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झारखण्ड के चीर -हरण की तईयारी

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                             झारखण्ड के चीर -हरण की तईयारी 

                            लूट लो झारखण्ड पार्ट १ 
टी पी सिंह तहलका 

झारखण्ड को बेचने  तईयारी चल रही है -गडकरी,शाह ,नथवाणी अर्जुन ,रघुबर ,सुदेस ,चंद्रप्रकाश सभी का सिंडिकेट है जो इस मामले में शामिल है ,इसी  कारन आजसू -भाजपा गठंबंधन हुवा है। असल में कोयले के ३२ ब्लॉक जो झारखण्ड में बिकने है उसकी तईयारी चल रही है अडानी से लेकर गडकरी तक इस मामले में शामिल है ,इसकी सुरुवात भाजपा शासनकाल में हो गयी थी जब अर्जुन मुख्यमंत्री थे ,इस काम में योगेन्द्र साव सबसे बड़ा रोड़ा थे सो उन्हें रास्ते से हटा दिया गया ,योगेन्द्र साव को जेल भेजने में केंद्र सरकार के गडकरी  लेकर मोदी तक  भूमिका निभायी और करोडो का खेल हुवा ,कप्तान मनोज कौशिक सिर्फ एक मोहरा थे ,इसीलिए उन्होंने आजतक कुछ नहीं कहा जबकि पूरी रामायण ख़त्म हो गयी। हां आगे यह नीति थी  सरकार बनाकर ये नुमाईन्दे कोयले की काली कमाई का खेल करेंगे इसमें नक्सली संगठन टी पी सी इनके साथ होगा अब तो टी पी सी का निर्माण करवाने में अहम भूमिका निभानेवाले बी डी राम इनके कुनबे में सिपाही बनकर खड़े है ,इसीलिए सिमरिया से गणेश गंझू ,लातेहार से नारायण गंझू को इनलोगो ने भाजपा से टिकट के लिए  अस्वस्त कर दिया था ,लेकिन ऐन वख्त पर मोदी जी ने गणेश का  नाम काट दिया की यह नक्सली है और नारायण गंझू टिकट मिलने के बाद ४ नवम्बर की रात्री में लातेहार में गिरफ्तार कर लिया गया। इन सभी की कुंडली योगेन्द्र साव के पास है इसलिए उसे जेल भीतर भेज दिया गया है ,नक्सली संगठन का निर्माण  अलावे योगेन्द्र ने जो भी लूट लेवी रंगदारी का  काम किया है वह सभी नेता कर रहे है ,राजेंद्र सिंह  हद भी लाँघ चुके है ,और नक्सली संगठन बनवाने में तो बी डी राम   पर भी कार्यवाही बनती है पर ऐसा नहीं हुवा क्यों ?टी पी सी के इस मंशा को योगेन्द्र साव ने लिखकर भी दिया है। योगेन्द्र साव को पकड़वाने में दो बड़े आई पी एस अधिकारिओ की भूमिका है जो अमित शाह से लेकर गडकरी के संपर्क में है ,और इन्हे कार्पोरेट सेक्टर से दो करोड़ रु भी पेड़ करवाया है। इन सभी को भाजपा या झारखण्ड के विकास की कोई चिंता  नहीं है इन्हे चिंता है कार्पोरेट लूट की। अर्जुन मुंडा कभी नहीं चाहते है की भाजपा को ३५ से ज्यादा सीट आये वरना फिर कोई दूसरा विधायक  मुख्य मंत्री बन जायेगा ,,और तोड़ -जोड़ की जहा बात हुई वहां अर्जुन  अलावे कोई धनुर्धर सफल नहीं हो पायेगा। इसी कारण माधव लाल ,राजा पिटर ,दुलाल भुईया जैसे श्योर शार्ट सीट को भी इन लोगो ने एक तरह से बेच दिया। इनकी मंशा तो यही है पर दुःख इस बात की है की अमित शाह इनके इस खेल में शामिल हो गए है। गडकरी और नथवाणी तो मानले की पहले से ही कार्पोरेट सेक्टर के वो है ,,,वो मतलब ,,,,,. . अगर मोदी जी इनकी मंशा को नहीं रोक पाये तो एक बार फिर से झारखण्ड के जबरदस्त लूट की कहानी सार्थक हो जाएगी। जय श्री राम
नरेन्द्र मोदी जी ने झारखण्ड को लुटना शुरू कर दिए हैं,टंडवा प्रखंड से खुदाई शुरू कर कोयला लुटना जारी है टंडवा हजारीबाग रोड में अडानी के बडे बडे हाईवा से कोयले की लूट जारी है,कोई इसका विरोध वहीं करे इसलिये टीपीसी का खौफ बनाने के लिये लुट का कुछ हिस्सा उन्हे भी !
घाघ नेताओ के सामने नौकरशाह चित
झारखण्ड में ९ साल तक बीजेपी का शाषण रहा। खूब लूट हुयी इन सालो में। नेता के साथ अधिकारी भी डुबकी मारते रहे। नेताओ की चरणबन्दना  करने वाले भाजपाई अधिकारी बाद में नेतागीरी करने के लिए नौकरी छोड़कर बीजेपी में शामिल होते रहे। मोदी जी की राजनीती देखकर लगा की अब उनकी राजनीती जाएगी। लेकिन अब जब टिकट का बटवारा हुआ तो एक नौकरशाह को छोड़ किसी को टिकट नहीं मिला। बड़े अरमान से पूर्व आई ए एस मुख्त्यार सिंह ,विमल कीर्ति सिंह ,और पूर्व आई जी  ,अमिताभ चौधरी ,शीतल उड़ाव ,नंदू प्रसाद और मनोज मिश्रा बीजेपी में शामिल हुए थे और टिकट की आस लगाये थे। लेकिन घाघ नेताओ ने टिकट नहीं दिया। अब बेचारे लोग आंसू बहा रहे है। कहते फिर रहे है की जात भी गवाए और भात भी नहीं मिला। नौकरी भी गयी। आप ही बताये ये भाई लोग क्या करे। 
    वाह रे झारखण्ड का राजनितिक खेल अर्जुन -रघुबर -राजेंद्र- परिमल नथवाणी  सबने मिलकर ना सिर्फ टिकट बेचे बल्कि पार्टी की आबरू अस्मिता और स्टेटस भी  बेच दिया,बड़ा खेल हुवा लम्बा सौदा हुवा ,आजसू के साथ। सुदेश ने अपनी सीट बचाने के लिए तिलेस्वर के लाश को बेच दिया ,,अपना भ्रस्टाचार को छुपाने के लिए अपनी पार्टी के कई नेताओ की बलि चढ़ा दी जो पिछले ५ साल से पार्टी के जड़ को सींच रहे थे। दूसरी तरफ अमित शाह -नरेंद्र मोदी की बड़ी बड़ी बात की जा रही थी पर इनकी हवा अर्जुन मुंडा ने निकाल दी जिसको चाहा टिकट दिला दिया ,जिससे चाहा एलायंस करावा दिया ,कल सीट काम होने पर यही आजसू ब्लैक मेल करेगा ,फिर अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत करेगा जिनके जुगल जोड़ी के भ्रस्टाचार की कहानी जग ज़ाहिर है। अब सरकार ही जब ब्लैक मेल होगी तो इनपर कार्यवाही कैसे हो सकता है ? महाराष्ट्र में शिव सेना से परहेज़ करनेवाली पार्टी यहाँ आजसू के भ्रस्टाचार को अपने साथ लेकर चल रही है क्या इसमें अमित शाह जैसे तथाकथित  खिलाडी भी राजनितिक मंडी  बिकते दिखाई नहीं दे रहे है ? अमित महतो सिल्ली ,,राजा पीटर तमाड़ ,,समरेश सिंह बोकारो ,, ,,जैसे सीट को भी अर्जुन ने बेच दिया ,जिनकी जीत तय मानी  जा  रही है ,लेकिन ये अर्जुन के पिछलग्गू नहीं बनेंगे इसलिए इन्हे रास्ते से हटा दिया गया ,और केंद्रीय नेतृत्व ने इनके गलत इरादे  माफ़ इसलिए कर दिया क्युकी उन्हें मोटा माल मिल गया -चुप्पी साधने के  लिए। बड़कागांव जैसे सीट भी भाजपा की झोली में दिखाई दे रहे थे पर इनका भी सौदा हो गया ,कहा जा  रहा था की  संघ की चलेगी और संघ गलत नहीं करने देगा ,संघ नही बिकेगा। पर यहाँ संघ इस मामले में बिका भी और गलत करने की इजाजत भी दी। यानी झारखण्ड में सबकी ओकात भ्रस्ट हो जाती है। आजसू के साथ गठबंधन से फायदा सिर्फ आजसू को है भाजपा को नहीं क्युकी आजसू के मज़बूत दावेदार हर जगह से चुनाव लड़ेंगे ,बागी के रूप में, इसलिए फायदा  होने का सवाल ही नहीं  है,,बल्कि पार्टी  कार्यकर्ता उन बगिओ को मदद भी करेगा। दिखाने के लिए बागी को पार्टी से निकाल दिया जायेगा ,,बाद में ले लिया जायेगा ,अपनी खेती है ,किसी केंद्र के नेता से परमिसन लेने की जरुरत नहीं ना।


सी आई डी रिपोर्ट भी बदल सकती है झारखण्ड में

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        सी आई डी  रिपोर्ट भी बदल सकती है झारखण्ड में 
                                लड़की का पता नहीं बलात्कार का केस दर्ज़ 
                                      ADG पर रिपोर्ट बदलवाने का दबाव 

तहलका डेस्क ( रांची )
जी हां जनाब झारखण्ड में सं कुछ होता है ,यहाँ जब पुलिस ज्यादती करती है तो उसे ख़त्म करने के लिए सी आई डी को अनुसंधान का जिम्मा सौपा जाता है ,वह जब सही जाँच करती है तो उसे रिपोर्ट बदलने का दबाव डाला जाता है ,क्युकी जो पोलिस पदाधिकारी इस आफत के परकाले में आता है वह राज्य के डी ज़ी का दाया हाथ है सो ए डी ज़ी सी आई डी पर दबाव है की फ़ौरन से पेस्तर  रिपोर्ट बदलवाए।
      मामला झारखण्ड के रामगढ ज़िले से जुड़ा है ,वह भी गुरूजी के सबसे नज़दीकी आदमी गौरांग राय से जुड़ा है जो होटल के मालिक है। गौरांग पर रामगढ थाने में ३३९/०९   दर्ज़ है जिसमे इनके ऊपर पूजा नामकी लड़की के साथ बलात्कार का केस दर्ज़ है। केस पूजा के पिता सुरेन्द्र प्रसाद पटना निवासी ने दर्ज़ करायी है। सुरेन्द्र प्रसाद के बारे में जब सी आई डी ने जांच किया तो पाया की पूजा नामकी उनकी कोई बेटी है ही नहीं। असल में होटल व्यू एंड विसं में उस दिन जो लड़की सुरेन्द्र के साथ ठहरी थी बेटी बनकर वह एक काल गर्ल थी। सुरेन्द्र प्रसाद एक दबंग आदमी है सो जब होटल में लड़की के साथ उन्हें आपत्तिजनक मुद्रा में पकड़ा गया और मार पीट भी की गयी तो उसका बदला लेने के लिए उनने थानेदार को पटाकर उल्टा केस दर्ज़ करा दिया की होटल मालिक और उसके बेटो ने बलात्कार किया है। सभी जेल चले गए। तत्कालीन थाना प्रभारी विजय कुमार अभी DSP बन गए है और डी ज़ी पी राजीव कुमार के खासमखास है गुप्त से गुप्त कार्य इनके जिम्मे है। अगर CID की रिपोर्ट पर कार्यवाही होती है तो DSP साहब की छुट्टी हो जाएगी सो मामला पलटने की तईयारी है। अशोक तिर्की DSP ने अपने ज्ञापांक २८५/०५. ०३. १४ को जमा कर दिया है अपने ज्ञापांक ०९/१४  (२५। ०५। १४ ) के जरिये। इसके साथ ही इन्स्पेक्टर एन एन दास ने भी अपनी जांच रिपोर्ट सौपी है। विजय असल में दबग पुलिस पदाधिकारी बन चुके है। लाखो करोडो नहीं अरबो में खेलनेवाले -रामगढ रांची से लेकर जमशेदपुर तक इनका कुनबा फैला हुवा है जो ज़मीन के बड़े बड़े कारोबार करता है।
  गौरांग राय की पत्नी पार्वती राय के आवेदन पर मुख्य मंत्री ने CID को जांच का ज़िम्मा दिया और जब परत खुलने लगे तो मामला फिल्मी हो गया। अब विजय कुमार ADG  पर दबाव दाल रहे है की जांच की रिपोर्ट बदल जाये। ताकि उन्हें बचाया जा सके।
    गौरांग राय शिबू सोरेन के करीबी रहे है उनके साथ जब ऐसा हो रहा है तब आम जनता के साथ क्या होगा सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
    सनद रहे की दिसंबर २०१३ में तहलका ने इस बाबत एक रिपोर्ट छापी थी। और उसके बाद ही CID  जांच की अनुसंसा  की गयी थी।


हॉवर्ड का डिग्रीधारी भारत में फिसड्डी

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           हॉवर्ड का डिग्रीधारी  भारत में फिसड्डी 


उमेश ओझा ( रांची ) तहलका डेस्क 
झारखण्ड के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन ने हज़ारीबाग़ सांसद जयंत सिन्हा को आड़े हाथो लेते हुवे उरिमारी में १० अक्टूबर को   कहा की बाहरी आदमी ललबबुवा को सांसद बनाया तो क्या चाहते हो ? जिसको १० गाव ,१० पंचायत का नाम नहीं पता है ,लोगो से मिलने के बाद डेटोल पानी से हाथ धोता है ,जिसको खतियान ,खाता और रसीद की जानकारी नहीं है ,कुँवा का पानी पिला दो तो बीमार हो जायेगा। 
        इस बक्तब्य पर जयंत सिन्हा ने तीखी और तल्ख़ टिपण्णी करते हुवे बड़का गाव में १२ अक्टूबर को  कहा की मै झारखंडी हु मेरा जन्म हज़ारीबाग़ में हुवा है ,हेमंत अपनी सोचे हमलोग देश दुनिया के बजट बनाते है छोटी बातो  ध्यान नहीं देते है। हेमंत अपने कार्यो की तरफ देखे जो उनसे नहीं हो रहा है। 
जयंत सिन्हा हज़ारीबाग़ के सांसद ,सबसे पढ़े लिखे नेता ,हेमंत सोरेन के सवाल का जवाब देते इतने आग बबूला हो गए की पढ़ाई लिखाई भी भूल गए। हेमंत ने कहा जयंत १० पंचायतो के नाम नहीं जानते सही बात है ,उरिमारी हेमंत की सभा के सवाल का जवाब देते हुवे बड़का गाव में जयंत ने कहा की हम झारखण्ड के ५ हज़ार पंचायतो का नाम बता सकते है।और मोबाइल दिखाते हुवे कहा की झारखण्ड के ५ हज़ार पंचायत अपनी मुट्ठी में रखते है।  जबकि इतने पंचायत  झारखण्ड में  है भी नहीं ,कहा से लायेंगे जयंत  ??  आंकड़ा इस प्रकार है  - झारखण्ड में कुल पंचायत =४५६२,,गाव =३२६२० ,,प्रखंड =२६० ,,अनुमंडल =३८,,जिला =२४ ,,प्रमंडल =५ ,,आबादी =३२९८८१३४ ,,     भला बताईये   हॉवर्ड विस्व विद्यालय के प्रबंधन के मास्टर को इतनी जानकारी नहीं की उसके राज्य में कितने ज़िले गाव और पंचायत है ?विस्वविद्यालय भी शर्मा जायेगा जयंत की  इस बुद्धि पर। जयंत ने हेमंत को ललकारा है की किसी मंच पर बहस कर ले  ,पर क्या इन्ही झूठे आंकड़ों पर जयंत बहस कर अपने पिताजी यशवंत सिन्हा  का नाम भी डुबाएंगे ?जिनके सामने झारखण्ड का कोई नेता बहस करने में डर महसूस करता है। तहलका ने इस बाबत कई झारखंडी नेताओ से फोन पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो अनुभव बड़ा खराब रहा जिसे हम हूबहू नहीं छाप सकते है।हेमंत ने सुलझे भासा का इस्तेमाल करते हुवे कहा की मैंने जो कहा वह बहस का विसय ना बने आपलोग स्वयं उनसे पूछे की क्या वे १० पंचायतो का नाम जानते है ? सही न लगे तो अपने पंचायत का नाम बता दे। जो आदमी अपने पंचायत का नाम नहीं बता सकता वह अपने छेत्र ,अपने ज़िले को कितना जान सकता है वह आप भी जानते है। हमें बताने की जरुरत नहीं है। एक नेता जिसका नाम हम नहीं छाप रहे है उन्होंने दावे के साथ कहा की जयंत का एडमिसन हॉवर्ड में डोनेसन से हुवा था ,बाद में वह से आये तो अपने पिताजी के यु टी आई घोटाले में उनका साथ दिया।  जयंत सिन्हा के भासन और जनता के बीच उनकी छवि को देखकर यह साफ हो जाता है की उन्हें अनुकम्पा के आधार पर सांसद की कुर्सी मिली जिसमे मोदी का भी देन सम्मिलित है। पर उनकी बौद्धिक छमता में इतनी गिरावट क्यों है जिसमे वे सामनेवाले की छमता विद्वता और अपना अनुभव भी भूल जाते हो ? क्या हॉवर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई में कोई खोट है ?कही पूंजीपतिओ को सम्बोधित करते हुवे कहते है की आप पैसे में न बीके ,,कही शिछाविदो को सम्बोधित करते कह देते है की आप पॉलिटिकल एजेंडा में भाग ले।  
        अब  आकलन करके देखए -दोनों का वक्तब्य सही है ,दोनों का दोसरोपण भी १०० % सही है ,दोनों ने अपने -अपने दिमाग से एक दूसरे को अलंकार दिया वह कही से गलत नहीं है। दोनों ललबबुवा है दोनों बाप का हर ( हल ) जोत रहे है ,दोनों किस्मत के धनि है। दोनों राजनीती में छोटे परिंदे है ,दोनों पत्नी  डरते है ,दोनों पैसे  भूखे है ,दोनों बड़बोले है -करनी में शून्य ,दोनों बात के धनि है ,दोनों पूंजीपतिओ को ज्यादा महत्व देते है ,
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कोयला तस्करो ने चक्रव्यूह में फसाया है योगेन्द्र को

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                योगेन्द्र -नक्सल मामले में नया खुलासा  

        कोयला तस्करो ने चक्रव्यूह में फसाया है योगेन्द्र को 


उमेश ओझा ( तहलका डेस्क रांची )
जी हा इसमें कोई अतिसयोक्ती नहीं की कोयला तस्करो ने योगेन्द्र साव को फसाया है और इसमें पुलिसिया मिलीभगत भी शामिल है। दोनों के आँखों की किरकिरी थे योगेन्द्र साव। एक DSP सतीश चन्द्र झा को भी कोयला माफिया हटवा चुके है। क्युकी नक्सलिओ से योगेन्द्र साव के सम्बन्ध २००० से ही है ,यह बात सामने आती रही है प्रमाणित होती रही है ,यहाँ तक की सांसद नवीन जिंदल को धमकाने और लेवी वसूलने की बात प्रमाणित हो चुकी है ,उस समय भी पोलिस ने उन्हें नहीं हटाया ,उसके बाद विधायक सौरभ नारायण सिंह को भी लेवी माँगा धमकाया पकड़ा गया फिर भी पुलिस ने छोड़ दिया। योगेन्द्र के चाचा केदार साव को नक्सलिओ से मरवा दिया।कई स्थानो पर इनके दिए हुवे सामान और हथियार को पुलिस ने बरामद किया, प्रमाणित भी हुवा।  इसी  तरह कई अन्य लोगो को मरवाया उसमे पुलिस ने इन्हे बचा लिया फिर अभी क्यों फसाया गया ?
असल में अभी अक्टूबर से कोयला तस्करी के बहुत बड़े नेटवर्क पर रांची में सिंडिकेट की बैठक हुई है इसमें एक पुलिस अधिकारी ही इनके अगुवा बने है। इसमें सबसे बड़ा रोड़ा थे योगेन्द्र साव ,उन्होंने हजारीबाग के एक सबसे बड़े कोयला माफिया से उसकी गाड़ी नापो -मलडीह जंगल में पकड़कर पैसा ऑन स्पोर्ट वसूला। २० लाख रु प्रति माह देने की मासिक क़िस्त भी बंधी। फिर चुरचु जंगल में तीन कोयला प्लांट से भी वसूली की बात कही ,हजारीबाग के एक बड़े पुलिस अधिकारी से २५ लाख रु नज़राना वसूला। रामगढ ,पिपरवार ,बोकारो में भी आदेश भिजवाया की बिना साहब को नज़राना दिए एक छटाक कोयला बाहर नहीं भेजा जाएगा। रूंगटा बंधुओ की तीन  फैक्ट्रियो को भी फरमान जारी हुवा की वे २० लाख रु प्रति महीना प्रति फैक्ट्री जमा करे। सभी जगह एक ही कोयला माफिया का  रुक्का चलता  है,इसलिए उसने  एक जाल बिछाया इस जाल को पुलिस के हाथ दिया और उसी जाल में योगेन्द्र फस गए। इस सारे जाल का निर्माण यहाँ रांची में ही किया गया है ,इस  चक्रव्यूह के निदेशक भी रांची में ही  बैठे है- सेनापति हजारीबाग में।  सारे प्रकरण में रांची का एक अखबार भी जुड़ा हुवा है। झारखण्ड CID टीम ने भी अपने जांच में पाया है की रांची के एक अखबार का आदमी पिपरवार से लेकर धनबाद तक अखबार के लिए वसूली करता है। धनबाद में उसका नाम कुछ है चतरा में कुछ और रामगढ में कुछ और। पहले कोयला माफिया पुलिस हवलदार को हटाते थे अब DSP  और मंत्री को भी हटाने लगे है। उनकी ओकात झारखण्ड राज्य बनने के बाद बढ़ी है। यही कारन है की योगेन्द्र साव हर बार सीबीआई जांच की मांग कर रहे है। इतना बड़ा मामला है तो सीबीआई को जांच क्यों नहीं दी जाती है ? अगर ऐसा हो गया तो एक दर्ज़न IPS ,,५० से अधिक प्रेसवाले ,१०० थानेदार ,और अन्य विभागों के अधिकारी सफ़ेदपोस नेता और मंत्री सलाखों के पीछे होंगे ,योगेन्द्र को निशाना इनपर साधना चाहिए सो निशाना बीजेपी पर साधा यही गलत हुवा। 
    पिछले लोक सभा चुनाव में चार महीनो के दौरान चार ज़िलों से अवैध खुदाई कर १६०० करोड़ का  कोयला मंडीओ में बेच दिया गया पुलिस और नक्सली इसमें सबसे बड़े हिस्सेदार रहे उसके बाद कोयला मफियाओ का नंबर आता है। इस पुरे प्रकरण में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा DGP की मिलीभगत शामिल है। इस आगामी  चुनाव में टारगेट ४००० करोड़ का है। 



झारखण्ड के बेवड़ा मंत्री है नक्सलिओ के आका

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 झारखण्ड के बेवड़ा मंत्री है नक्सलिओ के आका 


झारखण्ड सरकार के मंत्री योगेन्द्र सॉ नक्सली संगठन  झारखण्ड टाईगर ग्रुप मामले में फसते जा रहे है ,हलाकि अभी आधिकारिक पुस्टी नहीं की गयी है क्युकी अनुसन्धान चल रहा है पर सच है की गिरफ्तार पार्टी का सरगना राजकुमार गुप्ता  ने स्वीकार किया है की उनके संगठन का आका योगेन्द्र सॉ और उनके साले मुकेश सॉ है वही उनके लिए फंड से लेकर हथियार तक की व्यवस्था कर संगठन का निर्माण कराया था। योगेन्द्र साव पहले से भी नक्सलिओ से साथ -गाठ के आरोपी रहे है दर्ज़न भर से अधिक मामले अभी भी चल रहे है एक में वारंट भी है -टेलीग्राफ अखबार में एक साल पहले योगेन्द्र साव ने कहा था की जल जंगल जमीन और कोयला खदानों की रछा के लिए टाईगर ग्रुप का निर्माण करेंगे। और यह टाईगर ग्रुप आ भी गया सामने। इस ग्रुप का आदमी देखिये कैसे इनके साथ हेलीकाप्टर में घूम रहा है -नाम राजू साव। अब प्रश्न उठाने  तक इन्हे मंत्री पद से हटाया क्यों नहीं गया ,और कितने सबूत चाहिए सरकार के मुख्यमंत्री को ?टाईगर ग्रुप के अभी तक आठ सदस्यों को जेल भेजा जा चूका है जिसमे से ५ को अभी तीन दिन  के रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है इससे बरामद मोबाइल का कॉल डिटेल्स मंगाया जा रहा है ताकि पुख्ता सबूत जुटाया जा सके। 

CASE LIST OF YOGENDRA SAW MINISTER JHARKHAND
कांग्रेसिओं ने हर  बार कहा की कोई दागी विधायक किसी कीमत पर मंत्री नहीं  बनेगा ,  और बना दिया योगेन्द्र साव को मंत्री जो दागी ही नहीं महादागी है ,दर्ज़न  भर से अधिक मामले लूट ,रंगदारी मार - पीट के दर्ज है ,कई मामलो पर कांग्रेसियो ने भी जांच में सही पाया है ,वैसे विधायक को मंत्री बनाकर कांग्रेस ने मिशाल कायम की है झारखण्ड को विकास की गाड़ी में बिठाने के लिए , यह  के पास भी मौजूद है पर शायद उन्हें इस बात का इल्म हो की हम गुंडे  मवालियो के भरोसे ही शायद सरकार चला सकते हैविधायक स्वयं दावा करता है की वह नक्सली है ,यह राज्य नक्सल समस्या से जूझ रहा है ,और ऐसे में एक नक्सल पार्टी  चलाने का दावा करनेवाला आदमी मंर्त्री बनता है तो आगे जनता क्या उम्मीद कर  सकती है यह आप स्वयं अंदाज़ लगा सकते है  ,
- इतना ही नहीं साहब ने किसी अधिकारी को छोड़ा नहीं है , अपने छेत्र में बी डी ओ राज बल्लभ सिंह को इतना पीटा की इन्हें पटना के अस्पताल में एक महीने तक भर्ती  रहना पड़ा ,
:- इतना ही नहीं योगेन्द्र साव  के कारनामो की लिस्ट इनके  आलाकमान

case no;-55/2010   केरेडारी थाना  21.08.10 को डी एस पी के द्वारा ट्रू  किया गया फीर  SP ने अपने पत्रांक  2071 से केस को सही पाया ,मामला NTPC के अधिकारी को पीटने का
2.case no .04/11 केरेडारी थाना का मामला Rajballbh singh BDO को  पीटने का वारंट भी जारी हुवा था
3. case no   85/2007....बरका गाव थाना
4.case no ..408/2004,,,,,,वन अधिनियम   ,,20.04.2007  से वारंट जारी,इसमें पकडे गए गाडी को वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी को पीटकर लूट लिया था ,बड़का गाव कार्यालय से
5.158/2010  बड़का गाव थाना   आचार  संहिता उल्लंघन का मामला
6. 55/11 गिद्दी थाना  5 लाख   रंगदारी मांगने का मामला , रामगढ स्पोंज आयरन को।  इस मामले में योगेन्द्र ने एस पी पर आरोप लगाया तो डी जी पी ने जांच का ज़िम्मा डी आई जी सुमन गुप्ता और फीर मुरारी लाल मीना आई जी को दिया जिनने मामले को सही पाया था
7.  case no 901/2008  10 10 2008  को रामगढ डी एस पी ने पर्यवेछन टिपण्णी दिया
8.case no 408./2004
9.case no 96/2005..
10.case no 303/2003
11.case no  141/2006  सदर थाना
12. case no 255/2009   पतरातू थाना

इसके अलावे इनपर राज्य सभा  सांसद बनाने के मामले में रूपया लेने का मामला सी बी आई के पास चल रहा है दो बार इनकी पूछताछ हो चुकी ,कई मामलो के उजागर होने की अभी भी संभावना बनी है ,






राजा बंगला बना राजा बाजार

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                    राजा बंगला बना राजा बाजार 

उमेश ओझा ,
 रांची तहलका डेस्क ,
                  झारखण्ड के रामगढ राज परिवार का राजा बंगला राजा बाजार बन गया है। अब यहाँ कार्यालय  चलेगा ,कोई जलसा नहीं होगा ,कोई राजनीती नहीं होगी ,ज़मीनो का सौदा हो गया है और ये दूकान अवैध रूप से खड़े होकर रौनक बिखेर रहे है।
    अब आईये ज़रा इतिहास के आईने में झाककर देखते है की माज़रा क्या है ?
       रामगढ राज का यह तहसील कचहरी था ,यहाँ लगान वसूली और उसके कागज़ात रखे जाते थे। द्वितीय विस्व युद्ध के समय यहाँ इटालियन कैदिओ को रखा जाता था। यहाँ ३७ इटली के कैदी रखे गए थे। फिर युद्ध ख़त्म हुवा तो कैदी चले गए ,और राजा ने यहाँ एक अस्तबल बना दिया ,साथ ही बाकी जगह में कचहरी चलने लगा ,जब सेन्सस हुवा तो बिहार के सेन्सस कागज़ात यहाँ रखे गए। बाद में जब देस आज़ाद हुवा तो रेवेन्यू मिनिस्टर के बी सहाय ने कहा की यह अंग्रेजी हुकूमत का तहसील कार्यालय था अब देस आज़ाद हुवा तो यह बिहार सरकार का हिस्सा हो गया। क्युकी सहाय राजा के विरोधी थे और वे येन केन प्रकारेण राजा को नुक्सान पहुचाना चाहते थे। फिर इसपर
केस दर्ज़ हुवा केस में राजा जीत गए और एक कार्यालय जिसमे सेन्सस का काम चलता था उसको छोड़कर सभी में अपना कार्यालय बना लिए ,लेकिन उसके बाद बिहार सरकार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक चला गया और कोर्ट ने सरकार के पछ में फैसला दे दिया क्युकी राजा की बंसीधर स्टेट जो ट्रस्ट है वह बिहार से अलग होने के बाद रेनुवल हुवा ही  नहीं,सेन्सस का जो ऑफिस था उसे भी राजा के कारिंदो ने एक ज़मीन माफिया को बेच दिया पर बाद में उसे माफिया से आज़ाद कराया गया जब उपयुक्त हजारीबाग ने हस्तछेप किया। अब पुरे ज़मीन को टुकड़ो में बाटकर बेच दिया जा रहा है ,जिसको जहां मन है खरीदकर दिवार लगा दे रहा है ,पर सारे निर्माण और कब्ज़ा अवैध है ,जहा राजा कामाख्या नारायण की तूती बोलती थी आज वहा कबाड़खाना बन गया है ,बल्कि विधायक बनाने के बाद सौरभ नारायण सिंह ने भी इसे ९ साल कार्यालय के 
रूप में चलाया।
अभी इस अभिलेखागार को लोग समझ नहीं पाते है पर यह पूरे झारखण्ड राज्य का एकलौता का अभिलेखागार है यहाँ काम करनेवालो की मस्ती है कोई नहीं जनता है की यहाँ इतना महत्वपूर्ण कार्यालय है।
वैसे यह स्थान बंगलीओ के लिए ऐशगाह के रूप में बनाया गया था ,इसके सामने भी आनंद भवन इन्द्रपुरी सिनेमा अंग्रेज़ो को खुश रखने के लिए बार के रूप में बनाया गया था। अभी जितने भी निर्माण है उनपर डोज़र चलने की उम्मीद है इसलिए राजा के कारिंदो ने इसे ओने पौने रेट में बेच दिया। आज पूरे राजा बंगला में तीन सौ निर्माण अवैध रूप से हो चुके
है। एक शो रूम एक अस्पताल भी चल रहा है।
शो रूम अवैध 


राजा बांग्ला गेट -जिसमे शाही लोगो (निशान लगा है )

जाने अपना राशिफल