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गुरुकुल का गुरु और स्कुल का शिक्षक

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                             शख्शियत 

             गुरुकुल का गुरु और स्कुल का शिक्षक 
कोडरमा से टी पी सिंह
आज के युग में शिक्षक की महत्ता घटी है जबकि राजतंत्र में भी गुरुकुल और शिक्षक की महानता को राजा भी चुनौती नहीं दे पाता था गुरु को राजा से उच्च आदर सम्मान प्राप्त था ,कालांतर में समय बदला तो लोकतंत्र में भी गुरु से बने मास्टर की महानता बनी रही क्युकी वह समाज का सबसे अहम् और प्रभावी अंग बना रहा ,MP MLA मंत्री भी मास्टर या शिक्षक के आगे नट मस्तक होते रहे ,क्युकी उनका योगदान समाज को एक दिशा एक दशा देने की बनी रही समय बदलते गया और मास्टर मास्टरवा बन गया ,क्युकी उसमे लोभ और लाभ के प्रति आकर्षण बढ़ता गया ,जैसे जैसे आकर्षण बढ़ता गया शिक्षक का सम्मान घटता गया ,आज समाज में शिक्षक एक सामान्य इज्जत का हकदार भी नहीं रह गया है ,लेकिन इनके बीच अभी भी कुछ ऐसे शिक्षक है जिन्होंने अपनी मर्यादा को बचाया है और वह मर्यादा समाज के अन्य लोगो के लिए मिशाल बनकर इज्जत बढाता रहता है ,ताकि गुरु सम्मान की मर्यादा कायम रहे इन्ही प्रेरक शिक्षको में एक नाम KP SHARMA का है ,अभी कोडरमा जिले के डोमचांच जैसे ग्रामीण परिवेश में जन्मे पढ़े लिखे शर्माजी ने विनोबा विस्वविद्यालय में वरीय व्याख्याता के पद से रिटायर हुवे राजनीती में भी अच्छी उपलब्धि हासील की लेकिन अपनी तिख्हड़ बोली की वज़ह से मुकाम नहीं प् सके क्युकी आजकल समाज में सच बोलनेवाला कुछ हासील नहीं कर पाता है और राजनीती में तो सच बोलने का मतलब मौत है ,सो शर्माजी ने डोमचांच में ही एक अच्छी सकुल की नीव रखी आज यह स्कुल एक मुकाम हासील कर चूका है ,

   हालाकि शर्माजी यह स्कुल हजारीबाग या रांची में भी खोल सकते थे और उनके तीन वकील पुत्रो ने यह सलाह भी दी पर शर्माजी का तर्क था हजारीबाग या रांची में स्कुल खोलनेवाले की संख्या बहुत है पर डोमचांच में अच्छा स्कुल बिना लाभ के खोलनेवाला कोई नहीं ,मैंने ज़हा बोरा लेकर स्कुल में पढ़ा वह के बच्चो को यह कमी उसके अभिभावक के साथ नहीं होने दूंगा ,लिहाज़ा अपने रिटायर्मेंट का पैसा अपनी पत्नी के रेतायार्मेंट का पैसा और ज़मीन बेचकर स्कुल में लगा दिया ,असामयिक मौत के बाद अपनी पत्नी मंजुला शर्मा के नाम से यह एकादमी एक नेक एकादमी बन चूका है ,अब यह स्कुल किसी नाम का मोहताज़ नहीं है ,हालाकि यह स्कुल बहुत बड़ा नहीं है जिससे इसकी महानता का डंका पूरे राज्य में बजाय जा सके पर इसके खुलने की गाथा और इसमें लगे पैसे के कारण यह jharkhand का एकलौता स्कुल बन चूका है जो एक शिक्षक को महान बनाता है ,और अब शर्माजी के इस नेक कार्यस्थल के चुनाव पर इनके बेटो को भी गर्व होने लगा है लिहाज़ा साल में उनका भी कुछ न कुछ इसमें सहयोग राशी लग ही जाता है ,
यह स्कुल फायदे के लिए नहीं चलाया जाता है बल्कि एक उद्देश्य है जिसकी पूर्ती का बखान तो सभी करते है पर पूरा करने की दिशा में कोई आगे नहीं बढ़ता है ,मंजुला शर्मा के मौत पर मनाई जा रही वर्षी को स्कुल के स्थापना से जोड़ दिया गया है और इस ग्यारह अप्रैल को माननेवाले वर्षी में राज्य के आला अधिकारी मंत्री विधायक शामिल होते है तो इसकी महानता में चार चाँद लग जाते है ,इस बार सरयू राय जैसे धीर गंभीर मंत्री के आगमन ने साबित कर दिया की यह स्कुल सफलता की दिशा में कोई दो कदम आगे बढ़ चूका है ,

    जाहीर तौर पर KP SHARMA कुरेश प्रसाद शर्मा ज़मींदार खानदान में पैदा हुवे थे मायिका माईन्स के मालिक उनके पिताश्री से राजेंद्र बाबू भी चंदा लेने आते थे ,लेकिन KPS या उनके तीन पुत्रो में जमींदारी के कोई गुण नहीं है क्युकी दोनों प्राणी शिक्षक थे और समाज के साथ अपने पुत्रो को भी यह तालीम दी की समाज को कैसे कोई दिशा देना है ,




रामनवमी जुलुश के बहाने राजनीती के दांव

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     रामनवमी जुलुश के बहाने राजनीती के दांव 


रांची डेस्क उमेश ओझा
झारखण्ड का हजारीबाग बड़ा सेंसेटिव जिला है यहाँ बड़कागाँव के महुदी में तीन दशक के बाद रामनवमी जुलुश निकालाने के लिए यशवंत सिन्हा ने ऐलान किया है  ।पर जुलूस को निकलना मुख्य मकसद नही है बल्कि मामले को भड़का देना मुख्य मकसद है ।इसलिए जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है . 
क्योंकि बड़कागाँव में भाजपा  का झंडा उठानेवाला नही बचा सो वज़ूद की लड़ाई है ।वरना रामनवमी का जुलुश नवमी और दशमी को निकलता है ।यह अष्टमी यानि 4 अप्रैल को कहाँ  के पंडित ने जुलुश निकलने को कहा ? तो यहां राजनितिक पंडितो की जमात ने बताया है कि अष्टमी को वहां कुछ बवाल होगा तो उसका छींटा हजारीबाग के जुलुश पर भी पड़ेगा ।उसका पूरा फायदा मिलेगा । बैठे बिठाये सारे लोग अपनी तरफ बीना मेहनत और बिना खर्च के ?हजारीबाग में रामनवमी बड़ा त्यौहार है सो पूरे सूबे की नज़र यहाँ की रामनवमी पर होती है ,यहाँ की रामनवमी के कारन दंगो से कई नेता पैदा हुवे है ,कांग्रेस की यह परंपरागत सीट भाजपा की झोली में चली गयी ,बाद में येन केन प्रकारेण यशवंत सिन्हा इस सीट पर काबिज़ हो गए ,जब मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने बुजुर्ग भाजपाई के फंदे में यशवंत सिन्हा को फांस दिया तो उन्होंने अपने बेटे जयंत सिन्हा को यह सीट  बिरासत में दे डाली ,जयंत और सुमंत यशवंत सिन्हा के दो बेटे है इस सीट पर जयंत के काबिज़ होने से उनके दुसरे बेटे  में इतनी मर्माहत है की वे उसी दींन  से हजारीबाग आना छोड़ दिए ,जबकि वे ही सबसे ज्यादा यहाँ आनेवाले यशवंत पुत्र थे यहाँ के कई लोगो से उनकी आत्मीयता थी, इसलिए उनकी नाराज़गी जायज़ है ,जयंत सिन्हा मोदी लहर में सांसद बन गए मंत्री भी बन गए लेकिन उनके कार्यो की त्रुटी ने उनके विभाग छीन लिए और उन्हें इन्फीरियर विभाग देकर नागरिक उड्डयन मंत्री बना दिया गया ,लेकिन अभी भी मोदी सरकार में उनके वजूद की लम्बी तलाश है सो उनका पत्ता कट सकता है या अगले चुनाव में उन्हें हार का मुह देखना पड सकता है इसलिए खुल गयी गांठो को उनके पीताश्री अभी से सुलझाने में लगे है कई पूराने लोग जो पार्टी छोड़ चुके थे उन्हें बुला लिया गया है कई को मनाया गया है कई को फुसलाया गया है ,और महुदी जहा से जुलुश पिछले 33 साल से बंद है वह से धार्मिक चिंगारी भड़काकर अपनी प्रसिद्धि के अलावे बेटे की जीत को अछुन्न बनाने के प्रयास में यह घोषणा की गयी है ,अष्टमी को कही भी पूरे भारत में जुलुश नहीं निकाला जाता है लेकिन यहाँ अष्टमी को जुलुश इसलिए निकलने की घोषणा कर धार्मिक उन्माद भड़काने की कोसिस की गयी है ,यशवंत सिन्हा बहुत ही घाघ राजनीतिग्य है सो वे जानते है की उन्हें इस कार्य के लिए अनुमति नहीं मिलेगी और उन्हें महुदी या उससे पहले गिरफ्तार कर लिया जायेगा ,वैसी स्थिति में उनके लोग हजारीबाग और अन्य स्थानों पर निकल रहे जुलुस को नौमी या दशमी को रुकवा देंगे की यशवंत सिन्हा गिरफ्तार हो गए है हिन्दुओ का हक़ छीना जा रहा है वैसे में एक धार्मिक लहर चलेगी और इसका राष्ट्रिय रूप सामने आयेगा ,महुदी विवाद तब भी था जब यशवंत सिन्हा यहाँ के सांसद और भारत सरकार के वित्त और विदेश मंत्री थे पर उन्होंने इस मामले में कोई पहल नहीं की जिससे कोई हल भी निकल सकता था राज्य में भी इनकी सरकार और इनके द्वारा बनाया गया मुख्यमंत्री था ,पर इन्होने ऐसा नहीं किया इस मामले को इसी समय के लिए पाल पोसकर बड़ा किया और अब उसका नाजायज़ फायदा उठाने के लिए आगे बढ़ रहे है ,सनद रहे की जब यशवंत सिन्हा जी राज्य सभा के सांसद थे तो र्संसद में यह बात कही थी की हजारीबाग के हिन्दू दंगा इसलिए करते है क्युकी उसके बाद मुसलमानों की ज़मीन को हड़प जा सके ,फिर जब भाजपा में शामिल हुवे तो गोहत्या के विरुद्ध रैली निकली और गिरकर बेहोश हो गए दिल्ली चले गए ,बाद में महावीर विस्व्कर्मा को अस्वस्थ बनाकर अवैध रूप से टिकट हथिया लिया सांसद बने तो गो हत्या करने के लिए स्लाटर हौस बनाने के लिए सांसद निधि का पैसा दे दिया ,जब आईएस बने तो गिरिडीह में sdo पद पर थे तो एक सरदार करतार सिंह दुग्गल का केस कटवा दिया बाद में इस कार्य के लिए इन्हें माफ़ी मांगते हुवे तख़्त हर्मंदीर में मत्था टेकना पड़ा था ,
इस तरह इनका कैरेक्टर बड़ा ही कम्प्लिकेटेड रहा है लेकिन किस्मत इनका साथ हर कदम पर दिया है सो ये कामयाब इंसान रहे है विदेशी में भी इनकी कई कोठिया है ,झारखण्ड के रघुबर सरकार से लेकर केंद्र के बड़े नेता इनसे डरते है इसी कर्ण इनके बेटे को मंत्री पद दिया गया है , जबकि वर्तमान में ये किसी भी पद पर नहीं है ,
बड़का गाव में इनकी स्थिती काफी नाज़ुक है क्युकी वहाँ कांग्रेस की विधायक है और दुसरे नंबर पर आजसू है सो नैया डगमग है ,एक बार तो हद तब हो गयी जब एक डॉन लखन साव के नेतृत्व में कार्यक्रम किया इनके बेटे ने यहाँ कार्यकर्त्ता सम्मलेन कर डाला जो आम सभा बन गया बड़कागाव में । नापो पूल के शिलान्यास का कार्यक्रम बड़कागाँव आनन फानन में । अभी सारा ध्यान बड़कागाँव पर है ताकि अपने लिए या उपजावु मिटटी में थोड़ा खाद पानी डालकर उर्वर बनाया जा सके ।।वरना एक राष्ट्रीय स्तर के नेता को कार्यक्रम करने के लिए एक गुंडे का सहारा नही लेना पड़ता ।ज़मीन माफिया से लेकर कोयला माफिया और NTPC में माफियागिरी कर रहे लोगो की सेना तैयार है कि इसबार कुछ न कुछ करवा देना है ।और इस मामले में हज़ारीबाग़ शांत है ।इसलिए यहां की हवा को बड़कागाँव की चिंगारी देने की ज़मीन तैयार की जा रही है ।और एक बड़े नेता को फिर से चोट लगाकर बेहोसी का नाटक का प्लॉट तैयार हो रहा है ।यही नाटक इनके बेटे की नैया पार लगा सकता है और इनके गम हो रही अस्मिता को चमक दे सकता है 
अब देखना है कि जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार क्या कुछ कदम उठा पाते है ।

एन डी ग्रोवर - एक असाधारण प्रतिभा

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       एन डी ग्रोवर - एक असाधारण प्रतिभा 

नारायण दास ग्रोवर एक नाम है जिसने भारतीय शिछा को एक नया आयाम दिया है और समाज को देश को एक प्रेरणा दी की *कौन कहता है की आसमां में सुराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो *,समाज में देश में एक आदमी जिसने इमानदारी से शिछा का अलख जगाया तो एक नयी राह निकल पड़ी और कन्वेंतिया एदुकेसन जो इसाई मिशनरी के हाथो की कठपुतली बनता जा रहा था उसपर विराम लगा ,

आज अच्छी तालीम देने के लिए एक अच्छा संस्थान जो कम खर्च पर गरीब से लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए जन्नत की शक्ल बनता जा रहा है 6 फ़रवरी को ND GROWER की सातवीं पुन्य तिथि है ,15 नवम्बर 1923 को जन्मे ग्रोवर साहब ने भारत विभाजन के बाद 1960 से शिछा के अलख जगाने में जुटे तो 6 फ़रवरी 2008 यानि मृत्यु के दीं तक उसी सेवा में रहे बिना किसी लोम मोह घृणा तृष्णा के ,निशुल्क शिछा देने को प्रेरित करनेवाले इस महत्मा ने संस्थान को एक नई उचाई तक पहुचाया ,
DAV हजारीबाग ने ग्रोवर साहब के पुण्यतिथि को सिल्वर जुबली कार्यक्रम के साथ जोड़ दिया है साथ ही हवन पूजन और वाद विवाद प्रतियोगीता आयोजीत की गयी है इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय क्विज़ मास्टर प्रणव मुखर्जी को बुलाया गया है ताकि प्रतियोगीता को रास्ट्रीय फलक पर प्रतिस्थापीत किया जा सके ,

*रजरप्पा मंदिर में CRPF जवान ने दे दी अपनी बलि,

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*            रजरप्पा मंदिर में CRPF जवान ने  दे दी अपनी बली ,
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रामगढ़ स्थित रजरप्पा के मां छिन्नमस्तिके मंदिर परिसर में कल एक अजीबोगरीब आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिससे सनसनी फैल गई है। हजारीबाग में तैनात बिहार के बक्सर के बलिहार गांव के एक सीआरपीएफ जवान ने, जिसका नाम संजय नट  है, उसने मंदिर में पूजा अर्चना के बाद अपने साथ लाए गए धारदार हथियार से अपना गला काटकर अपनी बलि चढ़ा दी।



प्रत्यक्षदर्शियों ने ने बताया कि इस व्यक्ति ने सुबह मंदिर में मां छिन्नमस्तिका की पूजा अर्चना की और उसके बाद माता की प्रतिमा के आगे खुद की बलि चढ़ा दी। इस घटना के बाद से मंदिर में ताला लगा दिया गया है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

*बक्सर का रहने वाला है मृतक संजय नट*

व्यक्ति की पहचान बक्सर बलिहार गांव (बिहार) निवासी संजय नट( 45) के रूप में की गई।
मृतक संजय नट सीआरपीएफ का जवान था और हज़ारीबाग़ में तैनात था। दो दिन पहले ही अपने गाव बलिहार में छुट्टी बिता ड्यूटी पर गया था। घर में पत्नी शारदा देवी व दो बेटे और दो बेटियां हैं। घटना की जानकारी मिलने से पूरा परिवार सदमे में है और पत्नी शारदा का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।

*माता की पूजा अर्चना कर परिक्रमा की, दे दी बलि*

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संजय को सोमवार से ही मंदिर परिसर के आसपास देखा गया था। मंगलवार सुबह उसने मां छिन्नमस्तिका की पूजा की और फिर मंदिर की परिक्रमा करने लगा। इसी दौरान उसने खुद के साथ लाए कटारी से मंदिर के मुख्य द्वार के पास अपना गला रेत डाला।

इस घटना में मुंदिर का मुख्य द्वारा पर खून फैल पड़ा और संजय वहीं गिर गया और उसकी वहीं मौत हो गई।फौरन पुलिस को इस घटना की सूचना दी गई और मंदिर के द्वार पर ताला लगा दिया गया।

मौके पर पहुंची पुलिस ने संजय के पॉकेट की तलाशी ली तो कागज मिला। इससे उसकी पहचान हुई और कागज में मिले फोन नम्बर से उसके घरवालों को सूचना दी गई। उसके परिजनों के अनुसार, संजय की मानसिक स्थिति बिल्कुल ठीक थी और वो खेती-किसानी का काम करता था।

*पहले से ही बलि का मन बनाकर आया था*



प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि संजय पहले से ही बलि का मन बनाकर यहां आया था। उसने ठीक वैसी ही नई कटारी अपने साथ रखी थी, जैसी कि मां छिन्नमस्तिका की प्रतिमा में है।

उधर, घटना के बाद मंदिर में पूजा अर्चना पर रोक लगा दी गई है। मंदिर के महंत ने बताया कि अब शुद्धिकरण के बाद ही मंदिर में पूजा अर्चना शुरु हो सकेगी। दोपहर तक पूजा बंद रहेगी, इस दौरान विधिवत मंदिर का शुद्धिकरण किया जा रहा है।

*पंचद्रव्य और पंचगव्य से किया गया मंदिर का शुद्धिकरण*

मंदिर में हुई आत्महत्या की घटना के पश्चात मंदिर के पूजारियों के द्वारा मंदिर के शुद्धिकरण का कार्य किया गया। इस दौरान पूजारियों ने पंचगव्य , पंचद्रव्य व पांच नदियों के जल से मंदिर का शुद्धिकरण किया। मंदिर शुद्धिकरण के दौरान विशेष रूप से पूजा की गई। तत्पश्चात सुबह नौ बजे के बाद श्रद्धालूओं के लिए मंदिर का पट खोला गया। जिसके बाद बाहर से आए श्रद्धालुओं को पूजा का मौका मिला।

*आत्महत्या की पुलिस ने की पुष्टि*

मौके पर मौजूद रजरप्पा थाना प्रभारी अतिन कुमार ने बताया कि प्रथम द्रष्टया यह मामला आत्माहत्या का लगा रहा है। हलांकि पूरी जानकारी पोस्टपार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही दी जा सकती है।

*पुजारी ने भी कहा - आत्महत्या ही है*

रजरप्पा छिन्नमस्तिके मंदिर के न्यास समिति के सचिव सह पुजारी शुभाशिष पंडा ने बताया कि यह मामला पूरी तरह से आत्हत्या का है। युवक ने यहाँ पहुंचकर पहले पूजा-अर्चना की। उसके बाद मां के समक्ष स्वयं अपना गला रेतकर आत्म हत्या कर ली।

फर्जी खाते के मायाजाल में फसी एक महिला ,37 करोड़ की हेराफेरी

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    एक्सिस बैंक  का कारनामा ,37 करोड़ के लेनदेन फर्जी खाते से 

पुलिस ,आयकर ,बैंक सभी  मौन मतलब दाल में है                      काला ,मिलीभगत की बू 




तहलका डेस्क हजारीबाग 
हजारीबाग में एक महिला का एक्सिस बैंक में जाली खाता खुलवाकर तीन साल में 37 करोड़ की हेराफेरी की गयी ,महिला को तब पता चला जब आयकर वालो ने नोटिस किया ,मामला एक्सिस बैंक से जुडा  है जहा २०१० में किरण कुमारी पति vivek kumar के नाम से जाली पैन कार्ड जाली स्थानीयता प्रमाणपत्र जमाकर खाता खुलवा दिया गया,बाद में महिला ने सदर थाना हजारीबाग में एक FIR की 307/14 लेकिन आजतक  अनुसंधान में ना तो कुछ हुवा नाही किसी की गिरफ्तारी की गयी ,थाना से लेकर इस बड़े मामले में ऊपर के पुलिस पदाधिकारी बोलने से कतरा  रहे है .

जबकि बैंक के अधिकारी और मैनेजर कुछ भी मुह खोलने से मना कर रहे है कहते है उपर की बात है हमें बोलने की इजाजत नहीं है वही आयकर अधिकारी भी कहते है हम कुछ नहीं बोल सकते अनुसंधान चल रहा है ,जबकि इन्होने अभी तक नाही ही किसी को गिरफ्तार किया है नाही किसी के ऊपर केस किया नाही ही किसी से औपचारिक  पूछताछ की

,जबकि महिला किरण कुमारी को अभी नवम्बर २०१६ में नोटिस किया गया है ,असल में मामला इतना बड़ा है की हर जगह से मैनेज कर लिया गया है और इस मामले में बैंक ,आयकर अधिकारी ,और पुलिस तीनो मैनेज हो चुके है इसलिए सिर्फ कागज़ी खानापूरी की जा रही है ,मयंक मिश्र स्पेसल जांच अधिकारी आयकर रांची से जब फोन पर बात हुई तो उलटे यह पूछने लगे की कहा से आपको जानकारी मिली किसने कागज़ात दिए यह बताईये ,जबकि उनके पास यह मामला दो वर्षो से चल रहा है


अगर इमानदारी से जांच की जाए तो कई अन्य मामले प्रकाश में आ सकते है और एक बड़े रैकेट का पर्दाफास हो सकता है पर सारे सरकारी माध्यम औरबैंक की मिलीभगत ने मामले पर पर्दा डाल दिया है ,ज़बकी नियम के हिसाब से फर्जी खाता खोलने वाले आदमी और बैंक अधिकारी दोनों पर केस किया जाना चाहिए था .अब बेचारी बरही की महिला को बार नोटिस किया जाना आयकर की मंशा को प्रदर्शित करता है ,जो एक स्कुल में 2 हज़ार माहवारी पर बच्चो को पढ़ाती है और उसका पति जीवन बिमा करता है ,दोनों पिछले 14 सालो से ITR भी भरते है ,
अब ज़रा इस वीडियो में महिला का दर्द भी सुने
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झारखण्ड में हरिजनों पर अत्याचार ,कोई सुनवाई नहीं

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    झारखण्ड में हरिजनों पर अत्याचार ,कोई सुनवाई नहीं 
तहलका रामगढ
रणजीत
मांडू थाना में हरिजन केस नही लिया जाता ।दबंगों ने हरिजनों की जमीन लूटी इज्जत पर हाथ डाला पुलिस से लेकर प्रसासन तक खामोश क्योंकि दबंग लोग मुख्यमंत्री के जाती के करीबी है । झारखण्ड के मांडू में जिन हरिजनों को विनोबा जी के भूदान आंदोलन में जमीन मिली आज मुख्यमंत्री के जाती के लोग अवैध ढंग से जमाबंदी करवाकर उसपर कब्ज़ा कर रहे है ।जबकि सरकारी आदेश है कि हरिजन आदिवासी के अलावे जिस किसी जाती के लोगो को GM ज़मीन का पर्चा दिया जाये या जमाबंदी खोला जाये तो उसकी अनुमति कैबिनेट से होंनी चाहिए ।दूसरे यहां 88-89 में हरिजनों को पर्चा दिया गया उनकी जमाबंदी खोली गयी ।उस प्लॉट की जमीन पर अम्बेडकर भवन स्कुल और पंचायत भी बना है । लेकिन मांडू के कर्मचारी से लेकर अंचल अधिकारी ने पैसे के दम पर सब कुछ अवैध को वैध बना दिया ।२००१ में बनाया गया पर्चा अब ज़मीं पर दखल कब्ज़ा करवा रहा है। जहा हरिजनों के १०० घर है। 

अब दबंग बाज़बरन उस जमीन पर डोजर चला रहे है तो गरीबो माजलूमो हरिजनों ने उन्हें रोका तो सबके साथ मार पीट की महिलाओ को ब्लॉज तक फाड़ डाला और कहा कहि जाओ कुछ नही होगा जातिसूचक गलियां दी ।सभी डरे सहमे है फिर भी लोग थाने गए ।अमूमन थाने में जैसा होता है वही हुवा केस नही लिया गया ।वहाँ भी गालियो का सामना करना पड़ा तो DIG कमिश्नर को भी महिलाओं ने आवेदन दिया है ।अब इसके बाद भी अगर केस दर्ज नही होता है तो मान लिया जाये की थाना ही नही बिकता सरकार भी बिकती है ।और सरकार वायदे कायदे और इरादे जनता के सामने कुछ और अंदर कुछ और है। 


लेकिन इन सबके बावजूद एक बात समझ में नही आती की उपायुक्त रामगढ तेज़ तर्रार है बोल्ड है फिर उनसे भी क्या ईमानदारी की आशा नही रखी जा सकती है ? सवाल सीधा है बड़ा है पर नुकीला और कटीला भी है ।मांडू थाना तो मॉन लो की बराबर से दबंग थानेदारी का अड्डा रहा है लिहाज़ा वहां के थानेदार शायद DIG पर भी भारी पड़ जाये SP को तो कोयला चोर से लेकर भ्रस्टाचारियो ने चु चु का मुरब्बा बना दिया है ।यहाँ थाने  में जाने से महिलाओं से थानेदार इज्जत मांगता है। यह तहलका ने ही खुलासा किया था ।तीसरी तरफ सरकार है जो कहती है मेल पर ही दर्ज होगा FIR पर कैसे ?सरकार के बड़े बड़े हाकिम मुहाफ़िज़ और अलंबरदार जिनपर सारा दारोमदार है वे तो अपना मेल खोलते ही नही नीचेवाले को नसीहत क्या देंगे। 


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