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कोयला तस्करो ने चक्रव्यूह में फसाया है योगेन्द्र को

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                योगेन्द्र -नक्सल मामले में नया खुलासा  

        कोयला तस्करो ने चक्रव्यूह में फसाया है योगेन्द्र को 


उमेश ओझा ( तहलका डेस्क रांची )
जी हा इसमें कोई अतिसयोक्ती नहीं की कोयला तस्करो ने योगेन्द्र साव को फसाया है और इसमें पुलिसिया मिलीभगत भी शामिल है। दोनों के आँखों की किरकिरी थे योगेन्द्र साव। एक DSP सतीश चन्द्र झा को भी कोयला माफिया हटवा चुके है। क्युकी नक्सलिओ से योगेन्द्र साव के सम्बन्ध २००० से ही है ,यह बात सामने आती रही है प्रमाणित होती रही है ,यहाँ तक की सांसद नवीन जिंदल को धमकाने और लेवी वसूलने की बात प्रमाणित हो चुकी है ,उस समय भी पोलिस ने उन्हें नहीं हटाया ,उसके बाद विधायक सौरभ नारायण सिंह को भी लेवी माँगा धमकाया पकड़ा गया फिर भी पुलिस ने छोड़ दिया। योगेन्द्र के चाचा केदार साव को नक्सलिओ से मरवा दिया।कई स्थानो पर इनके दिए हुवे सामान और हथियार को पुलिस ने बरामद किया, प्रमाणित भी हुवा।  इसी  तरह कई अन्य लोगो को मरवाया उसमे पुलिस ने इन्हे बचा लिया फिर अभी क्यों फसाया गया ?
असल में अभी अक्टूबर से कोयला तस्करी के बहुत बड़े नेटवर्क पर रांची में सिंडिकेट की बैठक हुई है इसमें एक पुलिस अधिकारी ही इनके अगुवा बने है। इसमें सबसे बड़ा रोड़ा थे योगेन्द्र साव ,उन्होंने हजारीबाग के एक सबसे बड़े कोयला माफिया से उसकी गाड़ी नापो -मलडीह जंगल में पकड़कर पैसा ऑन स्पोर्ट वसूला। २० लाख रु प्रति माह देने की मासिक क़िस्त भी बंधी। फिर चुरचु जंगल में तीन कोयला प्लांट से भी वसूली की बात कही ,हजारीबाग के एक बड़े पुलिस अधिकारी से २५ लाख रु नज़राना वसूला। रामगढ ,पिपरवार ,बोकारो में भी आदेश भिजवाया की बिना साहब को नज़राना दिए एक छटाक कोयला बाहर नहीं भेजा जाएगा। रूंगटा बंधुओ की तीन  फैक्ट्रियो को भी फरमान जारी हुवा की वे २० लाख रु प्रति महीना प्रति फैक्ट्री जमा करे। सभी जगह एक ही कोयला माफिया का  रुक्का चलता  है,इसलिए उसने  एक जाल बिछाया इस जाल को पुलिस के हाथ दिया और उसी जाल में योगेन्द्र फस गए। इस सारे जाल का निर्माण यहाँ रांची में ही किया गया है ,इस  चक्रव्यूह के निदेशक भी रांची में ही  बैठे है- सेनापति हजारीबाग में।  सारे प्रकरण में रांची का एक अखबार भी जुड़ा हुवा है। झारखण्ड CID टीम ने भी अपने जांच में पाया है की रांची के एक अखबार का आदमी पिपरवार से लेकर धनबाद तक अखबार के लिए वसूली करता है। धनबाद में उसका नाम कुछ है चतरा में कुछ और रामगढ में कुछ और। पहले कोयला माफिया पुलिस हवलदार को हटाते थे अब DSP  और मंत्री को भी हटाने लगे है। उनकी ओकात झारखण्ड राज्य बनने के बाद बढ़ी है। यही कारन है की योगेन्द्र साव हर बार सीबीआई जांच की मांग कर रहे है। इतना बड़ा मामला है तो सीबीआई को जांच क्यों नहीं दी जाती है ? अगर ऐसा हो गया तो एक दर्ज़न IPS ,,५० से अधिक प्रेसवाले ,१०० थानेदार ,और अन्य विभागों के अधिकारी सफ़ेदपोस नेता और मंत्री सलाखों के पीछे होंगे ,योगेन्द्र को निशाना इनपर साधना चाहिए सो निशाना बीजेपी पर साधा यही गलत हुवा। 
    पिछले लोक सभा चुनाव में चार महीनो के दौरान चार ज़िलों से अवैध खुदाई कर १६०० करोड़ का  कोयला मंडीओ में बेच दिया गया पुलिस और नक्सली इसमें सबसे बड़े हिस्सेदार रहे उसके बाद कोयला मफियाओ का नंबर आता है। इस पुरे प्रकरण में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा DGP की मिलीभगत शामिल है। इस आगामी  चुनाव में टारगेट ४००० करोड़ का है। 



झारखण्ड के बेवड़ा मंत्री है नक्सलिओ के आका

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 झारखण्ड के बेवड़ा मंत्री है नक्सलिओ के आका 


झारखण्ड सरकार के मंत्री योगेन्द्र सॉ नक्सली संगठन  झारखण्ड टाईगर ग्रुप मामले में फसते जा रहे है ,हलाकि अभी आधिकारिक पुस्टी नहीं की गयी है क्युकी अनुसन्धान चल रहा है पर सच है की गिरफ्तार पार्टी का सरगना राजकुमार गुप्ता  ने स्वीकार किया है की उनके संगठन का आका योगेन्द्र सॉ और उनके साले मुकेश सॉ है वही उनके लिए फंड से लेकर हथियार तक की व्यवस्था कर संगठन का निर्माण कराया था। योगेन्द्र साव पहले से भी नक्सलिओ से साथ -गाठ के आरोपी रहे है दर्ज़न भर से अधिक मामले अभी भी चल रहे है एक में वारंट भी है -टेलीग्राफ अखबार में एक साल पहले योगेन्द्र साव ने कहा था की जल जंगल जमीन और कोयला खदानों की रछा के लिए टाईगर ग्रुप का निर्माण करेंगे। और यह टाईगर ग्रुप आ भी गया सामने। इस ग्रुप का आदमी देखिये कैसे इनके साथ हेलीकाप्टर में घूम रहा है -नाम राजू साव। अब प्रश्न उठाने  तक इन्हे मंत्री पद से हटाया क्यों नहीं गया ,और कितने सबूत चाहिए सरकार के मुख्यमंत्री को ?टाईगर ग्रुप के अभी तक आठ सदस्यों को जेल भेजा जा चूका है जिसमे से ५ को अभी तीन दिन  के रिमांड पर लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है इससे बरामद मोबाइल का कॉल डिटेल्स मंगाया जा रहा है ताकि पुख्ता सबूत जुटाया जा सके। 

CASE LIST OF YOGENDRA SAW MINISTER JHARKHAND
कांग्रेसिओं ने हर  बार कहा की कोई दागी विधायक किसी कीमत पर मंत्री नहीं  बनेगा ,  और बना दिया योगेन्द्र साव को मंत्री जो दागी ही नहीं महादागी है ,दर्ज़न  भर से अधिक मामले लूट ,रंगदारी मार - पीट के दर्ज है ,कई मामलो पर कांग्रेसियो ने भी जांच में सही पाया है ,वैसे विधायक को मंत्री बनाकर कांग्रेस ने मिशाल कायम की है झारखण्ड को विकास की गाड़ी में बिठाने के लिए , यह  के पास भी मौजूद है पर शायद उन्हें इस बात का इल्म हो की हम गुंडे  मवालियो के भरोसे ही शायद सरकार चला सकते हैविधायक स्वयं दावा करता है की वह नक्सली है ,यह राज्य नक्सल समस्या से जूझ रहा है ,और ऐसे में एक नक्सल पार्टी  चलाने का दावा करनेवाला आदमी मंर्त्री बनता है तो आगे जनता क्या उम्मीद कर  सकती है यह आप स्वयं अंदाज़ लगा सकते है  ,
- इतना ही नहीं साहब ने किसी अधिकारी को छोड़ा नहीं है , अपने छेत्र में बी डी ओ राज बल्लभ सिंह को इतना पीटा की इन्हें पटना के अस्पताल में एक महीने तक भर्ती  रहना पड़ा ,
:- इतना ही नहीं योगेन्द्र साव  के कारनामो की लिस्ट इनके  आलाकमान

case no;-55/2010   केरेडारी थाना  21.08.10 को डी एस पी के द्वारा ट्रू  किया गया फीर  SP ने अपने पत्रांक  2071 से केस को सही पाया ,मामला NTPC के अधिकारी को पीटने का
2.case no .04/11 केरेडारी थाना का मामला Rajballbh singh BDO को  पीटने का वारंट भी जारी हुवा था
3. case no   85/2007....बरका गाव थाना
4.case no ..408/2004,,,,,,वन अधिनियम   ,,20.04.2007  से वारंट जारी,इसमें पकडे गए गाडी को वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी को पीटकर लूट लिया था ,बड़का गाव कार्यालय से
5.158/2010  बड़का गाव थाना   आचार  संहिता उल्लंघन का मामला
6. 55/11 गिद्दी थाना  5 लाख   रंगदारी मांगने का मामला , रामगढ स्पोंज आयरन को।  इस मामले में योगेन्द्र ने एस पी पर आरोप लगाया तो डी जी पी ने जांच का ज़िम्मा डी आई जी सुमन गुप्ता और फीर मुरारी लाल मीना आई जी को दिया जिनने मामले को सही पाया था
7.  case no 901/2008  10 10 2008  को रामगढ डी एस पी ने पर्यवेछन टिपण्णी दिया
8.case no 408./2004
9.case no 96/2005..
10.case no 303/2003
11.case no  141/2006  सदर थाना
12. case no 255/2009   पतरातू थाना

इसके अलावे इनपर राज्य सभा  सांसद बनाने के मामले में रूपया लेने का मामला सी बी आई के पास चल रहा है दो बार इनकी पूछताछ हो चुकी ,कई मामलो के उजागर होने की अभी भी संभावना बनी है ,






राजा बंगला बना राजा बाजार

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                    राजा बंगला बना राजा बाजार 

उमेश ओझा ,
 रांची तहलका डेस्क ,
                  झारखण्ड के रामगढ राज परिवार का राजा बंगला राजा बाजार बन गया है। अब यहाँ कार्यालय  चलेगा ,कोई जलसा नहीं होगा ,कोई राजनीती नहीं होगी ,ज़मीनो का सौदा हो गया है और ये दूकान अवैध रूप से खड़े होकर रौनक बिखेर रहे है।
    अब आईये ज़रा इतिहास के आईने में झाककर देखते है की माज़रा क्या है ?
       रामगढ राज का यह तहसील कचहरी था ,यहाँ लगान वसूली और उसके कागज़ात रखे जाते थे। द्वितीय विस्व युद्ध के समय यहाँ इटालियन कैदिओ को रखा जाता था। यहाँ ३७ इटली के कैदी रखे गए थे। फिर युद्ध ख़त्म हुवा तो कैदी चले गए ,और राजा ने यहाँ एक अस्तबल बना दिया ,साथ ही बाकी जगह में कचहरी चलने लगा ,जब सेन्सस हुवा तो बिहार के सेन्सस कागज़ात यहाँ रखे गए। बाद में जब देस आज़ाद हुवा तो रेवेन्यू मिनिस्टर के बी सहाय ने कहा की यह अंग्रेजी हुकूमत का तहसील कार्यालय था अब देस आज़ाद हुवा तो यह बिहार सरकार का हिस्सा हो गया। क्युकी सहाय राजा के विरोधी थे और वे येन केन प्रकारेण राजा को नुक्सान पहुचाना चाहते थे। फिर इसपर
केस दर्ज़ हुवा केस में राजा जीत गए और एक कार्यालय जिसमे सेन्सस का काम चलता था उसको छोड़कर सभी में अपना कार्यालय बना लिए ,लेकिन उसके बाद बिहार सरकार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक चला गया और कोर्ट ने सरकार के पछ में फैसला दे दिया क्युकी राजा की बंसीधर स्टेट जो ट्रस्ट है वह बिहार से अलग होने के बाद रेनुवल हुवा ही  नहीं,सेन्सस का जो ऑफिस था उसे भी राजा के कारिंदो ने एक ज़मीन माफिया को बेच दिया पर बाद में उसे माफिया से आज़ाद कराया गया जब उपयुक्त हजारीबाग ने हस्तछेप किया। अब पुरे ज़मीन को टुकड़ो में बाटकर बेच दिया जा रहा है ,जिसको जहां मन है खरीदकर दिवार लगा दे रहा है ,पर सारे निर्माण और कब्ज़ा अवैध है ,जहा राजा कामाख्या नारायण की तूती बोलती थी आज वहा कबाड़खाना बन गया है ,बल्कि विधायक बनाने के बाद सौरभ नारायण सिंह ने भी इसे ९ साल कार्यालय के 
रूप में चलाया।
अभी इस अभिलेखागार को लोग समझ नहीं पाते है पर यह पूरे झारखण्ड राज्य का एकलौता का अभिलेखागार है यहाँ काम करनेवालो की मस्ती है कोई नहीं जनता है की यहाँ इतना महत्वपूर्ण कार्यालय है।
वैसे यह स्थान बंगलीओ के लिए ऐशगाह के रूप में बनाया गया था ,इसके सामने भी आनंद भवन इन्द्रपुरी सिनेमा अंग्रेज़ो को खुश रखने के लिए बार के रूप में बनाया गया था। अभी जितने भी निर्माण है उनपर डोज़र चलने की उम्मीद है इसलिए राजा के कारिंदो ने इसे ओने पौने रेट में बेच दिया। आज पूरे राजा बंगला में तीन सौ निर्माण अवैध रूप से हो चुके
है। एक शो रूम एक अस्पताल भी चल रहा है।
शो रूम अवैध 


राजा बांग्ला गेट -जिसमे शाही लोगो (निशान लगा है )

तारा शाहदेव को कोटिशः धन्यवाद

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                                           तारा शाहदेव को कोटिशः धन्यवाद 

जी हा जो काम अच्छे अच्छे मीडिया ,जांच एजेंसी ,पुलिस ,प्रसासन ,सरकार नहीं कर सकी वह तुमने कर दिखाया ,सचमुच तुम बहादुर शूटर हो जिसका निशाना पक्का और अचूक है। तुम्हारा जीवन भले ही खराब हुवा पर तुमने राज्य को एक प्रेरणा दी है ,एक सबक दी है ,एक रोशनी दिखाई है जो अभी की भ्रस्ट व्यवस्था में संभव नहीं था ,पुलिस तो हर समय पछ निस्पछ विवादों रहती है ,मै इनका जिक्र नहीं करूँगा पर न्यायपालिका के कठमुल्लो की कहानी और भी फ़िल्मी है ,न्याय के आसान पर बैठनेवाले भगवान को आप कही भी ,कभी भी रात के अँधेरे में बुला सकते है ,एक डब्बा मिठाई के लिए ये किसी को फोन कर सकते है ,सर्कस के एक पास लिए गिड़गिड़ा सकते है ,एक बोरी चावल के लिए तीन किलोमीटर पैदल जा सकते है ,तो फिर लाख दो लाख के लिए क्या कर सकते है इसका अंदाज़ा लगाना मुस्किल है। एक रक़ीबुल नहीं हर ज़िले में ऐसे आधा दर्ज़न रक़ीबुल है जो न्याय के मंदिर में बाबा से कसी प्रकार काम आसानी से करावा देंगे। अब रही बात नेताओ की तो उनकी वकत अंदाजा आप कभी भी झारखण्ड में लगा सकते है। अगर एक पुरे दिन हेमंत सोरेन के घर आनेवालों को नज़रबंद कर उनका सामान ज़ब्त कर लिया जाये तो अरबो का खुलासा हो जाये ,पर बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा ? कोई है नया शाहदेव ?????
                                  पूरे देश पर राज करना चाहता था रकीबुल: तारा शाहदेव

नेशनल शूटर तारा शाहदेव और रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल की शादी और फिर धर्म परिवर्तन से लेकर तारा शाहदेव के साथा उत्पीडऩ की मामला सुर्खियों में आया। 40 दिनों तक तारा रकीबुल की कैद में रहकर हर तरह के जुर्म को झेला। तारा के रीढ़ की हड्डी डैमेज कर दी गई। लेकिन तारा के बाहर आने के बाद झारखंड की राजनीति, ब्युरोक्रैसी, पुलिस व्यवस्था से लेकर ज्यूडिसियरी में भूचाल आ गया। लंपट राजनीति की कलई खुली तो न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों और पुलिसिया भेडिय़े की कहानी देश समाज को लज्जीत कर दिया। पैसे और लड़की का व्यापक जाल सामने आया। सीबीआई की जांच की सिफारिश राज्य सरकार ने की लेकिन तारा को कितना न्याय मिलेगा कहना मुश्किल है।
इन तमाम मामलों पर तारा शाहदेव के साथ खास और एक्सक्लूसिव बातचीत:

सवाल: आपने कहा है कि नवबंर महीने में रकीबुल कोई बड़ा धमाका करना चाहता था?
जवाब: जी हां वह ऐसा ही अपने फोन से बोलता था। वह कहता था कि उसके जाल में 15 विधायक, 14 गवर्नर, 4 जज और दर्जनों पुलिस अधिकारी हैं। वह यह भी कहता था कि 14 विधायक इस काम के लिए काफी हैं। लगता है कोई बड़ा राजनीतिक स्कैंडल की बात होगी। नामधारी को भी गवर्नर बनवाने की बात करता था। अब जांच एजेंसी है पता कर सकती है।

सवाल: क्या किसी जज को आप जानती हैं?
जवाब: 4 जज इसके टच में थे। एक तो दिल्ली से आते थे, शायद उनका नाम इकबाल था। दो जज यहीं के थे। पूर्व राज्यपाल सैयद सिप्ते रजी भी यहां आते थे। रजी से इसके घनिष्ठ संबंध थे।

सवाल:सुरेश पासवान राज्य के मंत्री हैं उसके बारे में आपका क्या सोच है।
जवाब:वह काला चेहरा है राजनीति का, सफेद कपड़ा पहनकर काला खेल करता है। पता नहीं राजनीति में वह क्या करता है। ऐसे लोगों पर शर्म आती है।

सवाल:और हाजी हुसैन?
जवाब:सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं। उसके रैकेट में सब शामिल हैं। बड़ा रैकेट सच पता नहीं पुलिस कितना जांच करेगी।

सवाल:उसके घर पर और कौन आते थे?
जवाब:एक तो सीजिए देवघर था। एक एडीएम सोनभद्र उत्तर प्रदेश, एसडीएम इलाहाबाद। इसके अलावा दिल्ली से एक आईएएस आता था। कई और बड़े अधिकारी दिल्ली से आते थे। कुछ लोग छत्तीसगढ़ से भी आते थे। एसी काजमी भी था।

सवाल:आपने 14 विधायक की बात कही हैऔर कितनों को आप पहचानती हैं?
जवाब:रकीबुल 14-15 विधायकों को अपने जेब में रखने की बात करता था। वह बात भी करता था। मैं दो को ही पहचानती हूं। बाकी को मैंने नहीं देखी नहीं।

सवाल:किस पार्टी के विधायक थे?
जवाब:इतने बड़े पैमाने पर कोई खेल हो रहा हो तो जाहिर है इसके चंगुल में सभी दलों के विधायक होंगे। चुकि मैंने सबको देखी नहीं लेकिन हमें लगता है कि कर्ई और दलों के विधायक भी इसके नेटवर्क में शामिल थे।

सवाल:आप चुनाव लडऩे जा रही हैं?
जवाब:नहीं। कई लोगों ने इस ओर इशारा किया है। कुछ लोगों ने हमें यह भी कहा कि मैं बीजेपी की हूं। लेकिन मैं राजनीति में नहीं जा रही हूं। राजनीति वाले क्या सोट रहे हैं। मैं नहीं जानती। कई दलों के लोग मिलने आये हैं। लेकिन मेरा मकसद रकीबुल के खेल और तंत्र को ओपन करना है। रकीबुल पूरे देश पर राज करना चाहता था

सवाल:शादी के पहले से कितने दिनों की पहचान थी ?
जवाब: डेढ़ माह की। वह अपने को संस्कारी के रूप में पेश कर रहा था। हम लोग उसे पहचान नहीं पाये। अपना मकसद पूरा होते ही उसने हमें प्रताडि़त करना शुरू कर दिया।

सवाल:रकीबुल हिंदू है या मुसलमान?
जवाब:वह आधा हिंदू और आधा मुसलमान है। उसका जन्म भले ही हिंदू घर में हुआ है लेकिन वह अब मुस्लिम जीवन जीता है।

सवाल:और रकीबुल की मां ?
जवाब:वह तो मुस्लिम ही है। भर दिन घर में अल्ला अल्ला करती रहती थी।
सवाल:धर्म परिवर्तन करने की लड़ाई आप लड़ रही हैं या फिर रकीबुल के गलत खेल के खिलाफ हैं?
जवाब:धार्मिक जबरन परिवर्तन का मामला तो है ही और प्रताडि़त करने का मामला भी। लेकिन इस आदमी का बड़ा संसार है। ऐसा कोई काम नहीं जिसमें यह शामिल नहीं है। लड़की सप्लाई करने से लेकर तमाम तरह के खेलों में यह शामिल है। इसकी जांच हो।

सवाल:रकीबुल का आरोप है कि आप पैसे के लिए ऐसा कर रही हैं?
जवाब:मेरी शादी में मेरी मौसी ने खर्च किये हैं। करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए। सब मेरी मौसी ने किया। हम लोग जमीन वाले हैं। खेती बाड़ी है। उसी से घर चलता है। मुझे भी जीने के लिए निशानेबाजी से पैसे मिल जाते हैं। वह जो भी कह रहा है झूठ बोलता है। रेडिशन ब्लू में शादी हुई। शादी से पहले उसने एक अंगूठी गिफ्ट किया था।

सवाल:किन किन नेताओं ने आपको चुनाव लडऩे को कहा?
जवाब:मैं राजनीति को नहीं देख रही हूं। यह राजनीति वाले सभी मुद्दों को दबाना चाहते थे। मैं शूटर हूं वही रहूंगी।

सवाल:वामदेव ने 10 हजार लड़कियों को बेचा, रकीबुल और वामदेव में क्या अंतर है?
जवाब:यह एक रैकेट है उनके पास राजनीतिक पावर है ये लड़कियों को टार्चर करते हैं हमने चार पांच लड़कियों का ग्रुप यहां भी आते देखा। एक रिचा नाम की थी।

सवाल:क्या आप कैंद में थी ?
जवाब:हां फोन से भी बात सामने में करवाते थे। हमें बंद करके रखा गया था।

सवाल: इस राज्य को क्या कहेंगे?
जवाब:आम आदमी को बहुत परेशानी है। टार्चर किया जाता है। लूटने का खेल है। बड़ा खेल है सर।

सवाल:मीडिया की भूमिका कैसी है?
जवाब:मीडिया की भूमिका अच्छी है। सच्चाई के साथ है। मीडिया ने ही हमें बचाया है।

सवाल: शादी से पहले उसकी मां को नहीं पहचान सकीं?
जवाब: नहीं पता ही चला। वह मुस्लिम थी फिर हिंदू बनी फिर मुस्लिम।

सवाल:आपकी जन्म तिथि और घर परिवार?
जवाब:फरवरी 1992। एक भाई है जुवेद नाथ शाहदेव, मां गुजर गयी इसी साल और पिताजी हैं 12 वीं की है अभी प्रथम श्रेणी से। पढ़ाई करूंगी और खेलूंगी। हमने कई गोल्ड मेडल लिए हैं।

सवाल:क्या आपको नहीं लगता है कि झारखंड में ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार है?
जवाब: इसे कौन नहीं मानेगा सब दिखाई पड़ रहा है। पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार है। लेकिन जांच करने वाला ही जब खेल करता हो तो क्या कहेंगे।

रांची। राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज तारा शाहदेव का जुल्मी रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन खान के उच्चस्तरीय संबंधों का ठोस सबूत सामने आया है। उसके एक मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल्स भी मीडिया के हाथ लगे हैं, जिसमें उसके मंत्रियों, नेताओं, आइएएस अधिकारियों, जजों आदि उच्चस्तरीय लोगों से अनगिनत बार बात होने की जानकारी सामने आई है। पूर्व सांसद इंदर सिंह नामधारी से ही कोहली ने सिर्फ इस नंबर से एक महीने के अंदर 26 बार बात की है।एक मामूली-सा एनजीओ चलाने वाले कोहली के घर से छापेमारी के दौरान 36 सिम मिले थे, जबकि दिल्ली में उसकी गिरफ्तारी के समय भी पुलिस ने छह सिम बरामद किया था। होटल में एक मामूली वेटर का काम करने वाले कोहली के अपने घर पर जजों के सामने आरोपियों को बैठा कर डील करवाया करता था।कोहली के जिस सिमकार्ड का डिटेल्स मीडिया के हाथ लगा है, उसका नंबर 8102777771 है। इस मोबाइल पर जुलाई और अगस्त में कुल 962 इनकमिंग-आउटगोइंग कॉल रिकॉर्ड किए गये हैं। कॉल डिटेल्स से पता चलता है कि कोहली के रिश्ते राजभवन के एडीसी शम्स तबरेज से लेकर झारखंड के प्रोजेक्ट बिल्डिंग में बैठनेवाले सचिव और प्रधान सचिव तक रहे हैं। कोहली के अब तक मिले कुल 42 सिमकार्ड्स के डिटेल खुलने पर कई बड़े लोग बेनकाब हो सकते हैं।
कॉल डिटेल
मो. मुश्ताक अहमद, रजिस्ट्रार विजिलेंस, झारखंड हाईकोर्ट
8 जुलाई से 20 अगस्त तक 16 बार हुई बातचीत।
सुरजीत कुमार (डीएसपी, नगर उंटारी)
6 जुलाई से 6 अगस्त तक 13 बार बातचीत।
हाजी हुसैन अंसारी, झारखंड के कैबिनेट मंत्री
29 से 01 अगस्त तक दो बार और पीए से 01 से 09 अगस्त तक सात बार बातचीत।
इंद्रदेव मिश्रा (यूपी बार काउंसिल के सदस्य)
2 जुलाई से 09 अगस्त तक 10 बार हुई बातचीत।
तारा शाहदेव के अनुसार, इन ही की मदद से यूपी के कई कोर्ट से रंजीत सिंह कोहली के तार जुड़े।
वीणा मिश्रा, न्यायिक सेवा ( देवघर, झारखंड )
5 जुलाई से 5 अगस्त तक 20 बार हुई बातचीत।
तारा शाहदेव का कहना है कि ये ब्लेयर अपार्टमेंट में आयी थीं।
पारितोष उपाध्याय (आइएफएस, संयुक्त सचिव)
4 जुलाई से 11 अगस्त तक 21 बार बातचीत।
इंदर सिंह नामधारी, विधानसभा के पूर्व स्पीकर और चतरा के पूर्व सांसद
02 जुलाई से 06 जुलाई तक तीन बार और उनके पीए से 01 जुलाई से 08 अगस्त तक 26 बार बातचीत।
सैयद मतलूब हुसैन (सिविल जज, सरायकेला-खरसावां)
15 जुलाई से 9 अगस्त तक 2 बार हुई बातचीत।

झारखण्ड का बेवड़ा मंत्री।

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                                  झारखण्ड का बेवड़ा मंत्री। 

          जी हा चौकिये नहीं। अपने बॉडी को गार्ड देने के लिए हंगामा करनेवाला झारखण्ड सरकार का मंत्री योगेन्द्र साव बिना बॉडी गार्ड के कहा जा रहे थे ? कोडरमा में क्यों उत्तर गए ? उनके साथ बदसलूकी हो जाती ,,उनका सामान छीन जाता ,,उनपर जानलेवा हमला हो जाता ,,उनकी हत्या हो जाती ,,तो इसका जिम्मेवार कौन होता ? खबर बड़ी है पर इतनी गंदी है की इसे न तो तस्वीरों में  उतारा जा सकता है न ही लिखा जा सकता है। आखिर राज्य की भी इज्जत है। वैसे थोड़ी हिंट दे दू  की मंत्री जी के साथ दो लोग और कोडरमा से चढनेवाले थे। माल असबाब के साथ पर किसी कारन वे नहीं आये और मंत्री जी उतर गए। जाकर क्या करते ? कापर करू सिंगार पिया मोर आँधर। बहुत दिक्कत है। आखिर मंत्री है बॉडी गार्ड क्यों मिला है ,एरोप्लेन में तो सुरछा होती है इसलिए नहीं जाते सुरछा कर्मी ,पर रेल में क्या सुरछा है हर दिन यात्री लुटे जाते है।  पर अगर कोई उल्टा सीधा काम करना हो तो बॉडी गार्ड को तो किनारा लगाना होगा ना। सो उन्हें विश्राम दिया गया -ताकि वो राजदार नहीं बने वैसे भी राजनीती में आने के बाद से ही योगेन्द्र साव विवादित रहे है। अभी पिछले महीने ही अपने बॉडी गार्ड की मौत में सवालो से घिरे है ,इनपर वारंट है ,कई केस चल रहे है। अब रात में कोडरमा स्टेसन पर तुरंत प्रेसवालो का जमावड़ा हो जायेगा यह नहीं जानते थे पर हो गया ,,नहीं तो किनारे से फूटने के चक्कर में थे। 

दलाल स्ट्रीट झारखण्ड

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                          दलाल स्ट्रीट  झारखण्ड 

झारखण्ड  की स्थापना के बाद से ही यह स्टेट दलाल स्ट्रीट बनकर रह गया है। यहाँ क्या नेता क्या दलाल क्या इंजीनियर क्या मंत्री सभी हमाम में नंगे है। भले मधु कोड़ा पकड़े गए ,पर वास्तविकता है की शिबू दादा से लेकर अर्जुन मुंडा और हेमंत सोरेन ,यहाँ तक की बाबूलाल भी उसी कस्ती में सवार है ,,कोई दो करोड़ ज्यादा  कोई दो करोड़ कम। सतीश सिन्हा ,बिनोद सिन्हा ,पुनमिया ,काले से लेकर अभी मामला रक़ीबुल हसाब पर आ फसा है। पर सभी मामले एक जैसे है  सभी मंत्री से लेकर विधायको की टोली और  IAS  IPS  अधिकारिओ का खेमा इस गेम में शामिल है , हवाला से राज्य के रिस्वत का रूपया हरियाणा चंडीगढ़ मुरादाबाद जा रहा है ,दलाल भी मालामाल हो रहे है। कल तक खैनी बेचनेवाले ,पान लगानेवाले ,शराब बेचनेवाले आज अरबपति है। क्यों नहीं होंगे ? हम उनके हितैसी जो है। अर्जुन ,हरिनारायण ,एनोस ,चंद्रप्रकाश ,योगेन्द्र ,मधु ,का इतिहास क्या है ? अभी रक़ीबुल हसन की बात कर रहे है कई पार्टिया उसे टिकट देने के बारे में सोच रही है। जितना बदनाम होगा उतना  वोट आएगा। कोई इंजिनियर आज मुख्य मंत्री को भी नहीं लगाता है क्यों ? मधु कोड़ा के मंत्री रहते एक कोयले का दलाल हजारीबाग के डी सी पर हावी होता दिखा , क्या है यह सब ,अर्जुन मुंडा काल में तो काले को छोड़कर किसी का विकाश नहीं हुवा ,पार्टी का वज़ूद भी रसातल में चला गया। कोयला तस्करी की बात करते है इनके इजाजत के बगैर पत्ता नहीं हिलता है। अभी अधिकारिओ का तबादला क्या मुफ्त हो रहा है ? एक एक तबादले में लाखो रुपये का खेल हो रहा हैं। हेमंत -राजेंद्र का गेम शो चल रहा है ,जिसको आना है आते जाओ -पाते जाओ। 

कथित लव जेहादी रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल हसन की गिरफ़्तारी के बाद उसका राज बाहर आ पायेंगें इसकी संभावना बहुत ही कम है। इस बात की आशंका खुद तारा भी व्यक्त कर रही हैं। यदि नेशनल मीडिया में तारा का मामला नहीं उछलता तो लोकल मीडिया में सक्रिय  लोगों का कॉकस इस मामले को कब का हजम कर गया होता।
 रांची से हमारी टीम के पास जो सूचनाएं आ रहीं हैं , उससे पता चल रहा है कि मीडिया, नौकरशाह और पोल्टीशियंस कई लोग तारा के गुनाहगार हैं। मामले के जगजाहिर होने के बाद ऐसे तत्वों ने तारा को हतोत्सहित करने का कोई भी कदम नहीं छोड़ा। रात में एक वरिष्ठ डीईजी स्तर के पदाधिकारी ने अपने पॉकेट के पत्रकारों से सम्पर्क साधा और फिर रातों -रात मीडिया के कुछ लोग मैनेज हो गये। अख़बारों में आरोपी रणजीत के फेबर में यह खबर छपी कि उससे उसकी पत्नी तारा ने लाखों रुपये का डिमांड की। पूरा नहीं कर पाया तो यह झूठा आरोप लगा दिया गया। ऐसा लिखने वाले ने यह कभी नहीं लिखा कि रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल हसनआखिर क्या काम करता था कि रांची में करोड़ों की उगाही कर रखी थी।  
 हमारी टीम को जो सूचनाएं आ रही है ,उसके मुताबिक रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल हसन नौकरशाह और पोल्टीशियंस के काले धन को वाइट करने का काम किया करता था। रांची के एक डीईजी लेबल के अधिकारी से उसके काफी नजदीक के सबंध हैं। बताया जा रहा है कि उसी की सलाह पर दिल्ली में उनकी एक कंपनी और ट्रेवल एजेंसी चल रही थी। एक पत्रकार को भी उसमें हिस्सेदार बनाया गया था। बताया जा रहा है कि कई अधिकारी, मंत्री का पैसा इसी तरह उसने देश भर में लगा रखें हैं। कहीं कंपनी, कहीं जमीन ,कहीं अपार्टमेंट में। ऐसे में कई पत्रकारों को भी यह कॉकस लाभ पहुंचा चुका है।
तभी राष्ट्रीय शूटर तारा सहदेव के जख्म पर  झारखंड पुलिस अपने बयान से नमक छिड़कने का ही काम कर रही है । डीजीपी झारखंड बिना जांच अभी से कह रहें हैं कि पता चला है कि रकीबूल हसन एक हिन्दू है । सवाल यह है कि क्या पुलिस ने रकीबूल के हिन्दू होने का बयान उसके खानदान/रिश्तेदारों की छानबीन कर दी ? क्या पुलिस उसके आय के श्रोतों की छानबीन की ? क्या उसकी संदिग्ध गतिविधियों की जांच करवाने की चेष्टा की ? फिलहाल यह ममामला अब काफी पेचीदा हो चुका है , जिसमें हर किसी को सच्चाई के खुलासे का इंतजार रहेगा, पर जिस तरह के घालमेल की खबरें हम तक आयीं हैं, उसमें तो यह संभावना दूर -दूर तक दिख नहीं रही है। अब न्यायालय का चमत्कार दिख जाय  कुछ हो सकता है। 

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