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अडानी के झारखण्ड पर मेहरबानी का राज

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      अडानी के झारखण्ड पर  मेहरबानी का राज 
तहलका डेस्क 
अडानी बाबा ने झारखण्ड पर कृपा की है ५० हज़ार करोड़ के निवेश का MOU किया है ,पर  यह उपकार नहीं यह  उनका नहीं झारखंडी लोगो  का माल है ,वैसे ही जैसे माल महाराज के मिर्जा खेले होली ,कैसे? आईये तफसील से बताते हैक्या है लूट की सच्चाई  ,अडानी को झारखण्ड में दो कोलियरियो मगध और आम्रपाली में आवूट सोर्सिंग का काम मिला है , अडानी रेड्डी ग्रुप की कंपनी से काम  करवाते है क्युकी नक्सलियो से उनका अच्छा  तालमेल है ,मगध झारखण्ड इंडिया नहीं एशिया का सबसे बड़ा कोलियरी है ,इसमें प्रति क्यूबिक मीटर १०० रु का रेट फिक्स किया गया है जबकि सारा खर्च मुनाफा काटकर ५० रु का आता है ,फीर यह उपकार क्यों ? और किसने किया ? HSCL नामक कंपनी CCL की अन्य कोलियरियो में ५७ रु के रेट से काम कर भी रहा है फीर CCL में ही दो दो रेट क्यों ? क्युकी अडानी बाबा को मोदी बाबा का  आशीर्वाद प्राप्त है ,मगध से इस कंपनी को हर साल बीस मिलियन क्यूबिक मीटर कोयला  निकलना है ,यानी ५० रु अवैध रेट की दर से २०० करोड़ रु हर माह एक कलियारी से अडानी लूटकर ले जा रहे है काम करने की कमाई है सो अलग ,यानी तीन हज़ार करोड़ एक कोलियरी से लूट रहे है सालाना, दो दो कोलियरी है यानी छः हज़ार करोड़ की लूट ,और यह लूट बीस साल चलेगा यानी एक लाख बीस हज़ार करोड़ का लूट और दूसरी तरफ ५० हज़ार करोड़ का झुनझुना दिखाकर हमारे ऊपर उपकार करने का नौटंकी पेल रहे है ,खेल यही नहीं रुकता है आगे का हाल भी कुछ इस प्रकार है यहाँ का कोयला इन्हें ११०० रु प्रति टन के हिसाब से यानि एक रु दस पैसा की दर से सब्सिडी पर मिलता है ,अपने उपयोग से चार गुण ज्यादा कोयला उठाते है आदानी और बाकी का कोयला खुले बाज़ार में ७००० से लेकर  ८००० रु प्रति टन के हिसाब से बेच देते है ,अब अगर सारा हिसाब आप जोड़ेंगे तो कमाई लाखो करोड़ में चला जायेगा ,पर इन सब बातो को जनता के सामने लाने के लिए ना तो किसी विधायक के पास फुर्सत है ना ही अकल ना ही हिम्मत और ना ही बोलने की सलाहियत ,सारे लोगो का दिमाग ट्रांसफर पोस्टिंग तक ही सिमित है ,बचे सांसद तो ज्यादातर भाजपा के है सो उनके सामने मोदी के नाम से हवा निकल जाती है ,फीर बोलेगा कौन ?और इसी तरह झारखण्ड का माल लोग कमाकर नहीं लूटकर भाग रहे है ,कोई कुछ ना बोले इसलिए नक्सलियो का साथ लेते है लेवी देते है जनता को खामोश करते है नेता को बड़ा गिफ्ट और चारो तरफ सन्नाटा ,,वाह रे विपछ वाह रे नेता और वाह री जनता ? लूट लो झारखण्ड 



दूसरे अब प्राइवेट कोयला कम्पनिओं को कोयला बेचने का भी अधिकार होगा ,यह कोयले के राष्ट्रीयकरण के बाद सबसे बड़ी भूल है जो जानबूझकर कार्पोरेट घरानो को फायदा पहुचाने  के लिए किया गया है ,क्युकी  राष्ट्रीयकरण के बाद कंपनी को सिर्फ अपने काम के लिए कोयला खोदने का अधिकार था वे खुले बाज़ार में कोयला नहीं बेच सकते थे ,इससे उनके स्वेच्छा चरिता  पर लगाम लगा रहता था थोड़ा बहुत अधिक कोयला कोड़कर  वे चाोरी  छुपे बाज़ार में अनयूस्ड  कॉल के नाम से बेचते थे ,टाटा  जैसी कंपनी भी कोयले की चोरी के चलते सरकार के सामने नत्मस्तक  रहती थी,अपने स्लरी के साथ कोयला चुरकर उसे अनउस्ड कॉल के नाम से बाजार में बेचती थी। पर अब यह मज़बूरी ख़त्म हो गयी मोदीजी की सरकार ने उन्हें बाज़ार में खुले आम जिस दर से कोयला बीके , बेचने का अधिकार सरकार से दे  दिया है, जितना  ताकत होगा उतना कोयला कम्पनीवाले कोडेंगे ,जो कोयला ५० साल चलना चाहिए था उसे १० -१५ साल में ही ख़त्म कर देंगे  ,इससे सरकार को ,राज्य को ,देश को ,घाटा है ,पर इन्हे इससे क्या ? मोदी जी सबसे बड़े राष्ट्र भक्त है कोयला बेचने से क्या होगा कोड़कर बेच दो कल झारखण्ड के लोगो के पास न खेती होगी ना ही वन बस भिखमंगे की तरह रहना है मगन। 

मारे गए पलामू में १२ नक्सली

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     झारखण्ड में एक बार फीर नक्सली हलकान 
                                              मारे गए पलामू में १२ नक्सली 
तहलका डेस्क
पुलिस और नक्सलियो के बिच झारखण्ड में चल रहे लुका छुपी के खेल में एक बार फीर नक्सलियो को मात खानी पडी है ,इस बार उनकी मौत रईसी के आचल में हुई, १२ नक्सली वातानुकूलित स्कोर्पियो में जा रहे थे की jmpp को इसकी सूचना मिल गयी और उन्होंने पुलिस को सटीक सूचना देकर काम तमाम करावा दिया ,पहाड़ो जंगलो नदियो नालो की ख़ाक छानने वाले जब ए सी में बैठेंगे तो उनकी मौत निश्चीत है ,अब JMPP इलाके में इसके एवाज़ में आम लोगो से जो रुक्का और लेवी वसूलेगा उस दर्द से कोई वाकिफ नहीं होना चाहता है ,और पुलिस उनके कार्यो को हर कदम पर जस्टिफाय करने की कोसिस कर रही है पर TPC और JMPP के वर्चस्व वाले इलाके में आम आदमी की बोलती बंद हो गयी है ,


पलामू:झारखंड के पलामू जिले में पुलिस और सीआरपीएफ केसंयुक्त कार्रवाई में 12 नक्सली मारे गए हैं। यह मुठभेड़ मंगलवार तड़के हुई। पुलिस के मुताबिक, लातेहार और पलामू जिले में पोखरी इलाके में स्कॉर्पियो वाहन पर पुलिस ने फायरिंग की। वाहन में बैठे 12 नक्सली मौके पर मारे गए। उनसे पुलिस ने आठ राइफल और 250 कारतूस व कुछ अन्य हथियार बरामद किए हैं। बताया गया है कि मरने वालों में वह नक्‍सली भी शामिल है, जिसने दो साल पहले एक पुलिसकर्मी की हत्‍या करने के बाद उसके पेट में बम प्लांट किया था।
वैसे अंदर खाने की खबर है कि जेजेएमपी ने पुलिस को माओवादियों की गतिविधियों की सूचना दी थी। उनकी सूचना पर ही पुलिस और सीआरपीएफ ने इस मुठभेड़ में सफलता पाई है। नक्सली संगठन जेजेएमपी (झारखंड जनमुक्ति परिषद) के बारे में कहा जाता है कि इसे पुलिस और सीआरपीएफ का सहयोग मिलता रहता है और पुलिस ने ही इसे माओवादियों के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल के लिए खड़ा किया है। झारखंड में जेजेएमपी और टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) दाे ऐसे संगठन हैं जिन्हें पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ लड़ाई के लिए खड़ा किया है। इनमें संगठन से बगावत कर अलग होने वाले नक्‍सली शामिल हैं। झारखंड के कई हिस्सों में इनकी पकड़ अच्छी है और ये लेवी वसूला करते हैं। ये दोनों संगठन पुलिस पर कभी हमला नहीं करते।


मारे गए नक्सलियों में से कुछ की पहचान हुई है। दो नक्सलियों की पहचान मनिका थाना के नेवार के पारा टीचर उदय यादव और एरिया कमांडर अनुराग जी उर्फ डॉक्टरजी के रूप में हुई है। अनुराग पर झारखंड पुलिस ने दस लाख रुपए का इनाम रखा था। उसने 2013 में पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद एक मृत जवान के पेट में बम प्लांट किया था।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस इलाके में नक्सलियों की गतिविधि चल रही थी। इसी बीच सोमवार की रात सूचना मिली थी कि यहां नक्सलियों का एक दल निकलेगा। इसके बाद पुलिस और सीआरपीएफ की एक टुकड़ी वहां पहुंची। इसी दौरान वहां से एक स्‍कॉर्पियो गाड़ी गुजरी जिसमें नक्सली बैठे थे। जवानों ने गाड़ी पर फायरिंग की। दोनों ओर से करीब तीन घंटे तक फायरिंग हुई जिसके बाद 12 नक्सली मारे गए।नक्सली जिस गाड़ी से जा रहे थे उस पर पश्चिम बंगाल का नंबर प्लेट था। WB 60E 2011 नंबर की इस गाड़ी के मालिक की पहचान भी हो गई है। गाड़ी पश्चिम बंगाल के मंटू साह व एन झरना सरकार के नाम पर दर्ज है।झारखंड में पिछले तीन साल के दौरान सुरक्षा बलों ने 50 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया है। नक्सली हिंसा के कारण 2000 से अब तक राज्य में 1200 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।दुमका में 20 अप्रैल 2014 को नक्सलियों ने एक पुलिस वाहन को निशाना बनाया था। इसमें छह पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। उस वक्त लोकसभा का चुनाव हो रहा था। हमले के बाद नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान तेज हो गया था। लेकिन मंगलवार तड़के जैसी मुठभेड़ नहीं हुई थी।


झारखंड के सभी 24 जिले नक्सलवाद से प्रभावित माने जाते हैं। हालांकि, पिछले कुछ साल में सुरक्षा बलों के अभियानों के कारण नक्सलियों पर अंकुश लगा है। लेकिन नक्सलियों के 17 छोटे गुट राज्य में सक्रिय हैं।

कोयले की कमाई के लिए गैंग वार

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             कोयले की कमाई का गैंग वार 
तहलका डेस्क
झारखण्ड के हजारीबाग में २ जून को दींन  दहाड़े १०.४५ बजे हजारीबाग का कोर्ट परिसर थर्रा उठा ,जजो  के हाथ से कलम छुट गए वकील भागने लगे पुलिस अपनी बन्दुक और जान बचाने के लिए इधर उधर छुपने लगे ,कोलाहल और धुवे से ऐसा गुबार निकला की आग राजधानी रांची तक दस्तक दे गयी .मामला संगीन था क्युकी AK 47 जैसे घातक हथियार से कोर्ट कैम्पस में गोली चलना कोई मामूली बात नहीं थी ,इसके बाद तो यहाँ मुख्यमंत्री की ताकीद पर आई जी से लेकर DGP तक एक एककर आने लगे बार कौंसिल भी अपने वकीलों की रछा के लिए कारवाही करने से लेकर दबाव डालने में पीछे नहीं रहा ,
 असल में झारखंड के हजारीबाग ,बोकारो ,रामगढ ,धनबाद ,चतरा,लातेहार ,गिरिडीह जिले में सामानांतर सरकार चलती है ,कोयला तस्करी रुक जाये तो शायद सरकार गीर जाये ,इसमें खाखी से लेकर खादी और कलमघिस्सू पत्रकार से लेकर जंगल की सरकार तक शामिल है सो कही से कोई चीख पुकार सुनाई नहीं देती है जाहिर है पिछले 25 वर्षो से कोयला तस्करी यक्छ प्रश्न बनकर गिरता उठता सम्हलता और फीर सामने नामुदार होता रहा है जिसमे कई नेता ,मंत्री ,विधायक ,पुलिस वालो के खून गिरे है धरती लाल भी हुई हंगामा भी हुई पर फीर वह यक्छ सामने खड़ा दिखाई देते रहा है , पर इस बार का मामला कुछ अलग है ,संगीन है और सोचने को विवस करनेवाला है क्युकी मारा गया सुशील श्रीवास्तव जेल में बंद था पेशी के लिए कोर्ट में आया था लोगो को सूचना थे की वह भाग सकता है भगाया जा सकता है या उसके दुसमन उसे मार सकते है इसकिये उसकी सुरछा में १४ जवान स्वचालित हथियारों के साथ लगाये गए थे ,पर कोर्ट कैम्पस में जब उसपर गोलिया चली तो सारे हथियारवाले जवान अपनी जान बचाने में व्यस्त दिखाई दिया इसलिए हत्यारा बड़ी आसानी से दिवार फांदकर निकल गया और हथियार छोड़ गया की आपलोग इसे देखकर संतोस करो  डरो और हमारी आतंक की कमाई के कोयले को हवा देते रहो ,


,,,,,,,,,,,,,,,,,,कोर्ट की हत्या ने कठघरे में खड़ा किया सबको ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
हजारीबाग कोर्ट में हुई २ जून की हत्या ने न सिर्फ पुलिस और सुरछा पर प्रश्न खड़ा किया है बल्कि समाज ,सरकार ,पुलिस ,खुफिया तंत्र के सामने दर्ज़नो सवाल खड़े कर दिए है ,जिसका उत्तर इमानदारी के साथ कोई भी नही दे सकता है ,हत्या के बाद खुलासा हुवा की इनकी रंगदारी २ करोड़ महिना की थी ,तो क्या २ करोड़ सुशिल स्वयं खा जाते थे ,या यह सब कई लोगो में बटता था ,अगर बटता था तो वे लोग कौन है जो इनसे हिस्सा बटाकर इनको समर्थन देते थे ,और आज वे कहा है ? उनके नाम का खुलासा क्या कभी हो सकता है ?झारखण्ड की पुलिस और यहाँ की तथाकथीत इमानदार सरकार में इतनी हिम्मत ,,,,,,इतनी ताकत है की वे इन नामो का खुलासा करे ? कोई माय का लाल नहीं जो इन नमो को सार्वजनिक कर सके ,,ज़ाहीरहै भविष्य में अपराधियो के साथ साथ जज ,वकील ,पुलिस नेताओ की हत्या भी इसी तरह के सेटिंग से होती रहेगी ,,
,,,,,भोला पाण्डेय और सुशिल श्रीवास्तव की हत्या एक ही तरीके से की गयी पुलिसवालों की निगेहबानी में उनकी हाथ के नीचे और कोई पुलिस हताहत नहीं ,,तो क्या दोनों हत्याए एक ही गैंग ने करवाई है जिसको किसी बड़े शातिर पुलिस का संरछन प्राप्त है ?
,,,,,सुशिल की हत्या के बाद उसको दफनाने के क्रम में दर्ज़नो रौंड गोलिया चली ,कसम खायी गयी की बदला लिया जाएगा ,,,बरोबर लिया जाएगा ,,,,कहा पुलिस की भी है मिलीभगत ,,,तो क्या पुलिसवाले भी मारे जायेंगे अपराधी गैंग के साथ साथ ,पुलिस यानी सरकार को खुली चुनौती इन मफियावो के तरफ से ,किसकी शह पर ?और पुलिस मुह टाक रही है ,,,सारा खेल कोयले की काली कमाई का है ,जिसमे सभी के दामन दागदार है ,


,,,,,,,,,सुशील की अन्तिम यात्रा में कोई पुलिस क्यों नहीं ,,,,,,,,,,,
जब सारा महकमा जान रहा था की इसके साथ बहुत सारे डॉन जुड़े है तो खुफिया विभाग के लोग या पुलिस के जवान क्यों नहीं थे वहा ? ताकि एक साथ सभी लोगो की तोह मिल सके ,इसका मतलब है की माफिया गिरोहों की जानकारी पुलिस नहीं रखना चाहती है ,क्युकी उनसे बहुत सारा लें देन भी होता रहता है ,जब इस बाबत डी जी डी के पाण्डेय से पुछा गया तो उनका जवाब था हम विडिओ फूटेज मंगवा रहे है ,इसका मतलब साफ़ है की इशारो को अगर समझो राज को राज रहने दो ,केवल हत्यारा पकड़ा जाये बस पुलिस की ड्यूटी ख़त्म आगे एनी गिरोहों को टारगेट नहीं करना है काम होने दो ताकि पुलिस की आमदनी बनी रहे ,विशाल सिंह ओरंगाबाद जो मधु कोड़ा का करीबी माना जाता है ,इसकी इन मफियावो से कैसे तालमेल हुई ? जो आज की तारीख में बड़ा स्तर माना जाता है ,


हजारीबाग कोर्ट की घटना को लेकर वकील और जज दोनों चिंतीत है हजारीबाग ही नहीं रांची बार कोंसिल के लोग भी हजारीबाग में आकर मीटिंग कर रहे है ताकि वकीलों की सुरछा को चाक चौबंद करने पर बल दिया जा सके ,पर क्या यह संभव है की वकीलों जजो को full प्रूफ सुरछा मुहैया कराया जा सके ?? कतई नहीं क्युकी दोनों समुदाय के लोगो में इगो प्रोब्लम सबसे ज्यादा है ,कोई जज गाडी से उतरकर पैदल अपने इजलास तक नहीं जायेंगे ,,,कोई वकील सुरछा में तैनात संतरियो की बात नहीं मानेगे और यही से चुक होती है ,बार एसोसिएसन के लोग लाख इस बात की दुहाई दे दे पर सभी सदस्य इस बात को मानने के लिए तईयार नहीं होंगे ,वह तैनात पुलिसकर्मी बार बार रुसवाई में ज़ीने को मजबूर होते है ,यही सबसे बड़ी कमजोरी है ,हम सुरछा की बात तो करते है पर सुरछाकर्मी के आदेशो का बराबर उलंघन करते है ,हमने झारखण्ड में पुलिस को ,,बोडिगार्ड को ,,संतरी को मौगा बनाकर रखा दिया है ,ऐसे में उससे अछे कार्य की कल्पना क्यों करते है ,किसी आदमी को बोडिगार्ड नहीं चाहिए उसे उसका नौकर चाहिए ,उससे सब्जी मंग्वावो ,उससे पानी पिल्वावो ,उससे बच्चा खेल्वावो और ज़ब सुरछा में कोताही होकर गोलियों से चलनी हो जावो तो बच्चे कहेंगे खराब पुलिस दिया था ,उसे कभी भी सुरछा के मद्देनज़र इस्तेमाल नहीं किया जाता है क्यों ?और फीर हम यही रोना रोते है ,तो फीर चाहे वो न्यायलय के बड़े वकील हो या ज़ज़ उन्हें ऐसी हकीकतो का सामना करेंगे जिसका भविष्य काफी भयानक है ,

,,,,,,हजारीबाग का हाई प्रोफाईल कोर्ट ज़हाँ ऐतिहासीक सेन्ट्रल जेल से दुर्दांत अपराधी ,नक्सली ,आतंकवादी हर दीं पेशी के लिए आते है ,और वहा एक बड़ी गाडी ,AK 47 ग्रेनेड ,अंशु गैस और अन्य हथियारों का ज़खीरा लेकर आसानी से घुस जाते है ,क्या यह सुरछा लेप्स नहीं है ,पुलिसवालों ने गोली भी चलायी पर पचास मीटर भागते किसी अपराधी को गोली नहीं लगना क्या बताता है ?अपराधी दर्ज़न भर की संख्या में थे पर कोई भी पकड़ में नहीं आ सका ,कोर्ट परिषर में हर समय पचास हथियारबंद पुल्कर्मी होते है ,पर मन से गिरे अपने भाग्य को कोसते हुवे हर दीं ड्यूटी करते है की हमारा कही भी तबादला करा दो ,कोर्ट से मुक्ती दिला दो दो चार कमानेवाला स्थान दिला दो ,इसी उधेड़बुन में उनकी एफिसिएंसी ख़त्म हो जाती है और जाब वो गोली चलते है तो अपराधी को निशाना साधने पर वकील को गोली लग जाती है ,कोयले के कमाऊ जिले में अपराधी से लेकर पुलिस तक का ध्यान सड़क पर कोयले की गाडी में होता है ड्यूटी पर नहीं 
SUSHIL SRIVASTAVA की डेड बॉडी और उसका बेटा सदर अस्पताल में हंगामा मचाते ,अभी से रियासत सम्हालने का तेवर कई फोटोफ्राफरो को गलिया दी बाद में काबू में आया ,पुलिस के सामने यह तेवर तो बाद में क्या होगा ,भोला पाण्डेय और सुशील श्रीवास्तव की अदावत और गैंग वार में कई लोग मारे जा चुके है ,भोला पाण्डेय का भतीजा किशोर पाण्डेय भी जमशेदपुर में २०१४ में मारा गया ,फीर चुनाव से पहले लखन साव को भोला पांडे के लोगो ने मारने की कोसिस की पर उसका अन्ग्राछाक मारा गया चुनाव के पहले हथियार ज़मा नहीं करना भी एक अपराध होता है पर उससे यह भी पूछताछ नहीं की गयी ,लखन साव और किशोर पाण्डेय के मोबाईल के काल डिटेल्स निकलने से कई सफेद्पोस चेहरों से भी नकाब उतरेगी ,पर यह सब करेगा कौन ? जेल से चल रहे साम्राज्य को राज्य सरकार भी नहीं रोक सकी इसका मतलब क्या है ?
,,,,,,,हजारीबाग का हाई प्रोफाईल कोर्ट ज़हाँ ऐतिहासीक सेन्ट्रल जेल से दुर्दांत अपराधी ,नक्सली ,आतंकवादी हर दीं पेशी के लिए आते है ,और वहा एक बड़ी गाडी ,AK 47 ग्रेनेड ,अंशु गैस और अन्य हथियारों का ज़खीरा लेकर आसानी से घुस जाते है ,क्या यह सुरछा लेप्स नहीं है ,पुलिसवालों ने गोली भी चलायी पर पचास मीटर भागते किसी अपराधी को गोली नहीं लगना क्या बताता है ?अपराधी दर्ज़न भर की संख्या में थे पर कोई भी पकड़ में नहीं आ सका ,कोर्ट परिषर में हर समय पचास हथियारबंद पुल्कर्मी होते है ,पर मन से गिरे अपने भाग्य को कोसते हुवे हर दीं ड्यूटी करते है की हमारा कही भी तबादला करा दो ,कोर्ट से मुक्ती दिला दो दो चार कमानेवाला स्थान दिला दो ,इसी उधेड़बुन में उनकी एफिसिएंसी ख़त्म हो जाती है और जाब वो गोली चलते है तो अपराधी को निशाना साधने पर वकील को गोली लग जाती है ,कोयले के कमाऊ जिले में अपराधी से लेकर पुलिस तक का ध्यान सड़क पर कोयले की गाडी में होता है ड्यूटी पर नहीं ,

यह है संतोष पाण्डेय । विकास तिवारी के खासमखास इन्होंने बताया की मुन्नू ठाकुर है मुख्य शूटर सुशिल श्रीवास्तव हत्याकांड में। मुख्य सरगना विकास तिवारी अभी भी पकड़ से बाहर ।
,,,,,,,यह बात अब खुल गयी है की भोला पाण्डेय की हत्याके बाद उनके भतीजे किशोर उर्फ़ के पी ने सुशिल की हत्या के लिए बिहार के शूटरो को सुपारी दी थी ,लेकिन वह नहीं जनता था की उसकी सुपारी भी बिहार के ही शूटरो को दी गयी है और कदमा में उसकी दीन दहाड़े हत्या कर दी गयी ,,इसके बाद सारे रंगदारी के मामले सुशिल के खाते में आने लगे तो रियासत की कमान विकास तिवारी ने सम्हाली और उन्ही शूटरो से साथ गाठ की जिनको बयाना दिया गया था ,और एक बड़ी डील यानी एक ड्राम की हुई ,और तीन महीने से रेकी होती रही ,हलाकि किशोर के जिन्दा रहते भी रेकी हुई थी उस समय खुफिया विभाग ने यह जानकारी अपने हेडक्वाटर को दी थी ,और इसीके बाद सुशिल की सुरछा बधाई गयी थी ,उसे जेल से ही पेशी देने की बात की गयी थी पर वह अपनी रियासत को बढाने ,अपने बेटे पत्नी से मिलने ,वसूली का हिसाब लेने और नयी सुपारी लेने देने के लिए कोर्ट आता था ,उसके एक बार कोर्ट आने में २५ हज़ार का खर्च आता था और एक नवाब की तरह सिपाही उसकी खतीरदारी करते थे ,लेकिन विकास तिवारी ने सारे दिल से बढाकर एक बड़ी दिल की ताकि उसके AK47 के गोलिओ को कोई व्यवधान नहीं डाले ,और जिस तरह से भोला पाण्डेय और किशोर की हत्या करायी गयी उसी तर्ज़ पर सुशिल की हत्या करादी गयी और पूरा हजारीबाग खामोश हो गया ,
,,,,,,,,,AK47 से हजारीबाग में यह तीसरी हत्या है ,पहली हत्या JPCके बादल की कोसुम्भा में की गयी ,उसकी भी सुपारी ही दी गयी थी ,दूसरी हत्या गुड्डू गंझू की बेंदी में की गयी वह भी सुपारी किलिंग ही थी ,और यह तीसरी हत्या २ जून को की गयी और तीनो हत्याए कोयले की काली कामेi के लिए की गयी ,यानी कोअले की काली कमाई के लिए अब हजारीबाग में गरज रही है बंदूके .पुलिस है तमाशबीन ,,,,,




कोयले के कालिख से काला हुवा झारखण्ड ,

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                  ,कोयले के कालिख से काला हुवा झारखण्ड ,
टी पी सिंह  तहलका डेस्क कोयला तस्करी एक अभिशाप बनकर रह गया है हर दीन केस भी दर्ज होते है और हर दीन करोडो की तस्करी भी हो जाती है ,पर आजतक किसी भी जन प्रतिनिधि ने इस बात का प्रश्न लोक सभा या विधान सभा में उठाने की जहमत नहीं उठाई ,क्यों ?क्या सभी के सभी कोयला तस्कर है जिसके छेत्र में तस्करी धड़ल्ले से होती है ? झारखण्ड बनाने के अगुवा लोगो ने कहा की हमारा अपना राज्य होगा तो हम इन गलत कार्यो पर खुद प्रतिबन्ध लगायेंगे ,अभी दुसरे के हाथो में सत्ता शासन है,राज्य बना तो वे ही चोरी कराने लगे ,झारखण्ड बना तो वे ही रहनुमा कोयला तस्करों के सरगना बन बैठे ,और यह बात लुका छुपी नहीं बल्कि राज्य के मुखिया बन कर उन नुमयिन्दो ने खुद जिले के कप्तानो को आदेश फरमाते रहे की इनको छोड़ दो ,इनको पकड़ लो इनके कागजात सीज कर लो इनको कही से कोई तंग ना करे इत्यादी ,झारखण्ड के सात जिलो में 12 विधान सभा और सात लोक सभा में कोयले की चोरी नहीं डकैती होती है ,और प्रत्यछ एवं परोछ रूप से सभी १९ जन प्रतिनिधी इस धंधे के तलबगार है ,और ए १९ मिलकर पुरे झारखण्ड के शासन और सत्ता पर काबिज़ 82 की संख्या पर अपना प्रभाव छोड़ते है ,यही कारण है की जो कोयला तस्करी में शामिल नहीं भी है वे इस प्रश्न को विधान सभा या लोक सभा में उठाने से कतराते है ,हलाकि कांग्रेसी विधायक योगेन्द्र साव ने मंत्री बंनकर इन सवालो को सीबीआई से लेकर कोयला मंत्री, प्रधान मंत्री तक उठाई पर कोई कार्यवाही नहीं होना बताता है की हमारे केंद्रीय नेता भी इस मलाई को चाटने में अपनी सहभागीता निभाते है ,भले ही योगेन्द्र साव का अपना फंडा था ,अपनी कमाई (अवैध ) में चार चाँद लगाना मकसद था वरना वे इस बात को कबिनेट की बैठक में लाते विधान सभा के पटल पर रखते , पर ऐसा करना उनका मकसद नहीं था उनका मकसद था की वे अपनी मुखियागिरी पर मुहर लगवा ले ,,नक्सलियो को हर माह आठ से दस करोड़ की लेवी कोयला तस्करी से जाती है ,इससे वे हर तरह का काम करते है ,पुलिस को मारने से लेकर मंत्रियो यहाँ तक की मुख्यमंत्री को खरीदने का का , पुलिसवालों की कमाई भी दस से पंद्रह करोड़ हर माह है ,वही हर दीन तीस से चालीस करोड़ का कोयला अवैध ढंग से डेहरी और वनारस की मंडी में बेच दी जाती है ,राज्य की खुफिया एजेंसी ,सीबीआई ,मंत्री संतरी ,पुलिस ,हमारे पत्रकार विरादरी के लोग स्थानीय नेता के बिच हर दीन डील होती है ,कोयले का गेम होता है और आम जनता टुकुर टुकुर मुह ताकती रह जाती है ,,,क्युकी इस बड़े गेम में आजतक कई विधायक ,पुलिस ,आम जनता ,कारोबारी ,पूंजीपती ,जो आवाज़ बुलंद करने की कोसीस करते है उन्हें मौत की नींद सुला दिया जाता है ,जाहीर है जुबां पर लोग ताला लगाये बैठे है या मलाई चाटकर उसका स्वाद लेने में व्यस्त है
आईये इस विडिओ में देखते है कोयले के काला खेल 
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,,,,,,,,झारखण्ड पुलिस को बड़ी सफलता ,,,,,,

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,,,,,,,,,झारखण्ड पुलिस को बड़ी सफलता ,,,,,,
तहलका डेस्क 

हजारीबाग पुलिस ने कटकमसांडी के उलान्झ जंगल से एक LMG ( लाईट मशीन गन ) बरामद किया है इतने बड़े हथियार की बरामदगी पुलिस के द्वारा झारखण्ड में पहली बार किया गया है ,यह LMG २३ सितम्बर २००१ को चुरचु के जंगल में १२ CRPF के जवानो को मारकर लूटी गयी थी ,इसमें 15 जवान घायल भी हुवे थे ,आईपीएस दीपक वर्मा के बुलेट प्रूफ जिप्सी पर भी सैकड़ो गोलिया दागी गयी थी , लाईट मसिंगन के साथ ५७५ रौंड गोलिया और दस मगज़ीन भी बरामद किया गया है ,यह हथियार नृपेन्द्र गंझू जोनल कमांडर भाकपा माओ ने आक्रमण कर लूटा था ,बाद में अनुराग गुप्ता ने नृपेन्द्र को मारकर २० लाख बरामद कर लिया था पर हथियार बरामद नहीं हो पाया था,आज हजारीबाग पुलिस ने एस पी अखिलेश झा के नेतृव में यह बड़ा हथियार बरामद कर लिया है ,






झारखण्ड में चावल का घोटालेबाज कौन ?

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    झारखण्ड में चावल का घोटालेबाज कौन ?

तहलका डेस्क 
झारखण्ड में धान की खरीद और सब्सिडी और लेवी  राईस का जो घोटाला हुवा है उसमे सरकार के नुमायिन्दो ने ७५ % मुनाफा जेब में रख लिया क्युकी सारा काम उनके आदेश पर ही हुवा था ,इसके बाद पैक्स के दबंग लोगो ने अपना हिस्सा निकाल लिया और अब सारा दोस मिल मालिको के मत्थे मढ़ने की पुरजोर कोसिस जारी है ,अगर इन्साफ किया जाये ,इमंदारे से जांच किया जाये ,तो गलती करनेवाले सलाखों के पीछे होंगे और इस लिस्ट में झारखण्ड के लगभग ५ उपायुक्त  जेल जायेंगे ,पर क्या इन्साफ है झारखण्ड में ? मोदीजी के निदेशन में झारखण्ड राज्य में चल रहा चलचित्र कभी भी सच को दिखने का सहस नहीं जूता पा रहा है ,रघुबरदास केवल रबर स्टाम्प बनकर रह गए है ,कहे तो मनमोहन सिंह की तरह झारखण्ड में राज ,,काज ,,सत्ता चल रहा है ,हलाकि मिल मालिक फसे है तो उनकी जुबान  खामोश है पर हजारीबाग के एक मिला मालिक अरुण कुमार ने इस मामले को उठने का साहस ज़रूर किया है ,उन्होंने निर्भीकता से जिस प्रकार तथ्यों को सामने लाया है उसमे कई अधिकारी कर्मचारी के काले चहरे बदनाम होंगे ,भले ही उनके सेहत पर कोई प्रभाव ना पड़े पर उनके काला रंग समाज के सामने ज़रूर आयेगा ,क्युकी कोई भी आईएएस किसी दुसरे आईएएस को फसाता नहीं है और जांच अंततः वही आकार रुकेगी ,आईये अरुण कुमार के बातो को हम हुबहू आपके सामने परोसने की जुर्रत करते है ,फैसला और इन्साफ आपके सामने आ जायेगा ,

झारखंड सरकार के फूड सेक्रेटरी की गुंडागर्दी का मै खुद शिकार हो गया।
मेरे मिल, गणपति राइस प्लान्ट, डेमोटाड हजारीबाग में वित्तीय वर्ष 2012-13 में माह जनवरी 2013 से उपायुक्त हजारीबाग के आदेशानुसार पैक्स के माध्यम से एग्रीमेंट क्लाउज के साथ मिलिंग कार्य के लिए धान आया था। उक्त धान से हमलोगों ने चावल तैयार कर रखा।
यह बात दोनों पक्ष मानते हैं।
एकरारनामा के अनुसार चावल उठाव की ब्यवस़्था सरकार के कर्मियों को अपने वाहन से मिल में मिलिंग चार्ज का भुगतान कर ले जाना था। मेरा कार्य केवल मिलिंग करके सूचना देने का था। मैने कई बार सूचना दिया है। लिखित एवं मौखिक रूप में।
झारखंड में लगभग सभी चावल गोदामों में जगह नहीं रहने, मिलिंग चार्ज, ट्रान्सपोटेस, हैन्डलिंग चार्ज का भुगतान सरकार के द्वारा नहीं करने के कारण मिलों से पुरी क्षमता के अनुसार पैक्स अथवा सरकार के द्वारा चावल का उठाव नहीं किया गया।
उपायुक्त हजारीबाग के पत्रांक 139 दिनांक 15 जनवरी 2014 एवं पत्रांक 366 दिनांक 28 अप्रैल 2014 को इस आशय का पत्र सचिव खाद्य आपूर्ति विभाग को लिखा गया कि मिलों में चावल तैयार है। उठाने हेतु दिशा निर्देश दिया जाए। परंतु सरकार सोती रही।
अंत में सरकार एकरारनामे का उल्लंघन करते हुए झारखंड के सभी राइस मिलों को अगस्त 2014 में बचे हुए चावल के अनुरूप पैसा जमा करने का आदेश निर्गत कर दिया।
अब समस्या यह है कि जब चावल उठाना था तब तो चावल उठाई नहीं, अब उस चावल के अनुरूप पैसा माँग रही है जो चावल लगभग दो वर्ष पूराना है, किडा, मौसम, धुप, बरसात का मार झेल चुका है।
एकरारनामा के शर्तों का उल्लंघन
1. मिल में मिलिंग चार्ज देकर पैक्स /सरकार को चावल का उठाव करना था। नहीं किया
2 . मिल के क्षमता के अनुरूप प्रति दिन पैक्स /सरकार को चावल का उठाव करना था। नहीं किया
3. ट्रान्सपोटींग की ब्यवस़्था खुद सरकार को करना था। नहीं किया
4. मुझे एक रू० का भी भुगतान पैक्स /सरकार ने नहीं किया।
5. चावल लेना था पैसा माँग रही है। यह अपने आप में एकरारनामा का उल्लंघन है।
क्या कहता है कानुन ?
कानून के अनुसार_ कांट्रैक्ट एक्ट सेक्शन 73 कहता है कि - - - - यदि दो पक्षों के बीच में करार हो तो यदि कोई एक पक्ष करार को तोडता है तो करार तोडने वाला दूसरे पक्ष के सारे हर्जाना का देनदार होगा।
माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार राज्य सरकार एकरारनामे का एक पक्षकार के हैसियत रखते हुए मेरे विरूद्ध डिमांड रकम तय नहीं कर सकती है।
इसी कानुन के अनुसार मुझे अपने मेहनताना के साथ हर्जाना का रकम लेना है। सरकार को पैसा देना नहीं है।
मैने व्यवहार न्यायालय हजारीबाग में मनी सूट 9/2014 दायर किया है जो कि लंबित है। सरकार उसमें लडना नहीं चाहती है, एवं पुलिस बल का दुरुपयोग करने के लिए हमलोगों पर F. I. R की है। एवं मिल सिल किया है।
[6:26pm, 30/01/2015] Arun Kumar: मेरे मिल के उपर बैंक कर्ज है सारा स्टाक मिल में पडा हुआ है मिल सिल करने के कारण माल खराब हो रहा है, मशीन चुहा कुतर रहे हैं, चोरी हो रहा है, मेरे सुरक्षा गार्डों को मार पीट कर भगा दिया गया है। कार्य रत कर्मी बेरोजगार हो गए हैं।
[6:49pm, 30/01/2015] Arun Kumar: ज्ञातव्य हो कि अब तक मैंने कोई मुकद्दमा गणपति राइस प्लांट v/s स्टेट आॅफ झारखंड नहीं हारा हूँ।
कानून को ताक पर रख कर मेरा मिल सिल किया गया है। इसलिए इन सारी क्षति को भी पाने का हक मुझे है। और मै इसे लूँगा। मुझे भारतीय कानून व्यवस्था पर पूरा विश्वास है।
उपायुक्त हजारीबाग का पत्रांक 139 दिनांक 15-1-2014 फोटो संलग्न
पत्रांक 366 दिनांक 28-4-2015 




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