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झारखण्ड की महिमा न्यारी- सीबीआई पर निगरानी भारी

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            झारखण्ड की महिमा न्यारी  
                  सीबीआई  पर निगरानी  भारी 

तहलका डेस्क रांची
झारखण्ड में कोयले की कालिख से मुह और हाथ काला कर चुकी सीबीआई अब हर जगह मात खा रही है यानी उनके मातहत और अधिकारी के दामन पर दाग लगता जा रहा है ,इस बार राज्य के APDRP  योजना में एक कंपनी के काले कारनामो को जांच  निगरानी को जब भ्रस्टाचारी नहीं खरीद पाये तो सीबीआई के साथ मिलाकर खेल खेला और निगरानी की जांच को ही रुकवा दिया ,इससे लगता है की झारखण्ड की मीट्टी में जो भ्रस्टाचार के अवयव है उनसे अच्छी फसले  भी रोगग्रस्त हो जा रही है ,आपके सामने प्रस्तुत है 10. 89  करोड़ के अधिक भुगतान  की तह खोलता हुवा यह रिपोर्ट :-
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,भ्रष्टाचार के आगे सरकार ने घुटने टेके,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

राज्य के निगरानी ब्यूरो को कमजोर करने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का मामला प्रकाश में आया

है. राज्य सरकार द्वारा एक ऐसे मामले में निगरानी जांच पर रोक लगा दी गयी है जिसमे राज्य के निगरानी

ब्यूरो द्वारा अभियुक्तों के विरुद्ध काण्ड सत्य पाते हुए निगरानी कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है.

इससे सरकार के भ्रष्टाचार-विरोधी छवि को धक्का पहुंचा है. एक ओर तो सरकार निगरानी विभाग को मजबूत

बनाने की कवायद कर रही है, वही दूसरी ओर भ्रष्ट ताकते उसे कमजोर करने की तरकीब में सफल होते नजर

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ए पी डी आर पी परियोजना के जमशेदपुर पैकज में एजेंसी आर पी सी

एल को रु 10.89 करोड़ के अधिक भुगतान का मामला महालेखाकार की रिपोर्ट में आने के बाद विद्युत् बोर्ड ने

इसकी जांच की. जांच में कई पदाधिकारिओं की संलिप्तता सामने आने के बाद बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष शिव

वसंत के आदेश पर सचिव सुमंत कुमार सिन्हा द्वारा निगरानी ब्यूरो में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. राज्यपाल के

तत्कालीन सलाहकार श्री वी. एस. दूबे के आदेश के बाद निगरानी ब्यूरो द्वारा कांड संख्या ०२/२०११ दर्ज कर

जांच प्रारंभ कर दिया गया. अनुसंधान के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निगरानी ब्यूरो द्वारा डब्ल्यू एन

के होरो, मुख्य अभियंता, एस सी श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता, उमेश कुमार, वित्त नियंत्रक, निरंजन राय,

वित्त नियंत्रक, वी पी दूबे, निदेशक वित्त, तथा डी महापात्रा, उप लेखा निदेशक के विरुद्ध अभी हाल में ही

आरोप पत्र दाखिल किया गया है.



सूत्रों का कहना है की इस काण्ड के अनुसंधान में लगातार रुकावट पैदा करने की कोशिश की गयी है.

निगरानी ब्यूरो द्वारा वर्ष २०१३ में ही अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति मांगी गयी थी पर

अभियुक्तों के प्रभाव में यह टलता रहा. यहाँ तक की बोर्ड से स्वीकृती होने के बाद भी इसे निगरानी ब्यूरो को

सूचित नहीं किया गया था. बाद में ब्यूरो के कड़े रुख के बाद झारखंड ऊर्जा विकास निगम के महाप्रबंधक

(कार्मिक) ने अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की. इसके बाद ही आरोप पत्र दाखिल किया

मधुसूदन मित्तल द्वारा दायर पी आई एल संख्या १७९३/२००१ में माननीय झारखंड द्वारा बोर्ड के

गतिविधियों के सी बी आई जांच का आदेश दि २८.०३.२०११ को दिया गया था. इस आदेश का सहारा लेकर

अभियुक्तों द्वारा इस काण्ड की जांच रुकवाने का प्रयास किया जाता रहा है.

दिनांक १२.०९.११ को सी बी आई के डी. एस. पी .श्री ए के झा ने बोर्ड एवं ब्यूरो को पत्र लिखा कि

ए पी डी आर पी के उक्त पॅकेज में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है एवं प्राथमिकी गलत दायर हुई है. चूँकि उस समय

तक निगरानी जांच में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों की पुष्टि हो चुकी थी, अत: इस बाबत सी बी आई से

पत्राचार किया गया. पत्रांक ३४४ दिनांक २१.०१.२०१३ द्वारा सी. बी. आई. ने स्पस्ट किया कि उनके द्वारा

APDRP स्कीम की कोई जांच नहीं की जा रही है. डी. एस. पी. सी. बी. आई. के उपरोक्त पत्र के सम्बन्ध में
पत्राचार करने पर बाद में सी बी आई ने दि ०८.११. २०१३ को पत्र लिख कर स्वीकार किया कि इस मामले में

उसके द्वारा गहन जांच नहीं की गयी है.

अब कांड में अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपों की पुष्टि होने एवं आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मंत्रिमंडल

(निगरानी) विभाग के पत्रांक १६४१ दि ११.०८.१५ के द्वारा जांच स्थगित करने का आदेश पारित कर दिया

गया है क्या है पत्र में पत्र में कहा गया है कि इस मामले की जांच सी बी आई कर रही है. पत्र में विधि विभाग का मंतव्य अंकित है कि बशर्ते दिनांक २८.०३.११ के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय अथवा माननीय उच्च न्यायालय का इस सम्बन्ध में कोई आदेश नहीं पारित हुआ हो तो सी बी आई जांच तक निगरानी अनुसंधान स्थगित रखी जाय. पत्रांक ३४४ दिनांक २१.०१.२०१३ द्वारा सी. बी. आई. ने स्पस्ट किया कि उनके द्वारा APDRP स्कीम की कोई जांच नहीं की जा रही है. पुन: सी बी आई के पत्र संख्या ४५९६ दि ०८.११.२०१३ द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस सम्बन्ध में उनके द्वारा कोई विस्तृत जांच नहीं की गयी है. सी बी आई ने कई वादों में दायर प्रतिशपथ पत्रों द्वारा भी माननीय न्यायालयों को सूचित किया है की उनके द्वारा इस मामले की जांच नहीं की जा रही है. काण्ड के एक अभियुक्त द्वारा दायर क्रिमिनल मिस्लेनिअस पिटीशन १२९८/१२ में सभी तथ्यों पर विचार कर के तथा सी बी आई का पक्ष प्राप्त करने बाद माननीय झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दिनांक
२८.०२.२०१३ को आदेश पारित कर निगरानी जांच को हरी झंडी दे दी है. स्पष्ट है कि इन तथ्यों को छुपाकर मुख्यमंत्री से अनुसंधान पर स्थगनादेश प्राप्त किया गया है.उक्त काण्ड के अभियुक्तों द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में दायर केशों की सूची:

FILING NUMBER CASE NO PETITIONER

NAME RESPONDENT NAME

012010052962013 Cr.M.P/0000499/2013 Virendra

Pratap Dubey

State Of Jharkhand

Through Secretary Cabinet

Vigilance Department And

012010055552013 Cr.M.P/0000523/2013 Niranjan Roy State Of Jharkhand And

012010059352013 Cr.M.P/0000558/2013 Pushpendra

State Of Jharkhand And

Kumar Sinha Ors





कई केशों में माननीय झारखंड हाईकोर्ट द्वारा निगरानी अनुसंधान जारी रखने का आदेश पारित किया गया है

इतने संगीन मसले पर आनन्-फानन में जाँच पर रोक निगरानी ब्यूरो का मनोबल कम करने तथा अभियुक्तों –

एजेंसी को लाभ पहुंचाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है. यक्ष प्रश्न पुन: उपस्थित है कि क्या झारखंड

इसका सीधा लाभ में. आर. पी. सी. एल. को मिल सकता है. उसके द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कारवाई रोकने तथा

अतिरिक्त भुगतान प्राप्त करने हेतु वाद दायर किया गया है. अगर ऐसा होता है तो सरकार पर भारी आर्थिक

बोझ पड़ सकता है. आर. पी. सी. एल. के केश में माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे

में. आर. पी. सी. एल. के विरुद्ध पहले भी फर्जी बैंक गारंटी जमा कर बोर्ड से धोखा-धडी करने का केश चल रहा

है. बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष श्री शिवेन्दु द्वारा इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने का आदेश दिया गया था पर

ऊर्जा विभाग ने दो वर्ष पूर्व बोर्ड को निदेश दिया था कि निगरानी अभियुक्तों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया जाय,
अब सवाल उठना लाज़मी हो गया है की जब सरसो में ही भूत घुस जाये तो झाड़ फूक का क्या फायदा ? सीबीआई ही अगर दामन को गन्दा कर लेगी तो विस्वास किसपे किया जा सकेगा ?

आनन- फानन में VPSC NO. 2/11 तथा 19/13 की जांच स्थगित करने से उठने वाले सवाल:
1. विधि विभाग ने प्रशासी विभाग से यह संपुष्ट होने को कहा था कि 28.03.11 के बाद माननीय उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय का कोई आदेश नही आया है। सवाल यह है कि इसको नजरअंदाज़ क्यों किया गया?

2. उप सचिव ने अपनी टिप्पणी में Cr. M. P. 1298/12 में CBI के affidavit का संपादित अंश तो अंकित किया है पर इस केश में पारित आदेश को क्यों छुपाया, जबकि इस केश में माननीय उच्च न्यायालय ने सभी तथ्यों पर गौर करके निगरानी जांच को हरी झंडी दी थी।

3.उप सचिव ने अपनी टिप्पणी में बोर्ड के वरीय विधि परामर्शी की एक टिप्पणी का जिक्र किया पर उसके एक माह के बाद ही केश डायरी के गहन अध्ययन के बाद दिए गए मंतव्य को क्यों नजरअंदाज कर दिया गया जिसमे उन्होंने काण्ड को सत्य बताते हुए तुरंत अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव दिया।

4. उप सचिव ने CBI के पत्र संख्या 465 दिनांक 29.01.13 की गलत व्याख्या करते हुए यह क्यों लिखा कि CBI APDRP की जांच कर रही है जबकि उस पत्र के संलग्नक पत्र संख्या 344 दिनांक 21.01.13 द्वारा ही CBI ने स्पष्ट कर दिया था कि वह APDRP की जांच नही कर रही है।

5. उप सचिव ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP (Crl.) 8203/2013 में 17 अक्टूबर 2013 को पारित स्थगनादेश का उल्लेख किया पर यह उल्लेख क्यों नही किया कि उक्त केश में निर्णय की तिथि 17.08.15 निर्धारित है जो कि internet से संभव था। 

अब सुप्रीम कोर्ट ने 17.08.15 को उक्त स्थगनादेश को रद्द करते हुए उक्त वाद को dismiss कर दिया है और अपराधियों के CBI जांच के दावे को खारिज करते हुए निगरानी जांच को हरी झंडी दी है तो क्या इस तथ्य को माननीय मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है?

बड़ा सवाल यह है कि अपराधियों के पक्ष में आँख बंद करने के लिए मंत्रिमण्डल (निगरानी) विभाग के उप सचिव, विशेष सचिव तथा अपर मुख्य सचिव पर कौन सा दवाब था।

धनबाद की धाक

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                 धनबाद की धाक 

tahalka desk
धनबाद झारखण्ड  का ऐसा जिला है जहा के जन प्रतिनिधि  बाहुबली नेता की गाड़ी भी VIP, गाड़ियों के नंबरप्लेट पर भी एक ही नंबर रहता है ,अलग अलग शौक के धनि लोग अलग अलग तरह की बातो के लिए जाने जाते है ,कभी यहाँ के बाहुबलियो के घर का गेट पूरे बिहार में अलग तरह का होता था आज उनके शौक बदल चुके है दुनिया बदल गयी है 
धनबाद. झारखंड के धनबाद की सड़कों पर एक नंबर की गाड़ियों के काफिले चर्चा का विषय हैं। अपना रुतबा दिखाने का शौक अब फॉलोअर तक पहुंचने लगा है। झरिया से विधायक संजीव सिंह के पास जितनी गाडि़यां हैं सभी का एक ही नंबर है। रसूखदार नेताओं और ठेकेदारों के इस शौक के पीछे अलग दिखने की कहानी है। दिलचस्प है कि चाहे विधायक ढुल्लू महतो हों या नीरज सिंह या लालबाबू, अकेली गाड़ी में नहीं एक ही नंबर की गाड़ियों के काफिले में चलते हैं।
संजीव सिंह, सिंह मेंशन
चर्चित बाहुबली विधायक स्व. सूर्यदेव सिंह के बेटे और सिंह मेंशन के युवराज हैं। झरिया विधानसभा इनके परिवार की राजनीतिक विरासत है। 35 सालों से इनके परिवार के लोग ही यहां विधायक बन रहे हैं। संजीव खुद यहां विधायक हैं। संजीव को 7007 नंबर की गाड़ी रखने का शौक है।
ढुल्लू महतो, बाघमारा से विधायक
ढुल्लू बाघमारा से दूसरी बार विधायक हैं। इनकी सभी गाड़ियों का रंग और नंबर एक ही है। वे इसमें कोई समझौता नहीं करते। काफिले में मौजूद सभी गाड़ियों का नंबर 5252 है।
नीरज सिंह, पूर्व डिप्टी मेयर
विधायक स्व. सूर्यदेव सिंह के भाई ओर स्व. राजनारायण सिंह के पुत्र। 2010 से 2015 तक डिप्टी मेयर रहे हैं। इन्हें 4500 व 0045 नंबर की गाड़ियों का शौक हैं।
लालबाबू सिंह, ठेकेदार
एक ही बैंक में 100 करोड़ रु. रखकर आयकर के शिकंजे में फंसकर रातों रात देशभर में चर्चित हुए बीसीसीएल के ठेकेदार लालबाबू सिंह को भी खास नंबर और दो ही रंग (काली और सफेद) की गाड़ियों का शौक है। सिंह के काफिले की सभी गाड़ियों का नंबर 25 है।
डीटीओ से बातचीत
धनबाद के डीटीओ रविराज शर्मा से पूछा गया कि क्या एक ही नंबर की कई गाड़ियां कोई रख सकता है?
जवाब : हां। च्वाइस नंबर लेने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन पिछले साल से च्वाइस बेस नंबर का आवंटन कंप्यूटराइज्ड हो रहा है। अब च्वाइस नंबर लेने के लिए शुल्क देना पड़ता है। इन सभी ने भी दिया है, इसलिए इनके पास एक नंबर की इतनी गाड़ियां हैं।
By courtsey
pradhuman जी निराला  



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      झारखण्ड का पहला डिजिटल सरकारी  स्कुल 
तहलका डेस्क  हजारीबाग ब्यूरो
हजारीबाग के एक सरकारी विद्यालय ने वह कारनामा कर दिखाया है जो अच्छे अच्छे निजी विद्यालय भी नहीं कर पाए है ,हजारीबाग के सरकारी बालिका विद्यालय में छात्रावो के  सत प्रतिसत डिजिटल लोकर खुल गए है इनके शिछक तथा अन्य कर्मचारियो के भी लौकर खोल दिए गए है और  सभी इसका सञ्चालन भी बखूबी कर रहे है ,
यह विद्यालय झारखण्ड राज्य का पहला विद्यालय बन गया है जहाँ के १०० % बच्चो के डिजिटल लौकर है ,डिजिटल लौकर इंटरनेट पर ऐसा सर्वर है जिसमे आप अपने पासवर्ड आई  डी से एक लौकर बनाते है जिसमे आपको एक GB से अधिक का स्पेस मिलता है उसमे आप अपने सारे ज़रूरी कागजात राख सकते है छात्र छात्रावो को किसी नौकरी के फार्म भरने में जो प्रमाणपत्र भेजने की कठिनाई होती थी अब वे इसका उपयोग कर सकते है ताकि कोई भी  इस आई डी की जांच कर आपका सर्टिफिकेट देख सकता है जिसमे आपका डिजिटल हस्ताछर भी रहता है इसकी सरकारी मान्यता भी प्राप्त हो चुकी है ,अब यही काम कई गाव में भी चालू किया जा रहा है

झारखण्ड में नक्सली वर्चस्व और पुलिस

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         झारखण्ड में नक्सली वर्चस्व और पुलिस 
तहलका डेस्क
उमेश ओझा रांची

झारखण्ड सरकार ने नक्सलिओ पर इनाम घोसित कर  दिया है पांच हज़ार से लेकर करोड़ तक पर विडम्बना है की इसमें TPC के किसी नक्सली का नाम नहीं है जबकि वह तीन जिले में आतंक का पर्याय बन चूका है इसका मतलब क्या है ?टी पी सी  पुलिस की पार्टी पुलिस के द्वारा पुलिस के तन  मन धन के लिए बनायीं गायी पार्टी है ,पुलिस की दुधारू गाय बनी इस पार्टी के इशारे पर बड़े बड़े काम होते है ,यह पार्टी अब इतना पैसा बना ली है ही अपने से रिस्क लेने की ज़रूरत नहीं सुपारी किलिंग करवा रही है ,इस पार्टी के आड़े जो भी आता है उसे ख़त्म करवा देती है अभी इस पार्टी ने JPC नमक संगठन को ख़त्म करने का मन बना लिया है सो पुलिस भी इनके इरादे में शामिल है ,
इस बार विवेक जी नामक जे पी सी सुप्रीमो इनकी पकड़ में आया है जिसे २९ अगस्त को हजारीबाग पुलिस ने इसे जेल भेज दिया  ,हजारीबाग पुलिस ने इसे मेंन  रोड से पकड़ा और बताया गया की इसे बेंदी के जंगल से पकड़ा गया ,जे पी सी भी पुलिस का ही संगठन उन्हीके लिए बनाया गया संगठन है ,फिर इसे पकड़ा क्यों ? जब ए लोग AK 47 एवं अन्य बड़े हथियारों के साथ प्रदर्शन करते है तो पुलिस क्यों नहीं पकड़ती है ? ज्यादा उपलब्धि मिलती ,पर नहीं इन्हें अभी TPC के पछ में JPC का सफाया करना है सो पकड़ लिए ,राज्य सरकार से भी यही निर्देस है ताकि TPC के एकछत्र राज में एकमुश्त पैसे की उगाही हो और एक जगह से सरकार मंत्री और पुलिस के बड़े नुमायिन्दो को नज़राना मिलता रहे ,इसलिए विवेक की सुपारी हजारीबाग पुलिस ने लेली ,वरना ए लोग पुलिस कप्तान से लेकर सभी पुलिस अधिकारिओ के घर पर जाते रहते थे ,इससे पहले कोशुम्भा के जंगल में बादल नामक जोनल कमांडर  की सुपारी टी पी सी ने दी और बिहार से आकर अपराधियो ने 47 से उसकी हत्या कर डाली ,फीर JPC मुख्य  सुप्रीमो कमांडर गुड्डू गंझू को भी बिहार के अपराधियो ने ही  सुपारी लेकर बेंदी के जंगल में हत्या कर डाली ,अब बचा था विवेक सो उसे भी सालता दिया गया ताकि NTPC के माईन्स खुलने से पहले TPC की कमाई को एक नजरिये से देखा ,,,,नापा ,,,,और बांटा   जा  सके ,क्युकी हजारीबाग पुलिस हर दीन TPC के संपर्क में है ,

फर्जी मुठभेड़ के आईने में ,,,,,,,नक्सल त्रासदी का दंश झेलता झारखण्ड

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फर्जी मुठभेड़ के आईने में ,,,,,,,नक्सल त्रासदी  का दंश                           झेलता  झारखण्ड 

उमेश ओझा
तहलका डेस्क रांची
नक्सली आतंक के सिधांत के सिधांत पर काम करते है ,निशाना कौन होगा इसकी परवाह नहीं ,कौन मरेगा इसकी चिंता नहीं देश में समाज में पुलिस में  भय और आतंक कायम हो बस उनका सिक्का चलता रहेगा।  ठीक अब  इसी सिधांत पर पुलिस चलने लगी है खासकर झारखण्ड में ,आतंक फ़ैलाने और पैसा कमाने में वे नक्सलियो को  पीछे छोड़  चुके है ,कोई मारा जाये इससे मतलब नहीं ,,दोसी मरे निर्दोस मरे ,गरीब मरे अमीर मरे ,बस मारना  है ताकि उनकी उपलब्धि बरकरार रहे ,पैसा वे नक्सलियो से भि ले रहे है उनकी मदद भी ले रहे है उनको मदद भी कर रहे है ताकि चोर चोर मौसेरे भाई का द्रिस्तांत  कायम रहे। आईये इसी सन्दर्भ में आपको पलामू लिए चलते है जहा पिछले आठ जून को पुलिस  की बड़ी उपलब्धि का डंका पुरे देश में बजा ,पर भीतर सी सच्चाई  सुनने पर मानवता शर्मशार हो जाती है ,मानवाधिकार  आयोग बौना हो जाता है और पुलिस की मर्दानगी किन्नर के शक्ल में तब्दील हो जाती है।
        लातेहार जिले के नेवार गाव  का एक पारा सिछक उदय  यादव जो पुलिस की मुखबिरी के आरोप में नक्सलियो द्वारा पिटाई का शिकार हुवा ,फिर घर छोडकर भागना पड़ा और मनिका में शरण लेना पड़ा जहा से पिचले सात जून को उसका अपहरण हो गया घर से , दुसरे दीन पता चला की वह पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया ,पुलिस का तथाकथीत दलाल पुलिस के हाथो मारा जाये ,बात कुछ हजम होनेवाली नहीं है ,फीर पता चला की उस पारा टीचर के साथ उसके फुफेरे भाई को भी पकड़कर मार दिया गया ,दोनों अपने छोटे बच्चे के साथ घर के चाट पर सोये थे जहाँ से उनको खीचकर JJMP के लोग सतबरवा थाना छेत्र के बकोरिया जंगल में  ले गए और मौत के घात उतार दिया ,फीर अन्य लोगो के साथ मिलाकर पुलिस को उपलब्धि गिनने के लिए दे दिया गया ,सारे लोग चुप है क्युकी JJMP के आतंक के सामने किसी की नहीं चलती है जबकि सब जानते है की यह एन्कोउन्टर फर्जी है। और JJMP को पुलिस के साथ उनके कानून और बन्दूक का भी साथ मिल रहा है ,मृतक पारा टीचर उदय की पत्नी ने झारखण्ड के गृह सचीव को एक लिखित आवेदन देकर उसके साथ हुवे अन्याय को न्याय में बदलने की गुहार लगायी गयी है ,देखना यह दिलचस्प होगा की ज़हां DGP, मुख्यमंत्री और राज्य के आलाधिकारी इसको बहादुरी की संज्ञा से नवाज़ रहे है वहां क्या गृह सचीव एक मामूली सिछक की  विधवा को न्याय देने की हिम्मत जूता पाएंगे ? सवाल बड़ा है और जवान सिर्फ एक है जो आप हम और पूरा राज्य जनता है। लेकिन सच के आईने में झाँकने के लिए आपको यह विडिओ देखना होगा
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भोलुआ की पाती मुखमंतरी का नाम

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जरा एक नज़र देखो ना,,, ,,,,,,,,,,भोलुआ की पाती                                   मुखमंतरी का नाम 

आदरणीय मुखमंतरी महोदय
                                        वालेकुम परनाम। आगे राज में सब खुसल  मंगल ठीके है। लेकिन आपका राज में आपका बोला हुवा ,लिखा हुवा बात कोय नहीं मान रहा है ,काहे ? आप बोलते है की कोयला चोरी नहीं होगा -हो रहा है। आप बोलते है नक्सली को मार के भगा देंगे -रोज आपका आदमी का साथ बैठके रंगबाजी कर रहा है ,दारू पि रहा है। आप बोलते है नक्सली सबको मारके  ख़तम  कर देंगे -नक्सली तो नहीं आम आदमी मार दिया जा रहा है। घूसखोरी नहीं चलेगा - जमके चल रहा है। ज़मीन  का दलाली बंद होगा - रोज सरकारी ज़मीन  बिक रहा है।
   इस बार ईगो नया डिसीज़न केबिनेट से पास हुवा है की पचास करोड़ का लागत  से पुलिस अनुसन्धान संस्थान बनेगा। अरे भाय  पहले से सत्तर करोड़ का लागत से हजारीबाग में पुलिस अकादमी बना ,लेकिन हियाँ  पर IG  का पोस्टिंग नहीं हुवा है इसलिए इसको अकादमी का दर्ज़ा नहीं मिला है। यहाँ दस गो इन्स्पेक्टर का पोस्ट है लेकिन काम कर रहा है केवल चार। आपका पास संसाधन का कमी है फिर ई पचास करोड़ का बिल्डिंग कमिसन वास्ते बन रहा है का ?कहे की जो है वही नकारा है फिर अगला काहे बनेगा ?पचास करोड़ में पांच पर्सेंट का हिसाब से ढाई करोड़ रु होता है यह कौन लेगा ? जिसका हाथ से आपको सुरछित मिले ?काहेकि  पुलिस विभाग में तिस पर्सेंट कमिसन है ,चालीस पर्सेंट एक्स्ट्रा रेट से एस्टिमित बनता है जहा पर आप पुरनका DGP  राजीव बाबू को भेजे है ,उनसे किसका किसका सेटिंग है भाई ? आपको  अगर केंद्र से  पैसा मांगता है तो आप हमलोग पर जोड़के टैक्स लगा दीजिये पर अइसन बेईमानी नहीं कीजिये मंत्रीजी ,आपका बाल बच्चा पर पड़ेगा ,और आपतो  अच्छा आदमी का गिनती में आ रहे है फिर गन्दा काम से तौबा कीजिये।
,,,,,,,,,,खैर आगे आपका ,,,,,,
भोलुआ  उर्फ़ भोलानाथ
,माँसीपीढ़ी  हजारीबाग

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