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मंत्री के पिताजी ने ख़रीदा भाजपा कार्यालय ,मामला भारत सरकार के मंत्री का

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       मंत्री के पिताजी ने ख़रीदा भाजपा कार्यालय 
        भाजपा सरकार की उपलब्धि झारखण्ड में 
उमेश ओझा
तहलका डेस्क रांची 
पार्टी विद  डिफ़रेंस यानि  भाजपा की रंगत अब बाज़ार में दिखने लगी है की यह पार्टी अन्य पार्टियो से अलग कैसे है , झारखण्ड के हजारीबाग में भाजापा का जिला कार्यालय जो अटल भवन या अटल सेवा केंद्र के नाम से जाना जाता है उसे जयन्त सिन्हा  यानि भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री ने अपने पिताजी  यशवंत सिन्हा  के नाम से रजिस्ट्री करवा लिया ,यह कार्यालय भाजपा कार्यकर्ताओ के सदस्यता शुल्क और चंदे के पैसे से बना है ,इसकी ज़मीन भी इसी तरह 18 मंडलों के पैसे से खरीदा गया ,तत्कालीन जिला अध्यछ भैया बांके बिहारी के नाम से जो यशवंत सिन्हा  के रिश्तेदार कहे जाते है इसलिए इसे अपने नाम गुपचुप तरीके से रजिस्ट्री करवाने में कोई मस्स्कत नहीं करनी पडी ,अब एक माह बाद जब भाजपयियो को पता चला तो उन्होंने प्रधानमंत्री मोदीजी के नाम एक आवेदन दिया है वह भी रजिस्टर्ड डाक से इसके साथ केन्द्रीय अध्यछ अमित शाह को भी पत्र भेजा है ,अब देखना है की यशवंत सिन्हा जयन्त सिन्हा के विरुद्ध बोलने लिखने में जैसे झारखण्ड में भाजपाई डरते है वैसे ही केंद्र डरता है या कोई हल निकाल पाता  है ,क्युकी इस कार्यालय को अवैध ढंग से बेचे जाने के पूर्व भी एक सक्रीय कार्यकर्त्ता पूर्व महामंत्री ने भाजपा के प्रदेश अध्यछ को पत्र  लिखा था की कोई हल् निकालने को,  पर हल निकलना तो दूर की बात उन्होंने इन दबंग पिता पुत्रो से पूछने की हिम्मत भी नही जूटा  पाए , पद और पैसे के साथ पदवी का गुरुर और ताकत देखिये की जहा झारखण्ड में खास महाल की ज़मीनों के हजारो आदेश चार पांच छह साल से आदेश की राह देखते धुल फांक रहे है वही यशवंत सिन्हा  के लिए भाजपा कार्यालय खरीदने के आदेश महज छह दिनों में आ गए यानी आम और खास के कार्यो में अंतर था है और रहेगा ,यह मामूली बात नहीं है,मंत्री और उनके पिताजी अपने लिए मंत्री बने या जनता के लिए यह जांच का विषय है , हजारीबाग निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री करने के लिए खतियान खेवट के साथ 12 तरह के कागजात मांगे जाते है उसके बिना रजिस्ट्री संभव नहीं है पर यहाँ साहब के लिए सारे दरवाज़े खिडकियों के साथ खोल दिए गए ,बिना खतियान खेवट के रजिस्ट्री हो गयी नामान्तरण हो गया अब कार्यालय पर कब्ज़ा  तो है ही उसे किराये पर लगाने की मंशा भी सामने आ जाएगी .NTPC किराये पर इसे लेने के लिए तईयार बैठा है ,यही कारन है की हजारीबाग में भूदान आन्दोलन में भारत भर में सबसे ज्यादा ज़मीने विनोबा भावे को मिली थी आज उनकी कीमत आज करोडो में है उसकी अवैध ढंग से प्लाटिंग बिक्री और नामान्तरण की जा रही है पर इसे रोकने की जगह इसको बढ़ावा मिल रहा है क्युकी मंत्री से लेकर सारे अधिकारी ऐसे ही भूमि मफियावो के साथ है ,जो मंत्री खुद गलत करेगा वह आम आदमी के साथ हो रहे अन्याय को कैसे रोक सकता है ,तीन दीन पहले अखबारों की सुर्खियाँ थी की जयंत सिन्हा  ने अपने पिता के NGO जोहार को नियमो के विपरीत बैंको से 47 लाख दिलवा दिए ,उससे पहले इनके परिवार का नाम गरीबी रेखा की शुची में शुमार हो गया ,शायद विकाश की अवधारना यही है इसलिए तो मोदीजी ने उत्तर प्रदेश में भाषण के दौरान कहा की विकाश देखना है तो झारखण्ड जाईये ,और अब यह रजिस्ट्री का राज खुला है , आपके सामने प्रमाणिक  दस्तावेज़ प्रस्तुत है  ,आंकलन कीजिये की विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का हाल यह है और इतने बड़े भ्रस्टाचार पर सबकी जुबां खामोस है जो अपने घर के भ्रस्टाचार से निपटने में अछम है वह  देश से भ्रस्टाचार मिटने का संकल्प ले रहा है ,संपत्ति का दाम लगा है 93 लाख भवन ज़मीन ,पर यह रुपया क्या बेचनेवाले के खाते में ज़मा हुवा या फिर वही बंदरबाट का खेल ??





 मनोज गुप्ता  समाजसेवी सह RTI कार्यकर्त्ता  हजारीबाग ने कहा  पूरे जिले में फाईले पडी है उसे देखनेवाला कोई नहीं पर मंत्री  के पिताजी का अवैध ढंग से रजिस्ट्री क्यों किया गया ? क्युकी ए लोग ही राज्य में भूमि के अवैध कारोबार में शामिल है ,इनके इशारे पर ही जमीन का सारा अवैध काम होता है 

आदित्य जी  प्रचार प्रमुख भाजपा हजारीबाग के अनुसार  चंदे के पैसे से बना यह अटल भवन यानि जिला कार्यालय गलत तरीके से रजिस्ट्री किया गया यशवंत जी इसे भाजपा  के नाम से जल्द नामंत्रीत करे ,मैंने उस समय ही प्रश्न उठाया था की भाजपा का कार्यालय भाजपा के नाम से जाना जाये पर इनलोगों ने अटल भवन बनाकर उस समय ही अवैध करने की जगह छोड़ रखी थी ,




मंत्री के साथ साजिश ,या साजिश कर रहे है मंत्री ?

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मंत्री के साथ साजिश ,या साजिश कर रहे है मंत्री ?
            मंत्री के साख पर सवाल 
संजीव शुक्ल दिल्ली डेस्क

भारत सरकार के  वित्त राज्य मंत्री जयन्त सिन्हा और उनके पिताश्री यशवंत सिन्हा किसी बड़े साजिश के शिकार हो रहे  है या फिर नाटक कर साजिश के जरिये जनता को गुमराह रहे है ,सवाल  बड़ा है और जनता को जवाब चाहिए ,
यशवंत सिन्हा जयन्त सिन्हा का ही नाम गरीबी रेखा की शुचि में शुमार क्यों और कैसे हो जाता है ? यही परिवार अपने घर के बाहर सरकारी हैंड पम्प लगाते है और उसे खराब करवा देते है ,उसे बनाने वाले को डाटकर भगा देते है , की गन्दा होता है ,फिर उसी बोरिंग से अवैध रूप से मोटर लगाकर अंदर पानी लेते है ,जबकि ऐसा करनेवालों के विरुद्ध केस करने का प्रावधान है ,कई केस हुवे  भी है पर यहाँ कौन केस करेगा ? सनद रहे की इस मोहल्ले में पानी की भारी किल्लत है और जयंत सिन्हा को दिल्ली से कई दीनो तक जिला प्रशासन को निर्देश देकर टैंकर से पानी भेजना पड़ा था ,क्युकी पानी के बिना लोग त्राहिमाम करते हुवे जयंत सिन्हा के गेट पर हंगामा खड़ा कर दिया था ,बावजूद इसके हैंडपम्प नहीं बनाया गया ,क्यों ?


जयंत सिन्हा ने मंत्री बनते के साथ एक साल के अंदर भाजपा कार्यालय अटल भवन को अपने पिता के नाम रजिस्ट्री करवा दिया,ख़ास महल की यह ज़मीन भाजपा जिलाध्यछ के नाम से जमाबंदी किया गया था ,आम लोगो के ख़ास महाल की ज़मीन नामांतरण नहीं हो रही है ,इसपर मंत्री जी का ध्यान नहीं है अपनी ज़मीन को ९ डीनो में ही मुख्यमंत्री से आदेश करवाकर नामांतरण करावा लिया ,इसे NTPC  को भाड़े पर लगने की कवायद की जा रही है ,जबकि विस्व की सबसे बड़ी पार्टी का हजारीबाग के प्रमंडलीय मुख्यालय में कार्यालय नहीं है ,यहाँ के विधायक को अपने घर में कार्यालय खोलना पड़ा है ,जबकि इसी शहर में  कांग्रेस पार्टी का कार्यालय कृष्ण वल्लभ आश्रम के नाम से रजिस्टर्ड  है वह भी ख़ास महाल की ही ज़मींन है ,  सब्ज़ी खरीदते है चौपारण में और यहाँ दिल्ली में बताते है की दिल्ली में सब्ज़ी का भाव देख रहे है अखबारों की सुर्खियां बंनती  है

 ,हजारीबाग में भूदान की ज़मीन  भूमि माफियाओं ने लूट मचा रखी है ,पर इसपर इन पिता पुत्रों का ध्यान नहीं है ,यशवंत सिन्हा ने सिर्फ एक प्लाट की जांच सीबीआई से करने के लिए मुख्य्मंत्री को चिट्ठी लिखी ,जबकि यहाँ सरकारी ज़मीन भूदान गैर मजरुआ ज़मीन जंगल की ज़मीन गोचर और हरिजनों की लाखो एकड़ ज़मीन अवैध तरीके से नामांतरण करावा लिया गया है जिसकी जांच भी दूसरे फोरम से चल रही है पर पहले इन्हे बचने की  कवायद यशवंत सिन्हा जी के तरफ से चलती थी अब इन भुमाफियाओ की पैरवी जयंत सिन्हा जी के द्वारा करने का आरोप है ,क्युकी इतने बड़े मामले पर स्थानीय पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर भी ना तो  कोई जवाब दिया जाता है और ना ही इसपर कोई करवाई की अनुशंषा की जाती है

,हजारीबाग और रामगढ में कोयला तस्करी बड़ी समस्या है ,अरबो के इस तस्करी में लगभग नेताओं के दामन पर दाग लगे है ,जयंत सिन्हा जैसे हावर्ड के प्रोडक्ट भी इस दाग से बाहर नहीं रह सके ,चुनाव जितने से पहले ही कोयला तस्करों ने मीटिंग कर इन्हे बुलाया और मदद करने के अस्वासन के साथ आर्थिक मदद  भी की इसलिए इनके खिलाफ मंत्री एक लब्ज़ भी सुनने को तैयार नहीं , जयंत सिन्हा जी ने अपने पिताश्री की विरासत सम्हालने की गरज से हजारीबाग की नागरिकता तो ग्रहण कर  ली पर इनकी पत्नी पुनीता कुमार अभी भी यहाँ की नागरिकता से परहेज़ कर रही है ,और वित्त मंत्री वित्त राज्य मंत्री जिस स्कुल में मतदान करने जाते है उस स्कुल की हालत ज़र्जर है ,यहाँ बिजली नहीं कम्पुटर सिछा नहीं चाहर दिवारी नहीं शौचालय में छत  नहीं,पूरी दुनिया को विकास का ईन दिखानेवाले का घर इस तरह बेतरतीब होगा कौन कह सकता है ,पर हकीकत यही है इसमें फ़साना यह है की सभी बातो को एक साथ नकार देते है की साजिस हो रही है ,हां साजिस तो हो रही है पर सजिसकर्ता कौन है ? यह अनुसंधान का विषय ज़रूर है ,
मंत्री जी ने अस्पताल के दलाल को मीडिया प्रभारी बना रखा है ,मंत्री होकर नकली नोट एक दूकानदार को दे दिया वह भी एक नही हज़ार के तीन तीन नोट ,राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र सिंह कहते है की हमारे कार्यकाल में ही हजारीबाग में मेडिकल कालेज -अस्पताल पास कर दिया गया ,फंड भी रिलीज हो गया अब इसका श्रेय जयंत सिन्हा लेने की फ़िराक में है ,हेमंत सोरेन ने एक बार चुटकी लेते हुवे कह दिया की अपने इलाके के पञ्च पंचायतो के नाम भी नहीं बता सकते ,यह सूचना जैसे ही जयंत सिन्हा को मिली भीड़ भरे भासन में कह दिया पांच क्या इस छेत्र के पञ्च हज़ार पंचायत मेरी मुट्ठी में रहता है (मोबाईल दिखाते ) ज़बकी हजारीबाग क्या पूरे झारखण्ड में पांच हज़ार पंचायत नहीं है ,एक फूटबाल प्रतियोगीता करायी ,बैंको से पैसा लिया और प्रायोजक में अपना नाम डाल दिया ,कोई कंट्रोवर्सी ना हो इसलिए फूटबाल संघ को ही खेल से बाहर कर दिया ,अपने कार्यालय में जेल जा चुके आदमी को मैनेजर बना दिया है और अब उसे 15 सूत्री का सदस्य भी बना दिया ,ज़बकी अच्छे अच्छे भाजपाई हासिये पर है ,आम आदमी के काम का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है की किसी आदमी का PNR नम्बर भी कन्फर्म नहीं करा सकते है ,कई पत्रकार भी इस दोष का शिकार हो चुके है ,

भाजपा की ठेकेदारी में कराहता विस्थापन का दर्द

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भाजपा की  ठेकेदारी  में कराहता विस्थापन  का  दर्द 
बड़कागाव  में एन टी पी सी  का कोल  माईनिंग प्रोजेक्ट  पर नेताओ की                                          काली   साया 
तहलका डेस्क
उमेश ओझा
झारखण्ड  में हजारीबाग भाजपा  का हाई प्रोफाईल छेत्र है इसलिए राज्य  या केंद्र के बड़े नेता भी यहाँ की राजनीती या  कूटनिति में अपनी भागीदारी  नहीं निभाते है ,लिहाज़ा यहाँ का मामला यहाँ के आका के  भरोसे चलता  है ,और इसी परंपरा में  आज १५ सालों से  कंपनी जिस आस में यहाँ  प्रोजेक्ट लगाने की  सोच रहा  है  उसपर तुषारापात होता  रहा है ,मिसनरी और  भाजपा  ने अलग  अलग बड़का गाव में  अपने अपने स्वार्थ के लिए किसानो ग्रामीणों रैयतो के हितो का  एक तरह  से बलात्कार किया  है ,बाकी बचे खुचे मामले को कांग्रेस के स्थानीय नेता ने अपने स्वार्थ के लिए बिगाड़ा ,पर पूरा मामला यह है की यहाँ NTPC के दो दो खनन परियोजनाए लगनी है ,दोनों में भाजपा और कांग्रेस दोनों का क्लेश  ग्रामीणों  से उनका हक़ हुकुक  छीन   रहा है ,भाजपा के बड़े नेता  और दलाल यहाँ हावी होकर स्थानीय लोगो का हक  छीन रहे है ,इसमें सांसद विधायक और  भाजपा के  बड़े  फायिनांसर का  हाथ  है ,भाजपा  नेताओ  ने  अब  हत्यारों  शूटरो मफियावो को  आगे  बढाकर माईनिंग प्रोजेक्ट पर  हावी  होने  की  पृष्ठभूमि  तईयार  की  है ,NTPC के  जितने  भी  काम चल  रहे  है चाहे वह RNR  कोलोनी हो या  डंप  यार्ड  हो  या  गोदाम हो  या  खनन  हो  सभी में   भाजपा के नेताओ  की  बड़ी भागीदारी  है ,यह बाते राजद  के  प्रदेश अध्यछ गौतम  राणा ने भी  स्वीकार  की  है ,स्थानीय  नेता और  बुजुर्ग  लोग  स्थानीयता   के दर्द  को आगे  बढ़ाते  हुवे  जल  सत्याग्रह  से  स्टार्ट कर  चिता सत्याग्रह पर पहुचे  है ,
 विस्थापन के सालते दर्द को  ग्रामीण न  बता  पा रहे है  ना छुपा पा रहे  है और नेताओ की  अपनी स्वार्थ लोलुपता  में महिला पुरुष बच्चे  बूढ़े और गर्भवती महिलाये लाठियो से पिटे  जा रहे  है जुल्म वो सितम के  शिकार  हो  रहे  है ,उनके  गहर में  कोई कोई  भाजपाई या  कांग्रेसी या  राजद  की  आंखे झाँकने को  तईयार  नही और  कार्पोरेट दलाल खुल्ला  खेल  फरुखाबादी खेलने को  बिसात बीचा  चुके  है ,ग्रामीण मोहरे इधर  से उधर किये  जा रहे  है ,
हजारीबाग से पत्रकार टी सिंह ने  भी इस  मामले पर  अपना आलेख लिखकर कुछ खुलासा किया  है
बड़कागाव का विस्थापन और आन्दोलन का दर्द
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NTPC ने बड़कागाव में जबसे बड़कागाव में कोल माईनिंग प्रोजेक्ट लगाने की प्रक्रिया आरम्भ की है तबसे आजतक आन्दोलन होते रहेहै ,कार्य रुकता चालू होता बिकता और फीर यक्च्छ प्रश्न बनकर सामने खड़ा हो जाता रहा है,कई नेताओ ने कई पार्टियो ने कई जातियो ने कई वर्गों ने कई धर्मो ने आन्दोलन की बागडोर सम्हाली उसे आगे बढाया ,किसी ने अपनी डफली बजायी किसी ने अपना राग गाया किसी ने खरीदा किसी ने बेचा और फीर रैयतो को वही छोड़ दिया उनके भाग्य के भरोसे,दूर से तमाशा देखनेवाले रैयतो के आन्दोलन को ड्रामा कहते है नेता मज़ाक करते है दुनिया हसती है विस्थापीत रोते है ,पर किसी ने भी विस्थापन के दर्द को आत्मसात करने उसे इमानदारी सेसुलझाने का प्रयास नहीं किया ,कहने को तो यहाँ राज्य नही दुनिया के बड़े नेता मौजूद है उनकी उपस्थितीहै पर इस मामले में इमानदारी से किसी ने प्रयास करने की जुर्रत नहीं की ,NTPC ने भी कभी इमानदारी से पारदर्शी योजना नहीं बनायीं ग्रामीणों को ठगने बरगलाने तोड़ने लड़ाने में लाखो नहीं करोडो खर्च किये पर वास्तव में जो रैयत है उनतक लाभ पहुचाने का मात्र १० प्रतिसत प्रयास किया,
इस आन्दोलन को सबसे पहले मिसनरी ने हँडल किया अपने तरीके से चलाया मार पीट करवाया अधिकारिओ पुलिस पत्रकार नेता को पिटवाया और आन्दोलन को आम आदमी के चिंतन से बहुत दूर कर दिया ,दुसरे इनके साथ मिथिलेश और दिनेश नामक स्थानीय नेताओ ने जाती पाती का भेद भाव करवा दिया ,यह इस आन्दोलन की सबसे बड़ी तकनिकी खामी रही,
इसके बाद आन्दोलन की कमान भाजपा के कुछ बड़े पार्टी के नेताओ ने सम्हालने की जुगत में अपने को कम्पनी का सिपहसालार बना लिया और कंपनी के साथ मिलकर दलाली ठेकेदारी और बिचौलिया गिरी कर ग्रामीणों को तोड़ने लगे ,यहाँ से आन्दोलन की दूसरी गिरावट शुरू हुई,
इसके बाद आन्दोलन को स्थानीय कांग्रेसी नेता और अपने को इसी धरती का लाल बतानेवाले योगेन्द्र साव ने सम्हाला , योगेन्द्र साव ने अपनी राजनीती कूटनीति भ्रष्टनिति के ज़रिये आन्दोलन को हर तरह से खंडीत कर रख दिया ,तोड़ जोड़ की विडंबना में जोड़ने की जगह लोगो को अलग अलग खेमे में जुड़ने को विवस कर दिया ,आज इसी आन्दोलन की वज़ह से उनपर ही नहीं उनकेपुत्र विधायक पत्नी पर भी केस दर्ज है ,क्युकी सारी दुनिया से उनकी रुसवाई हो चुकी है,योगेन्द्र को लोगो ने चोर दलाल कमिसंखोर ,झूठा बताया,लेकिन चाहे जो भी हो योगेन्द्र साव कितना भी गलत किया हो अपने हिसाब से लोगो को बेचा खरीदा हो पर आज की तारीख में अगर ज़मीन की कीमत २० लाख है तो वह योगेन्द्र की वज़ह से वरना कंपनी छह लाख से ज्यादा देने नहीं जा रही थी , और छः लाख से बीस लाख में बड़ा फासला होता है,नहीं तो हजारीबाग में ही बांका में रैयती ज़मीन कीकीमत एक लाख रु एकड़ लगायी गयी है जो वर्तमान में पेमेंट मोड़ पर आया है ,

पत्रकारों को पुलिस बना रही है मुखबिर

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           पत्रकारों को पुलिस  बना रही है  मुखबिर 
                    कई प्रेसवाले निशाने पर 
तहलका डेस्क रांची
चतरा में ताज़ा टी वि  के रेपोटर इन्द्रदेव यादव  की  हत्या  ने  कई प्रसंगों को एक साथ जोड़कर रख  दिया है ,कौन पत्रकार  है कौन ठेकेदार और कौन पहरेदार ? कई लोगो  को  चैनेल और अखबार  ने केवल उगाही के लिए रख  छोड़ा है क्या वे भी पत्रकार ही  है ?
कई लोग पुलिस की  मुखबिरी में लगे है उन्हें पुलिस दरमाहा देती है वे पुलिस के यहाँ सब्जी से लेकर मीट मुर्गा भी पहुचाते है कई लोगो को निगरानी ने दरमाहा देकर अपना मुखबिर या  एस पी ओ बनाया है ,अब इन लोगो की लिस्ट को नक्सली संगठन खंगाल रहे है और इन्हें एक एक कर निशाना  बनाया जा सकता है ,खासकर चतरा ,हजारीबाग ,कोडरमा ,रामगढ ,लातेहार ,पलामू में स्थिति गंभीर है ,
चतरा में लगभग दो दर्ज़न पत्रकार पुलिस  के पेड़ स्टाफ़ है ,कुछ पुलिस के तो कुछ निगरानी के ,वही हजारीबाग में भी मुफसिल से लेकर जिला में 26 पत्रकार पुलिस और निगरानी के सेलेरी स्टाफ़ है लेकिन इनका वजूद खतरे में है ,पुलिस को अब मुखिबिरी के लिए बड़ी रकम मिलती है इसमें आधे से ज्यादा पुलिस या निगरानी के अधिकारी खुद खा जाते है ,आम आदमी को मुखबीर रखने में उन्हें ज्यादा पैसे खर्च  करने पड़ते है वही प्रेसवालो को मुखबीर या SPO बनाने में ज्यादा मस्सकत नहीं करनी पड़ती है वही उन्हें आधे रकम में ही सारा काम करा लिया जाता है बल्कि फोन के पैसे भी पुलिस बचा लेते है , इन प्रेसवालो से पैसे देनेवाले गलत करनेवाले व्यवसायी और अन्य लोगो की तोह भी पुलिसवाले लेते रहते है और जो उगाही होती है उसमे दोनों का अलग अलग हिस्सा होता है ,
कोडरमा ,रामगढ लातेहार पलामू की स्थिती थोड़ी भिन्न है ,पर यह स्थिती भयानक है और आगे आनेवाले दिनों में पत्रकारों के साथ अगर कोई दुर्घटना होती है तो ऐसे लोगो को सावधान रहने की ज़रूरत है ,और साथ ही पत्रकारिता में थोड़े फिल्त्रेसन की भी जरुरत है ,कई पत्रकार संघ भी बन रहे है वही कई रन कर रहे है जो ऐसे भ्रष्ट पत्रकारों को बचाने के लिए जी जान एक कर रहे है ,कई संगठनो को बाहर से भी चंदे मिल रहे है जिसका बेजा खर्च हो रहा है ,कई के बारे में ख़ुफ़िया विभाग और कई के बारे में आई बी को भी जानकारियाँ मिल चुकी है ऐसे कई संगठन को राज्य के बड़े पुलिस अधिकारी भी प्रयोग में ला रहे है ताकि सूचना मिल सके ,पर आगे यही सूचना संगठन सरकार और पुलिस के लिए नासूर बन सकते है ,जैसे बी डी राम ने टी पी सी संगठन बनाया था ताकि मावोवाद को ख़त्म किया जा सके आज वही संगठन समाज के लिए नासूर बन चूका है ,वैसे ही कई पत्रकार संगठन सरकारी सूचना तंत्र का माध्यम बनते जा रहे है जो कई दुसरे प्रकार के अतिवादी संगठन से हाथ मिलाकर परेसानी का सबब पैदा कर सकते है ,ये संगठन पुरे राज्य में नेटवर्क बनाकर अपने वजूद का डंका मनवाने के लिए अधिकारिओ से मोटी  रकम भी वसूल रहे है ,इन्हें मुफसील से जो सुचनाये मिल रही है वे सरकार के खुफिया विभाग को पंहुचा रहे है ,नक्सली  ऐसे लोगो की लिस्ट बना रही है लिस्ट बनने में भाकपा  मावो और TPC सहीत कई अन्य संगठन भी है ,

अब जो सही मायने में पत्रकार है वो इस प्रकार के लोग और संगठन दोनों से किनारा कर ले रहे है ,एक तरफ अखबार के मालिक और उनके नुमायिंदे है जो पत्रकारों के साथ शोषण की प्रबुद्ध तरकीब बनाकर उनका शोसन कर रहे है वही दूसरी और ऐसे संगठन और उसके नेता है जो गलत करते हुवे चोरी और सीना जोरी की तर्ज़ पर समाज और राज्य में अपने ताकत का परचम बुलंद कर रहे है ,सरकार पत्रकार और समाज तीनो को ऐसे लोगो को पहचानना होगा ,
               नक्सली पैसे  बांटते  है पत्रकारों  को 
दूसरी  तरफ  नक्सली  संगठन TPC  चतरा के ३७ पत्रकारों  में  हर  माह  साढ़े  छह  लाख  रु   बाटता   है ,जिससे वे उसके  हुकुम  के गुलाम  बने  रहे  ,हर  पत्रकार  को  ओहदे पद  और  उसकी प्रसिध्ही  के  लिहाज़  से  नज़रान  मिलता  है  इसमें  प्रिंट  और  इलेक्ट्रोनिक  दोनों  मीडिया  के  लोग  शामिल  है ,राची  के  8 पत्रकारो  को  भी  दरमाहा  नज़राना  पेश  किया जाता  है  ,

भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री गरीब है

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               मंत्री बने बीपीएल धारी 

भारत सरकार  के  वित्त राज्य  मंत्री गरीब  है ,क्या 

               मिलेगा इंदिरा  आवास ?

हजारीबाग डेस्क 



भारत सरकार के पूर्व वित्त एवं विदेश मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा गरीबी रेखा से निचे बसर करते है उन्हें इंदिरा आवास योजना का लाभ मिलेगा साथ ही उन्हें अन्त्योदय योजना के तहत एक रु चावल और अन्य अनाज दिए जायेंगे ,यह मै नहीं कह रहा हूँ बल्कि झारखण्ड सरकार का लिस्ट कह रहा है जिसमे यशवंत सिन्हा का नाम हुपाद पंचायत के २५२ वे नंबर पर दर्ज़ है ,इस परिवार में ५ सदस्य दिखाए गए है इस लिहाज़ से वर्तमान में भारत सरकार के वित्त राज्य मंत्री जयन्त sinha भी BPL केटेगरी में शुमार हो जाते है क्युकी वे यशवंत सिन्हा के बड़े पुत्र और राजनितिक वारिस भी है ,अब ज़रा हुपाद पंचायत की मुखिया सरिता देवी की सुनते है की वे क्या कहती है क्युकी इसी पंचायत में यशवंत सिन्हा का ऋषभ वाटिका है जो 8 एकड़ ज़मीन पर फैला किसी आलीशान कोठी को भी लजा देता है ,
सरिता देवी मुखिया हुपाद पंचायत कहती है गरीब का नाम नहीं है और अमिर का नाम पता नहीं कैसे चढ़ जाता है सूचि में
अब ज़रा गरीब के कुनबे में झांककर देखते है उसकी क्या सोच है यशवंत sinha के नाम दर्ज होने से
मारशा एक्का ग्रामीण आदिवासी महिला कहती है गरीब लोगो की शुची में आमिर आदमी का नाम दर्ज है जो गलत है मेरा नाम यहाँ होना चाहिए सो नहीं है और यशवंत sinha जैसे लोगो का नाम दर्ज है ,और तो और पुनीता sinha जिनका नाम यहाँ की मतदाता शुची में नहीं है उनका नाम भी है यहाँ BPL धारीशुचीमें.
हलाकि इस मामले पर यशवंत सिन्हानेस्वयं कहा है की मै तो यह नाम चढाने के लिए आवेदन नहीं दिया लिहाज़ा यह किसकी गलती या साजिस है उसको पहचानकर दंडित किया जाना चाहिए ,



बड़कागाव में पुलिस आतंक से कराहते ग्रामीण

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बड़कागाव में पुलिस आतंक से कराहते ग्रामीण

तहलका डेस्क रांची ( गोपाल सहाय )

बडकगाव के ग्रामीण इलाके में आज शाम १७ मई को पुलिसिया आतंक ने लोगो को घर छोडकर भागने पर मजबूर कर दिया,ओरत बच्चे बूढ़े सभी को घर में घुसघुसकर पिटा गया,दरवाज़े तोडकर पुलिस ने बर्बरता की नुमयिस की ,जैसे अंग्रेजो की हुकूमत फीर से कायम हो गयी हो , सदर अस्पताल में उनका बयान भी नही लिया गया,यहाँ से कहा गया गया की बदकगाव थाना में ही दर्ज होगा बयान ,जबकि बड़कागाव थाना ने कहा अस्पताल में ही दर्ज होगी प्राथमिकी और वही लिया जायेगा बयान ,यह बात भी सही है की अस्पताल में ही बयान दर्ज होने का प्रावधान है ,फीर एक पुलिस ने दबी जुबां में कहा कि बड़ा साहेब का आदेश है प्राथमिकी दर्ज नहीं होगी ना ही बयान लिया जायेगा ,लोकतंत्र में यह परंपरा घातक है अमानवीय है ,मानवाधिकारों का उल्लंघन है ,
असल में बड़का गाव में कोयले के उत्खनन के लिए NTPC को खनन का पट्टा दिया गया है उसने त्रिवेणी नामक कंपनी को आउट सोर्सिंग का काम दिया है अब उस कंपनी के अधिकारी उनके गार्ड्स पुलिस मिलकर ग्रामीणों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे है ताकि वे उन्हें बिना ज़मीन का मुवावजा दिए कोयला कोड़ने का अधिकार दे दे ,इसके विरोध में ग्रामीण पिचले 45 दिनों से धरने पर है 12 गाव के लगभग ४०० लोग धरने पर बैठे है ,इसमें महिलाएं बच्चे और बूढ़े भी है , लोकतंत्र में धरना प्रदर्शन करने का अधिकार सबको है पर पुलिस की बर्बरता सर चढ़कर बोल रही है यह सरकार की तानाशाही का नतीजा है ,पूर्व विधायक मंत्री योगेन्द्र साव को अंचल बदर किया गया है विधायक निर्मला देवी को केस में फसाकर अन्दर करने की मुहीम चल रही है मजिस्ट्रेट से वारंट माँगा गया है ,जबकि जिस केस में निर्मला देवी पर केस किया गया उस समय निर्मला देवी ग्रामीणों के साथ जल सत्याग्रह कर रही थी जो कई अखबारों और टी वी चैनल की सुर्खियाँ बनी थी ,पर पुलिस को क्या वह रांची के झारखण्ड सरकार के आदेशो का पालन करने में व्यस्त है भले ही वह आदेश लोकतान्त्रिक परंपरा के लिए शोसन की प्रतिमूर्ति हो ,अभी के समय में झारखण्ड में कोई ऐसा उपायुक्त कप्तान नहीं है जो सरकार के गलत आदेशो के पालन करने से मन कर दे ,
नियम के मुताबिक ग्रामीणों को अगर मुवावजा देने में कोई दिक्कत हो तो ट्रेज़री में पैसे जमाकर भी खनन किया जा सकता था पर NTPC ने ऐसा करने की कभी नहीं सोची जिससे उनकी नियत में खोंट का पता चलता है ,इनके लिए जो कोलोनी बनाया गया है वह भी घटिया है रघुबर दास के आदेश पर भाजपा की कमिटी ने इसका जांच भी किया उस कमिटी को उपहार मनुहार देकर रिपोर्ट को बदलने की साजिस की गयी यह भी प्रमाणित हो गया ,बावजूद इसके ज़बरन काम कराया जा रहा है ,फीर पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत sinha के निर्देश पर भाजपा के GM को एक करोड़ रु एकड़ के मुवावाज़े का ऐलान सौपा गया ,इन सभी बातो के बाद स्थानीय नीती ग्रामीणों किसानो एवं विस्थापितों की राय के बगैर ग्रामीणों के तन मन धन का शोसन कर उनके आन्दोलन को कुचलने और उनके साथ अमानवीय व्यवहार की गाडी चलाई जा रही है ,

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