमरे का मकान 



झारखण्ड में भ्रस्टाचार की माया ,,,,धुप और छाया

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,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,इमानदार मंत्री पर भारी भ्रटाचार ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,झारखण्ड में जारी है व्यापार
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टी पी सिंह (tahalka )
झारखण्ड सरकार ने आज अपने पांच प्रमोटी अधिकारिओ को जिलाधिकारी बनाया है ,इसमें एक जिलाधिकारी है मनोज कुमार जिन्हें बोकारो जिले का जिलाधिकारी बनाया गया है ,अब मनोज कुमार की बानगी देखिये ,इन्होने बोकारो में रहते ही ज़मीन घोटाला कराया था ,उस समय वह LRDC थे ,अंचलाधिकारी के खारिज आदेश को मनोज कुमार ने पारित कर दिया था क्युकी वह मामला हेमंत सोरेन द्वारा अवैध तरीके से खरीदी गयी CNT एक्ट की ज़मीन थी ,२५ एकड़ अवैध तरीके से ज़माबंदी के एवज़ में मनोज कुमार शिबू सोरेन के चौथे पुत्र बन गए इन्हें रांची का SDO बना दिया गया रिवॉर्ड देकर ,वहा फीर थोडा हंगामा बरपा तो इन्हें नगर निगम में बैठा दिया गया ,वहा इनने नितिन मदन कुलकर्णी के रहते अवैध पैसे वसूलना सुरु किया ,बीस रु अपने लिए २० रु प्रति फीट हेमंत के लिए ,,सी पी सिंह विधायक रांची ने इनका फायिल बनाया और फीर इन्हें यहाँ से जाना पड़ा ,अभी इनने सी पी सिंह को जग्मोहनी जडी घोलकर पिला दिया ,उन्हें भी खरीद लिया और अवैध कार्यो का पुलिंदा ( काला चिठा ) फाईल सी पी बाबु इमानदार मंत्री से हासील कर लिया ,तथाकथित इमानदार मंत्री ने अभय दान दिया तो बोकारो के डी सी बना दिए गए ताकि हेमंत के अवैध ज़मीन की फायल को दुरुस्त किया जा सके ,साथ ही रघुबर के स्वजातीय भी है उनकी मुराद भी पूरी हो जायेगी ,वे हर तरफ बनिया जिलाधिकारी देखना चाहते है ,अब JMM से भाजपा अलग कैसे है ,दोनों मौसेरे भाई की भूमिका में है ,ताकि JMM सबसे बड़ा विपछ भाजपा सरकार की गलतियो को नज़र अंदाज़ करते रहे फीर कौन बोलेगा ? आज शाम को ही यह सारी बात और कच्चा चिटठा का पुलिंदा लिए एक अधिकारी एक वरिस्थ पत्रकार के पास गए पत्रकार वह पुलिंदा लिए मनोज कुमार के पास पहुच गया की अगर खबर छपी तो आपका नोटीफिकेसन रद्द हो सकता है ,तुरंत माल ढीला हुवा फाईल की डीलिंग हुई और पत्रकार का मोबाईल बंद हो गया ,अब मनोज कुमार बोकारो जाकर कोयला लोहा पत्थर ज़मीन बेचेंगे कौन क्या कर लेगा ? यह है अछे दीन की सुरुवात ,,,,यह है भाजपा की सरकार THE पार्टी WITH DIFFRENCE समझे सरकार ,,,,,,,,,,,,

रेलवे की दलाली से कराहते ग्रामीण

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                रेलवे की दलाली से कराहते ग्रामीण 
तहलका डेस्क
चौकिये नहीं पर बात सच है ,हज़ारीबाग़ के बांका गाव में शिवपुर -टोरी रेलवे लाईन के लिए ज़मीन २००३ -०४ में  अधिग्रहीत की गयी थी। लेकिन वन विभाग से NOC नहीं मिलने के कारन लाईन रद्द हो गयी ,अब NTPC यहाँ डम्पिंग यार्ड और रैक लोडिंग पॉइंट बना रहा है। रेलवे को इससे भारी मुनाफा होगा सो रेलवे ने यह ज़मीन NTPC को बेच दी। नियमतः यह ज़मीन सरकार को या रईयतो को वापस होनी चाहिए अधिग्रहण के सरकारी प्रावधानों के तहत ५ साल तक अगर कोई काम नहीं होता है तो ज़मीन वापस होना चाहिए यहाँ तो बारह साल बीत गए ,इसी नियम के तहत कोल ब्लॉक वापस किये गए ,एक तो टाइम बार्ड दूसरे कम रेट। यहाँ दोनों बाते प्रभावी है। ज़मीन का रेट मात्र ४८०० रु प्रति कट्ठा /चार डिस्मिल के लिए दी गयी। क्या यह रेट जायज़ है ? यहाँ के किसान काफी मेहनती है ,उनकी ज़मीन छीन गयी तो सलगावां ,कदमा ,छड़वा डैम गोंडा डैम के पास किराये पर ज़मीन लेकर खेती कर हरियाली पैदा कर दिखाया है। ऐसे किसान की ज़मीन मात्र ४८०० रु कट्ठा यानि एक लाख बीस हज़ार रु प्रति एकड़। उसमे भी अभी तक १०६ किसानो को मुआवज़ा मिला भी नहीं है ,अभी फरवरी माह में भू अर्जन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक १८८ /१५ के ज़रिये इनको मुआवज़ा भुगतान करने के लिए रैयती ज़मीनो के लिस्ट जारी किये है ,जिसमे किसी भी किसान का नाम दर्ज़ अंकित नहीं है क्यों ?जब ज़मीन रैयती है तो रईयत कहा गए कहते है हमारे पास भू अभिलेख नहीं है ,तो ये किसके पास होंगे ,,,,मोदी जी के पास ?और अब इन किसानो को २०१५ में १८.८७ एकड़ ज़मीन का मुआवज़ा ४८०० प्रति कठा लेने का दबाव बनाया जा रहा है वह भी तब जब माननीय उच्च न्यायलय ने संज्ञान लिया नहीं तो पुलिस के लाठी के बल पर कब्ज़ा करने की कवायद जारी है। बाकि के २० एकड़ गैरमजरूआ खास जिसपर १९१७ से खेती कर रहे किसान बेदखल कर दिए गए ,उन्हें कहा गया सरकारी ज़मीन है मुआवज़ा नहीं मिलेगा ,जिसपर ९ कुवा तिस सालो से सिचाई के काम आ रहा था। और इस ज़मीन को NTPC को कमाने के लिए दे दिया गया जो वर्षो काबिज़ है उनको बाबा जी का ढुल्लू ,उन्हें क्यों नहीं हकीयत और मालिक समझा जा रहा है ? जबकि इसी गाव में ग्रामीणो को डराकर धमकाकर बगल के अस्सी एकड़ ज़मीन शहर के भू माफियाओ ने यह कहकर ओने पौने दाम में खरीद लिया की सरकार तो पैसा देगी नहीं हम जो देते है रख लो। ताकि इसपर बाद में बड़ा व्यवसाय स्थापित किया जा सके ,अगर सरकार ,NTPC या कोई भी इन भू माफियाओ से ज़मीन लेती है तो उनको अच्छा मुआवज़ा भी मिलेगा क्युकी सारा कुछ उन्हीका किया धरा है ,गाव में दो गुट बनवा दिया है ,NTPC DGM की पिटाई में भी इन्ही दलालो की भूमिका अग्रणी है। अब रेलवे और NTPC दोनों उच्च न्यायलय में हलफनामा दायर करने जा रहे है की काम रेलवे का है मेरा नहीं ,लेकिन काम रेलवे का है तो इसका टेंडर कब और किसके आदेश से निकला ,और सरकार तथा रेलवे का कितना पैसा कब  आया ? क्युकी यहाँ के काम में ६६% हिस्सा राज्य सरकार को ३३% रेलवे को देना है इस बात पर भू अर्जन पदाधिकारी बंका राम चुप्पी साध गए। NTPC के ज़ी एम RS राठी  फोन नहीं उठा रहे है। 



भोलुआ की पाती ,,,,,,,,,,,,मुखमंतरी का नाम

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जरा ,,,,,,,,,,,,,,,एक ,,,,,,,,,, नज़र,,,,,,,,,,,,,,, देखो,,,,,,,,,,,, ना

             भोलुआ की पाती ,,,,,,,,,,,,मुखमंतरी का नाम
आदरनिये रघुबर जी ,
                              वालेकुम परनाम।  आपको दास नहीं लिखे काहे की अब आप दास नहीं रहे मालिक हो गए है ,राज का मालिक ,,जनता का मालिक ,,सरकार का मालिक  इसी वास्ते खाली रघुबर जी लिखे बुरा नहीं मानना है। अबरी चिट्ठी लिखने का खास कारन है की आप रोज रोज बोल रहे है की ५० हज़ार मास्टर का बहाली करेंगे ,,,अरे भाई ई मास्टरवान का बहाली कहे वास्ते कर रहे है ,इससे कोई फायदा नहीं है। ईगो सीधा हिसाब है की पचास हज़ार मास्टर का हर महीना वेतन बनेगा एक अरब पचास करोड़ रूपया। इससे बढ़िया है की आपलोग ५० हज़ार लडकन जे पढ़ाय करनेवाला है उसको दे दीजिये पांच हज़ार रु महीना खरच आवेगा केवल पच्चीस करोड़ रूपया। अगर जादा चाहते है तो एक लाख बच्चा को दीजिये पचास करोड़ खरच आवेगा ,साथ में बच्चा अच्छा इसकूल में पहड़ सकेगा ,और रोज रोज हड़ताल, धमकी वेतन बढ़ाओ का हंगामा भी नहीं होगा। सरकारी स्कुल में कौन अपना बच्चा को पढ़ाना चाहता है ?? ज़रा ईगो सवाल तो जनता को पूछिये ,,अगर नहीं तब ई बहाली केकरा वास्ते कर रहे है ,,इतना मास्टर का वेतन में आप पांच लाख बच्चा को हर महीना ५ हज़ार रु वज़ीफ़ा दे  है ,,पांच लाख परिवार हर साल आपके सरकार का वफादार होगा ,,इसलिए रघुबर बाबू ज़रा ध्यान दीजिये ,,इस मास्टरवान का चक्कर में मत पढ़िए ईसब सरकार का एसेट्स नहीं लेब्लिटी है। इसलिए प्लान कैंसल कीजिये मास्टर लोग सबसे खराब जीव जंतु हो गिया है। कोई अब इस लोग अपना बेटी का शादी भी नहीं करना चाहता है। काहे की इसमें सबसे बड़ा बाधा है रिजर्वेसन और उसको आप ख़तम नहीं कर सकते है लेकिन इवाला नया फार्मूला जे हम दिए है उसमे सब लोग चारो खाना चित्त हो जायेगा।
खैर आगे फिर कभी 
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आपका भोलुआ उर्फ़ भोलानाथ 
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,माँसीपीढ़ी ,हज़ारीबाग़ ८२५३०१ 

झारखण्ड में थाना बनाने में लूट का व्यापार

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    झारखण्ड में थाना बनाने में लूट का व्यापार 

टी पी सिंह  तहलका 

झारखण्ड में पुलिसः की बानगी देखिये ,इनके भवन बनाने के लिए एक अलग विंग है - पुलिस भवन निर्माण निगम। यहाँ के सबसे बड़े अधिकारी होते है MD ,अब यह पद आई ज़ी या ऊपर के अधिकारी से सुशोभित होता है। यहाँ बिना मोटे रिस्वत के कोई परिन्दा पर नहीं मारता है ,काम होता है ज़िलों में ,पर वहा के पुलिस कप्तान या थानेदार का कोई रोल नहीं होता ना ही घटिया निर्माण या गलत होने पर कुछ बोल सकता है। अभी वर्तमान में राज्य के अंदर मॉडल थाने बन रहे है। स्टेमित है २ करोड़ की और काम है मात्र अस्सी लाख का यानि सवा करोड़ का बंदरबाट होता है। उसके बाद भी निर्माण देखिये घटिया ही नहीं अस्ताबक्र। दो प्रतिसत निर्माण को छोड़कर किसी भी निर्माण को अच्छा नहीं कहा जा सकता है। पीलर डांस मुद्रा में ,दिवार शयन मुद्रा में और ठेकेदार रिस्वत मुद्रा में। इस निर्माण को प्राइवेट ठेकेदार मुनाफा कमाकर अस्सी लाख में बना देगा वह भी अच्छी फिनिशिंग अच्छे रंग रोगन साथ। लेकिन यहाँ तो बंदरबाट करनीहै  भाई सो लूट सके तो लूट। इस निगम में एक ख़ास जाती के लोगो का साम्राज्य है ,उस कॉकस से सभी घबराते है ,अभी यहाँ देशमुख साहब एम डी थे ५० करोड़ का नगद तोहफा लेकर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए। यही हाल पुलिस के नीव में मट्ठा पटा रहा है। 


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