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फर्जी खाते के मायाजाल में फसी एक महिला ,37 करोड़ की हेराफेरी

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    एक्सिस बैंक  का कारनामा ,37 करोड़ के लेनदेन फर्जी खाते से 

पुलिस ,आयकर ,बैंक सभी  मौन मतलब दाल में है                      काला ,मिलीभगत की बू 




तहलका डेस्क हजारीबाग 
हजारीबाग में एक महिला का एक्सिस बैंक में जाली खाता खुलवाकर तीन साल में 37 करोड़ की हेराफेरी की गयी ,महिला को तब पता चला जब आयकर वालो ने नोटिस किया ,मामला एक्सिस बैंक से जुडा  है जहा २०१० में किरण कुमारी पति vivek kumar के नाम से जाली पैन कार्ड जाली स्थानीयता प्रमाणपत्र जमाकर खाता खुलवा दिया गया,बाद में महिला ने सदर थाना हजारीबाग में एक FIR की 307/14 लेकिन आजतक  अनुसंधान में ना तो कुछ हुवा नाही किसी की गिरफ्तारी की गयी ,थाना से लेकर इस बड़े मामले में ऊपर के पुलिस पदाधिकारी बोलने से कतरा  रहे है .

जबकि बैंक के अधिकारी और मैनेजर कुछ भी मुह खोलने से मना कर रहे है कहते है उपर की बात है हमें बोलने की इजाजत नहीं है वही आयकर अधिकारी भी कहते है हम कुछ नहीं बोल सकते अनुसंधान चल रहा है ,जबकि इन्होने अभी तक नाही ही किसी को गिरफ्तार किया है नाही किसी के ऊपर केस किया नाही ही किसी से औपचारिक  पूछताछ की

,जबकि महिला किरण कुमारी को अभी नवम्बर २०१६ में नोटिस किया गया है ,असल में मामला इतना बड़ा है की हर जगह से मैनेज कर लिया गया है और इस मामले में बैंक ,आयकर अधिकारी ,और पुलिस तीनो मैनेज हो चुके है इसलिए सिर्फ कागज़ी खानापूरी की जा रही है ,मयंक मिश्र स्पेसल जांच अधिकारी आयकर रांची से जब फोन पर बात हुई तो उलटे यह पूछने लगे की कहा से आपको जानकारी मिली किसने कागज़ात दिए यह बताईये ,जबकि उनके पास यह मामला दो वर्षो से चल रहा है


अगर इमानदारी से जांच की जाए तो कई अन्य मामले प्रकाश में आ सकते है और एक बड़े रैकेट का पर्दाफास हो सकता है पर सारे सरकारी माध्यम औरबैंक की मिलीभगत ने मामले पर पर्दा डाल दिया है ,ज़बकी नियम के हिसाब से फर्जी खाता खोलने वाले आदमी और बैंक अधिकारी दोनों पर केस किया जाना चाहिए था .अब बेचारी बरही की महिला को बार नोटिस किया जाना आयकर की मंशा को प्रदर्शित करता है ,जो एक स्कुल में 2 हज़ार माहवारी पर बच्चो को पढ़ाती है और उसका पति जीवन बिमा करता है ,दोनों पिछले 14 सालो से ITR भी भरते है ,
अब ज़रा इस वीडियो में महिला का दर्द भी सुने
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झारखण्ड में हरिजनों पर अत्याचार ,कोई सुनवाई नहीं

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    झारखण्ड में हरिजनों पर अत्याचार ,कोई सुनवाई नहीं 
तहलका रामगढ
रणजीत
मांडू थाना में हरिजन केस नही लिया जाता ।दबंगों ने हरिजनों की जमीन लूटी इज्जत पर हाथ डाला पुलिस से लेकर प्रसासन तक खामोश क्योंकि दबंग लोग मुख्यमंत्री के जाती के करीबी है । झारखण्ड के मांडू में जिन हरिजनों को विनोबा जी के भूदान आंदोलन में जमीन मिली आज मुख्यमंत्री के जाती के लोग अवैध ढंग से जमाबंदी करवाकर उसपर कब्ज़ा कर रहे है ।जबकि सरकारी आदेश है कि हरिजन आदिवासी के अलावे जिस किसी जाती के लोगो को GM ज़मीन का पर्चा दिया जाये या जमाबंदी खोला जाये तो उसकी अनुमति कैबिनेट से होंनी चाहिए ।दूसरे यहां 88-89 में हरिजनों को पर्चा दिया गया उनकी जमाबंदी खोली गयी ।उस प्लॉट की जमीन पर अम्बेडकर भवन स्कुल और पंचायत भी बना है । लेकिन मांडू के कर्मचारी से लेकर अंचल अधिकारी ने पैसे के दम पर सब कुछ अवैध को वैध बना दिया ।२००१ में बनाया गया पर्चा अब ज़मीं पर दखल कब्ज़ा करवा रहा है। जहा हरिजनों के १०० घर है। 

अब दबंग बाज़बरन उस जमीन पर डोजर चला रहे है तो गरीबो माजलूमो हरिजनों ने उन्हें रोका तो सबके साथ मार पीट की महिलाओ को ब्लॉज तक फाड़ डाला और कहा कहि जाओ कुछ नही होगा जातिसूचक गलियां दी ।सभी डरे सहमे है फिर भी लोग थाने गए ।अमूमन थाने में जैसा होता है वही हुवा केस नही लिया गया ।वहाँ भी गालियो का सामना करना पड़ा तो DIG कमिश्नर को भी महिलाओं ने आवेदन दिया है ।अब इसके बाद भी अगर केस दर्ज नही होता है तो मान लिया जाये की थाना ही नही बिकता सरकार भी बिकती है ।और सरकार वायदे कायदे और इरादे जनता के सामने कुछ और अंदर कुछ और है। 


लेकिन इन सबके बावजूद एक बात समझ में नही आती की उपायुक्त रामगढ तेज़ तर्रार है बोल्ड है फिर उनसे भी क्या ईमानदारी की आशा नही रखी जा सकती है ? सवाल सीधा है बड़ा है पर नुकीला और कटीला भी है ।मांडू थाना तो मॉन लो की बराबर से दबंग थानेदारी का अड्डा रहा है लिहाज़ा वहां के थानेदार शायद DIG पर भी भारी पड़ जाये SP को तो कोयला चोर से लेकर भ्रस्टाचारियो ने चु चु का मुरब्बा बना दिया है ।यहाँ थाने  में जाने से महिलाओं से थानेदार इज्जत मांगता है। यह तहलका ने ही खुलासा किया था ।तीसरी तरफ सरकार है जो कहती है मेल पर ही दर्ज होगा FIR पर कैसे ?सरकार के बड़े बड़े हाकिम मुहाफ़िज़ और अलंबरदार जिनपर सारा दारोमदार है वे तो अपना मेल खोलते ही नही नीचेवाले को नसीहत क्या देंगे। 


झारखण्ड में स्पोर्ट्स की डूबती नैया-जिम्मेवार कौन ?

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    झारखण्ड  में  स्पोर्ट्स  की  डूबती  नैया-जिम्मेवार कौन ?


सुधांशु  सुमन नामक एक तथा कथित समाजसेवी   झारखण्ड  ओलम्पिक  असोसिएसन का उपाध्यछ की कुर्सी पर काबिज़ हो चूका है ,चंचल भट्टाचार्य से लायजनिंग कर आर के आनंद की खिदमत से यह आदमी इस कुर्सी पर काबिज़ हो गया जिसने झूठ में भी कभी खेल का मैदान तक नहीं देखा खेलना और खेल संघो का प्रतिनिधित्व करना तो अलग बात है। यही कारन है की झारखण्ड में अगर धोनी को निकाल दे तो खेल में शून्यता ही दिखाई देगी। आर के आनंद भी चाहते है की उन्हें कोई दलाली चमचागिरी करनेवाला मिल जाये जो झारखण्ड आने के बाद उनकी खिदमत में लगा रहे। खेल के खिलाडी  गायब है और झारखण्ड  में ऐसे लोग काबिज़ हो रहे है जो सत्ता के गलियारे में दलाली की बिन बजा  रहे है जिनका चरित्र विवादास्पद है। 

कौन है मनोज गुप्ता ? झारखण्ड सरकार में .

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    कौन है मनोज गुप्ता ? झारखण्ड सरकार  का खैरख्वाह ?
उमेश ओझा
तहलका डेस्क रांची
मधु कोड़ा सरकार की तरह अब रघुबर दास की सरकार में कुछ ऐसे लोगो का नाम आ रहा है जो सरकार में बतौर दलाल की भूमिका में है पर आईएएस आईपीएस से लेकर अधिकारियो के तबादले की लिस्ट उनके घर पर तैयार होती है। मनोज गुप्ता ऐसा ही एक नाम है यह आदमी मुख्य मंत्री का खासमखास है। इसलिये तो कल तक जिस आदमी का एक छोटा बिजली रिपेयरिंग का दूकान थी  साथ में कबाड़ी का अवैध काम करता था वह आज करोडो का मालिक बना बैठा है। केवल सत्ता के गलियारे में लाइजनर बनकर। सी ओ BDO से लेकर सचिव तक के तबादले की नीव रखता है ,सभी माफिया सभी ज़मीन दलाल ,सभी बड़े व्यवसायी से इसका संपर्क है और यह आदमी सरकार के नाम पर पैसे की बड़ी उगाही कर  रहा है अब यह पैसा सरकार के खिदमत में जाता है या कही और इसकी जांच ज़रूरी है। राजेन्द्र सिंह के बेटे का पार्टनर है और हजारीबाग बोकारो में इसके बड़े काम हो रहे है।कई जगहों पर कई आईपीएस के लिए ज़मीन भी खरीद कर रखा है  अभी दो महीने पहले बेटे का नामांकन दिल्ली में कराया तो रहने के लिए एक करोड़ का फ्लैट ही खरीद लिया। क्या रघुबर दास ने इसे अपने लिए रखा है ? क्या मोदी जी की पारदर्शीता यही है की कल के कबाड़ी चोर आज सत्ता चलाने में अपनी भूमिका निभाए ? रांची में कुछ लोग अब इसपर RTI  से जवाब मांगने की तैयारी कर रहे है उसके बाद मोदीजी के सामने यही सवाल होगा। सरकार भाजपा की है या दलालो की  ? इसलिए इस आदमी की खूफिया विभाग IB  या सीबीआई से जांच होनी चाहिए। दूसरे यह भी साबित होने लगा है की भाजपा की सत्ता का दलाल कौन है ? एक कांग्रेसी !

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सवालो के घेरे में झारखण्ड का राजभवन

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     आरोपों के  घेरे  में  झारखण्ड  का  राजभवन
तहलका डेस्क रांची
कुलपति  विनोबा गुरदीप सिंह  के  भ्रस्ताचार की  सीमा पार  हो  चुकी  है  फिर  भी  उन्हें  बचाए  और  बनाये  रखना क्या  मज़बूरी  है ,जबकि  राजभवन  को  सभी  प्रकार  की  भ्रस्टाचार   के  साबुत  पेश  किये  जा चुके  है ,छात्रों  के  साथ  गुंडागर्दी ,कोकशास्त्र  लिखने  छापनेवाले को  यहाँ  पास  कर  दिया  जाता  है  सही  छात्रों  को  अपने  रिज़ल्ट  के  लिए  आमरण  अनसन  करना  पड़ता  है ,वीकास के  कार्यो  में २२  प्रतिसत  कमिसन  लेकर  घटिया  काम  को  भी  मंजूरी  मिल  जाती  है ,लगे  पदों  को  उखाड़कर कुलाधिपति  से  नया  पेड़  लगाया  जाता  है ,पुराने  राज्यपाल के  बोर्ड  उखाड़कर   नए  राज्यपाल  को खुस  किया  जाता  है  उनका  बोर्ड  लगाकर ,पर्यावरण विद  होकर  भी  १००  से  अधिक पदों  को  कटवाकर  एक  बड़ा  अपराध  किया  है ,लेकिन  535 करोड़  के  गेम से  सारे  लोग  मैनेज  हो  जाते  है ,राजभवन राज्य  सरकार विधायक  सांसद  मंत्री सीनेट  सिंडिकेट और  प्रभावशाली  लोग .जबकि इनकी  नियुक्ति ही अवैध  है और इनके  नियुक्ति पर उच्च न्यायलय की तलवार  लटक  रही है .


कुलपति ने ताज़ा कारनामा कर डाला ।जब राज्यपाल को रिपोर्ट भेजा गया सोसल मीडिया में वायरल हो गया कि कुलाधिपति को गुमराह किया गया ।जहाँ पेड़ लगवाया गया वहां से पेड़ उखाड़ा गया था ।अब सरदारजी ने आदेश दिया की 17 सितम्बर को जिन पेड़ो को उखाड़ा गया उसे फिर से लगा दो ।आज यानि 20 सितम्बर को सूखे हुवे पेड़ो को फिर से लगा दिया गया ।है ना सरदारजी की बुद्धिमानी ? और एक बार फिर से राज्यपाल द्वारा लगाया पेड़ उखाड़ कर दूसरे जगह लगाने की बेवकूफी की गयी ।कैसा है यह पर्यावरण विद सरदार ?ऐसे पर्यावरण विद ही झखण्ड को खोखला कर रहे है ।
दूसरी तरफ कुलाधिपति की गरिमा के विपरीत गुरदीप सिंग ने उनके द्वारा लगाए गए पेड़ को उखाड़कर दूसरी जगह लगवा दिया ।यह सरासर गलत है ।इनको जहाँ लगवाना था वही लगाते निर्णय में फेरबदल कर राज्यपाल की गरिमा को धूमिल किया ।इनके ऊपर प्रोटोकॉल उलंघन का केस दर्ज होना चाहिए ।
तीसरी बात है कि कौन विधि से इन्होंने चार दिनों के उखाड़े पेड़ को फिर से लगाने का काम किया ? क्या यह पागलपन नही है ? और सारे मामलो की जानकारी के बावजूद राज्य सरकार और राज्यपाल इनको पद पर शोभायमान रखे है क्या यह इनके किसी गुप्त कमज़ोरी या पूर्वाग्रह को नही दर्शाता है ? क्या यह आदमी कुलपति बने रहने के लायक है ?

बीएड का रिजल्ट निकल गया क्यों ?जब प्रॉब्लम थी तो संभव कैसे हुवा ? यानी जितनी बाते बोल रहे थे सभी झूठ थी । फिर वार्ता कर अनसन के दूसरे दीं ही क्यों नही तुड़वाया ।उस समय कह दिया मेरे हाथ में कुछ नही मैं रिज़ल्ट नही दे सकता आज कैसे दिया ।आपके हाथ में क्या है घुस लिए कुछ काम नही करना ।अरे बीएड कॉलेज के लोग डर से कुछ नही बोल रहे है पर सच यही है कि बिना चढ़ावा के रिजल्ट नही दिया जायेगा ।बीएड वालो ने भी बहुत गुड़ गोबर किया है इसलिए कमिसन माँगा गया था ।अकेले कैसे खा जाते सरदार मैं हूँ ।पर अपने मुह अपना हाथ अपने लोगो ने कानून अपने हाथ में लेकर हाथ खाली करवा दिया ।छात्र तो बेचारे मोहरा बन गए जो संगठन के लिए बीएड के लिए लात जुते खाये ।पर कोई बात नही 1100 छात्रों के साथ न्याय हो गया ।

कुलपती के क्रोध की आग कहाँ से लग रही है अब समझ में आने लगा है,यहाँ हम आपको एक विडिओ दिखा रहे है यह वीडियो कुलपति के ठेकेदारी की पोल खोलता है,यह नाला 18 लाख की लागत से बना है ,मरे हुवे पत्थरो को केवल रख दिया गया है जो पहली बरसात में ही बह निकले,नीचे केवल तीन नंबर इट से सोलिंग कर दिया गया है बालू डालकर,इसके उपर ढलाई भी नहीं,आप फोटो विडिओ देखकर अंदाजा लगा सकते है की किस ग्रेड का काम है,जबकि इनके यहाँ अपना इंजीनियर अपना सबकुछ है पर काम के लिए नहीं बल्कि घोटाला कैसे किया जाये इसके लिए ,इसमें स्टीमिट का 20प्रतिसत रुपया भी खर्च नहीं हुवा है,
इससे आगे चलते है तो अभी ५३५ करोड़ का बजट पास हुवा है सूत्र बताते है की साहब का कमिसन पांच प्रतिसत है बिना लाग लपेट के यानी २५ करोड़ में दाग नहीं,इसके अलावे चमचे ,चाटुकार, इंजीनियर ,सीनेट ,सिंडिकेट, बड़ा बाबु, ऑफिस में भी 17 प्रतिसत का खेल है ,यानी सौ करोड़ केवल प्रसाद बाटने में चला जायेगा तो काम घटिया होगा ही,ऐसे में मरा हुवा पत्थर में बहता नाला,बहता हुवा मैदान आपको मिलेगा ही,प्रश्न उठायियेगा तो डंडा लाठी उठाकर हडकायेगा ,की मेरे खिलाफ नहीं बोलो सभी चुने हुवे प्रतिनिधि मंत्री संत्री मेरे दरबारी है,सही बात है,कोई बोलने को तैयार नहीं यानी सभी जगहपर मैनेज,,,
यहाँ का ओडिट होना जरुरी है ,,अगर ओडिट नहीं हुवा तो हमलोग एक टीम बना रहे है उसमे पत्रकार वकील छात्र समाजसेवी और जागरूक जनता की टीम होगी,फैसला तो होगा ही इसमें सभी की पोल खुलेगी चाहे वह कुलपति हो या फिर उनको साथ देनेवाले शिछक सीनेट सिंडिकेट या जन प्रतिनिधि,

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                                    कृतघ्न कुलपति 

विनोबा भावे विस्वविद्यालय आज जिस मुकाम पर हैउसमे सबसे अहम् योगदान विनोदिनी तरवे का है ,फिर उसके बाद उनके समकछ कोई कुलपति नहीं आया,प्रबंधन,प्रशासन,सत्र,शैछ्निक वातावरण,कुल की गरिमा,संस्कारका जो माहौल उन्होंने तैयार किया उसके पसंगे में भी गुरदीप नहीं है,अभी सिल्वर जुबली कार्यक्रम का आगाज़ हुवा तो उन्हें ही भुला दिया इस नामुराद कुलपति ने,और कोई सीनेटकोई सिंडिकेट कोई प्रोफ़ेसर ने उन्हें इस बात को कहने की हिम्मत नहीं की क्यों? क्युकी यहाँ अब कोई प्रोफेसर बचा ही नहीं सभी ,,,,,,,है,सरदार के आगे सभी नतमस्तक है,,सभी समाज के लोग इनके एहसानों के बोझ टेल दबे है,,तभी तो एक रिटायर शिछक जिन्हें सम्मानित भी किया गया उन्हें ही बोलना पड़ा,लिखना पड़ा,
Mahesh Lal Das

हें हें हें ,गुरदीप जी यह क्या किया आपने? रजत जयंती के प्रारंभ में ही ( स्वर्गीय) डॉ विनोदिनी तरवे जी , को याद तक नहीं किया!
जिस प्रकार श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी झारखंड राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल और विवि की प्रथम महिला कुंलाधिपति हैं ,उसी तरह करबे जी झारखंड ( या तबके छोटानागपुर ) की पहली महिला कुलपति थीं।उन्हीं की लगन। मेहनत,कल्पना और कार्य कुशलता का प्रतिफल है आज का विनोबा भावे विश्वविद्यालय।उन्हीं के बीजारोपण के प्रस्फुटन से ही आज की ये ख़ुशनुमा वल्लरियॉं और पुष्प हैं।
आज तरवे जी को याद नहीं करना कृतघ्नता की पराकष्ठा होगी।
बडा दुख हुआ।मैं अपने सम्मान के आभार जताने में बोलना चाहता था और करबे जी के को याद भी करता ।पर समय तो मिला नहीं।
वैसे आपका समारोह भा विवि संघ के सौजन्य से ,मैसूर विवि एवं वनस्थली के कलाकारों के सहयोग से सफल हुआ।साधुवाद।
                   गवर्नर को गुमराह किया कुलपति ने 

विनोबा भावे विस्व विद्यालय में एकबार फिर से तरफदारी में तंबूरा तोड़ डाला । कुलाधिपति सह गवर्नर द्रौपती मुर्मू से एक पेड़ लगाकर तरफदारी करने की मुहर लगाने के लिये कई पेड़ उखाड़कर फेक डाले । जहाँ गवर्नर से पेड़ लगवाया गया वहां से एक छतवन एक शीशम दो अमरुद और तीन फूल के पौधे उखाड़कर फेक दिए गए ।वह भी वैसे कुलपति द्वारा जो पर्यावरण विद है ।कुलपति गुरदीप सिंह के आने के बाद इनके आदेश से लगभग एक सौ पौधे जो बड़े हो चुके थे उन्हें उखाड़कर फेक दिया गया ।आखीर कैसे कुलपति और कैसे पर्यावरण विद ? अपने तो पाप किया ही पाप का भागी गवर्नर को भी बनाया ।तरफदारी में तंबूरा तोड़ने की यह पहली घटना नही है इससे पहले इन्होंने गवर्नर का बोर्ड भी उखाड़ फेकने की हिम्मत कर डाली जो पद इनके वालिद की तरह का है । लेकिन राजभवन को यह कुलपति ना जाने कौन सी जगमोहनी जड़ी की घुट्टी पिलाते है जो इनके सारे अपराधों की फाइल को रद्दी की टोकरी में दाल दे रहे है ।
                      विनोबा में नॉन कॉग पदधारी 

विस्व विद्यालय में सीनेट सिंडिकेट के सदस्य इसलिये बनाये जाते है ताकि कुलपति की स्वेच्छाचारिता पर लगाम लगाया जाये ।उन्हें सही सलाह देकर छात्र हित में कार्य करने हेतु प्रेरित किया जाये ।लेकिन जब ये सदस्य कुलपति के मातहत और गुलाम की मुद्रा में उसका समर्थन करने लगे तो क्या शिच्छा के इस मंदिर में सत्य और ईमानदारी की शिच्छा कल्पना की जा सकती है ?ताज़ा घटी घटनाये -कुलपति ने गवर्नर का शिलापट्ट उखाड़ फेंका ।कुलपति ने घटिया नाला का निर्माण कराया साथ ही अन्य निर्माण घटिया ।कुलपति ने कोकशास्त्र बांचने वाले छात्र और उस गुरु को छोड़ दिया जिसने कॉपी जांची ।कुलपति ने छात्रों को अपने हाथ से पीटा।कुलपति ने छात्र को बाहरी तत्व और गुंडा कहा ।कुलपति ने अपने चालक से छात्र का मोबाइल छिनवाया ।कुलपति ने छात्रा का हाथ पकड़ा कहा कैम्पस तेरे बाप का है ? कुलपति ने राज्यपाल से पेड़ लगवाने के लिए दर्ज़नो लगे पेड़ काट डाले उखाड़ डाले ।जब हो हल्ला होने लगा अख़बार सोसल मीडिया में बातें आयी तो चार दिनों पहले उखाड़कर फेके हूवे सूखे पेड़ो को फिर से लगवा दिया । कुलपति ने राज्यपाल द्वारा लगाए पेड़ को उखाड़कर दूसरी जगह अपने गार्ड के हाथों लगवा दिया ।क्या यह कुलाधिपति के गरिमा के साथ खिलवाड़ नही ?
लेकिन सारी बातों पर सीनेट के सदस्यों ने तरफदारी चमचागिरी दलाली की तरह कहा आप तो जाबांज़ है ।आप बहादुर है आपने भगत सिंह की तरह काम किया है ।क्या यह कथन सही है ? क्या शिछको का यह पिछलग्गू आचरण समाज को कोई सीख दे पाएगा ? क्या आज की तारीख में कोई शिच्छक नही बचा जो सच बोल सके ? राजनीती के पुरोधा और जन प्रतिनिधि तो मानो पहले से ही नील डॉउन हो चुके है एक नही दो दर्जन विधायक और 5 सांसद जिन्होंने मुह पर सेलो टेप साट लिया है ।


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