मुख्य लेख

कोयले के कालिख से काला हुवा झारखण्ड ,

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in ,

                  ,कोयले के कालिख से काला हुवा झारखण्ड ,
टी पी सिंह  तहलका डेस्क कोयला तस्करी एक अभिशाप बनकर रह गया है हर दीन केस भी दर्ज होते है और हर दीन करोडो की तस्करी भी हो जाती है ,पर आजतक किसी भी जन प्रतिनिधि ने इस बात का प्रश्न लोक सभा या विधान सभा में उठाने की जहमत नहीं उठाई ,क्यों ?क्या सभी के सभी कोयला तस्कर है जिसके छेत्र में तस्करी धड़ल्ले से होती है ? झारखण्ड बनाने के अगुवा लोगो ने कहा की हमारा अपना राज्य होगा तो हम इन गलत कार्यो पर खुद प्रतिबन्ध लगायेंगे ,अभी दुसरे के हाथो में सत्ता शासन है,राज्य बना तो वे ही चोरी कराने लगे ,झारखण्ड बना तो वे ही रहनुमा कोयला तस्करों के सरगना बन बैठे ,और यह बात लुका छुपी नहीं बल्कि राज्य के मुखिया बन कर उन नुमयिन्दो ने खुद जिले के कप्तानो को आदेश फरमाते रहे की इनको छोड़ दो ,इनको पकड़ लो इनके कागजात सीज कर लो इनको कही से कोई तंग ना करे इत्यादी ,झारखण्ड के सात जिलो में 12 विधान सभा और सात लोक सभा में कोयले की चोरी नहीं डकैती होती है ,और प्रत्यछ एवं परोछ रूप से सभी १९ जन प्रतिनिधी इस धंधे के तलबगार है ,और ए १९ मिलकर पुरे झारखण्ड के शासन और सत्ता पर काबिज़ 82 की संख्या पर अपना प्रभाव छोड़ते है ,यही कारण है की जो कोयला तस्करी में शामिल नहीं भी है वे इस प्रश्न को विधान सभा या लोक सभा में उठाने से कतराते है ,हलाकि कांग्रेसी विधायक योगेन्द्र साव ने मंत्री बंनकर इन सवालो को सीबीआई से लेकर कोयला मंत्री, प्रधान मंत्री तक उठाई पर कोई कार्यवाही नहीं होना बताता है की हमारे केंद्रीय नेता भी इस मलाई को चाटने में अपनी सहभागीता निभाते है ,भले ही योगेन्द्र साव का अपना फंडा था ,अपनी कमाई (अवैध ) में चार चाँद लगाना मकसद था वरना वे इस बात को कबिनेट की बैठक में लाते विधान सभा के पटल पर रखते , पर ऐसा करना उनका मकसद नहीं था उनका मकसद था की वे अपनी मुखियागिरी पर मुहर लगवा ले ,,नक्सलियो को हर माह आठ से दस करोड़ की लेवी कोयला तस्करी से जाती है ,इससे वे हर तरह का काम करते है ,पुलिस को मारने से लेकर मंत्रियो यहाँ तक की मुख्यमंत्री को खरीदने का का , पुलिसवालों की कमाई भी दस से पंद्रह करोड़ हर माह है ,वही हर दीन तीस से चालीस करोड़ का कोयला अवैध ढंग से डेहरी और वनारस की मंडी में बेच दी जाती है ,राज्य की खुफिया एजेंसी ,सीबीआई ,मंत्री संतरी ,पुलिस ,हमारे पत्रकार विरादरी के लोग स्थानीय नेता के बिच हर दीन डील होती है ,कोयले का गेम होता है और आम जनता टुकुर टुकुर मुह ताकती रह जाती है ,,,क्युकी इस बड़े गेम में आजतक कई विधायक ,पुलिस ,आम जनता ,कारोबारी ,पूंजीपती ,जो आवाज़ बुलंद करने की कोसीस करते है उन्हें मौत की नींद सुला दिया जाता है ,जाहीर है जुबां पर लोग ताला लगाये बैठे है या मलाई चाटकर उसका स्वाद लेने में व्यस्त है
आईये इस विडिओ में देखते है कोयले के काला खेल 
video


,,,,,,,,झारखण्ड पुलिस को बड़ी सफलता ,,,,,,

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in ,

,,,,,,,,,झारखण्ड पुलिस को बड़ी सफलता ,,,,,,
तहलका डेस्क 

हजारीबाग पुलिस ने कटकमसांडी के उलान्झ जंगल से एक LMG ( लाईट मशीन गन ) बरामद किया है इतने बड़े हथियार की बरामदगी पुलिस के द्वारा झारखण्ड में पहली बार किया गया है ,यह LMG २३ सितम्बर २००१ को चुरचु के जंगल में १२ CRPF के जवानो को मारकर लूटी गयी थी ,इसमें 15 जवान घायल भी हुवे थे ,आईपीएस दीपक वर्मा के बुलेट प्रूफ जिप्सी पर भी सैकड़ो गोलिया दागी गयी थी , लाईट मसिंगन के साथ ५७५ रौंड गोलिया और दस मगज़ीन भी बरामद किया गया है ,यह हथियार नृपेन्द्र गंझू जोनल कमांडर भाकपा माओ ने आक्रमण कर लूटा था ,बाद में अनुराग गुप्ता ने नृपेन्द्र को मारकर २० लाख बरामद कर लिया था पर हथियार बरामद नहीं हो पाया था,आज हजारीबाग पुलिस ने एस पी अखिलेश झा के नेतृव में यह बड़ा हथियार बरामद कर लिया है ,






झारखण्ड में चावल का घोटालेबाज कौन ?

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in

    झारखण्ड में चावल का घोटालेबाज कौन ?

तहलका डेस्क 
झारखण्ड में धान की खरीद और सब्सिडी और लेवी  राईस का जो घोटाला हुवा है उसमे सरकार के नुमायिन्दो ने ७५ % मुनाफा जेब में रख लिया क्युकी सारा काम उनके आदेश पर ही हुवा था ,इसके बाद पैक्स के दबंग लोगो ने अपना हिस्सा निकाल लिया और अब सारा दोस मिल मालिको के मत्थे मढ़ने की पुरजोर कोसिस जारी है ,अगर इन्साफ किया जाये ,इमंदारे से जांच किया जाये ,तो गलती करनेवाले सलाखों के पीछे होंगे और इस लिस्ट में झारखण्ड के लगभग ५ उपायुक्त  जेल जायेंगे ,पर क्या इन्साफ है झारखण्ड में ? मोदीजी के निदेशन में झारखण्ड राज्य में चल रहा चलचित्र कभी भी सच को दिखने का सहस नहीं जूता पा रहा है ,रघुबरदास केवल रबर स्टाम्प बनकर रह गए है ,कहे तो मनमोहन सिंह की तरह झारखण्ड में राज ,,काज ,,सत्ता चल रहा है ,हलाकि मिल मालिक फसे है तो उनकी जुबान  खामोश है पर हजारीबाग के एक मिला मालिक अरुण कुमार ने इस मामले को उठने का साहस ज़रूर किया है ,उन्होंने निर्भीकता से जिस प्रकार तथ्यों को सामने लाया है उसमे कई अधिकारी कर्मचारी के काले चहरे बदनाम होंगे ,भले ही उनके सेहत पर कोई प्रभाव ना पड़े पर उनके काला रंग समाज के सामने ज़रूर आयेगा ,क्युकी कोई भी आईएएस किसी दुसरे आईएएस को फसाता नहीं है और जांच अंततः वही आकार रुकेगी ,आईये अरुण कुमार के बातो को हम हुबहू आपके सामने परोसने की जुर्रत करते है ,फैसला और इन्साफ आपके सामने आ जायेगा ,

झारखंड सरकार के फूड सेक्रेटरी की गुंडागर्दी का मै खुद शिकार हो गया।
मेरे मिल, गणपति राइस प्लान्ट, डेमोटाड हजारीबाग में वित्तीय वर्ष 2012-13 में माह जनवरी 2013 से उपायुक्त हजारीबाग के आदेशानुसार पैक्स के माध्यम से एग्रीमेंट क्लाउज के साथ मिलिंग कार्य के लिए धान आया था। उक्त धान से हमलोगों ने चावल तैयार कर रखा।
यह बात दोनों पक्ष मानते हैं।
एकरारनामा के अनुसार चावल उठाव की ब्यवस़्था सरकार के कर्मियों को अपने वाहन से मिल में मिलिंग चार्ज का भुगतान कर ले जाना था। मेरा कार्य केवल मिलिंग करके सूचना देने का था। मैने कई बार सूचना दिया है। लिखित एवं मौखिक रूप में।
झारखंड में लगभग सभी चावल गोदामों में जगह नहीं रहने, मिलिंग चार्ज, ट्रान्सपोटेस, हैन्डलिंग चार्ज का भुगतान सरकार के द्वारा नहीं करने के कारण मिलों से पुरी क्षमता के अनुसार पैक्स अथवा सरकार के द्वारा चावल का उठाव नहीं किया गया।
उपायुक्त हजारीबाग के पत्रांक 139 दिनांक 15 जनवरी 2014 एवं पत्रांक 366 दिनांक 28 अप्रैल 2014 को इस आशय का पत्र सचिव खाद्य आपूर्ति विभाग को लिखा गया कि मिलों में चावल तैयार है। उठाने हेतु दिशा निर्देश दिया जाए। परंतु सरकार सोती रही।
अंत में सरकार एकरारनामे का उल्लंघन करते हुए झारखंड के सभी राइस मिलों को अगस्त 2014 में बचे हुए चावल के अनुरूप पैसा जमा करने का आदेश निर्गत कर दिया।
अब समस्या यह है कि जब चावल उठाना था तब तो चावल उठाई नहीं, अब उस चावल के अनुरूप पैसा माँग रही है जो चावल लगभग दो वर्ष पूराना है, किडा, मौसम, धुप, बरसात का मार झेल चुका है।
एकरारनामा के शर्तों का उल्लंघन
1. मिल में मिलिंग चार्ज देकर पैक्स /सरकार को चावल का उठाव करना था। नहीं किया
2 . मिल के क्षमता के अनुरूप प्रति दिन पैक्स /सरकार को चावल का उठाव करना था। नहीं किया
3. ट्रान्सपोटींग की ब्यवस़्था खुद सरकार को करना था। नहीं किया
4. मुझे एक रू० का भी भुगतान पैक्स /सरकार ने नहीं किया।
5. चावल लेना था पैसा माँग रही है। यह अपने आप में एकरारनामा का उल्लंघन है।
क्या कहता है कानुन ?
कानून के अनुसार_ कांट्रैक्ट एक्ट सेक्शन 73 कहता है कि - - - - यदि दो पक्षों के बीच में करार हो तो यदि कोई एक पक्ष करार को तोडता है तो करार तोडने वाला दूसरे पक्ष के सारे हर्जाना का देनदार होगा।
माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार राज्य सरकार एकरारनामे का एक पक्षकार के हैसियत रखते हुए मेरे विरूद्ध डिमांड रकम तय नहीं कर सकती है।
इसी कानुन के अनुसार मुझे अपने मेहनताना के साथ हर्जाना का रकम लेना है। सरकार को पैसा देना नहीं है।
मैने व्यवहार न्यायालय हजारीबाग में मनी सूट 9/2014 दायर किया है जो कि लंबित है। सरकार उसमें लडना नहीं चाहती है, एवं पुलिस बल का दुरुपयोग करने के लिए हमलोगों पर F. I. R की है। एवं मिल सिल किया है।
[6:26pm, 30/01/2015] Arun Kumar: मेरे मिल के उपर बैंक कर्ज है सारा स्टाक मिल में पडा हुआ है मिल सिल करने के कारण माल खराब हो रहा है, मशीन चुहा कुतर रहे हैं, चोरी हो रहा है, मेरे सुरक्षा गार्डों को मार पीट कर भगा दिया गया है। कार्य रत कर्मी बेरोजगार हो गए हैं।
[6:49pm, 30/01/2015] Arun Kumar: ज्ञातव्य हो कि अब तक मैंने कोई मुकद्दमा गणपति राइस प्लांट v/s स्टेट आॅफ झारखंड नहीं हारा हूँ।
कानून को ताक पर रख कर मेरा मिल सिल किया गया है। इसलिए इन सारी क्षति को भी पाने का हक मुझे है। और मै इसे लूँगा। मुझे भारतीय कानून व्यवस्था पर पूरा विश्वास है।
उपायुक्त हजारीबाग का पत्रांक 139 दिनांक 15-1-2014 फोटो संलग्न
पत्रांक 366 दिनांक 28-4-2015 




भोलुवा की पाती ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मुरुख मंतरी का नाम

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in ,

      भोलुवा की पाती ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मुरुख मंतरी का नाम 
  ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,                                               ,,,,,,,,,,,ज़रा एक नज़र  देखो ना 

आदरनिये मुखमंतरी महाराज ,
                                     वालेकुम परनाम . आगे का खुसल मंगल बढ़िया है ,लेकिन आपका राज में बड़ा तकलीफ हो रहा है ,आपको आदमी लोग मुफलिसी का मसीहा मानके स्वीकार किया था लेकिन आप तो बड़का मगरूर आदमी निकल गए महाराज ,,,भला बताईये की आप तो पैसवा नहीं लेते है ,लेकिन आपका नाम से ट्रांसफर पोस्टिंग प्रमोसन एने का ओने करने का नाम पर जो पैसा वसूला जा रहा है से कहा जा रहा है ,,आप माय कसम खाइए की आपको मालूम नहीं है ,आपका बेटवा भी पैसा पकड़ रहा है उसको भी दू  लप्पड़ लगाईये , राजा का बेटा पैसा पकड़ेगा ,उसको बोलिए बैठ के राज करेगा ,भला बताईये की डीटीओ का पोस्टिंग वास्ते तिस लाख का रेट लगाया है ,कौन लगाया है ? का ई रेट जायज़ है ? मंत्रीमंडल का बिठाक कीजिये और रेट फिक्स कर दीजिये की कौन सा पोस्ट का लिए केतना लगेगा उसमे से आधा पैसा सरकार का खाता में जामा होगा और आधा आपलोग का पाकिट खर्चा ,कहे की आपलोग का पाकिट खर्चा बहुत ज़रूरी है न ,नहीं मिलेगा तब आपलोग बेलाला हो जाईयेगा ,आप घुस पकडे वास्ते निगरानी के मज़बूत कर रहे है ,सबसे पहले अपना घरवा के चारो तरफ उसब को लगाइए बड़ी आदमी नोट का बण्डल लेके घुमा रहा है ,इधर पाल्टा साहेब का मैटर गरम हो गया है राज से लेके केंद्र तक ऐसे दीन दहाड़े आपलोग भाजपा का सिपाही होक गाय खायियेगा तब कसे पचेगा महाराज ,नक्सल से भी आपलोग पैसा ले रहे है ई कौन कानून है ,,और वू  मोटका हर महिना कहे वास्ते आता है अलुवा ,,,उसको अबरी आता है तब ज़माल गोटा खिला दीजिये ,सर्वा सरिया जायेगा ,नहीं तो आपलोग को घुसखोर बनावे पर तुला हुवा है ,वू आपलोग का कटेगरी वाला बनिया नहीं है ,ख़तम कटेगरी का है ,
      और अगर नाय समझिएगा महाराज तब वही करिक्का अदमिया ज़े ललका कोटवा पहिनता है से आ जायेगा ,इसलिए आप होसियार ही जाइये ,
  आगे फीर  कभी
                          आपका  भोलुवा उर्फ़ भोलानाथ 
                              मांसीपीढ़ी ,हजारीबाग 

बाज़ार समिती भंग करने के लिए करोडो का सौदा ,मंत्री मालामाल

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , ,

झारखण्ड में मार्केटिंग बोर्ड की कवायद पर लगाम लगा 
                    करोडो की डीलिंग हुई
,                                      कृषि  मंत्री  मालामाल 
टी पी सिंह  तहलका
जी हां सरकार ,झारखण्ड सरकार के इस कार्यवाही को क्या कहेंगे ,आत्म हत्या ,? भ्रस्टाचार ,,,व्यभिचार ,,,या बनिया का व्यापार ?बहुत  कठीण प्रश्न है ,१९६० में वर्ल्ड बैंक की मदद से गठीत मार्केटिंग बोर्ड को ख़त्म करने के लिए व्यापारी वर्ग बहुत दीनो से लगे  थे  ,योगेन्द्र साव जब कृषि मंत्री थे तभी इसपर बड़ी डीलिंग हुई थी पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसपर लगाम लगा दिया सो उस समय की डीलिंग ख़त्म हो गयी ,अभी जैसे ही भाजपा के नेतृत्व की सरकार बनी इसपर कृषि मंत्री ने पहले की डीलिंग को थोडा बड़ा रेट देकर हामी भर दी ,,हलाकि कृषि सचीव नितिन मदन कुलकर्णी इसपर सहमती नहीं दे रहे थे पर उनके ऊपर मुख्य सचीव और मुख्यमंत्री का दबाव था इसलिए उन्हें भी हामी भरनी पडी ,हलाकि इसके लिए मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था की कमिटी गठीत कर दी है उनके रिपोर्ट आने के बाद ही कोई निर्णय लिया जायेगा पर ऐसा नहीं हुवा ,देवाशीष गुप्ता IAS के नेतृत्व में तीन सदस्यी कमेटी गठीत की गयी थी जिसने अपने रिपोर्ट में कहा था की बाज़ार समिती अपने मूल स्वरुप में ही काम करे ,इसकी जरुरत है ,तब क्यों भंग किया गया मार्केटिंग बोर्ड ,हलाकि अभी भंग नहीं किया गया है बल्कि मामूली एक प्रतिशत लग रहे टैक्स को ख़त्म किया गया ,इसमें मोटा माल बनाया गया ,बिहार में २००६ में लालन सिंह कृषि मंत्री ने ८५ करोड़ की मंडवानी कर बोर्ड को भंग कर दिया ,अब इतने दीनो बाद फीर से बिहार में इसकी आवस्यकता महसूस की जा रही है अब फीर से वहा बोर्ड गठीत होगा ,जबकि पूरे देश में मार्केटिंग बोर्ड दो प्रतिशत से १९ प्रतिशत तक बाज़ार कर लिया जाता है केवल केरला को छोड़कर ,अब रणधीर सिंह मंत्री कृषि विभाग ने इसे भंग किया हालाकि यह उनका अकेले का फैसला नहीं है बल्कि मोटे माल का एक हिस्सा रास्ट्रीय अध्यछ अमित शाह तक पंहुचा है ,उनके पिछले दौरे  में ही यह सब फिक्स हो गया था जब उनने कहा था कार्पोरेट को मदद नहीं करेंगे ,तीस करोड़ की डीलिंग हुई जिसमे आधा मंत्री -आधा रास्ट्रीय अध्यछ ,जब राजनाथ जी अध्यछ थे तब इसी तरह झारखण्ड में अनैतिक वातावरण पैदा कर हर माह मोटा माल ले गठरी बांधकर ले जाते थे,, अब यह काम अमित शाह जी को सौपा गया है ,जबकि झारखण्ड मॉडल एक्ट में २% के कर का प्रावधान किया गया था जो सेन्ट्रल गोर्मेट का था राज्य ने इसे स्वीकार भी किया था , यानी अभी के कृषि मंत्री को योगेन्द्र साव से भी खराब कहा जा सकता है ,सभी जिलो में करोडो के सरकारी भूखंड है भवन है उनको क्या करना है ? क्या यह मुफ्त में व्यापारियो के हाथ दे डालने का खेल चल रहा है ,रांची के पंडारा में धनबाद ,रामगढ में करोडो के भवन है एक एक गोदाम करोडो के है उनका क्या होगा ?
           अब अगर टैक्स नहीं लेंगे तो सफाई कौन कैसे करेगा ? अधिकारी कर्मचारी का वेतन कौन कहा से देगा ?पेयजल शेड का निर्माण कौन कैसे करेगा ? यार्ड में निर्मित संरचना का मेंटेनेंस कौन करेगा ?जबकि एक प्रतिशत का कर व्यवसायी कोई अपने घर से नहीं देता था वह क्रेता से वसूला जाता था ,रांची के हर एक  दूकान पचास पचास लाख के है जिसे व्यापारियो ने थांग रखा है जबकि यह किसानो के हीत के लिए किसानो का है ,और यह पूरे देश में वर्क कर रहा है पर केंद्र की सरकार व्यापारियो के हीत के लिए राज्य की सरकार व्यापारियो के पीठ पर खड़ा होकर किसानो के पीठ में छुरा भोकने का काम कर रही है ,अब हाट बाजारों की नीलामी कौन करेगा ? हाट बाज़ार से राज्य के २५००० किसानो को रोजगार मिलता था वह ख़त्म हो गया ,सभी यार्ड में sfc और FCI का गोदाम है अभी राज्य में २४०००० MTका स्टोरेज है इसका क्या होगा ?१०० करोड़ के डवलपमेंट का काम चल रहा है ,
अब ज़रा इनकी संपत्ति पर भी गौर फरमाया जाए  कहा किस जिले में  बाज़ार समिती की औकात क्या है ?
रांची ६० एकड़ ,धनबाद ५६ एकड़ ,रामगढ ४५ एकड़ ,पलामू ३० एकड़ ,गढवा ३५ एकड़ ,जमशेदपुर ५२ एकड़ ,दोघर २८ एकड़ ,गिरिडीह ३२ एकड़ ,चकुलिये १८ एकड़ ,कोडरमा २४ एकड़ ,प्कुर ३० एकड़ ,साहेबगंज २६ एकड़ ,
बोकारो ३४ एकड़ ,खूंटी १६ एकड़ ,हजारीबाग २४ एकड़  में फैला है यानी अरबो रु की सम्पत्ती है बाज़ार समिती के पास ,पर मफियावो और बड़े व्यापारियो की नज़र इसपर पहले से ज़मी थी ,उन्होंने मंत्री के साथ सौदा किया और जो काम भ्रष्ट सरकारे नहीं कर सकी वह तथाकथीत रघुबर दास की तथाकथीत इमानदार सरकार ने कर डाला ,इन्हें बिहार से भी थोडा सबक सिखना चाहिए था ,पर किसानो का हीत रहे तब तो यहाँ तो किसान का खून भी चूस लेना है नियती का नज़ारा यह है .

झारखण्ड ,मुख्यमंत्री रघुबर के गृह शहर में दो दो आयकर आयुक्त

Posted by Tahalka.In|Online News Channel | | Posted in , , , , , ,


,                    झारखण्ड ,मुख्यमंत्री रघुबर के गृह शहर में दो दो आयकर आयुक्त ,                                     चौकानेवाला मामला

टी पी सिंह  तहलका 
झारखण्ड है भैये यहाँ सब कुछ जायज़ है ,जब मुख्यमंत्री के नाक के नीचे आयकर आयुक्त रंगदारी कर रहा है तो दुसरे शहरो की बात क्या होगी ? यहाँ स्वेताभ सुमन नामक आयकर आयुक्त २००७ से पदास्थापीत है लेकिन इनका तबादला मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश हो गया ,बावजूद इसके इन्होने जमशेदपुर में ही अपना सारा कुनबा स्थापित कर रखा है,और यह सब जुबानी नहीं बल्कि बड़ा बड़ा बोर्ड लगाकर काबीज है ,जबकि यहाँ पर बीर बिरसा एक्का नामक आयुक्त का पदस्थापन है ,और रिश्वत वसूलना ,काम करवाना ,रंगदारी भंजना सुमन साहब का काम है ,क्या यह सब मुख्यमंत्री महोदय को मालूम नहीं ,,और अगर मुख्यमंत्री को यह मालूम नहीं मतलब वे नाक के नीचे की सड़ांध से भी बेखबर है ,तो सत्ता का हिसाब कैसे चलेगा ? या फीर रघुबर बाबा ही के इशारे पर यह सब होता है ? क्या होगा पूरे राज्य का जब हमारे मुखिया के घर के बगल में इतना बड़ा भ्रस्ताचार हर दीं हो रहा है ,इनकी दम पर कई बेनामी सम्पत्ती बनायीं गयी है ,हर तरफ इनके रंगदारी का डंका बाज़ रहा है ,कोई देखनेवाला नहीं कोई सुननेवाला नहीं ,जबकि देश के वित्त मत्री को भी इसकी सूचना सिकायत के रूप में की गयी है ,बेनामी नाजायज़ अरबो रु की संपत्ति बना रखी है ,इनका एक रिसोर्ट भी है जिसमे लड़किया बुलाई जाती है ,रिसोर्ट को भी लोग आयुक्त के रिसोर्ट के नाम से जानते है की यहाँ कभी छापा नहीं पड़ेगा ,सफेद्पोस से लेकर अधिकारी तक इनके यहाँ जल्वाफरोज़ होते है ,मज़े की बात तो यह है की इनका आवास जिले के पुलिस कप्तान के बगल में है ,और ये लाल बत्ती लगी गाडी से न सिर्फ घुमाते है बल्कि शान से उसपर जमशेदपुर आयुक्त का बोर्ड भी लगा रखा है ,व्यपारियो में भयादोहन होता है ,जबकि रघुबर दस हर बार भाषण देते नहीं थकते की अधिकारी राज ख़त्म होगा और किसी का भयादोहन नहीं होगा और उनके अपने जिले में यही काम धड़ल्ले से हो रहा है ,साहब के कुछ बड़े इन्वेस्टमेंट जो जमशेदपुर की शोभा बढा रहे है ,इनके अवैध कमाई का डंका बराबर से बजाता रहा है ,२००७ में अपराधियो ने इनका अपहरण कर लिया था एक बड़ी डीलिंग और फिरौती के बाद इन्हें अपराधियो ने तीन दींन  के बाद मुक्त किया था ,इनके विरूद्ध कई मामलो की फाईल दबी पडी है जिसे सेट करने के लिए ये सबको मैनेज करने के लिए सब तरह का ऊपर नीचे का खेल खेलते रहते है ,
      सोनारी आदर्श नगर
      आदर्श नगर में तिन रूम का falat

       सोनारी में ही २००० sqft का ऑफिस और अलग से एक मकान
       आदित्यपुर में हेवन टावर में १९०० sqft ६०४ no छठे माले पर
        अदित्यासिन्दिकेट में एक ५००० sqf का plot
       शेरेपंजाब चौक आदित्यपुर  स्थित  दयाल सिटी में ३ कमरे का मकान 



जाने अपना राशिफल