मुख्य लेख

फर्जी मुठभेड़ के आईने में ,,,,,,,नक्सल त्रासदी का दंश झेलता झारखण्ड

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,

फर्जी मुठभेड़ के आईने में ,,,,,,,नक्सल त्रासदी  का दंश                           झेलता  झारखण्ड 

उमेश ओझा
तहलका डेस्क रांची
नक्सली आतंक के सिधांत के सिधांत पर काम करते है ,निशाना कौन होगा इसकी परवाह नहीं ,कौन मरेगा इसकी चिंता नहीं देश में समाज में पुलिस में  भय और आतंक कायम हो बस उनका सिक्का चलता रहेगा।  ठीक अब  इसी सिधांत पर पुलिस चलने लगी है खासकर झारखण्ड में ,आतंक फ़ैलाने और पैसा कमाने में वे नक्सलियो को  पीछे छोड़  चुके है ,कोई मारा जाये इससे मतलब नहीं ,,दोसी मरे निर्दोस मरे ,गरीब मरे अमीर मरे ,बस मारना  है ताकि उनकी उपलब्धि बरकरार रहे ,पैसा वे नक्सलियो से भि ले रहे है उनकी मदद भी ले रहे है उनको मदद भी कर रहे है ताकि चोर चोर मौसेरे भाई का द्रिस्तांत  कायम रहे। आईये इसी सन्दर्भ में आपको पलामू लिए चलते है जहा पिछले आठ जून को पुलिस  की बड़ी उपलब्धि का डंका पुरे देश में बजा ,पर भीतर सी सच्चाई  सुनने पर मानवता शर्मशार हो जाती है ,मानवाधिकार  आयोग बौना हो जाता है और पुलिस की मर्दानगी किन्नर के शक्ल में तब्दील हो जाती है।
        लातेहार जिले के नेवार गाव  का एक पारा सिछक उदय  यादव जो पुलिस की मुखबिरी के आरोप में नक्सलियो द्वारा पिटाई का शिकार हुवा ,फिर घर छोडकर भागना पड़ा और मनिका में शरण लेना पड़ा जहा से पिचले सात जून को उसका अपहरण हो गया घर से , दुसरे दीन पता चला की वह पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया ,पुलिस का तथाकथीत दलाल पुलिस के हाथो मारा जाये ,बात कुछ हजम होनेवाली नहीं है ,फीर पता चला की उस पारा टीचर के साथ उसके फुफेरे भाई को भी पकड़कर मार दिया गया ,दोनों अपने छोटे बच्चे के साथ घर के चाट पर सोये थे जहाँ से उनको खीचकर JJMP के लोग सतबरवा थाना छेत्र के बकोरिया जंगल में  ले गए और मौत के घात उतार दिया ,फीर अन्य लोगो के साथ मिलाकर पुलिस को उपलब्धि गिनने के लिए दे दिया गया ,सारे लोग चुप है क्युकी JJMP के आतंक के सामने किसी की नहीं चलती है जबकि सब जानते है की यह एन्कोउन्टर फर्जी है। और JJMP को पुलिस के साथ उनके कानून और बन्दूक का भी साथ मिल रहा है ,मृतक पारा टीचर उदय की पत्नी ने झारखण्ड के गृह सचीव को एक लिखित आवेदन देकर उसके साथ हुवे अन्याय को न्याय में बदलने की गुहार लगायी गयी है ,देखना यह दिलचस्प होगा की ज़हां DGP, मुख्यमंत्री और राज्य के आलाधिकारी इसको बहादुरी की संज्ञा से नवाज़ रहे है वहां क्या गृह सचीव एक मामूली सिछक की  विधवा को न्याय देने की हिम्मत जूता पाएंगे ? सवाल बड़ा है और जवान सिर्फ एक है जो आप हम और पूरा राज्य जनता है। लेकिन सच के आईने में झाँकने के लिए आपको यह विडिओ देखना होगा
video




भोलुआ की पाती मुखमंतरी का नाम

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,

जरा एक नज़र देखो ना,,, ,,,,,,,,,,भोलुआ की पाती                                   मुखमंतरी का नाम 

आदरणीय मुखमंतरी महोदय
                                        वालेकुम परनाम। आगे राज में सब खुसल  मंगल ठीके है। लेकिन आपका राज में आपका बोला हुवा ,लिखा हुवा बात कोय नहीं मान रहा है ,काहे ? आप बोलते है की कोयला चोरी नहीं होगा -हो रहा है। आप बोलते है नक्सली को मार के भगा देंगे -रोज आपका आदमी का साथ बैठके रंगबाजी कर रहा है ,दारू पि रहा है। आप बोलते है नक्सली सबको मारके  ख़तम  कर देंगे -नक्सली तो नहीं आम आदमी मार दिया जा रहा है। घूसखोरी नहीं चलेगा - जमके चल रहा है। ज़मीन  का दलाली बंद होगा - रोज सरकारी ज़मीन  बिक रहा है।
   इस बार ईगो नया डिसीज़न केबिनेट से पास हुवा है की पचास करोड़ का लागत  से पुलिस अनुसन्धान संस्थान बनेगा। अरे भाय  पहले से सत्तर करोड़ का लागत से हजारीबाग में पुलिस अकादमी बना ,लेकिन हियाँ  पर IG  का पोस्टिंग नहीं हुवा है इसलिए इसको अकादमी का दर्ज़ा नहीं मिला है। यहाँ दस गो इन्स्पेक्टर का पोस्ट है लेकिन काम कर रहा है केवल चार। आपका पास संसाधन का कमी है फिर ई पचास करोड़ का बिल्डिंग कमिसन वास्ते बन रहा है का ?कहे की जो है वही नकारा है फिर अगला काहे बनेगा ?पचास करोड़ में पांच पर्सेंट का हिसाब से ढाई करोड़ रु होता है यह कौन लेगा ? जिसका हाथ से आपको सुरछित मिले ?काहेकि  पुलिस विभाग में तिस पर्सेंट कमिसन है ,चालीस पर्सेंट एक्स्ट्रा रेट से एस्टिमित बनता है जहा पर आप पुरनका DGP  राजीव बाबू को भेजे है ,उनसे किसका किसका सेटिंग है भाई ? आपको  अगर केंद्र से  पैसा मांगता है तो आप हमलोग पर जोड़के टैक्स लगा दीजिये पर अइसन बेईमानी नहीं कीजिये मंत्रीजी ,आपका बाल बच्चा पर पड़ेगा ,और आपतो  अच्छा आदमी का गिनती में आ रहे है फिर गन्दा काम से तौबा कीजिये।
,,,,,,,,,,खैर आगे आपका ,,,,,,
भोलुआ  उर्फ़ भोलानाथ
,माँसीपीढ़ी  हजारीबाग

विधायक अनंत सिंह " सियासत की जंग "

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,


        विधायक अनंत सिंह " सियासत की जंग "

तहलका डेस्क 

बिहार के मोकामा विधायक अनंत सिंह की अपहरण व हत्या मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और एसटीएफ अब उनके खिलाफ सबूत जुटाने में जुट गई है। कहा जा रहा है कि पटना पुलिस अनंत सिंह के खिलाफ टाडा एक्ट लगाने की कोशिश में है।
पुलिस इस संबंध में 1993 में मुंबई श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों के बाद फिल्म अभिनेता संजय दत्त पर लगे टाडा का अध्ययन कर रही है। मैगजीन बरामदगी मामले में उन पर टाडा एक्ट के तहत मामला दर्ज करने पर विचार किया जा रहा है। अगर अनंत सिंह पर टाडा लगता है, तो वह इस बार जल्दी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। 
इधर पटना पुलिस अनंत सिंह पर अब तक दर्ज सभी मामलों की समीक्षा करने में जुटी है। वर्ष 2007 तक अनंत सिंह पर कुल 23 मामले दर्ज थे। जून 2015 में उनके ऊपर दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। हालांकि केवल सात ऐसे मामले हैं, जो अनंत सिंह के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। 
इसी सिलसिले में सिटी एसपी (मध्य) चंदन कुशवाहा ने बताया कि विधायक को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। सरकारी आवास से इंसास और एसएलआर के मैगजीन मिलने के बाबत सचिवालय थाने में विधायक अनंत सिंह पर आर्म्स एक्ट की प्राथमिकी दर्ज की गई है। शनिवार को पुलिस ने कोर्ट से प्रोडक्शन वारंट लिया है। इस बीच, रविवार को भी अनंत सिंह के पटना स्थित सरकारी आवास पर पुलिस ने छापेमारी की। बवाल करने वाले उनके समर्थक भी एसटीएफ के निशाने पर हैं।
ग्रामीण एसपी हरि किशोर राय के मुताबिक शनिवार को भी एसटीएफ ने बाढ़ के अचुआरा, बेढना और हरोली गांव में छापेमारी की। लदमा से कुछ संदिग्ध पकड़े गए। 
इधर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पटना पुलिस से अनंत सिंह की संपत्ति का ब्योरा मांगा है। पुलिस ने बाढ़ में पुटुस के माता-पिता का भी डीएनए सैंपल लिया है। 
सैंपल को विधायक के घर से मिले कपड़ों पर लगे खून से मिलान कराने के लिए जांच को भेजा गया है। वहीं दूसरी ओर पुटुस के परिजनों का बाढ़ कोर्ट में सीआरपीसी 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया है।


अनंत सिंह ने जीवन में पहली बार अच्छा काम किया ,किसी युवती के साथ जबरदस्ती छेड़ -छाड़ ,उसके इज्जत का हनन करना कितना बुरा है अभी तो यह मामला ऐसा है की ना निगलते बन रहा है ना उगलते बन रहा है और सच्चाई पर्दे भीतर से झांक रही है ,महिला संगठनो को सच्चाई बाहर करना चाहिए ,हालांकि इससे उस मोहतरमा के इज्जत की रुस्वाई होगी पर ऐसा करनेवाले की सजा मौत ही होती है। भले ही अनंत सिंह ने अतीत में गलतिया और बहुत सारे पाप किये है पर यहाँ उनका कार्य सराहनीय है वरना कानून क्या सजा देगा ? समाज में ऐसा करनेवालो को जबतक युही सजा नहीं मिलेगी महिलाओ के साथ अपराध बोध ख़त्म नहीं होगा।पर जातिवादी व्यवस्था ,राजनीती ,कूटनीति ,आगामी चुनाव की धमक ,पार्टिओ के तालमेल ने सच्चाई गला घोटकर हत्या कर डाली।

बिहार चुनाव से पहले हत्या अपहरण और गिरफ्तारी का समीकरण एक नयी राजनितिक दिशा की ओर इंगित करता है यह संयोग नहीं राजनीती का एक राज है ,जिसको जनता के दिमाग में दुसरे तरीके से डालने की कवायद जोरो पर है
वैसे गुंडागर्दी की उम्र  ज्यादा नहीं होती है उसमे बदलाव करना पड़ता है ,समीकरण बिठानी पड़ती है पर इस दाव पेच से अलग रहते अनंत सिंह ने सिर्फ भुमिहरी की बदौलत अपने साम्राज्य का सिक्का बराबर चलने की कोसिस की इसलिए अब हारते नज़र आ रहे है ,इन्हेसभी फ्रंट पर एक साथ मोर्चा खोलने की गलती नहीं करनी चाहिए थी पर यही गलती इनके गले में फांस बंटी नज़र आ रही है ,राजनीती के सियासत दानो ब लड़ गए समझो .ने इन्हें चक्रव्यूह में फास लिया है ,लिहाज़ा अभिमन्यु की जगह इन्हें कृष्ण बनाना होगा तभी इनकी खैर है इनकी जीत है वरना इनके वर्चस्व के दीन अ

अडानी के झारखण्ड पर मेहरबानी का राज

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , , ,

      अडानी के झारखण्ड पर  मेहरबानी का राज 
तहलका डेस्क 
अडानी बाबा ने झारखण्ड पर कृपा की है ५० हज़ार करोड़ के निवेश का MOU किया है ,पर  यह उपकार नहीं यह  उनका नहीं झारखंडी लोगो  का माल है ,वैसे ही जैसे माल महाराज के मिर्जा खेले होली ,कैसे? आईये तफसील से बताते हैक्या है लूट की सच्चाई  ,अडानी को झारखण्ड में दो कोलियरियो मगध और आम्रपाली में आवूट सोर्सिंग का काम मिला है , अडानी रेड्डी ग्रुप की कंपनी से काम  करवाते है क्युकी नक्सलियो से उनका अच्छा  तालमेल है ,मगध झारखण्ड इंडिया नहीं एशिया का सबसे बड़ा कोलियरी है ,इसमें प्रति क्यूबिक मीटर १०० रु का रेट फिक्स किया गया है जबकि सारा खर्च मुनाफा काटकर ५० रु का आता है ,फीर यह उपकार क्यों ? और किसने किया ? HSCL नामक कंपनी CCL की अन्य कोलियरियो में ५७ रु के रेट से काम कर भी रहा है फीर CCL में ही दो दो रेट क्यों ? क्युकी अडानी बाबा को मोदी बाबा का  आशीर्वाद प्राप्त है ,मगध से इस कंपनी को हर साल बीस मिलियन क्यूबिक मीटर कोयला  निकलना है ,यानी ५० रु अवैध रेट की दर से २०० करोड़ रु हर माह एक कलियारी से अडानी लूटकर ले जा रहे है काम करने की कमाई है सो अलग ,यानी तीन हज़ार करोड़ एक कोलियरी से लूट रहे है सालाना, दो दो कोलियरी है यानी छः हज़ार करोड़ की लूट ,और यह लूट बीस साल चलेगा यानी एक लाख बीस हज़ार करोड़ का लूट और दूसरी तरफ ५० हज़ार करोड़ का झुनझुना दिखाकर हमारे ऊपर उपकार करने का नौटंकी पेल रहे है ,खेल यही नहीं रुकता है आगे का हाल भी कुछ इस प्रकार है यहाँ का कोयला इन्हें ११०० रु प्रति टन के हिसाब से यानि एक रु दस पैसा की दर से सब्सिडी पर मिलता है ,अपने उपयोग से चार गुण ज्यादा कोयला उठाते है आदानी और बाकी का कोयला खुले बाज़ार में ७००० से लेकर  ८००० रु प्रति टन के हिसाब से बेच देते है ,अब अगर सारा हिसाब आप जोड़ेंगे तो कमाई लाखो करोड़ में चला जायेगा ,पर इन सब बातो को जनता के सामने लाने के लिए ना तो किसी विधायक के पास फुर्सत है ना ही अकल ना ही हिम्मत और ना ही बोलने की सलाहियत ,सारे लोगो का दिमाग ट्रांसफर पोस्टिंग तक ही सिमित है ,बचे सांसद तो ज्यादातर भाजपा के है सो उनके सामने मोदी के नाम से हवा निकल जाती है ,फीर बोलेगा कौन ?और इसी तरह झारखण्ड का माल लोग कमाकर नहीं लूटकर भाग रहे है ,कोई कुछ ना बोले इसलिए नक्सलियो का साथ लेते है लेवी देते है जनता को खामोश करते है नेता को बड़ा गिफ्ट और चारो तरफ सन्नाटा ,,वाह रे विपछ वाह रे नेता और वाह री जनता ? लूट लो झारखण्ड 



दूसरे अब प्राइवेट कोयला कम्पनिओं को कोयला बेचने का भी अधिकार होगा ,यह कोयले के राष्ट्रीयकरण के बाद सबसे बड़ी भूल है जो जानबूझकर कार्पोरेट घरानो को फायदा पहुचाने  के लिए किया गया है ,क्युकी  राष्ट्रीयकरण के बाद कंपनी को सिर्फ अपने काम के लिए कोयला खोदने का अधिकार था वे खुले बाज़ार में कोयला नहीं बेच सकते थे ,इससे उनके स्वेच्छा चरिता  पर लगाम लगा रहता था थोड़ा बहुत अधिक कोयला कोड़कर  वे चाोरी  छुपे बाज़ार में अनयूस्ड  कॉल के नाम से बेचते थे ,टाटा  जैसी कंपनी भी कोयले की चोरी के चलते सरकार के सामने नत्मस्तक  रहती थी,अपने स्लरी के साथ कोयला चुरकर उसे अनउस्ड कॉल के नाम से बाजार में बेचती थी। पर अब यह मज़बूरी ख़त्म हो गयी मोदीजी की सरकार ने उन्हें बाज़ार में खुले आम जिस दर से कोयला बीके , बेचने का अधिकार सरकार से दे  दिया है, जितना  ताकत होगा उतना कोयला कम्पनीवाले कोडेंगे ,जो कोयला ५० साल चलना चाहिए था उसे १० -१५ साल में ही ख़त्म कर देंगे  ,इससे सरकार को ,राज्य को ,देश को ,घाटा है ,पर इन्हे इससे क्या ? मोदी जी सबसे बड़े राष्ट्र भक्त है कोयला बेचने से क्या होगा कोड़कर बेच दो कल झारखण्ड के लोगो के पास न खेती होगी ना ही वन बस भिखमंगे की तरह रहना है मगन। 

मारे गए पलामू में १२ नक्सली

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,

     झारखण्ड में एक बार फीर नक्सली हलकान 
                                              मारे गए पलामू में १२ नक्सली 
तहलका डेस्क
पुलिस और नक्सलियो के बिच झारखण्ड में चल रहे लुका छुपी के खेल में एक बार फीर नक्सलियो को मात खानी पडी है ,इस बार उनकी मौत रईसी के आचल में हुई, १२ नक्सली वातानुकूलित स्कोर्पियो में जा रहे थे की JJMP को इसकी सूचना मिल गयी और उन्होंने पुलिस को सटीक सूचना देकर काम तमाम करावा दिया ,पहाड़ो जंगलो नदियो नालो की ख़ाक छानने वाले जब ए सी में बैठेंगे तो उनकी मौत निश्चीत है ,अब JJMP इलाके में इसके एवाज़ में आम लोगो से जो रुक्का और लेवी वसूलेगा उस दर्द से कोई वाकिफ नहीं होना चाहता है ,और पुलिस उनके कार्यो को हर कदम पर जस्टिफाय करने की कोसिस कर रही है पर TPC और JJMP के वर्चस्व वाले इलाके में आम आदमी की बोलती बंद हो गयी है ,


पलामू:झारखंड के पलामू जिले में पुलिस और सीआरपीएफ केसंयुक्त कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गए हैं। यह मुठभेड़ मंगलवार तड़के हुई। पुलिस के मुताबिक, लातेहार और पलामू जिले में पोखरी इलाके में स्कॉर्पियो वाहन पर पुलिस ने फायरिंग की। वाहन में बैठे 12 नक्सली मौके पर मारे गए। उनसे पुलिस ने आठ राइफल और 250 कारतूस व कुछ अन्य हथियार बरामद किए हैं। बताया गया है कि मरने वालों में वह नक्‍सली भी शामिल है, जिसने दो साल पहले एक पुलिसकर्मी की हत्‍या करने के बाद उसके पेट में बम प्लांट किया था।
वैसे अंदर खाने की खबर है कि जेजेएमपी ने पुलिस को माओवादियों की गतिविधियों की सूचना दी थी। उनकी सूचना पर ही पुलिस और सीआरपीएफ ने इस मुठभेड़ में सफलता पाई है। नक्सली संगठन जेजेएमपी (झारखंड जनमुक्ति परिषद) के बारे में कहा जाता है कि इसे पुलिस और सीआरपीएफ का सहयोग मिलता रहता है और पुलिस ने ही इसे माओवादियों के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल के लिए खड़ा किया है। झारखंड में जेजेएमपी और टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) दाे ऐसे संगठन हैं जिन्हें पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ लड़ाई के लिए खड़ा किया है। इनमें संगठन से बगावत कर अलग होने वाले नक्‍सली शामिल हैं। झारखंड के कई हिस्सों में इनकी पकड़ अच्छी है और ये लेवी वसूला करते हैं। ये दोनों संगठन पुलिस पर कभी हमला नहीं करते।


मारे गए नक्सलियों में से कुछ की पहचान हुई है। दो नक्सलियों की पहचान मनिका थाना के नेवार के पारा टीचर उदय यादव और एरिया कमांडर अनुराग जी उर्फ डॉक्टरजी के रूप में हुई है। अनुराग पर झारखंड पुलिस ने दस लाख रुपए का इनाम रखा था। उसने 2013 में पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद एक मृत जवान के पेट में बम प्लांट किया था।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस इलाके में नक्सलियों की गतिविधि चल रही थी। इसी बीच सोमवार की रात सूचना मिली थी कि यहां नक्सलियों का एक दल निकलेगा। इसके बाद पुलिस और सीआरपीएफ की एक टुकड़ी वहां पहुंची। इसी दौरान वहां से एक स्‍कॉर्पियो गाड़ी गुजरी जिसमें नक्सली बैठे थे। जवानों ने गाड़ी पर फायरिंग की। दोनों ओर से करीब तीन घंटे तक फायरिंग हुई जिसके बाद 12 नक्सली मारे गए।नक्सली जिस गाड़ी से जा रहे थे उस पर पश्चिम बंगाल का नंबर प्लेट था। WB 60E 2011 नंबर की इस गाड़ी के मालिक की पहचान भी हो गई है। गाड़ी पश्चिम बंगाल के मंटू साह व एन झरना सरकार के नाम पर दर्ज है।झारखंड में पिछले तीन साल के दौरान सुरक्षा बलों ने 50 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया है। नक्सली हिंसा के कारण 2000 से अब तक राज्य में 1200 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।दुमका में 20 अप्रैल 2014 को नक्सलियों ने एक पुलिस वाहन को निशाना बनाया था। इसमें छह पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उस वक्त लोकसभा का चुनाव हो रहा था। हमले के बाद नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान तेज हो गया था। लेकिन मंगलवार तड़के जैसी मुठभेड़ नहीं हुई थी।


झारखंड के सभी 24 जिले नक्सलवाद से प्रभावित माने जाते हैं। हालांकि, पिछले कुछ साल में सुरक्षा बलों के अभियानों के कारण नक्सलियों पर अंकुश लगा है। लेकिन नक्सलियों के 17 छोटे गुट राज्य में सक्रिय हैं।और छोटे नक्सली संगठन पुलिस की शह  पर जनता का शोषण कर रहे है ,इस मामले में भी JJMP  ने इन लोगो को पकड़कर मार डाला  ऐसी चर्चा है ,१२ नक्सली के गाड़ी में मारे जाने के बाद भी एक खून का कतरा  गाड़ी में नहीं  गिरना , कई लोगो को घर से पकड़कर JJMP  के नक्सलिओ ने लाया बाद में उनकी लाश भी मिली ,जहा नक्सली का शव  पड़ा था वहा खून नहीं होना इस बात को बल देता है ,सूचनाये मिल रही है हम उसका खुलासा भी करेंगे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,CONTIN,,,,,

कोयले की कमाई के लिए गैंग वार

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,

             कोयले की कमाई का गैंग वार 
तहलका डेस्क
झारखण्ड के हजारीबाग में २ जून को दींन  दहाड़े १०.४५ बजे हजारीबाग का कोर्ट परिसर थर्रा उठा ,जजो  के हाथ से कलम छुट गए वकील भागने लगे पुलिस अपनी बन्दुक और जान बचाने के लिए इधर उधर छुपने लगे ,कोलाहल और धुवे से ऐसा गुबार निकला की आग राजधानी रांची तक दस्तक दे गयी .मामला संगीन था क्युकी AK 47 जैसे घातक हथियार से कोर्ट कैम्पस में गोली चलना कोई मामूली बात नहीं थी ,इसके बाद तो यहाँ मुख्यमंत्री की ताकीद पर आई जी से लेकर DGP तक एक एककर आने लगे बार कौंसिल भी अपने वकीलों की रछा के लिए कारवाही करने से लेकर दबाव डालने में पीछे नहीं रहा ,
 असल में झारखंड के हजारीबाग ,बोकारो ,रामगढ ,धनबाद ,चतरा,लातेहार ,गिरिडीह जिले में सामानांतर सरकार चलती है ,कोयला तस्करी रुक जाये तो शायद सरकार गीर जाये ,इसमें खाखी से लेकर खादी और कलमघिस्सू पत्रकार से लेकर जंगल की सरकार तक शामिल है सो कही से कोई चीख पुकार सुनाई नहीं देती है जाहिर है पिछले 25 वर्षो से कोयला तस्करी यक्छ प्रश्न बनकर गिरता उठता सम्हलता और फीर सामने नामुदार होता रहा है जिसमे कई नेता ,मंत्री ,विधायक ,पुलिस वालो के खून गिरे है धरती लाल भी हुई हंगामा भी हुई पर फीर वह यक्छ सामने खड़ा दिखाई देते रहा है , पर इस बार का मामला कुछ अलग है ,संगीन है और सोचने को विवस करनेवाला है क्युकी मारा गया सुशील श्रीवास्तव जेल में बंद था पेशी के लिए कोर्ट में आया था लोगो को सूचना थे की वह भाग सकता है भगाया जा सकता है या उसके दुसमन उसे मार सकते है इसकिये उसकी सुरछा में १४ जवान स्वचालित हथियारों के साथ लगाये गए थे ,पर कोर्ट कैम्पस में जब उसपर गोलिया चली तो सारे हथियारवाले जवान अपनी जान बचाने में व्यस्त दिखाई दिया इसलिए हत्यारा बड़ी आसानी से दिवार फांदकर निकल गया और हथियार छोड़ गया की आपलोग इसे देखकर संतोस करो  डरो और हमारी आतंक की कमाई के कोयले को हवा देते रहो ,


,,,,,,,,,,,,,,,,,,कोर्ट की हत्या ने कठघरे में खड़ा किया सबको ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
हजारीबाग कोर्ट में हुई २ जून की हत्या ने न सिर्फ पुलिस और सुरछा पर प्रश्न खड़ा किया है बल्कि समाज ,सरकार ,पुलिस ,खुफिया तंत्र के सामने दर्ज़नो सवाल खड़े कर दिए है ,जिसका उत्तर इमानदारी के साथ कोई भी नही दे सकता है ,हत्या के बाद खुलासा हुवा की इनकी रंगदारी २ करोड़ महिना की थी ,तो क्या २ करोड़ सुशिल स्वयं खा जाते थे ,या यह सब कई लोगो में बटता था ,अगर बटता था तो वे लोग कौन है जो इनसे हिस्सा बटाकर इनको समर्थन देते थे ,और आज वे कहा है ? उनके नाम का खुलासा क्या कभी हो सकता है ?झारखण्ड की पुलिस और यहाँ की तथाकथीत इमानदार सरकार में इतनी हिम्मत ,,,,,,इतनी ताकत है की वे इन नामो का खुलासा करे ? कोई माय का लाल नहीं जो इन नमो को सार्वजनिक कर सके ,,ज़ाहीरहै भविष्य में अपराधियो के साथ साथ जज ,वकील ,पुलिस नेताओ की हत्या भी इसी तरह के सेटिंग से होती रहेगी ,,
,,,,,भोला पाण्डेय और सुशिल श्रीवास्तव की हत्या एक ही तरीके से की गयी पुलिसवालों की निगेहबानी में उनकी हाथ के नीचे और कोई पुलिस हताहत नहीं ,,तो क्या दोनों हत्याए एक ही गैंग ने करवाई है जिसको किसी बड़े शातिर पुलिस का संरछन प्राप्त है ?
,,,,,सुशिल की हत्या के बाद उसको दफनाने के क्रम में दर्ज़नो रौंड गोलिया चली ,कसम खायी गयी की बदला लिया जाएगा ,,,बरोबर लिया जाएगा ,,,,कहा पुलिस की भी है मिलीभगत ,,,तो क्या पुलिसवाले भी मारे जायेंगे अपराधी गैंग के साथ साथ ,पुलिस यानी सरकार को खुली चुनौती इन मफियावो के तरफ से ,किसकी शह पर ?और पुलिस मुह टाक रही है ,,,सारा खेल कोयले की काली कमाई का है ,जिसमे सभी के दामन दागदार है ,


,,,,,,,,,सुशील की अन्तिम यात्रा में कोई पुलिस क्यों नहीं ,,,,,,,,,,,
जब सारा महकमा जान रहा था की इसके साथ बहुत सारे डॉन जुड़े है तो खुफिया विभाग के लोग या पुलिस के जवान क्यों नहीं थे वहा ? ताकि एक साथ सभी लोगो की तोह मिल सके ,इसका मतलब है की माफिया गिरोहों की जानकारी पुलिस नहीं रखना चाहती है ,क्युकी उनसे बहुत सारा लें देन भी होता रहता है ,जब इस बाबत डी जी डी के पाण्डेय से पुछा गया तो उनका जवाब था हम विडिओ फूटेज मंगवा रहे है ,इसका मतलब साफ़ है की इशारो को अगर समझो राज को राज रहने दो ,केवल हत्यारा पकड़ा जाये बस पुलिस की ड्यूटी ख़त्म आगे एनी गिरोहों को टारगेट नहीं करना है काम होने दो ताकि पुलिस की आमदनी बनी रहे ,विशाल सिंह ओरंगाबाद जो मधु कोड़ा का करीबी माना जाता है ,इसकी इन मफियावो से कैसे तालमेल हुई ? जो आज की तारीख में बड़ा स्तर माना जाता है ,


हजारीबाग कोर्ट की घटना को लेकर वकील और जज दोनों चिंतीत है हजारीबाग ही नहीं रांची बार कोंसिल के लोग भी हजारीबाग में आकर मीटिंग कर रहे है ताकि वकीलों की सुरछा को चाक चौबंद करने पर बल दिया जा सके ,पर क्या यह संभव है की वकीलों जजो को full प्रूफ सुरछा मुहैया कराया जा सके ?? कतई नहीं क्युकी दोनों समुदाय के लोगो में इगो प्रोब्लम सबसे ज्यादा है ,कोई जज गाडी से उतरकर पैदल अपने इजलास तक नहीं जायेंगे ,,,कोई वकील सुरछा में तैनात संतरियो की बात नहीं मानेगे और यही से चुक होती है ,बार एसोसिएसन के लोग लाख इस बात की दुहाई दे दे पर सभी सदस्य इस बात को मानने के लिए तईयार नहीं होंगे ,वह तैनात पुलिसकर्मी बार बार रुसवाई में ज़ीने को मजबूर होते है ,यही सबसे बड़ी कमजोरी है ,हम सुरछा की बात तो करते है पर सुरछाकर्मी के आदेशो का बराबर उलंघन करते है ,हमने झारखण्ड में पुलिस को ,,बोडिगार्ड को ,,संतरी को मौगा बनाकर रखा दिया है ,ऐसे में उससे अछे कार्य की कल्पना क्यों करते है ,किसी आदमी को बोडिगार्ड नहीं चाहिए उसे उसका नौकर चाहिए ,उससे सब्जी मंग्वावो ,उससे पानी पिल्वावो ,उससे बच्चा खेल्वावो और ज़ब सुरछा में कोताही होकर गोलियों से चलनी हो जावो तो बच्चे कहेंगे खराब पुलिस दिया था ,उसे कभी भी सुरछा के मद्देनज़र इस्तेमाल नहीं किया जाता है क्यों ?और फीर हम यही रोना रोते है ,तो फीर चाहे वो न्यायलय के बड़े वकील हो या ज़ज़ उन्हें ऐसी हकीकतो का सामना करेंगे जिसका भविष्य काफी भयानक है ,

,,,,,,हजारीबाग का हाई प्रोफाईल कोर्ट ज़हाँ ऐतिहासीक सेन्ट्रल जेल से दुर्दांत अपराधी ,नक्सली ,आतंकवादी हर दीं पेशी के लिए आते है ,और वहा एक बड़ी गाडी ,AK 47 ग्रेनेड ,अंशु गैस और अन्य हथियारों का ज़खीरा लेकर आसानी से घुस जाते है ,क्या यह सुरछा लेप्स नहीं है ,पुलिसवालों ने गोली भी चलायी पर पचास मीटर भागते किसी अपराधी को गोली नहीं लगना क्या बताता है ?अपराधी दर्ज़न भर की संख्या में थे पर कोई भी पकड़ में नहीं आ सका ,कोर्ट परिषर में हर समय पचास हथियारबंद पुल्कर्मी होते है ,पर मन से गिरे अपने भाग्य को कोसते हुवे हर दीं ड्यूटी करते है की हमारा कही भी तबादला करा दो ,कोर्ट से मुक्ती दिला दो दो चार कमानेवाला स्थान दिला दो ,इसी उधेड़बुन में उनकी एफिसिएंसी ख़त्म हो जाती है और जाब वो गोली चलते है तो अपराधी को निशाना साधने पर वकील को गोली लग जाती है ,कोयले के कमाऊ जिले में अपराधी से लेकर पुलिस तक का ध्यान सड़क पर कोयले की गाडी में होता है ड्यूटी पर नहीं 
SUSHIL SRIVASTAVA की डेड बॉडी और उसका बेटा सदर अस्पताल में हंगामा मचाते ,अभी से रियासत सम्हालने का तेवर कई फोटोफ्राफरो को गलिया दी बाद में काबू में आया ,पुलिस के सामने यह तेवर तो बाद में क्या होगा ,भोला पाण्डेय और सुशील श्रीवास्तव की अदावत और गैंग वार में कई लोग मारे जा चुके है ,भोला पाण्डेय का भतीजा किशोर पाण्डेय भी जमशेदपुर में २०१४ में मारा गया ,फीर चुनाव से पहले लखन साव को भोला पांडे के लोगो ने मारने की कोसिस की पर उसका अन्ग्राछाक मारा गया चुनाव के पहले हथियार ज़मा नहीं करना भी एक अपराध होता है पर उससे यह भी पूछताछ नहीं की गयी ,लखन साव और किशोर पाण्डेय के मोबाईल के काल डिटेल्स निकलने से कई सफेद्पोस चेहरों से भी नकाब उतरेगी ,पर यह सब करेगा कौन ? जेल से चल रहे साम्राज्य को राज्य सरकार भी नहीं रोक सकी इसका मतलब क्या है ?
,,,,,,,हजारीबाग का हाई प्रोफाईल कोर्ट ज़हाँ ऐतिहासीक सेन्ट्रल जेल से दुर्दांत अपराधी ,नक्सली ,आतंकवादी हर दीं पेशी के लिए आते है ,और वहा एक बड़ी गाडी ,AK 47 ग्रेनेड ,अंशु गैस और अन्य हथियारों का ज़खीरा लेकर आसानी से घुस जाते है ,क्या यह सुरछा लेप्स नहीं है ,पुलिसवालों ने गोली भी चलायी पर पचास मीटर भागते किसी अपराधी को गोली नहीं लगना क्या बताता है ?अपराधी दर्ज़न भर की संख्या में थे पर कोई भी पकड़ में नहीं आ सका ,कोर्ट परिषर में हर समय पचास हथियारबंद पुल्कर्मी होते है ,पर मन से गिरे अपने भाग्य को कोसते हुवे हर दीं ड्यूटी करते है की हमारा कही भी तबादला करा दो ,कोर्ट से मुक्ती दिला दो दो चार कमानेवाला स्थान दिला दो ,इसी उधेड़बुन में उनकी एफिसिएंसी ख़त्म हो जाती है और जाब वो गोली चलते है तो अपराधी को निशाना साधने पर वकील को गोली लग जाती है ,कोयले के कमाऊ जिले में अपराधी से लेकर पुलिस तक का ध्यान सड़क पर कोयले की गाडी में होता है ड्यूटी पर नहीं ,

यह है संतोष पाण्डेय । विकास तिवारी के खासमखास इन्होंने बताया की मुन्नू ठाकुर है मुख्य शूटर सुशिल श्रीवास्तव हत्याकांड में। मुख्य सरगना विकास तिवारी अभी भी पकड़ से बाहर ।
,,,,,,,यह बात अब खुल गयी है की भोला पाण्डेय की हत्याके बाद उनके भतीजे किशोर उर्फ़ के पी ने सुशिल की हत्या के लिए बिहार के शूटरो को सुपारी दी थी ,लेकिन वह नहीं जनता था की उसकी सुपारी भी बिहार के ही शूटरो को दी गयी है और कदमा में उसकी दीन दहाड़े हत्या कर दी गयी ,,इसके बाद सारे रंगदारी के मामले सुशिल के खाते में आने लगे तो रियासत की कमान विकास तिवारी ने सम्हाली और उन्ही शूटरो से साथ गाठ की जिनको बयाना दिया गया था ,और एक बड़ी डील यानी एक ड्राम की हुई ,और तीन महीने से रेकी होती रही ,हलाकि किशोर के जिन्दा रहते भी रेकी हुई थी उस समय खुफिया विभाग ने यह जानकारी अपने हेडक्वाटर को दी थी ,और इसीके बाद सुशिल की सुरछा बधाई गयी थी ,उसे जेल से ही पेशी देने की बात की गयी थी पर वह अपनी रियासत को बढाने ,अपने बेटे पत्नी से मिलने ,वसूली का हिसाब लेने और नयी सुपारी लेने देने के लिए कोर्ट आता था ,उसके एक बार कोर्ट आने में २५ हज़ार का खर्च आता था और एक नवाब की तरह सिपाही उसकी खतीरदारी करते थे ,लेकिन विकास तिवारी ने सारे दिल से बढाकर एक बड़ी दिल की ताकि उसके AK47 के गोलिओ को कोई व्यवधान नहीं डाले ,और जिस तरह से भोला पाण्डेय और किशोर की हत्या करायी गयी उसी तर्ज़ पर सुशिल की हत्या करादी गयी और पूरा हजारीबाग खामोश हो गया ,
,,,,,,,,,AK47 से हजारीबाग में यह तीसरी हत्या है ,पहली हत्या JPCके बादल की कोसुम्भा में की गयी ,उसकी भी सुपारी ही दी गयी थी ,दूसरी हत्या गुड्डू गंझू की बेंदी में की गयी वह भी सुपारी किलिंग ही थी ,और यह तीसरी हत्या २ जून को की गयी और तीनो हत्याए कोयले की काली कामेi के लिए की गयी ,यानी कोअले की काली कमाई के लिए अब हजारीबाग में गरज रही है बंदूके .पुलिस है तमाशबीन ,,,,,




जाने अपना राशिफल